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  "type": "article",
  "title": "बेसन और मोतीचूर से आगे बढ़कर चखें इन छह खास किस्म के लड्डुओं का स्वाद",
  "summary": "भारत के अलग-अलग हिस्सों में सिर्फ बेसन या मोतीचूर के अलावा तिल, गोंद, उड़द दाल, सत्तू, चूरमा और मूंगफली से पारंपरिक लड्डू बनाए जाते हैं।",
  "content": "भारतीय खानपान में मिठाइयों का खास स्थान रहा है और त्योहारों या खास मौकों पर लड्डू का नाम सबसे पहले आता है। आम तौर पर लोग बेसन या मोतीचूर के लड्डुओं के बारे में ही ज्यादा सोचते हैं, लेकिन देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय सामग्री और परंपरा के आधार पर कई अन्य प्रकार के लड्डू भी चाव से खाए जाते हैं। इन पारंपरिक व्यंजनों में स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।\n\nतिल और गुड़ के लड्डू\nसर्दियों के मौसम और मकर संक्रांति के दौरान तिल और गुड़ के लड्डू विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले तिल को अच्छी तरह भून लिया जाता है और फिर उसे गुड़ की चाशनी या पिघले हुए गुड़ के साथ मिलाया जाता है। मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने के बाद हाथों से गोल आकार दिया जाता है। स्वाद को और बेहतर बनाने के लिए कई लोग इसमें मूंगफली या तरह-तरह के सूखे मेवे भी शामिल कर लेते हैं।\n\nपारंपरिक गोंद के लड्डू\nउत्तर भारत के तमाम परिवारों में गोंद के लड्डू बनाने की परंपरा सर्दियों के दिनों में निभाई जाती है। इन्हें बनाने के लिए खाने वाले गोंद को शुद्ध घी में तला जाता है ताकि वह अच्छी तरह फूल जाए। इसके बाद इसमें आटा, गुड़ या चीनी के साथ कटे हुए मेवे मिलाए जाते हैं और फिर गोल लड्डू तैयार किए जाते हैं। घी, मेवे और हल्की कुरकुरी बनावट इन लड्डुओं को बेहद खास बनाती है।\n\nदक्षिण भारत के उड़द दाल लड्डू\nदक्षिण भारतीय राज्यों में उड़द दाल से बनने वाले लड्डू काफी लोकप्रिय हैं और आंध्र प्रदेश में इन्हें विशेष रूप से सुन्नुंडालु कहा जाता है। इसे तैयार करने की विधि में उड़द दाल को भूनकर बारीक पीस लिया जाता है, जिसके बाद इसमें घी और चीनी या गुड़ मिलाकर लड्डू का रूप दिया जाता है। भुनी हुई दाल की सौंधी महक इन लड्डुओं को अन्य मिठाइयों से बिल्कुल अलग पहचान दिलाती है।\n\nसत्तू से बनने वाले लड्डू\nबिहार और उसके आसपास के इलाकों में सत्तू का उपयोग कई तरह के व्यंजनों में बहुतायत से होता है और इसके लड्डू भी काफी पसंद किए जाते हैं। भुने हुए चने के सत्तू में घी के साथ गुड़ या चीनी मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है। जरूरत के मुताबिक इसमें बादाम, काजू या इलायची भी डाली जा सकती है, जिससे सत्तू की सोंधी खुशबू और गुड़ की मिठास का मेल एक अलग स्वाद देता है।\n\nराजस्थान के प्रसिद्ध चूरमा लड्डू\nराजस्थानी संस्कृति में चूरमा के लड्डू अपने अनूठे पारंपरिक स्वाद के लिए जाने जाते हैं। इन्हें बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे से बाटी या मोटी रोटी पकाई जाती है। पकने के बाद इस बाटी को बारीक चूर कर उसमें घी और गुड़ या चीनी मिलाई जाती है। स्वाद को और बढ़ाने के लिए इलायची और कटे मेवे भी डाले जाते हैं और यह चूरमा मुख्य रूप से दाल-बाटी के साथ परोसा जाता है।\n\nमूंगफली और गुड़ के लड्डू\nमूंगफली और गुड़ के लड्डू बनाने के लिए बहुत अधिक तामझाम की आवश्यकता नहीं होती है। सबसे पहले मूंगफली के दानों को भूनकर उनके छिलके हटाए जाते हैं और फिर उन्हें हल्का दरदरा कूटकर पिघले हुए गुड़ में मिलाया जाता है। मिश्रण के गर्म रहने पर ही इसके लड्डू बांध लिए जाते हैं क्योंकि ठंडा होने पर गुड़ कड़ा हो जाता है। मूंगफली का क्रंच और गुड़ की मिठास सर्दियों के दिनों में लोगों को खूब भाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तिल और गुड़ के लड्डू किस मौसम में बनाए जाते हैं?\nतिल और गुड़ के लड्डू खासतौर पर सर्दियों और मकर संक्रांति के आसपास बनाए जाते हैं।\n\n2. आंध्र प्रदेश में उड़द दाल के लड्डुओं को क्या कहा जाता है?\nआंध्र प्रदेश में उड़द दाल से बनने वाले लड्डुओं को सुन्नुंडालु के नाम से जाना जाता है।\n\n3. राजस्थानी चूरमा के लड्डू बनाने के लिए मुख्य रूप से क्या इस्तेमाल होता है?\nचूरमा के लड्डू बनाने के लिए गेहूं के आटे से बनी बाटी या मोटी रोटी का चूरा उपयोग किया जाता है।\n\n4. मूंगफली और गुड़ के लड्डू बनाते समय मिश्रण को कब आकार दिया जाता है?\nमूंगफली और गुड़ के लड्डू मिश्रण के गर्म रहते ही बना लिए जाते हैं क्योंकि ठंडा होने पर गुड़ सख्त हो जाता है।",
  "url": "https://trendkia.com/food/explore-six-traditional-indian-laddoos-beyond-besan-and-motichoor-52191",
  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-10-27",
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    "लड्डू",
    "भारतीय मिठाइयां",
    "पारंपरिक व्यंजन",
    "मकर संक्रांति",
    "सर्दियों का खानपान"
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  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
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