घर पर बनाएं ढाबे जैसी मलाईदार काली मसूर दाल, देसी घी और मक्खन के तड़के से मिलेगा लाजवाब स्वाद काली मसूर और चना दाल के अनोखे मेल के साथ तैयार करें ढाबा स्टाइल क्रीमी दाल, जिसमें दोहरा तड़का और मक्खन भर देगा खास खुशबू। ढाबों पर मिलने वाली गाढ़ी, सुगंधित और क्रीमी दाल का स्वाद हर किसी की जुबान पर चढ़ जाता है। कई बार घर पर दाल बनाने पर वह खास टेक्सचर और रंगत नहीं आ पाती, जो सड़क किनारे बने ढाबों के खाने में मिलती है। अगर आप अपने सामान्य भोजन में वही पारंपरिक स्वाद जोड़ना चाहते हैं, तो काली मसूर और चना दाल के संयोजन से बनने वाली यह खास रेसिपी एक बेहतरीन विकल्प साबित होगी। देसी घी, मक्खन और दोहरे तड़के का मेल इस व्यंजन को बेहद लजीज बना देता है। दाल को भिगोने और उबालने का सही तरीका इस व्यंजन को बनाने की शुरुआत सही तैयारी से होती है। सबसे पहले काली मसूर दाल और चना दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद दालों को लगभग 3 से 4 घंटे के लिए पानी में भिगोकर छोड़ दें। दाल को भिगोने से न केवल पकने का समय घट जाता है, बल्कि दाल के दानों की बनावट भी बेहतर और नरम हो जाती है। जब दाल अच्छी तरह भीग जाए, तो उसे प्रेशर कुकर में डालें। कुकर में दाल के साथ हल्दी, स्वादानुसार थोड़ा नमक और लगभग 3 कप पानी मिलाएं। ढक्कन लगाकर मध्यम आंच पर गैस जलाएं और 5 से 6 सीटी आने तक इसे पकने दें। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि दाल पूरी तरह गलकर एकसार हो जाए ताकि बाद में ग्रेवी गाढ़ी बन सके। कड़ाही में तैयार करें मुख्य ग्रेवी मसाला एक कड़ाही लेकर उसमें देसी घी और 1 बड़ा चम्मच मक्खन गर्म करें। जब दोनों अच्छी तरह पिघल जाएं, तो जीरा डालें और उसे चटकने दें। इसके तुरंत बाद बारीक कटा हुआ प्याज कड़ाही में डालें और तब तक भूनें जब तक वह सुनहरा न हो जाए। फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट और कटी हुई हरी मिर्च डालकर 1 से 2 मिनट तक धीमी आंच पर चलाएं ताकि कच्चापन निकल जाए। अब इस मिश्रण में 2 बारीक कटे हुए या प्यूरी किए हुए टमाटर डालें। साथ ही लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और जरूरत के हिसाब से थोड़ा और नमक शामिल करें। पूरे मसाले को तब तक लगातार भूनते रहें जब तक कि किनारों से घी अलग होकर तैरने न लगे। जब मसाला पूरी तरह पककर खुशबू देने लगे, तब उबली हुई दाल को कड़ाही में पलट दें। धीमी आंच पर पकाना और अंतिम तड़का लगाना दाल और मसाले को अच्छी तरह मिलाने के बाद, आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी डालकर उसकी थिकनेस संतुलित करें। इसके बाद दाल को 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर उबलने दें। यही धीमी आंच वाली प्रक्रिया दाल को ढाबा जैसा गाढ़ापन और गहरा स्वाद देती है। इसके बाद कड़ाही में बचा हुआ मक्खन, ताजी क्रीम और थोड़ा गरम मसाला डालें। इसे 2 से 3 मिनट और पकाकर गैस बंद कर दें। स्वाद को अगले स्तर पर ले जाने के लिए एक छोटा पैन लें और उसमें 1 चम्मच घी गर्म करें। इसमें थोड़ा जीरा, बारीक कटा लहसुन और कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इस गरमागरम तड़के को तैयार दाल के ऊपर फैला दें। