# ढाई रुपये से शुरू हुआ गाजियाबाद का यह सफर, आज इतने में बिक रहा शिकंजी का एक गिलास

> गाजियाबाद के नवयुग मार्केट में पिछले करीब 30 साल से शिकंजी और बंटे वाली बोतल बेच रहे विनोद कुमार की दुकान का सफर ढाई रुपये से शुरू होकर आज तीस रुपये प्रति गिलास तक पहुंच गया है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/ghaziabad-lemonade-stalls-three-decade-journey-from-two-rupees-to-thirty-27742 · **Language:** Hindi
**Tags:** गाजियाबाद, शिकंजी, स्ट्रीट फूड, नवयुग मार्केट, विनोद कुमार

गाजियाबाद के नवयुग मार्केट में भीषण गर्मी के मौसम में ठंडी और मसालेदार शिकंजी का एक गिलास मिल जाए, तो चिलचिलाती धूप से बड़ी राहत मिलती है। इसके साथ ही अगर बंटे वाली ठंडी बोतल का स्वाद भी मिल जाए, तो बचपन के दिनों की पुरानी यादें एक बार फिर ताजा हो जाती हैं। इसी नवयुग मार्केट इलाके में एक छोटी सी दुकान पिछले लगभग 30 साल से स्थानीय लोगों को लगातार शिकंजी और बंटे वाली ठंडी बोतल का बेहतरीन स्वाद परोस रही है। जैसे-जैसे वक्त बीता, इस पूरे शहर का भूगोल बदला, बाजारों का दायरा काफी बड़ा हुआ और खाने-पीने की सभी चीजों के दाम भी बढ़े, लेकिन इस पुरानी दुकान की शिकंजी का खास स्वाद आज भी ग्राहकों को अपनी तरफ खींच लाता है।

## तीन दशक पहले की शुरुआत और शुरुआती कीमतें
दुकान के संचालक विनोद कुमार बताते हैं कि उन्होंने आज से करीब 30 साल पहले इस शिकंजी के कारोबार की शुरुआत की थी। उस दौर में नवयुग मार्केट और उसके आसपास के इलाकों में वैसी भारी भीड़भाड़ और घनी बसावट नहीं हुआ करती थी जैसी आज दिखाई देती है। उस समय दुकान के ठीक पास में एक स्कूल हुआ करता था, जो आज भी उसी जगह पर मौजूद है और वहां के छात्रों के बीच यह दुकान काफी जानी-पहचानी है।

शुरुआती दिनों को याद करते हुए विनोद बताते हैं कि जब उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब शिकंजी का एक गिलास महज 2.50 रुपये में बेचा जाता था। इसके अलावा, लोकप्रिय बंटे वाली बोतल की कीमत उस वक्त सिर्फ 1 रुपये हुआ करती थी। जैसे-जैसे साल गुजरे और शहर का तेजी से विस्तार हुआ, देश में महंगाई भी बढ़ी और उसी के अनुपात में शिकंजी के दाम भी धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते गए। वर्तमान समय में स्थिति यह है कि उनकी इस दुकान पर शिकंजी का एक गिलास 30 रुपये में और बंटे वाली बोतल 10 रुपये में ग्राहकों को मिलती है।

## परिवार का सहारा और कारोबार का संघर्ष
विनोद कुमार के लिए यह छोटी सी दुकान केवल पैसे कमाने का माध्यम भर नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे परिवार की जिंदगी का सबसे बड़ा और मजबूत सहारा भी है। उनका साफ कहना है कि उन्होंने इसी दुकान की बदौलत अपनी मेहनत की कमाई से अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण किया है। उनके इस छोटे से परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे शामिल हैं, जिनकी स्कूल की पढ़ाई से लेकर घर-गृहस्ती के तमाम जरूरी खर्च इसी दुकान से होने वाली आमदनी के जरिए पूरे होते हैं। उनकी धर्मपत्नी भी इस काम में उनका पूरा सहयोग करती हैं और दुकान पर हाथ बंटाती हैं। लगातार तीन दशकों तक एक ही काम को पूरी ईमानदारी से करते हुए विनोद ने इस दुकान को केवल अपनी रोजी-रोटी का जरिया नहीं बनाया, बल्कि समाज में अपनी एक अलग पहचान भी कायम की है।

