देसी घी में तैयार करें शाही जिमीकंद की लजीज सब्जी, उंगलियां चाटते रह जाएंगे सब अगर रोजाना की हरी सब्जियों से हटकर कुछ बेहद जायकेदार बनाना चाहते हैं, तो शुद्ध देसी घी में पकी सूरन यानी जिमीकंद की यह पारंपरिक सब्जी आपके भोजन को खास बना देगी। रोजमर्रा के भोजन में जब एक ही तरह की सब्जियां खाकर मन ऊब जाता है, तब किसी अनोखे और बेहद लजीज स्वाद की तलाश होती है। ऐसे मौकों के लिए सूरन यानी जिमीकंद की शाही सब्जी से बेहतर शायद ही कोई दूसरा विकल्प हो। आमतौर पर सूरन का नाम आते ही कुछ लोग मुंह बनाने लगते हैं, लेकिन जब इसे पारंपरिक रवायत और भरपूर शुद्ध देसी घी के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, तो इसका जायका इतना गहरा और अनोखा हो जाता है कि चिकन या मटन जैसे मांसाहारी व्यंजन भी इसके सामने फीके साबित होते हैं। घर के हर सदस्य को इसका समृद्ध स्वाद पहली ही बार में पसंद आ जाता है। देसी घी की खास अहमियत और तैयारी जिमीकंद को पकाना थोड़ा मुश्किल और धैर्य भरा काम माना जाता है, क्योंकि इसमें कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। हालांकि जब थाली में यह पकवान परोसा जाता है, तो इसकी हर एक निवाले में छिपी मिठास आपकी सारी मेहनत वसूल कर देती है। इस शाही व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका पकाने का पारंपरिक माध्यम है, जिसे पूरी तरह शुद्ध देसी घी में तैयार किया जाता है। इस खास विधि में सूरन की मात्रा के लगभग बराबर ही देसी घी का इस्तेमाल होता है, जिससे मसालों का अर्क कंद के रेशे-रेशे में रच-बस जाता है और इसका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है। हाथों की सुरक्षा और सूरन को उबालना सूरन को पकाने से पहले उसकी प्राथमिक तैयारी बेहद ध्यान से की जानी चाहिए। सबसे पहले सूरन के बाहरी कड़े छिलके को अच्छी तरह उतार लें और फिर इसे छोटे-छोटे चौकोर टुकड़ों में काट लें। सूरन में मौजूद प्राकृतिक तत्वों की वजह से इसे काटते समय हाथों में तेज खुजली हो सकती है, इसलिए काम शुरू करने से पहले हथेलियों पर थोड़ा नींबू का रस या सरसों का तेल अच्छी तरह मल लें। इसके बाद कटे हुए टुकड़ों को एक बर्तन में पर्याप्त पानी के साथ तब तक उबालें जब तक कि उसका कच्चापन और कसैलापन पूरी तरह निकल न जाए। धीमी आंच पर तड़का और मसालों की भुनाई उबालने के बाद अब मुख्य ग्रेवी तैयार करने की बारी आती है। एक भारी तले की कढ़ाई में शुद्ध देसी घी को अच्छी तरह गर्म करें। घी पिघल जाने पर इसमें बारीक कटी प्याज डालें और धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि वह सुनहरी भूरी न दिखने लगे। इसके तुरंत बाद अदरक और लहसुन का पेस्ट मिलाकर कुछ देर चलाएं, जिससे उनका कच्चापन समाप्त हो जाए। फिर कटे हुए लाल टमाटर, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर को डालकर भूनना शुरू करें। मसालों को तब तक लगातार भूनते रहें जब तक कि वे किनारों से घी न छोड़ने लगें। रस और मसालों का जुड़ाव और परोसने का तरीका जब मसालों से घी अलग होने लगे, तब पानी से छाने हुए उबले सूरन के टुकड़ों को कढ़ाई में डालकर अच्छी तरह मिला दें ताकि हर टुकड़े पर मसालों की परत चढ़ जाए। इसके बाद गैस की आंच धीमी कर दें और कढ़ाई को ढककर 10 से 15 मिनट तक पकने दें। इस धीमी आंच की प्रक्रिया से मसालों की खुशबू और घी का स्वाद सूरन के अंदर तक समा जाता है। अंत में खुशबूदार