घर पर बनाएं चटपटी और कुरकुरी सूरन की सब्जी, खुजली से बचने के लिए अपनाएं यह आसान तरीका उत्तर भारत में सूरन यानी जिमीकंद की सूखी और मसालेदार सब्जी खूब पसंद की जाती है। हाथ में खुजली से बचने और इसका बेहतरीन स्वाद पाने के लिए जानें उबालने से लेकर पकाने का पूरा तरीका। जिमीकंद को सूरन या ओल के नाम से भी पहचाना जाता है, जो पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ खाने में बेहद स्वादिष्ट कंद है। उत्तर भारत के पारंपरिक खानपान में इसकी मसालेदार सूखी सब्जी बेहद चाव से खाई जाती है। सही विधि से पकाने पर सूरन के टुकड़े बाहर की परत से हल्के कुरकुरे बनते हैं, जबकि अंदर से पूरी तरह नरम और मुलायम रहते हैं। इस जायकेदार सब्जी को दोपहर या रात के भोजन में रोटी, पराठे अथवा दाल-चावल के साथ आसानी से परोसा जा सकता है। काटने की तैयारी और खुजली से बचाव इस व्यंजन को तैयार करने की शुरुआत सूरन की सही कटाई से होती है। सबसे पहले कंद का छिलका उतार लें और फिर गूदे को मध्यम आकार के चौकोर टुकड़ों में काट लें। कच्चा सूरन काटते समय अक्सर त्वचा के संपर्क में आने से हाथों में तेज खुजली की समस्या हो जाती है। इस परेशानी से बचने के लिए चाकू चलाने से पहले हथेलियों पर अच्छी तरह थोड़ा तेल चुपड़ लें अथवा हाथों में दस्ताने पहन लें। उबालने का जरूरी चरण काटने के बाद सूरन के टुकड़ों को पकाने से पहले उबालना बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। एक गहरे बर्तन में पर्याप्त पानी लेकर उसे अच्छी तरह गर्म करें। पानी में कटे हुए टुकड़े डालें और लगभग 8 से 10 मिनट तक मध्यम आंच पर उबलने दें। इस प्रक्रिया से सूरन के भीतर मौजूद वह प्राकृतिक तत्व काफी हद तक समाप्त हो जाता है जिससे गले या मुंह में खुजली की आशंका रहती है। इसके अलावा उबालने से सब्जी का स्वाद और बनावट भी बहुत अच्छी हो जाती है। समय पूरा होने पर सारा पानी छानकर बाहर निकाल लें और उबले हुए टुकड़ों को एक किनारे रख दें। सरसों के तेल में भूनने की विधि सब्जी को पारंपरिक स्वाद देने के लिए एक कढ़ाही में सरसों का तेल गर्म करें। जब तेल से हल्का धुआं उठने लगे और कच्चापन निकल जाए, तब इसमें पहले से उबाले गए सूरन के टुकड़े डालें। टुकड़ों को मध्यम आंच पर तब तक उलट-पुलट कर तलें जब तक कि उनकी बाहरी सतह हल्की सुनहरी न दिखने लगे। इसके बाद सभी भुने हुए टुकड़ों को तेल निथारते हुए अलग प्लेट में निकाल लें। मसाला भूनना और ग्रेवी का विकल्प कढ़ाही में बचे हुए तेल में जीरा और हींग का तड़का लगाएं। जैसे ही जीरा चटकने लगे, अदरक का पेस्ट डालकर कुछ सेकंड तक चलाएं। इसके तुरंत बाद कटे हुए टमाटर शामिल करें और उनके गलने तक पकाते रहें। अब हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर मिश्रण को धीमी आंच पर भूनें। जब भुने हुए मसाले के किनारों से तेल अलग छूटता नजर आए, तब इसमें तले हुए सूरन के टुकड़े मिलाएं ताकि मसाला टुकड़ों पर अच्छी तरह लिपट जाए। यदि आप पूरी तरह सूखी सब्जी के बजाय हल्की तरी या लटपटी ग्रेवी चाहते हैं, तो इस समय 1/2 कप पानी डाल सकते हैं। इसके बाद कढ़ाही पर ढक्कन लगाएं और 8 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें ताकि सारे मसालों का अर्क सूरन के रेशे-रेशे में समा जाए। अंतिम तड़का और परोसने का ढंग सब्जी के पूरी तरह पक जाने के बाद उसमें गरम मसाला और अमचूर पाउडर डालें और हल्के हाथों से मिलाएं। अमचूर का खट्टापन इसके स्वाद को संतुलित करता है। अंत में 2 बड़े चम्मच बारीक कटा हरा धनिया ऊपर से बुरकें और चूल्हा बंद कर दें। इस गर्मागर्म सब्जी को गेहूं की सादी रोटी, कुरकुरे पराठे, बाजरे की रोटी