धौलपुर के देहाती रसोइयों में आज भी जिंदा है पारंपरिक स्वाद, छाछ और लौकी के कोफ्ते का अनोखा संगम धौलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में ताजी लौकी, बेसन और छाछ के मेल से बनने वाली पारंपरिक कोफ्ते की सब्जी आज भी लोगों के भोजन का मुख्य आकर्षण बनी हुई है। धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक खान-पान की समृद्ध विरासत और शुद्ध देसी स्वाद पूरी तरह सुरक्षित है। यहां के घरों में बनने वाली लौकी के कोफ्ते की पारंपरिक सब्जी आज भी लोगों की सबसे पसंदीदा डिशेज में से एक मानी जाती है। ताजी लौकी, बेसन और छाछ के अनोखे मेल से तैयार होने वाली यह सब्जी न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है। इस पारंपरिक व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे तैयार करने में बहुत अधिक समय नहीं लगता। इसे गेहूं की सादी रोटी, पराठे या फिर राजस्थान के पारंपरिक बाजरे की रोटी के साथ परोसा जाए, तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि बच्चों से लेकर घर के बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग इस पारंपरिक सब्जी को बेहद चाव से खाते हैं। कोफ्ता बनाने की सरल और पारंपरिक विधि स्थानीय गृहिणी रेखा शर्मा इस पारंपरिक डिश को बनाने की बेहद आसान विधि साझा करती हैं। वह बताती हैं कि स्वादिष्ट कोफ्ते बनाने की शुरुआत एकदम ताजी और नरम लौकी के चुनाव से होती है। सबसे पहले लौकी को अच्छी तरह छीलकर कद्दूकस कर लिया जाता है। इसके बाद, कद्दूकस की गई इस लौकी में जरूरत के अनुसार बेसन मिलाया जाता है, जो कोफ्तों को बांधने का काम करता है। स्वाद को बढ़ाने के लिए इस मिश्रण में स्वादानुसार नमक, थोड़ा सा जीरा, एक चुटकी लाल मिर्च पाउडर, हल्दी और धनिया पाउडर डाला जाता है। इन सभी सूखी सामग्रियों को लौकी और बेसन के साथ अच्छी तरह से हाथ से मिला लिया जाता है। जब यह मिश्रण पूरी तरह एकसार हो जाता है, तब इससे छोटे-छोटे गोल आकार के कोफ्ते तैयार कर लिए जाते हैं। सरसों के तेल में सिकाई और ग्रेवी की तैयारी इसके बाद कढ़ाई में शुद्ध सरसों का तेल डालकर उसे अच्छी तरह गर्म किया जाता है। तेल गर्म होने पर तैयार किए गए कोफ्तों को उसमें डालकर मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक अच्छी तरह से तला जाता है। जब कोफ्ते बाहर से कुरकुरे और अंदर से अच्छी तरह पक जाते हैं, तो उन्हें तेल से निकालकर एक अलग बर्तन में रख लिया जाता है। अब बारी आती है सब्जी की जान यानी उसकी ग्रेवी को तैयार करने की। इसके लिए प्याज, टमाटर, लहसुन और हरी मिर्च को एक साथ पीसकर एक महीन पेस्ट तैयार किया जाता है। कढ़ाई में दोबारा थोड़ा सा सरसों का तेल गर्म करके सबसे पहले जीरा चटकाया जाता है, और फिर तैयार किया गया प्याज-टमाटर का पेस्ट डालकर उसे अच्छी तरह भुना जाता है। इसके बाद मसाले में लाल मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाकर उसे तब तक पकाया जाता है जब तक कि मसाला तेल न छोड़ दे। छाछ का तड़का और धीमी आंच पर पकाई इस सब्जी को खास और अलग बनाने वाला सबसे महत्वपूर्ण चरण इसके बाद आता है। जब मसाला पूरी तरह भुनकर तैयार हो जाता है, तब उसमें लगभग दो चम्मच ताजी छाछ मिलाई जाती है। छाछ डालते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि मसाले को लगातार चलाया जाता रहे, ताकि छाछ फटने न पाए। जैसे ही इस ग्रेवी में एक उबाल आ जाता है, आवश्यकता के अनुसार इसमें पानी मिला दिया जाता है। इसके तुरंत बाद, पहले से तलकर रखे गए कोफ्ते ग्रेवी में डाल दिए जाते हैं और बर्तन को ढक्कन से ढक दिया जाता है। कोफ्तों को ग्रेवी का स्वाद सोखने के लिए इसे करीब 5 से 7 मिनट तक मध्यम आंच पर पकने दिया जाता है। ग्रामीण संस्कृति का अनमोल स्वाद धीमी आंच पर कुछ देर पकने के बाद गरमागरम और बेहद लजीज लौकी के कोफ्ते की सब्जी परोसने के लिए तैयार हो जाती है। मसालों और छाछ का यह अनोखा खट्टा-तीखा संयोजन ही इस डिश को बाकी सब्जियों से अलग और खास बनाता है। धौलपुर के ग्रामीण अंचलों में यह पारंपरिक डिश आज भी हर घर की पहली पसंद बनी हुई है। बेहतरीन स्वाद और भरपूर पौष्टिकता का यह अनूठा संगम हर मौसम में पूरे परिवार के साथ मिलकर भोजन करने के आनंद को दोगुना कर देता है। इसका आप पर असर • भारत में: यह पारंपरिक रेसिपी देश भर के लोगों को लौकी जैसी साधारण सब्जी को बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक तरीके से बनाने का एक शानदार विकल्प देती है। • धौलपुर में: स्थानीय स्तर पर ऐसी पारंपरिक डिशेज ग्रामीण खान-पान की समृद्ध संस्कृति और घरेलू रसोइयों की अनमोल विरासत को जीवित रखने में मदद करती हैं। सवाल-जवाब 1. धौलपुर स्टाइल कोफ्ता की क्या विशेषता है? इस डिश की मुख्य विशेषता ग्रेवी में छाछ का इस्तेमाल और कोफ्तों को शुद्ध सरसों के तेल में तलना है, जो इसे अनोखा देहाती स्वाद देता है। 2. कोफ्तों को ग्रेवी में डालने के बाद कितनी देर पकाना चाहिए? कोफ्तों को ग्रेवी का स्वाद अच्छी तरह सोखने के लिए मध्यम आंच पर ढककर करीब 5 से 7 मिनट तक पकाना चाहिए। 3. कोफ्ते का मिश्रण तैयार करने के लिए किन सामग्रियों की जरूरत होती है? इसके लिए कद्दूकस की गई लौकी, बेसन, स्वादानुसार नमक, थोड़ा जीरा, चुटकी भर लाल मिर्च पाउडर, हल्दी और धनिया पाउडर की आवश्यकता होती है। 4. इस पारंपरिक सब्जी को किस चीज के साथ परोसना सबसे अच्छा होता है? यह सब्जी सादी रोटी, पराठे और खास तौर पर पारंपरिक बाजरे की रोटी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है। https://trendkia.com/food/dholpur-ke-dehati-rasoiyon-men-aja-bhi-jinda-hai-parnparika-svada-chhachha-aura-lauki-ke-kophte-ka-anokha-sngama-7337 TrendKia — Har trend, sabse pehle.