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालकर सजाएं। इस मलाईदार दाल को गरमागरम तंदूरी रोटी, बटर नान, मिस्सी रोटी या जीरा राइस के साथ परोसें। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ी कसूरी मेथी भी मिलाई जा सकती है। इसका आप पर असर घर पर ढाबा शैली की दाल तैयार करने से साधारण भोजन को बिना होटल जाए खास और पौष्टिक बनाया जा सकता है। • स्वाद और विविधता: रोजमर्रा के भोजन में होटल जैसी क्रीमी दाल का स्वाद बिना बाहर जाए आसानी से मिल जाता है। यह परिवार और मेहमानों के लिए एक शानदार मुख्य व्यंजन बन सकता है। • किफायती विकल्प: घर में मौजूद बुनियादी मसालों और दालों से ही ढाबा स्टाइल स्वाद तैयार हो जाता है। इससे बाहर के खाने पर होने वाला खर्च बचता है। • पोषण और गुणवत्ता: दालों को पर्याप्त समय तक भिगोने और घर पर शुद्ध घी में पकाने से पाचन बेहतर रहता है। इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री पूरी तरह स्वच्छ और सुरक्षित होती है। • सर्विंग के विकल्प: इस गाढ़ी दाल को रोटी, पराठा, बटर नान या सादे जीरा राइस के साथ आसानी से परोसा जा सकता है। इससे किसी भी समय का भोजन तुरंत संपूर्ण बन जाता है। ऐसा क्यों हुआ ढाबा स्टाइल दाल की खासियत उसका खास गाढ़ापन, सोंधापन और दोहरा तड़का होता है, जो सही विधि अपनाने पर ही मिलता है। • दालों का मिश्रण: काली मसूर के साथ चना दाल मिलाने से ग्रेवी को स्वाभाविक रूप से गाढ़ा टेक्सचर मिलता है। चना दाल पकने के बाद दाल को अलग-थलग पानी जैसा होने से रोकती है। • धीमी आंच पर पकाना: मसालों के साथ दाल को 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकाने से उसका स्वाद पूरी तरह समा जाता है। तेज आंच की बजाय धीमी आंच से ही असली मलाईदार टेक्सचर तैयार होता है। • दोहरा तड़का: पहले तड़के में प्याज और टमाटर की भुनाई होती है, जबकि अंत में लहसुन और घी का तड़का ऊपर से डाला जाता है। यह तकनीक दाल में लंबे समय तक ताजा सुगंध बनाए रखती है। सवाल-जवाब 1. काली मसूर और चना दाल को पकाने से पहले भिगोना क्यों जरूरी है? दालों को 3 से 4 घंटे भिगोने से वे जल्दी गलती हैं और उनकी बनावट भी बेहद नरम और स्वादिष्ट बनती है। 2. दाल को कुकर में कितनी सीटी आने तक पकाना चाहिए? कुकर में 3 कप पानी, हल्दी और नमक डालकर मध्यम आंच पर 5 से 6 सीटी आने तक पकाना चाहिए ताकि दाल पूरी तरह गल जाए। 3. दाल को ढाबे जैसा गाढ़ापन कैसे मिलता है? मसाला मिलाने के बाद दाल को धीमी आंच पर 10 से 15 मिनट तक उबालने और अंत में मक्खन व क्रीम डालने से ढाबा स्टाइल गाढ़ापन मिलता है। 4. इस दाल में ऊपर से दूसरा तड़का किस चीज का लगाया जाता है? एक पैन में 1 चम्मच घी गर्म करके जीरा, बारीक कटा लहसुन और लाल मिर्च पाउडर डालकर ऊपर से दूसरा तड़का लगाया जाता है। 5. काली मसूर दाल को किन चीजों के साथ परोसना सबसे अच्छा रहता है? यह गाढ़ी दाल तंदूरी रोटी, बटर नान, मिस्सी रोटी या जीरा राइस के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है। https://trendkia.com/food/ghara-para-banaen-dhabe-jaisi-malaidara-kali-masoor-dala-desi-ghee-aura-makkhana-ke-tarake-se-milega-lajavaba-svada-35223 TrendKia — Har trend, sabse pehle.