घर पर बनाएं हलवाई जैसी खस्ता हरी मटर की कचौड़ी, नोट करें आसान विधि और जरूरी सामग्री सप्ताहांत के नाश्ते में साधारण पराठे या पोहा के बजाय बनाएं कुरकुरी और मसालेदार मटर की कचौड़ी, जिसे आलू की तरीदार सब्जी और तीखी चटनी के साथ परोसा जा सकता है। सुबह के नाश्ते या शाम की चाय के वक्त अगर रोजमर्रा के पोहा, सादे पराठे, दही-जलेबी अथवा दाल-रोटी से मन भर चुका हो, तो रसोई में कुछ नया और स्वादिष्ट तैयार किया जा सकता है। सर्दियों और सामान्य दिनों में भी हरी मटर से बनने वाले व्यंजन हमेशा पसंद किए जाते हैं। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय और लजीज विकल्प है हरी मटर की खस्ता कचौड़ी। यह कचौड़ी बाहर से खस्ता और कुरकुरी होती है, जबकि इसके भीतर भरा गया मटर और खड़े मसालों का मिश्रण इसे बेहद चटपटा बनाता है। इसे तीखी-खट्टी हरी चटनी, इमली की मीठी चटनी, ताजे दही या फिर पारंपरिक तरीदार आलू-टमाटर की सब्जी के साथ गरमागरम परोसा जा सकता है। इसे तैयार करने के लिए किसी जटिल सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि घर में आमतौर पर मिलने वाले मसालों और आटे से यह सरलता से बन जाती है। कचौड़ी के बाहरी आवरण के लिए आवश्यक सामग्री एकदम खस्ता और परतदार कचौड़ी तैयार करने के लिए सामग्री का सटीक अनुपात बहुत जरूरी है। बाहरी परत या आटे के लिए इन चीजों की आवश्यकता होती है • मैदा अथवा आटा: 2 कप मैदा (या चाहें तो विकल्प के तौर पर 1 कप मैदा और 1 कप गेहूं का आटा) • मोयन: 1/4 कप शुद्ध देसी घी या रिफाइंड तेल • अजवाइन: 1/2 छोटा चम्मच (हाथों से मसलकर डालें) • नमक: स्वादानुसार • पानी: आटा गूंधने के लिए आवश्यकतानुसार ठंडा पानी मसालेदार मटर की भरावन के लिए जरूरी चीजें कचौड़ी का असली स्वाद उसके अंदर की चटपटी भरावन में छिपा होता है। भरावन तैयार करने के लिए निम्नलिखित सामग्री अपने पास रख लें • हरी मटर: 1.5 कप ताजा या फ्रोजन मटर • तड़का व तेल: 1 बड़ा चम्मच तेल, 1/2 छोटा चम्मच हींग और 1 छोटा चम्मच साबुत जीरा • साबुत पिसे मसाले: 1 बड़ा चम्मच दरदरी पिसी सौंफ और 1 बड़ा चम्मच कुटा हुआ साबुत धनिया • अदरक-मिर्च: 1-2 बारीक कटी हरी मिर्च और 1 इंच कद्दूकस किया हुआ अदरक • बाइंडिंग के लिए: 1 बड़ा चम्मच बेसन • पिसे मसाले: 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर, स्वादानुसार गरम मसाला, सादा नमक और काला नमक • तलने के लिए: कढ़ाई में तलने हेतु पर्याप्त तेल आटा लगाने और मटर पीसने का सही तरीका कचौड़ी बनाने की शुरुआत आटा गूंथने से होती है। एक बड़े बर्तन या परात में मैदा (या गेहूं के आटे का मिश्रण), स्वादानुसार नमक, अजवाइन और 1/4 कप देसी घी या तेल डालें। अब दोनों हाथों की हथेलियों से आटे और घी को अच्छी तरह रगड़ें। जब आटे को मुट्ठी में बांधने पर वह बिना टूटे बंधने लगे, तो इसका अर्थ है कि मोयन बिल्कुल सही पड़ा है। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा ठंडा पानी छिड़कते हुए एक चिकना, नरम और लचीला आटा गूंध लें। कचौड़ी का आटा न तो ज्यादा सख्त होना चाहिए और न ही बहुत गीला। तैयार आटे को एक साफ गीले सूती कपड़े से ढंककर 20 मिनट के लिए आराम करने दें, जिससे मैदा अच्छे से सैट हो जाए। जब तक आटा आराम कर रहा है, तब तक हरी मटर को तैयार करें। 