या दाल-चावल की थाली के साथ परोसें। भोजन की थाली में हरी चटनी और कटे हुए प्याज का सलाद शामिल करने से इस देसी व्यंजन का स्वाद दोगुना हो जाता है। इसका आप पर असर इस पारंपरिक रेसिपी को घर पर सही तरीके से बनाकर आप बिना किसी परेशानी के पोषक तत्वों से भरपूर कंद का आनंद ले सकते हैं। • रसोई में समय की बचत: काटने से पहले तेल लगाने और 8 से 10 मिनट उबालने की विधि से हाथों और गले में खुजली की समस्या बिल्कुल नहीं होती। इससे पहली बार कंद पकाने वाले लोग भी बिना किसी झिझक के आसानी से स्वादिष्ट सब्जी बना सकते हैं। • दैनिक खानपान में विविधता: यह सब्जी गेहूं की रोटी, बाजरे की रोटी या दाल-चावल के साथ आसानी से खाई जा सकती है। इससे घर के नियमित शाकाहारी मेनू में एक नया और पौष्टिक विकल्प जुड़ जाता है। • किफायती पोषण: मौसमी कंद होने के कारण जिमीकंद बाजार में आसानी से मिल जाता है और घर के बुनियादी मसालों से तैयार होता है। कम बजट में परिवार को एक स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन खिलाने के लिए यह बेहतरीन उपाय है। • स्वाद और सेहत का संतुलन: अमचूर, हींग और अदरक के संतुलित प्रयोग से यह भारी कंद आसानी से पच जाता है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम बनावट बच्चों और बुजुर्गों दोनों को पसंद आती है। ऐसा क्यों हुआ सूरन को कच्चा पकाने पर गले और हाथों में खुजली होने का वैज्ञानिक कारण कंद में मौजूद प्राकृतिक तत्व होते हैं, जिसे विशेष विधियों से ही दूर किया जा सकता है। • प्राकृतिक रसायनों की मौजूदगी: कच्चे जिमीकंद में कैल्शियम ऑक्सालेट के सूक्ष्म क्रिस्टल होते हैं जो त्वचा या श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क में आने पर सुई जैसी चुभन और खुजली पैदा करते हैं। इसी कारण काटते समय हाथ पर तेल लगाना या दस्ताने पहनना आवश्यक माना जाता है। • उबालने से असर कम होना: गर्म पानी में 8 से 10 मिनट तक उबालने पर ये जलन पैदा करने वाले तत्व काफी हद तक टूट जाते हैं या पानी में निकल जाते हैं। इसके बाद पानी फेंक देने से कंद खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित और सुपाच्य बन जाता है। • खटास की भूमिका: अमचूर पाउडर जैसे अम्लीय तत्व ऑक्सालेट के प्रभाव को पूरी तरह बेअसर करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक पाक शैली में सूरन की सब्जी में हमेशा खटाई का इस्तेमाल किया जाता है। सवाल-जवाब 1. सूरन काटते समय हाथों में होने वाली खुजली से कैसे बचें? सूरन काटने से पहले अपनी हथेलियों पर अच्छी तरह थोड़ा तेल लगा लें या हाथों में दस्ताने पहनें। 2. जिमीकंद को पकाने से पहले कितनी देर उबालना चाहिए? कटे हुए टुकड़ों को गर्म पानी में 8 से 10 मिनट तक उबालना चाहिए ताकि इसकी खुजली पैदा करने वाली प्रकृति कम हो जाए। 3. सब्जी को भूनने के लिए किस तेल का इस्तेमाल किया जाता है? इस रेसिपी में पारंपरिक स्वाद और बढ़िया बनावट के लिए सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है। 4. क्या इस सब्जी में ग्रेवी बनाई जा सकती है? हां, यदि आप थोड़ी ग्रेवी चाहते हैं तो मसाले भूनने के बाद 1/2 कप पानी डालकर 8 से 10 मिनट धीमी आंच पर पका सकते हैं। 5. सूरन की सब्जी को किस तरह के भोजन के साथ परोसा जा सकता है? इसे गेहूं की रोटी, बाजरे की रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ हरी चटनी और प्याज के सलाद के संग परोसा जा सकता है। https://trendkia.com/food/ghara-para-banaen-chatapati-aura-kurakuri-suran-ki-sabji-khujali-se-bachane-ke-lie-apanaen-yaha-asana-tarika-37946 TrendKia — Har trend, sabse pehle.