# गेहूं के आटे में ये 5 मोटे अनाज मिलाते ही दूर होंगी कई गंभीर बीमारियां, जानें सही अनुपात

> सफेद गेहूं के आटे में चना, जौ, ज्वार, बाजरा और रागी मिलाकर घर पर पौष्टिक मल्टीग्रेन आटा तैयार किया जा सकता है। यह मिश्रण शरीर में पोषण की कमी दूर करने के साथ पाचन, शुगर और मोटापे को नियंत्रित करने में सहायक है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-10-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/gehun-ke-ate-men-ye-5-mote-anaja-milate-hi-dura-hongi-kai-gnbhira-bimariyan-janen-sahi-anupata-53518 · **Language:** Hindi
**Tags:** मल्टीग्रेन आटा, मोटे अनाज, डायबिटीज डाइट, रागी के फायदे, वजन घटाने के उपाय, सर्दियों का खानपान

शहरी जीवन की भागदौड़, दफ्तर में घंटों लगातार बैठे रहने की आदत, धूप की कमी और अधूरी नींद के चलते अधिकांश लोग स्वास्थ्य से जुड़ी कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं। शहरी आबादी में विटामिन बी 12 और विटामिन डी की कमी एक आम समस्या बन चुकी है। ऐसी दिनचर्या में खान-पान की गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है, जहां अक्सर हमारी दैनिक डाइट के मुख्य हिस्से यानी आटे की अनदेखी हो जाती है। केवल साधारण गेहूं के आटे से शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में यदि गेहूं के आटे में चना, ज्वार, जौ, बाजरा और रागी जैसे पांच महत्वपूर्ण अनाजों को शामिल कर लिया जाए, तो शरीर को निरोग और ऊर्जावान बनाए रखने में बड़ी मदद मिलती है।

## घर पर मल्टीग्रेन आटा बनाने का सटीक अनुपात
बाजार के बजाय घर पर ही शुद्ध मल्टीग्रेन आटा आसानी से तैयार किया जा सकता है। यह आटा डायबिटीज, दिल की बीमारियों और मोटापे की समस्या से राहत दिलाने में मददगार साबित होता है। अगर पांच किलो मल्टीग्रेन आटा तैयार करना हो, तो सबसे पहले तीन किलो साफ गेहूं लें। इसके बाद बाकी बचे दो किलो के हिस्से में चना, जौ, ज्वार और बाजरा प्रत्येक को 400 ग्राम की मात्रा में मिलाएं। शुरुआत में गेहूं की मात्रा अधिक रखना बेहतर रहता है ताकि पाचन तंत्र नए अनाज के साथ तालमेल बिठा सके।

जब मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियां खाने की नियमित आदत हो जाए और पाचन तंत्र इन्हें आसानी से पचाने लगे, तब गेहूं की हिस्सेदारी को धीरे-धीरे घटाया जा सकता है। नियमित सेवन के बाद आप अपनी जरूरत और शारीरिक क्षमता के अनुसार जौ, चना, ज्वार, बाजरा और मक्का के अनुपात को घटा या बढ़ा भी सकते हैं।

## देसी चना और मोटे अनाजों के स्वास्थ्य लाभ
इस मिश्रण में देसी चना शामिल करना विशेष रूप से फायदेमंद होता है। चने में प्रोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ वजन घटाने में मदद करती है। चना ब्लड शुगर के स्तर और डायबिटीज को नियंत्रित रखने में सहायक है, साथ ही इसमें फाइबर और आयरन की भरपूर मौजूदगी शरीर को जरूरी पोषण देती है।

सर्दियों के दिनों में गेहूं के साथ चना, मक्का, ज्वार, बाजरा और रागी का मिश्रण बेहद लाभकारी माना जाता है। मक्का, ज्वार और बाजरा की तासीर गर्म होती है और इनमें मौजूद थर्मोजेनिक गुण ठंड के मौसम में शरीर को अंदरूनी प्राकृतिक गर्मी प्रदान करते हैं। इन अनाजों में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं, जो शरीर में बेहद धीमी गति से पचते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा का स्तर बनाए रखते हैं। इसके अतिरिक्त इनमें आयरन, जिंक, प्रोटीन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो सर्दी-जुकाम, खांसी और अन्य मौसमी संक्रमणों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