1.5 कप हरी मटर को मिक्सर के जार में डालें। ध्यान रखें कि इसमें बिल्कुल भी पानी नहीं डालना है। मिक्सी को पल्स मोड पर रोक-रोककर चलाएं ताकि मटर का केवल दरदरा पेस्ट बने। मटर को बिल्कुल बारीक पीसकर पेस्ट बनाने से बचें, क्योंकि भरावन में जब मटर के छोटे टुकड़े मुंह में आते हैं, तभी कचौड़ी का असली स्वाद और बनावट निखर कर आती है। चटपटा मसाला भूनने की विधि गैस पर एक चौड़ी कढ़ाई चढ़ाएं और उसमें 1 बड़ा चम्मच तेल डालकर गर्म करें। तेल के गर्म होते ही उसमें 1 छोटा चम्मच जीरा और 1/2 छोटा चम्मच हींग डालें। जीरा चटकने के बाद इसमें कुटा हुआ धनिया, दरदरी पिसी सौंफ, कद्दूकस अदरक और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि मसालों की महक न आने लगे। इसके बाद कढ़ाई में 1 बड़ा चम्मच बेसन डालें और धीमी आंच पर लगभग 1 मिनट तक भूनें। बेसन डालने से न सिर्फ स्वाद बढ़ता है, बल्कि यह मटर की अतिरिक्त नमी को भी पूरी तरह सोख लेता है। अब इस मसाले में दरदरी पिसी हुई मटर डालें। साथ में 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर, गरम मसाला, सादा नमक और काला नमक मिला दें। पूरी सामग्री को लगातार कलछी से चलाते हुए धीमी आंच पर 4 से 5 मिनट तक भूनें। जब मिश्रण से अतिरिक्त पानी पूरी तरह सूख जाए और मसाला सूखकर कढ़ाई छोड़ने लगे, तब गैस बंद कर दें। इस भरावन को पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद हाथों से दबाते हुए इसके छोटे-छोटे आकार के गोल नींबू जैसे गोले बना लें, ताकि कचौड़ी भरते समय आसानी रहे। कचौड़ी भरने और तलने की आसान तकनीक बीस मिनट बाद आटे को दोबारा हल्का मसल लें और उसमें से मध्यम आकार की लोइयां तोड़ लें। एक लोई को हाथ में लेकर अंगूठे और उंगलियों की मदद से किनारों को पतला करते हुए कटोरी जैसा आकार दें। ध्यान रखें कि बीच का हिस्सा थोड़ा मोटा और किनारे पतले रहें। अब इस कटोरी के बीच में पहले से तैयार मटर की भरावन का एक गोला रखें। आटे के किनारों को ऊपर की तरफ उठाते हुए चारों तरफ से समेटें और ऊपर लाकर अच्छी तरह सील कर दें, ताकि तलते समय मसाला बाहर न निकले। अब इसे हथेलियों के बीच रखकर हल्के हाथ से दबाएं और चपटा आकार दें। कढ़ाई में तलने के लिए तेल डालें और उसे धीमी से मध्यम आंच पर हल्का गर्म करें। तेल बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए, वरना कचौड़ियां बाहर से तुरंत लाल हो जाएंगी और अंदर से कच्ची रह जाएंगी। तैयार कचौड़ियों को धीरे से तेल में छोड़ें। उन्हें तुरंत कलछी से न छुएं; जब वे हल्की होकर खुद तेल की सतह पर तैरने लगें, तब आंच को मध्यम करें और उन्हें पलटें। धीमी आंच पर उलट-पलट करते हुए दोनों तरफ से सुनहरा और पूरी तरह खस्ता होने तक तल लें। तलने के बाद कचौड़ियों को निकालकर टिशू पेपर पर रखें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए। इसी प्रक्रिया से बाकी बची कचौड़ियां भी तैयार करें और गरमागरम रसेदार आलू की सब्जी या चटनी के साथ इनका आनंद लें। इसका आप पर असर यह पारंपरिक