घर पर बनाएं हलवाई जैसा परतदार और खस्ता शक्करपारा, जानें सही तरीका और जरूरी टिप्स दिवाली के मौके पर घर पर ही हलवाई जैसा कुरकुरा और खस्ता शक्करपारा तैयार करने की आसान विधि और तलने की सही तकनीक समझें। दिवाली के पावन अवसर पर घरों में तरह-तरह के पारंपरिक पकवान और मिठाइयां तैयार करने का चलन सदियों से रहा है। त्योहार के दिनों में रिश्तेदारों और दोस्तों का घर आना-जाना लगा रहता है और उनका स्वागत पारंपरिक व्यंजनों से किया जाता है। ऐसे में अगर घर पर कोई ऐसा मीठा स्नैक तैयार करना हो जो लंबे समय तक चले और खाने में बेहद लाजवाब लगे, तो शक्करपारे से बेहतर विकल्प मिलना मुश्किल है। यह एक ऐसा पारंपरिक स्नैक है जिसे बच्चे और बड़े सभी बड़े चाव से खाते हैं। हलवाई जैसी परतें पाने का असली राज अक्सर घरों में यह अनुभव देखने को मिलता है कि शक्करपारे अंदर से सख्त हो जाते हैं या फिर उनमें बाजार जैसी परतें नहीं उभरतीं। इसका मुख्य कारण सामग्री का गलत अनुपात और आटा लगाने का गलत तरीका होता है। हलवाई जैसी बनावट हासिल करने के लिए बहुत अधिक मेहनत या जटिल सामान की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सही तकनीक का पालन करना जरूरी होता है। इस खास विधि को अपनाकर बिना किसी झंझट के एकदम खस्ता और मुंह में घुल जाने वाले शक्करपारे तैयार किए जा सकते हैं। आवश्यक सामग्री का सही मिश्रण शक्करपारे बनाने की शुरुआत एक सही लिक्विड बेस तैयार करने से होती है। इसके लिए एक बर्तन में दूध, चीनी और घी को एक साथ मिलाया जाता है। इस बर्तन को धीमी आंच पर तब तक हल्का गर्म किया जाता है जब तक कि चीनी के सभी दाने अच्छी तरह घुल न जाएं। यहां सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह रखनी होती है कि इस घोल को किसी भी हाल में उबालना नहीं है, सिर्फ हल्का गुनगुना रखना है। इसके बाद खुशबू और लाजवाब स्वाद के लिए इस गुनगुने घोल में थोड़ा सा इलायची पाउडर मिलाया जाता है। आटा तैयार करने की सही तकनीक तैयार किए गए गुनगुने दूध, घी और चीनी के मिश्रण को मैदे में एक साथ डालने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए। इसे थोड़े-थोड़े हिस्से में मैदे में मिलाना होता है ताकि मैदा जरूरत से ज्यादा गीला न हो। इस प्रक्रिया का सबसे अहम नियम यह है कि आटे को पारंपरिक रोटियों की तरह गूंथना या मसलना बिल्कुल नहीं है। जैसे ही मैदा और तरल मिश्रण आपस में जुड़ने लगें, तुरंत हाथ रोक लेना चाहिए। यदि बर्तन में थोड़ा तरल मिश्रण बच भी जाए, तो भी उसे अलग रख देना चाहिए और अतिरिक्त मिश्रण जबरन नहीं मिलाना चाहिए। बेलने और काटने का सही तरीका इस विधि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस आटे को तैयार करने के बाद रेस्ट कराने की जरूरत नहीं पड़ती। आटे को तुरंत चकले पर रखकर थोड़ा मोटा बेल लिया जाता है। अगर इसे पतला बेल दिया जाएगा तो तलते समय परतें नहीं खुलेंगी, इसलिए आटे की मोटाई बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके बाद एक चाकू की मदद से इसे अपनी पसंद के अनुसार चौकोर टुकड़ों में काट लिया जाता है। मोटाई सही रहने पर ही तलने के बाद इसमें सुंदर परतें दिखाई देती हैं। तलने के दौरान रखें इन बातों का ध्यान कड़ाही में तेल गर्म करके आंच को धीमे से मध्यम स्तर पर सेट किया जाता है। तेल में कटे हुए टुकड़े डालने के तुरंत बाद झारे या कलछी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अगर