गेहूं के आटे से तैयार करें बिल्कुल नर्म और फूली हुई पूरन पोली, आसान है तरीका पारंपरिक स्वाद और सेहत दोनों को ध्यान में रखकर बिना मैदा मिलाए भी बेहद मुलायम और फूली हुई पूरन पोली घर पर बनाई जा सकती है। महाराष्ट्र के पारंपरिक खानपान में पूरन पोली का स्थान बेहद खास माना जाता है। त्योहारों और खास मौकों पर बनाई जाने वाली इस मीठी रोटी को अमूमन गेहूं और मैदे के मिश्रण से तैयार किया जाता है। कई लोग स्वास्थ्य कारणों से मैदे का सेवन करने से बचते हैं। ऐसे में केवल गेहूं के आटे का इस्तेमाल करके भी उसी पारंपरिक स्वाद और कोमलता के साथ इसे पकाया जा सकता है। सही विधि और कुछ छोटी बातों का ध्यान रखकर आप घर की रसोई में एकदम खस्ता, फूली हुई और मुंह में घुल जाने वाली पूरन पोली आसानी से बना सकते हैं। आवश्यक सामग्री का सही नाप इस व्यंजन को बेहतरीन स्वाद देने के लिए जरूरी है कि सभी चीजें सही अनुपात में जुटाई जाएं। मुख्य परत और आंतरिक भरावन के लिए सामग्री इस प्रकार है • बाहरी परत के लिए: एक कप गेहूं का आटा, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा छोटा चम्मच नमक, एक चम्मच घी और आवश्यकतानुसार सादा पानी। • आंतरिक मीठे भरावन के लिए: एक कप चना दाल, तीन चौथाई कप पिसा हुआ गुड़, एक छोटा चम्मच घी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और आधा छोटा चम्मच जायफल पाउडर। चना दाल और गुड़ का भरावन बनाने की विधि पूरन पोली का असली स्वाद उसके अंदर भरे जाने वाले पूरन यानी मीठे मिश्रण पर निर्भर करता है। इसके लिए सबसे पहले एक कप चने की दाल को रात भर के लिए साफ पानी में भिगोकर छोड़ दें। अगली सुबह भीगी हुई दाल को पानी समेत प्रेशर कुकर में डालें। दाल को अच्छी तरह गलने के लिए छह से सात सीटी आने तक मध्यम आंच पर पकाएं। कुकर का दबाव खत्म होने और दाल के ठंडा पड़ने पर उसे छलनी की मदद से छानकर सारा अतिरिक्त पानी अलग कर लें। पानी पूरी तरह निकल जाने के बाद दाल में तीन चौथाई कप गुड़ का पाउडर अच्छी तरह मिलाएं। इस मिश्रण को पारंपरिक सिलबट्टे पर बारीक और चिकना पीस लें। जब दाल और गुड़ का गाढ़ा लेप तैयार हो जाए, तब इसमें आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और आधा छोटा चम्मच जायफल पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। इस तरह पूरन पोली का सुगंधित भरावन तैयार हो जाता है। आटा लगाने और बेलने का विशेष तरीका गेहूं के आटे से नर्म पोली बनाने का सबसे बड़ा राज उसके गूंथने में छिपा है। एक बड़ी परात या थाली में एक कप गेहूं का आटा निकालें। इसमें आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा छोटा चम्मच नमक और एक चम्मच घी डालकर हाथों से अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए आटे को बेहद लचीला और नरम होने तक गूंथें। चूंकि इसमें मैदा शामिल नहीं है, इसलिए इसे सामान्य से अधिक समय तक मसलना पड़ता है ताकि आटे में खिंचाव आ सके। आटा तैयार होने पर उसकी ऊपरी सतह पर थोड़ा घी लगाएं और सूती कपड़े से ढककर करीब आधा से पौन घंटा के लिए छोड़ दें। यह विश्राम आटे को सेट होने में मदद करता है, जिससे पकते समय पोली फूलती है। समय पूरा होने पर कपड़े को हटाएं, आटे में एक चम्मच अतिरिक्त घी डालें और दोबारा एक बार अच्छे से मसल लें। अब मध्यम आकार की लोई बनाकर उसे बीच से गहरा कटोरीनुमा आकार दें और उसमें तैयार मीठा भरावन भरकर किनारों को पूरी तरह बंद कर दें। सेंकने की प्रक्रिया और परोसने का आनंद लोई को बेलने के