गरम मसाला ऊपर से डालें और बारीक कटी ताजी हरी धनिया पत्ती छिड़ककर गैस बंद कर दें। यह गरमा-गरम शाही जिमीकंद की सब्जी रोटी, कुरकुरे पराठे या सादे चावल के साथ परोसने के लिए बिल्कुल तैयार है। इसका आप पर असर सूरन की यह खास रेसिपी उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो शाकाहारी भोजन में समृद्ध और भारी जायका तलाशते हैं। • रसोई बजट: इस विधि में सूरन की मात्रा के लगभग बराबर देसी घी का उपयोग किया जाता है, जिससे यह सामान्य रोजमर्रा की सब्जियों की तुलना में थोड़ी महंगी बैठती है। यदि आप बजट को ध्यान में रखना चाहते हैं, तो इसे खास पारिवारिक अवसरों या सप्ताहांत के दावत के लिए चुनें। • त्वचा की सुरक्षा: जिमीकंद काटते समय होने वाली खुजली से बचाव के लिए हाथों में सरसों का तेल या नींबू का रस लगाना जरूरी होता है। इस आसान एहतियात को अपनाने से आप बिना किसी शारीरिक असुविधा या जलन के आसानी से खाना बना सकेंगे। • स्वाद का विकल्प: यह शाकाहारी व्यंजन उन परिवारों के लिए उपयुक्त है जहां कोई मांसाहार नहीं खाता लेकिन मसालेदार और रिच ग्रेवी पसंद करता है। इसे घर पर बनाकर आप ढाबे या रेस्तरां के भारी व्यंजनों जैसा गहरा स्वाद पा सकते हैं। • पाचन और स्वास्थ्य: भारी मात्रा में घी और मसालों के कारण यह सब्जी काफी गरिष्ठ होती है। हल्का भोजन पसंद करने वाले लोग इसे दोपहर के खाने में खाएं और रात के भोजन में अत्यधिक सेवन से बचें। ऐसा क्यों हुआ सूरन को एक खास विधि से पकाने और उबालने की आवश्यकता इसलिए पड़ती है ताकि इसमें मौजूद प्राकृतिक कसैलेपन और जलन पैदा करने वाले तत्वों को निष्क्रिय किया जा सके। • प्राकृतिक कसैलापन: कच्चे जिमीकंद में कड़वापन और गले में खराश पैदा करने वाले यौगिक होते हैं। इसी वजह से इसे पकाने से पहले पानी में उबालकर कसैला पानी फेंकना अनिवार्य कदम माना जाता है। • धीमी भुनाई का विज्ञान: शुद्ध देसी घी मसालों के अर्क को खींचकर सूरन के भीतरी हिस्सों तक पहुंचाने में मदद करता है। धीमी आंच पर 10 से 15 मिनट पकाने से ही इसका रेशा नरम होकर मसालों को सोख पाता है। • हाथों में खुजली का कारण: सूरन के छिलके और गूदे के संपर्क में आने से त्वचा पर जलन होती है। तेल या खट्टे नींबू का रस एक सुरक्षात्मक परत बनाता है, जो त्वचा को सीधे एंजाइम के संपर्क में आने से रोकता है। सवाल-जवाब 1. सूरन काटते समय हाथों में होने वाली खुजली से कैसे बचें? सूरन को छीलने और काटने से पहले अपने हाथों पर थोड़ा सरसों का तेल या नींबू का रस अच्छी तरह लगा लें। 2. सूरन को ग्रेवी में डालने से पहले उबालना क्यों जरूरी है? सूरन को पानी में उबालने से उसका सारा कच्चापन और कसैलापन पूरी तरह बाहर निकल जाता है। 3. इस रेसिपी में कितना देसी घी इस्तेमाल किया जाता है? इस पारंपरिक शाही विधि में जितना सूरन लिया जाता है, लगभग उतना ही शुद्ध देसी घी इस्तेमाल होता है। 4. मसाला मिलाने के बाद सब्जी को कितनी देर तक पकाना चाहिए? उबले हुए सूरन को मसाले में मिलाने के बाद धीमी आंच पर 10 से 15 मिनट तक पकने देना चाहिए। 5. इस सूरन की सब्जी को किन चीजों के साथ परोसा जा सकता है? इसे गरमा-गरम सादी रोटी, पराठे या उबले हुए चावल के साथ परोसा जा सकता है। https://trendkia.com/food/desi-ghi-men-taiyara-karen-shahi-jimikand-ki-lajija-sabji-ungaliyan-chatate-raha-jaenge-saba-34698 TrendKia — Har trend, sabse pehle.