व्यंजन घर के बजट में बाहर जैसी गुणवत्ता का नाश्ता बनाने और दैनिक खानपान में विविधता लाने में मदद करता है। • घरेलू बचत: बाजार से महंगे स्नैक्स खरीदने के बजाय घर में मौजूद आटे, मसालों और मटर से बेहद कम लागत में स्वच्छ नाश्ता तैयार किया जा सकता है। यह परिवार के सभी सदस्यों के लिए एक किफायती और पौष्टिक विकल्प साबित होता है। • स्वाद और विविधता: रोजमर्रा के उबले या सादे नाश्ते से बोर हो चुके परिवारों के लिए यह वीकेंड पर मेन्यू बदलने का बेहतरीन साधन है। इसे बच्चों के टिफिन, लंच या शाम की चाय के साथ आसानी से परोसा जा सकता है। • खानपान की स्वच्छता: बाहर के इस्तेमाल किए हुए तेल के बजाय घर के शुद्ध तेल या घी में तलने से सेहत को नुकसान नहीं पहुंचता। घर पर तैयार होने के कारण इसमें कृत्रिम रंगों या प्रिजर्वेटिव्स का कोई डर नहीं रहता। • समय की बचत: मटर की भरावन को पहले से तैयार करके फ्रिज में रखा जा सकता है, जिससे मेहमानों के आने पर तुरंत गरम कचौड़ियां बनाई जा सकें। इससे ऐन वक्त पर रसोई में होने वाली हड़बड़ाहट से बचा जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ कचौड़ी को सही मायने में खस्ता और स्वादिष्ट बनाने के लिए पारंपरिक कुकिंग तकनीकों और सामग्री के वैज्ञानिक संतुलन की आवश्यकता होती है। यह विधि कुछ खास नियमों के सही पालन पर निर्भर करती है। • मोयन और ठंडे पानी का प्रभाव: आटे में पर्याप्त घी या तेल को हथेलियों से मलने से ग्लूटेन का खिंचाव नियंत्रित होता है, जिससे परतदार बनावट मिलती है। ठंडे पानी के इस्तेमाल से वसा पिघलती नहीं है और आटा तलते समय तेल कम सोखता है। • बेसन द्वारा नमी का नियंत्रण: हरी मटर में प्राकृतिक पानी की मात्रा अधिक होती है, जो तलते समय भाप बनकर कचौड़ी को नरम कर सकती है। भरावन में भुना हुआ बेसन मिलाने से सारी अतिरिक्त नमी सोख ली जाती है और कचौड़ी लंबे समय तक खस्ता बनी रहती है। • धीमी आंच पर तलने की प्रक्रिया: कचौड़ियों को तेज तेल में डालने पर केवल बाहरी परत जलती है और अंदरूनी आटा कच्चा रह जाता है। हल्के गर्म तेल में धीमी आंच पर तलने से अंदर तक परतें पकती हैं और कचौड़ी फूलकर खस्ता बनती है। सवाल-जवाब 1. कचौड़ी को लंबे समय तक खस्ता कैसे बनाए रखें? आटे में मोयन की सही मात्रा रखें और कचौड़ियों को हमेशा धीमी से मध्यम आंच पर धीरे-धीरे तलें। तेज आंच पर तली कचौड़ी जल्दी नरम पड़ जाती है। 2. क्या हरी मटर की भरावन में पानी मिलाना चाहिए? नहीं, मटर को पीसते समय या भूनते समय पानी बिल्कुल न डालें। भरावन जितनी सूखी रहेगी, कचौड़ी उतनी ही कुरकुरी बनेगी। 3. कचौड़ी का आटा सख्त होना चाहिए या नरम? कचौड़ी का आटा पूरी जितना सख्त नहीं, बल्कि पराठे की तरह मुलायम और लचीला होना चाहिए ताकि भरावन आसानी से बंद हो सके। 4. मटर की कचौड़ी के साथ क्या परोसना सबसे अच्छा रहता है? इसे चटपटी रसेदार आलू-टमाटर की सब्जी, पुदीने-धनिया की हरी चटनी, इमली की खट्टी-मीठी सोंठ या ताजे दही के साथ परोसें। https://trendkia.com/food/ghar-par-banayein-halwai-jaisi-khasta-hari-matar-ki-kachori-recipe-39236 TrendKia — Har trend, sabse pehle.