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  "title": "गया के मारकंडे महादेव मंदिर के पास 10 रुपये में 3 मिनी समोसे, रोजाना 2000 से अधिक बिकते हैं",
  "summary": "महंगाई के बीच गया के मंगला गौरी और मारकंडे मंदिर के पास श्री केसरिया पेड़ा दुकान पर 10 रुपये में 3 मिनी समोसे मिल रहे हैं। स्वाद और कम कीमत के कारण यहां रोजाना 2000 से ज्यादा समोसे बिकते हैं।",
  "content": "देशभर में बढ़ती महंगाई के कारण खान-पान की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। आमतौर पर हलवाई की दुकानों पर एक समोसे की कीमत 10 से 15 रुपये तक पहुंच चुकी है। हालांकि, बिहार के गयाजी शहर में एक ऐसी प्रसिद्ध दुकान है जहां आज भी महज 10 रुपये में 3 गरमा-गरम मिनी समोसे दिए जा रहे हैं। इस अनोखे और किफायती स्वाद का आनंद लेने के लिए दुकान के बाहर रोजाना पेट पूजा करने वालों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।\n\nश्री केसरिया पेड़ा दुकान की अनोखी पेशकश\nगया शहर के प्रसिद्ध मंगला गौरी मंदिर, मारकंडे महादेव मंदिर और पवित्र वैतरणी तालाब के ठीक सामने श्री केसरिया पेड़ा दुकान स्थित है। इस दुकान के संचालक मनोज कुमार गुप्ता पिछले 3 वर्षों से शहर का सबसे सस्ता समोसा बेच रहे हैं। 3 साल पहले तक यह दुकान शहर के नादरागंज कोयरीबाडी इलाके में चलती थी। उस समय भी लोग इसे पसंद करते थे, लेकिन जब से दुकान मारकंडे महादेव मंदिर के बगल में खुली है, तब से यहां ग्राहकों का हुजूम उमड़ पड़ा है।\n\nरोजाना 2000 से ज्यादा मिनी समोसे की बिक्री\nदुकान पर मिलने वाले इन छोटे समोसों को मिनी समोसा कहा जाता है। सुबह 8 बजे से ही मनोज कुमार गुप्ता अपने 5 कर्मचारियों के साथ समोसा बनाने की तैयारियों में जुट जाते हैं। सुबह 11 बजे से ही समोसे के शौकीन दुकान पर पहुंचना शुरू कर देते हैं और यह सिलसिला रात 8 बजे तक लगातार जारी रहता है। मांग इतनी अधिक रहती है कि ग्राहकों को अपनी बारी के लिए कम से कम आधे घंटे यानी 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। दुकान से रोजाना 2000 पीस से अधिक मिनी समोसे बिक जाते हैं।\n\nसरसों की खास चटनी और सेहत का ख्याल\nइन मिनी समोसों का असली स्वाद इसके साथ परोसी जाने वाली खास सरसों यानी राई की चटनी से आता है। चटनी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोज 2 गैलन सरसों की चटनी खत्म हो जाती है। दुकान मालिक मनोज कुमार गुप्ता के अनुसार, वे समोसे में अधिक तीखे या नुकसानदेह मसालों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हल्का मसाला डाला जाता है। इसी वजह से बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी वर्ग के लोग इसे बिना किसी हिचकिचाहट के खाते हैं। मनोज कुमार गुप्ता इस अपार सफलता को मां मंगला गौरी और भगवान महादेव की कृपा मानते हैं।\n\nस्थानीय निवासियों और ग्राहकों की प्रतिक्रिया\nगया के स्थानीय निवासी राजू कुमार सिंह ने बताया कि जब भी वे इस रास्ते से गुजरते हैं, इस दुकान पर रुककर मिनी समोसा जरूर खाते हैं। राजू कुमार सिंह के अनुसार, \"10 रुपये में एक समोसा तो हर दुकान में मिलता है, लेकिन इतना सस्ता और स्वादिष्ट समोसा पूरे बिहार में मिलना मुश्किल है।\" यहां आने वाले कई ग्राहक न केवल मौके पर समोसे का लुत्फ उठाते हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए भी पैक करवा कर ले जाते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nपाठकों पर प्रभाव:\n\n• बिहार में: गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए महंगाई के दौर में मात्र 10 रुपये में भरपेट और किफायती नाश्ता उपलब्ध है।\n• भारत में: यह मॉडल साबित करता है कि गुणवत्ता और सही स्वाद के साथ बजट-फ्रेंडली भोजन की मांग देश भर में हमेशा बनी रहती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गया में 10 रुपये में 3 समोसे कहां मिलते हैं?\nयह समोसा गया शहर के मंगला गौरी मंदिर, मारकंडे महादेव मंदिर और वैतरणी तालाब के सामने स्थित श्री केसरिया पेड़ा दुकान पर मिलता है।\n\n2. श्री केसरिया पेड़ा दुकान के मालिक कौन हैं?\nइस दुकान के मालिक मनोज कुमार गुप्ता हैं, जो पिछले 3 वर्षों से यह सस्ता मिनी समोसा बेच रहे हैं।\n\n3. दुकान के खुलने का समय और समोसे की दैनिक बिक्री कितनी है?\nदुकान में तैयारी सुबह 8 बजे शुरू होती है और ग्राहक 11 बजे से रात 8 बजे तक आते हैं। यहां रोजाना 2000 से अधिक मिनी समोसे बिकते हैं।\n\n4. इन मिनी समोसों के साथ कौन सी चटनी दी जाती है?\nइन समोसों के साथ विशेष सरसों यानी राई की चटनी दी जाती है, जिसकी रोजाना दो गैलन तक खपत हो जाती है।\n\n5. इस समोसे की क्या खासियत है जो इसे स्वास्थ्य के लिए बेहतर बनाती है?\nमनोज कुमार गुप्ता समोसे में हल्के मसालों का इस्तेमाल करते हैं ताकि किसी को पेट से जुड़ी परेशानी न हो और हर उम्र के लोग इसे खा सकें।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्रेरणा और सीख:\n\n• कम कीमत में उच्च गुणवत्ता: मनोज कुमार गुप्ता ने दिखाया कि कम मार्जिन रखकर और बिक्री की मात्रा बढ़ाकर भी एक सफल व्यवसाय चलाया जा सकता है।\n• ग्राहकों के स्वास्थ्य का ध्यान: समोसे में हल्के मसालों का उपयोग करके हर उम्र के लोगों को आकर्षित किया जा सकता है।\n• सही स्थान का चयन: नादरागंज कोयरीबाडी से मारकंडे मंदिर के पास दुकान स्थानांतरित करने से ग्राहकों की भीड़ में भारी वृद्धि हुई।\n• रोजगार का सृजन: एक छोटे व्यापार के माध्यम से पांच स्थानीय कर्मचारियों को रोजगार देना और निरंतर समय पर सेवा प्रदान करना।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-08-01",
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    "मनोज कुमार गुप्ता",
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    "सस्ता नाश्ता गया"
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