लिए एक साफ जिपर प्लास्टिक शीट को काटकर समतल जगह पर बिछाएं। उस पर लोई रखकर पहले उंगलियों से हल्का थपथपाएं। इसके बाद बेलन की सहायता से हल्के हाथों से चारों तरफ एक समान रूप से पतला बेल लें। धीमी आंच पर गैस पर तवा या पैन चढ़ाएं और उस पर थोड़ा घी लगाएं। बेली हुई पोली को गर्म तवे पर डालें और दोनों तरफ हल्का भूरा रंग आने और अच्छी तरह पकने तक पलट-पलटकर सेकें। सिकते ही यह भाप से गुब्बारे की तरह फूलने लगती है। तैयार गरमा-गरम पूरन पोली को ताजे आमरस या गाढ़े दही के साथ परोसकर इसके पारंपरिक स्वाद का लुत्फ उठाएं। इसका आप पर असर इस आसान विधि से घर पर बिना मैदा मिलाए अधिक पौष्टिक और सुपाच्य पूरन पोली बनाई जा सकती है। • खानपान और सेहत: मैदे के बिना केवल गेहूं के आटे और गुड़ का प्रयोग पाचन को हल्का रखता है। इससे स्वास्थ्य को लेकर सजग लोग भी बिना किसी झिझक के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकते हैं। • रसोई में सुविधा: सामान्य बर्तनों और सिलबट्टे की मदद से त्योहारों की तैयारी सरल हो जाती है। विशेष सामग्री खरीदे बिना रसोई में मौजूद दाल, गुड़ और मसालों से इसे तैयार किया जा सकता है। • बजट और समय: घर पर उपलब्ध दाल और आटे से बनी यह डिश बाजार की तुलना में काफी सस्ती और शुद्ध पड़ती है। दाल को रात में भिगोकर रखने से सुबह पकाने के समय में काफी बचत होती है। • परंपरा और स्वाद: जायफल और इलायची का संतुलन परिवार के हर सदस्य को पारंपरिक स्वाद का अनुभव कराता है। इसे आमरस या दही के साथ परोसकर पूरे भोजन का आनंद लिया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक पूरन पोली में लचीलापन लाने के लिए मैदा मिलाया जाता है, लेकिन कुछ विशेष पाक तकनीकों से केवल गेहूं के आटे में भी वही कोमलता हासिल की जा सकती है। • अतिरिक्त गूंथने की वजह: गेहूं के आटे में मैदे जैसा प्राकृतिक खिंचाव कम होता है। इसलिए आटे को ज्यादा देर तक मसलने और घी के साथ सेट होने देने से उसमें जरूरी लचीलापन विकसित हो जाता है। • दाल को रातभर भिगोने का कारण: चने की दाल सख्त होती है और उसे पचने योग्य व मुलायम बनाना आवश्यक होता है। रातभर भिगोने से दाल छह से सात सीटी में अच्छी तरह गल जाती है और पीसते समय गांठें नहीं बनतीं। • प्लास्टिक शीट के प्रयोग का कारण: गेहूं के आटे की पतली परत बेलते समय चिपकने या फटने का डर रहता है। जिपर प्लास्टिक की शीट पर बेलने से बिना अतिरिक्त सूखा आटा लगाए पोली एक समान और पतली तैयार होती है। सवाल-जवाब 1. क्या बिना मैदा मिलाए पूरन पोली मुलायम बन सकती है? हां, गेहूं के आटे को अधिक समय तक गूंथकर और कपड़े से ढककर आधा से पौन घंटा सेट होने देने से पोली बेहद मुलायम और फूली हुई बनती है। 2. पूरन पोली के आटे में क्या-क्या मिलाया जाता है? आटे में एक कप गेहूं का आटा, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा छोटा चम्मच नमक और एक चम्मच घी मिलाकर पानी से गूंथा जाता है। 3. भरावन के लिए चने की दाल को कितनी देर पकाना चाहिए? रात भर भिगोने के बाद दाल को कुकर में छह से सात सीटी आने तक अच्छी तरह पकाना चाहिए ताकि वह पूरी तरह गल जाए। 4. पूरन पोली को किसके साथ परोसना सबसे अच्छा माना जाता है? तैयार गरमा-गरम पूरन पोली का स्वाद ताजे आमरस या सादे गाढ़े दही के साथ सबसे बेहतरीन लगता है। https://trendkia.com/food/gehun-ke-ate-se-taiyara-karen-bilkula-narma-aura-phuli-hui-puran-poli-asana-hai-tarika-44726 TrendKia — Har trend, sabse pehle.