## रागी की उपयोगिता और पोषण
घर पर आटा तैयार करते समय रागी, जिसे मडुआ भी कहा जाता है, को शामिल करना बेहद जरूरी है। रागी की तासीर गर्म मानी जाती है, इसलिए सर्दियों में इसका सेवन विशेष तौर पर गुणकारी होता है। रागी स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-मुक्त अनाज है जिसमें कैल्शियम अत्यधिक मात्रा में मौजूद होता है। यह हड्डियों और जोड़ों के दर्द में विशेष राहत पहुंचाता है। इसके साथ ही रागी में पर्याप्त मात्रा में फाइबर और प्रोटीन होता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने, वजन को नियंत्रित करने और ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

## इसका आप पर असर
घर के आटे में इन अनाजों को शामिल करने से सीधे आपके दैनिक पोषण और स्वास्थ्य बजट पर सकारात्मक असर पड़ता है।

- **खान-पान में बदलाव:** सफेद गेहूं के आटे पर निर्भरता कम करके पांच अनाजों का संतुलन बनाया जा सकता है। इससे रोजमर्रा की रोटियों में स्वाभाविक रूप से फाइबर, आयरन और कैल्शियम बढ़ जाता है।
- **वजन और शुगर नियंत्रण:** कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट की वजह से भूख जल्दी नहीं लगती और ब्लड शुगर स्थिर रहता है। डायबिटीज और बढ़ते वजन की समस्या से जूझ रहे लोगों को नियमित लाभ मिलता है।
- **मौसमी राहत:** सर्दियों में शरीर को प्राकृतिक गर्मी और रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है। मौसमी सर्दी-खांसी और जोड़ों के दर्द की शिकायत में कमी आती है।
- **बजट और शुद्धता:** बाजार के महंगे पैकेटबंद मल्टीग्रेन आटे के बजाय घर पर ही साबुत अनाज मिलाकर इसे तैयार किया जा सकता है। इससे कम खर्च में शुद्ध और बिना मिलावट वाला पोषण प्राप्त होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
आधुनिक शहरी जीवनशैली में कम शारीरिक श्रम और प्रसंस्कृत भोजन की अधिकता ने पोषण संबंधी कमियों को बढ़ा दिया है। केवल गेहूं के आटे पर अत्यधिक निर्भरता के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे वैकल्पिक अनाजों की आवश्यकता महसूस हुई।

- **पोषक तत्वों की कमी:** साधारण गेहूं के आटे में कई जरूरी खनिज और फाइबर सीमित मात्रा में होते हैं। लंबे समय तक केवल इसी का सेवन करने से सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पैदा हो जाती है।
- **शहरी जीवनशैली के दुष्प्रभाव:** ऑफिस में लगातार बैठकर काम करने और धूप के अभाव से मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है। ऐसे में भारी या साधारण कार्ब्स पचने में दिक्कत पैदा करते हैं और वजन बढ़ाते हैं।
- **पारंपरिक अनाजों की वैज्ञानिक उपयोगिता:** मोटे अनाजों में स्वाभाविक रूप से थर्मोजेनिक गुण, उच्च प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स होते हैं। इन अनाजों को मिलाकर खाने से शरीर को धीमी गति से निरंतर ऊर्जा मिलती रहती है।

## सवाल-जवाब

### 1. 5 किलो मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए कौन सा अनुपात सही है?
इसके लिए 3 किलो गेहूं लें और उसमें 400-400 ग्राम चना, जौ, ज्वार और बाजरा मिलाएं।

### 2. मल्टीग्रेन आटे में रागी मिलाना क्यों फायदेमंद है?
रागी ग्लूटेन-फ्री अनाज है, जिसमें कैल्शियम भरपूर होता है जो हड्डियों और जोड़ों के दर्द में राहत देता है।

### 3. सर्दियों में मक्का, ज्वार और बाजरा खाने की सलाह क्यों दी जाती है?
इनकी तासीर गर्म होती है और इनमें थर्मोजेनिक गुण होते हैं, जो सर्दियों में शरीर को अंदरूनी गर्माहट देते हैं।

### 4. क्या मल्टीग्रेन आटा वजन और डायबिटीज को नियंत्रित कर सकता है?
हां, इसमें मौजूद उच्च प्रोटीन, फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वजन घटाने और ब्लड शुगर स्थिर रखने में मदद करते हैं।

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