कच्चे टुकड़ों को तुरंत हिलाया जाए, तो वे गर्म तेल में बिखर सकते हैं। जब शक्करपारे खुद तैरकर तेल की सतह पर ऊपर आ जाएं, तब उन्हें हल्के हाथों से उलट-पुलट कर सुनहरा होने तक तला जाता है। सुनहरे और क्रिस्पी होने के बाद इन्हें प्लेट में निकालकर पूरी तरह ठंडा किया जाता है, जिसके बाद ही इन्हें एयरटाइट डिब्बे में रखना सुरक्षित होता है। इसका आप पर असर घर पर शुद्ध सामग्री से पारंपरिक स्नैक्स तैयार करने से त्योहारी सीजन में सेहत और बजट दोनों को फायदा मिलता है। • शुद्धता और सेहत: घर पर शक्करपारे बनाने से बाजार की मिलावटी मिठाइयों और बासी तेल के उपयोग से पूरी तरह बचा जा सकता है। इससे परिवार और मेहमानों को शुद्ध एवं स्वास्थ्यवर्धक पारंपरिक स्वाद परोसना संभव होता है। • किफायती उत्सव: कम खर्च में मैदा, घी, दूध और चीनी जैसी बुनियादी रसोई सामग्री से बड़ी मात्रा में स्नैक तैयार हो जाता है। यह त्योहारी बजट को संतुलित रखने में सीधे तौर पर मदद करता है। • भंडारण की सुविधा: सही तरीके से तलकर ठंडा करने के बाद इसे लंबे समय तक एयरटाइट डिब्बे में सुरक्षित रखा जा सकता है। व्यस्त दिवाली सप्ताह से पहले इसे बनाकर मेहमानों के लिए तैयार रखा जा सकता है। • बेकिंग और कुकिंग कौशल: सही तकनीक सीखने से आटा गूंथने और तलने की गलतियां हमेशा के लिए सुधर जाती हैं। यह अनुभव अन्य पारंपरिक भारतीय नमकीन और मिठाइयां बनाते समय भी काम आता है। ऐसा क्यों हुआ शक्करपारे के अंदर खस्तापन और परतें न बनने का सीधा संबंध आटे की हैंडलिंग और तलने के तापमान से होता है। • आटे को अधिक न मसलना: आटे को सख्त हाथों से गूंथने पर उसमें ग्लूटेन खिंच जाता है, जिससे शक्करपारा कड़ा बन जाता है। सामग्री को सिर्फ हल्के हाथों से समेटने से घी की परतों की बनावट बरकरार रहती है। • तरल मिश्रण का तापमान: दूध, घी और चीनी के मिश्रण को उबालने के बजाय सिर्फ गुनगुना रखने से चीनी पिघलती है और घी संतुलित रूप से मैदे में मिलता है। अत्यधिक गर्म घोल मैदे की संरचना को खराब कर सकता है। • आटे की मोटाई: आटे को पतला बेलने से उसकी अंदरूनी परतें तलते समय खुल नहीं पाती हैं। थोड़ा मोटा रखने से भाप अंदर बनती है और परतदार खस्तापन उभरता है। • धीमी आंच पर तलना: तेज आंच पर तलने से बाहर की परत तेजी से जल जाती है जबकि अंदर से आटा कच्चा रह जाता है। धीमी से मध्यम आंच पर तलने से हर परत अंदर तक कुरकुरी बनती है। सवाल-जवाब 1. शक्करपारे को हलवाई जैसा परतदार कैसे बनाएं? आटे को जोर लगाकर गूंथने के बजाय हल्के हाथों से समेटें और बेलते समय उसे थोड़ा मोटा रखें। 2. दूध, घी और चीनी के मिश्रण को कितना गर्म करना चाहिए? इस मिश्रण को उबालना नहीं है, सिर्फ चीनी घुलने तक हल्का गुनगुना करना होता है। 3. क्या आटा लगाने के बाद उसे रेस्ट देना जरूरी है? नहीं, इस रेसिपी में आटे को बिना रेस्ट दिए तुरंत बेलकर काटा और तला जा सकता है। 4. तेल में शक्करपारे डालते ही चम्मच क्यों नहीं चलाना चाहिए? कच्चे शक्करपारे बहुत नाजुक होते हैं, तुरंत चम्मच चलाने से वे तेल में बिखर सकते हैं। 5. शक्करपारों को कब तक स्टोर किया जा सकता है? पूरी तरह ठंडा होने के बाद इन्हें एयरटाइट डिब्बे में भरकर हफ्तों तक खस्ता रखा जा सकता है। https://trendkia.com/food/ghar-par-banaye-halwai-jaisa-paratdar-aur-khasta-shakkarpara-jane-sahi-tarika-aur-jaruri-tips-55438 TrendKia — Har trend, sabse pehle.