# गर्मी से राहत और सेहत का संगम: पूर्णिया के पॉलीटेक्निक चौक पर ₹25 में मिल रही है पौष्टिक ड्राय फ्रूट मटका लस्सी

> पूर्णिया के पॉलीटेक्निक चौक पर स्थित पप्पू जी की दुकान की मटका लस्सी भीषण गर्मी में लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। घर की जमाई शुद्ध दही और ड्राय फ्रूट्स से तैयार यह लस्सी मात्र 25 रुपये से 50 रुपये में उपलब्ध है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-08-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/garmi-se-rahata-aura-sehata-ka-sngama-purnea-ke-polytechnic-chowk-para-25-men-mila-rahi-hai-paushtika-draya-phruta-mataka-lassi-15337 · **Language:** Hindi
**Tags:** पूर्णिया न्यूज, मटका लस्सी, पप्पू जी की दुकान, पॉलीटेक्निक चौक, बिहार फूड, देसी ड्रिंक

बिहार के पूर्णिया में कड़ाके की धूप और बढ़ती गर्मी के बीच खुद को तरोताजा और सेहतमंद रखने के लिए लोग देसी और पारंपरिक पेय पदार्थों की तरफ रुख कर रहे हैं। ऐसे मौसम में शुद्ध दही से तैयार मिट्टी के बर्तन वाली मटका लस्सी शरीर को ठंडक पहुंचाने का एक बेहतरीन जरिया बनती है। यह पेय न केवल प्यास बुझाता है और पेट को ठंडक देता है, बल्कि दिनभर काम करने के लिए जरूरी ऊर्जा भी प्रदान करता है। अगर आप पूर्णिया क्षेत्र में हैं और असली देसी स्वाद की तलाश में हैं, तो पॉलीटेक्निक चौक पर स्थित पप्पू जी की दुकान एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है।

## शुद्ध दही और मिट्टी के मटके की पारंपरिक तैयारी
पॉलीटेक्निक चौक के पास स्थित 'पप्पू जी की दुकान' अपनी खास मटका लस्सी की गुणवत्ता और तैयारी के तरीके के लिए पूरे इलाके में मशहूर है। इस लस्सी की सबसे बड़ी खासियत इसकी शुद्धता और पारंपरिक मथन शैली है। बाजार में मिलने वाली मिलावटी सामग्रियों के बजाय, यहां केवल घर में जमाई गई शुद्ध और ताजी दही का ही इस्तेमाल किया जाता है। ठंडी-ठंडी दही को जब मिट्टी के मटके में रखकर पारंपरिक तरीके से मथा जाता है, तो उसमें से एक अनोखी सोंधी महक आती है, जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ा देती है।

## काजू, बादाम और पिस्ता से भरपूर पौष्टिक मिश्रण
पप्पू जी की यह लस्सी सिर्फ दही और चीनी का सामान्य घोल नहीं है। इसके स्वाद और गाढ़ेपन को बढ़ाने के लिए इसमें कई तरह की पौष्टिक चीजें मिलाई जाती हैं। लस्सी के प्रत्येक कुल्हड़ में भारी मात्रा में काजू, पिस्ता, किशमिश, बादाम और कसा हुआ नारियल पाउडर डाला जाता है। मेवों और ड्राय फ्रूट्स का यह बेहतरीन मिश्रण लस्सी को न केवल स्वादिष्ट और गाढ़ा बनाता है, बल्कि इसे एक संपूर्ण पौष्टिक आहार का रूप भी दे देता है। यही कारण है कि चौक से गुजरने वाला हर ग्राहक एक बार इसका स्वाद चखने के बाद दोबारा यहां खिंचा चला आता है।

## 25 रुपये से शुरुआत और हर वर्ग के लिए सुलभ
स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए यह दुकान सुबह से लेकर शाम तक लगातार खुली रहती है, जिससे लोग अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय आकर लस्सी का आनंद ले सकते हैं। कीमत की बात करें तो यह हर आम और खास की जेब के अनुकूल है। यहां 25 रुपये से लेकर 50 रुपये तक के विभिन्न बजट विकल्पों में लस्सी उपलब्ध कराई जाती है। अगर आप पूर्णिया में रहते हैं या पॉलीटेक्निक चौक के आसपास से होकर गुजर रहे हैं, तो मिट्टी के कुल्हड़ में मिलने वाली यह मटका लस्सी आपकी दिनभर की थकान और गर्मी को दूर करने के लिए एक शानदार विकल्प है।

## इसका आप पर असर
**पाठकों के लिए इसका प्रभाव:**

- **पूर्णिया और बिहार में:** पॉलीटेक्निक चौक से गुजरने वाले राहगीर और स्थानीय निवासी भीषण गर्मी में 25 से 50 रुपये के किफायती बजट में सेहतमंद और शुद्ध मटका लस्सी का आनंद ले सकते हैं।
- **भारत भर में:** गर्मियों के मौसम में कृत्रिम शीतपेयों के बजाय पारंपरिक दही और मेवों से बनी मटका लस्सी पाचन तंत्र को ठंडा रखकर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखती है।

## सवाल-जवाब

### 1. पूर्णिया में यह प्रसिद्ध मटका लस्सी की दुकान कहाँ स्थित है?
यह मशहूर 'पप्पू जी की दुकान' पूर्णिया के पॉलीटेक्निक चौक के पास स्थित है।

### 2. इस मटका लस्सी की सबसे मुख्य खासियत क्या है?
इस लस्सी में बाजार के मिलावटी सामान के बजाय घर की जमाई शुद्ध दही का उपयोग होता है, जिसे मिट्टी के मटके में मथा जाता है।

### 3. लस्सी में कौन-कौन से ड्राय फ्रूट्स और सामग्रियां मिलाई जाती हैं?
लस्सी में काजू, पिस्ता, किशमिश, बादाम और नारियल पाउडर का प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है।

### 4. इस दुकान पर मटका लस्सी की कीमत क्या है?
यहाँ 25 रुपये से लेकर 50 रुपये तक के अलग-अलग बजट में मटका लस्सी उपलब्ध है।

### 5. पप्पू जी की दुकान खुलने और बंद होने का समय क्या है?
यह दुकान सुबह से लेकर शाम तक लगातार खुली रहती है, जिससे ग्राहक किसी भी समय आ सकते हैं।

## प्रेरणा और सबक
**प्रेरणा और सीख:**

- **गुणवत्ता और शुद्धता सर्वोपरि:** मिलावटी सामान के बजाय घर की जमाई शुद्ध दही का इस्तेमाल कर ग्राहकों का भरोसा और उत्पाद की साख बनाई जा सकती है।
- **पारंपरिक तरीकों का सम्मान:** आधुनिक मशीनों के दौर में मिट्टी के मटके और कुल्हड़ की पारंपरिक शैली उत्पाद को अनोखा स्वाद और महक देती है।
- **हर वर्ग का ध्यान:** 25 से 50 रुपये जैसी किफायती दरें रखकर समाज के हर तबके को अपना नियमित ग्राहक बनाया जा सकता है।

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