घर पर ऐसे बनाएं बिल्कुल शुद्ध और ताजा मावा, बाजार की मिठाइयां भी पड़ जाएंगी फीकी बाजार की मिलावटी मिठाइयों से दूर रहना चाहते हैं तो अब घर पर ही बेहद आसान तरीके से शुद्ध मावा तैयार किया जा सकता है। चित्रकूट के विशेषज्ञ ओम प्रकाश ने इसके सही और आसान तरीके की पूरी जानकारी साझा की है। बाजार में मिलने वाली मिठाइयों का स्वाद लेते-लेते आज के समय में लोग कई बार बोर हो जाते हैं। यही वजह है कि अब बहुत से लोग अपने घर पर ही दूध से मावा या खोवा तैयार करके अपनी पसंद की पसंदीदा मिठाइयां बनाना पसंद करने लगे हैं। यदि आप भी अपने घर पर पूरी तरह से शुद्ध और ताजा मावा तैयार करना चाहते हैं, तो इसे बनाना बहुत ज्यादा मुश्किल काम नहीं है। कुछ आसान और सरल तरीकों को अपनाकर आसानी से घर पर ही बेहतरीन दूध का मावा तैयार किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में आने वाला चित्रकूट जिला अपने विशेष व्यंजनों के साथ-साथ मावा के लिए भी काफी मशहूर है। यहां के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक रूप से दूध से मावा तैयार करने के काम से जुड़े हुए हैं। गांवों में घरों के भीतर तैयार किया जाने वाला यह शुद्ध मावा आसपास के स्थानीय बाजारों में बिक्री के लिए भेजा जाता है। इसके बाद यही मावा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के तमाम अलग-अलग जिलों तक पहुंचाया जाता है, जहां इससे तरह-तरह की लजीज मिठाइयां बनाकर बाजारों में बेची जाती हैं। कढ़ाई में दूध डालकर शुरू करें प्रक्रिया मावा बनाने की विधि के बारे में जानकारी देते हुए रेसिपी एक्सपर्ट ओम प्रकाश ने बताया कि घर पर खोवा तैयार करने की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले एक साफ और मोटी तली वाली लोहे या भारी कढ़ाई की जरूरत होती है। इसमें दूध डालकर सबसे पहले धीमी आंच पर गर्म करना शुरू करना चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दूध को लगातार या फिर थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल पर बराबर चलाते रहना बहुत जरूरी होता है, ताकि दूध कढ़ाई की तली में न चिपके और जलने से सुरक्षित बचा रहे। जैसे-जैसे गैस पर रखा दूध गर्म होता जाता है, वैसे-वैसे उसमें मौजूद पानी भाप बनकर लगातार उड़ता जाता है और दूध धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगता है। इस पूरी अवस्था के दौरान दूध को चम्मच या कलछी से लगातार चलाते रहना बेहद आवश्यक है। जब कढ़ाई का दूध काफी ज्यादा गाढ़ा हो जाता है और उसमें नमी की मात्रा बहुत कम बच जाती है, तब वह धीरे-धीरे ठोस मावे का रूप लेने लगता है। बनाने के दौरान किन बातों का रखें ध्यान उन्होंने आगे बताया कि मावा बनाते वक्त सबसे ज्यादा सावधानी और ध्यान दूध को चलाने की प्रक्रिया पर ही देना चाहिए। अगर दूध को काफी लंबे समय तक बिना चलाए यूं ही छोड़ दिया जाए, तो वह कढ़ाई की तली में जल सकता है जिससे मावे का प्राकृतिक स्वाद और उसकी गुणवत्ता दोनों खराब हो सकती हैं। इसलिए हमेशा धीमी आंच पर ही दूध को लगातार चलाते हुए पकाना चाहिए। जैसे ही मिश्रण अच्छी तरह गाढ़ा हो जाए, गैस की फ्लेम बंद कर देनी चाहिए। बर्तन के ठंडे होते ही यह पूरी तरह मावा बन जाता है। सामान्य तौर पर देखा जाए तो 1 लीटर दूध से लगभग 200 ग्राम तक मावा आसानी से तैयार किया जा सकता है। हालांकि, मावे की कुल मात्रा पूरी तरह से इस्तेमाल किए जा रहे दूध की गुणवत्ता और उसके गाढ़ेपन पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, गाय के दूध की तुलना में भैंस के दूध में फैट या वसा की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिसके कारण उससे गाय के दूध के मुकाबले थोड़ा ज्यादा मावा निकलकर तैयार होता है। इसका आप पर असर घर पर शुद्ध मावा बनाने से बाजार में मिलने वाली मिलावटी चीजों से बचाव होता है और सेहत बेहतर रहती है। • भारत में: आम लोग त्योहारी सीजन या रोजमर्रा में घर का बना शुद्ध मावा इस्तेमाल कर सेहतमंद और सुरक्षित मिठाइयों का आनंद ले सकते हैं। • चित्रकूट में: स्थानीय ग्रामीण दूध उत्पादकों और मावा कारोबारियों को इस पारंपरिक व्यवसाय से बेहतर आजीविका और सही बाजार भाव का लाभ मिलता है। ऐसा क्यों हुआ बाजार में मिलने वाले मावे में मिलावट की आशंका और शुद्धता की कमी के कारण लोग अब पारंपरिक तरीकों से घर पर ही इसे तैयार करने लगे हैं। • पारंपरिक परंपरा: बुंदेलखंड के चित्रकूट क्षेत्र में पीढ़ियों से ग्रामीण दूध से खोवा तैयार करने के काम में जुटे हैं। • गुणवत्ता नियंत्रण: घर पर कम आंच पर लगातार दूध पकाने से उसकी शुद्धता और स्वाद पूरी तरह बरकरार रहता है। • दूध का प्रकार: भैंस के दूध में फैट की मात्रा अधिक होने के कारण कम दूध में भी ज्यादा मात्रा में मावा निकल आता है। सवाल-जवाब 1. घर पर 1 लीटर दूध से कितना मावा बन सकता है? सामान्य तौर पर 1 लीटर दूध से करीब 200 ग्राम तक मावा तैयार किया जा सकता है। 2. गाय और भैंस के दूध में मावा की मात्रा पर क्या असर पड़ता है? भैंस के दूध में फैट की मात्रा अधिक होने के कारण उससे गाय के दूध की तुलना में अधिक मावा निकलता है। 3. दूध को पकाते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए? दूध को धीमी आंच पर लगातार चलाते रहना चाहिए ताकि वह कढ़ाई की तली में न चिपके। 4. चित्रकूट का कौन सा क्षेत्र मावा के लिए प्रसिद्ध है? बुंदेलखंड का चित्रकूट जिला अपने ग्रामीण व्यंजनों और मावा उत्पादन के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। https://trendkia.com/food/ghara-para-aise-banaen-bilkula-shuddha-aura-taja-mava-bajara-ki-mithaiyan-bhi-para-jaengi-phiki-39591 TrendKia — Har trend, sabse pehle.