## गर्मी के दिनों में बढ़ती मांग और ग्राहकों का क्रेज
दुकानदार विनोद के अनुसार, गर्मियों के मौसम में शिकंजी की मांग हमेशा से ही काफी ज्यादा रही है और आज के समय में भी इसका वही पुराना क्रेज बरकरार है। ठंडी शिकंजी चिलचिलाती धूप और गर्मी से जूझ रहे लोगों को तुरंत राहत प्रदान करती है, इसलिए न केवल आसपास के स्थानीय लोग, बल्कि गाजियाबाद के दूर-दराज के इलाकों से भी लोग इस खास स्वाद का लुत्फ उठाने के लिए यहां खींचे चले आते हैं।

इस दुकान के बिल्कुल पास स्थित स्कूल के छात्र भी इस अनोखे स्वाद से अच्छी तरह वाकिफ हैं। स्कूल की छुट्टी के समय या दोपहर के वक्त बच्चे अक्सर यहां शिकंजी और बंटे वाली ठंडी बोतल पीने के लिए पहुंचते हैं। उनके लिए यह पेय पदार्थ केवल गर्मी भगाने का जरिया नहीं है, बल्कि उनके बचपन के अनुभवों और पुराने स्वाद से जुड़ा हुआ एक बहुत ही प्यारा अहसास है।

## बदलता वक्त और पुरानी यादों का सिलसिला
आज से तीन दशक पहले जिस दुकान पर शिकंजी का एक गिलास मात्र ढाई रुपये में मिल जाता था, आज उसी गिलास के लिए ग्राहकों को 30 रुपये चुकाने पड़ते हैं। ठीक इसी तरह, बंटे वाली बोतल की कीमत भी एक रुपये से बढ़कर अब सीधे 10 रुपये तक पहुंच चुकी है। भले ही शहर की शक्ल बदल चुकी है और बाजार का रूप भी आधुनिक हो गया है, लेकिन विनोद की इस पुरानी दुकान पर मिलने वाली शिकंजी और बंटे की मिठास में आज भी वही पुराना आकर्षण सुरक्षित है। यही मुख्य वजह है कि यहां आने वाले तमाम ग्राहकों के लिए यह दुकान महज एक सामान्य स्ट्रीट फूड का ठेका नहीं, बल्कि बीते हुए दिनों और सुनहरे बचपन की यादों को ताजा करने का एक खास ठिकाना बन चुकी है।

## इसका आप पर असर
यह खबर सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं और स्ट्रीट फूड प्रेमियों के बजट और खानपान के अनुभवों को प्रभावित करती है।

- **भारत में:** देश भर के पारंपरिक स्ट्रीट वेंडरों और छोटे दुकानदारों के सामने बढ़ती महंगाई के साथ अपने उत्पादों की कीमतें तय करने की चुनौती बनी रहती है। इससे ग्राहकों को भी बुनियादी खानपान की वस्तुओं के लिए समय के साथ अधिक पैसे चुकाने पड़ते हैं।
- **गाजियाबाद में:** स्थानीय निवासियों और नवयुग मार्केट आने वाले लोगों को अब ठंडी शिकंजी और बंटे के लिए क्रमशः 30 रुपये और 10 रुपये खर्च करने होंगे। यह बदलाव शहर के पुराने खानपान अड्डों पर बढ़ती लागत के असर को दर्शाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. गाजियाबाद में यह शिकंजी की दुकान कहाँ स्थित है?
यह दुकान गाजियाबाद के नवयुग मार्केट इलाके में स्थित है।

### 2. इस दुकान को कितने साल हो चुके हैं?
इस दुकान को संचालित होते हुए करीब 30 साल का समय हो चुका है।

### 3. शुरुआत में शिकंजी और बंटे की कीमत क्या थी?
शुरुआत में शिकंजी का एक गिलास 2.50 रुपये और बंटे वाली बोतल 1 रुपये की मिलती थी।

### 4. वर्तमान में शिकंजी और बंटे की कीमत कितनी है?
आज दुकान पर एक गिलास शिकंजी 30 रुपये और बंटे वाली बोतल 10 रुपये में मिलती है।

### 5. दुकान का संचालन कौन करता है?
इस दुकान का संचालन विनोद कुमार करते हैं और उनकी पत्नी भी इसमें हाथ बंटाती हैं।

## प्रेरणा और सबक
विनोद कुमार का यह सफर एक छोटे से व्यवसाय से लगातार तीन दशक तक परिवार चलाने की प्रेरणा देता है।

- **निरंतरता और मेहनत:** पिछले 30 साल से एक ही काम को पूरी निष्ठा के साथ करने से स्थिरता और आजीविका सुनिश्चित होती है।
- **पारिवारिक सहयोग:** परिवार के सदस्यों का कारोबार में हाथ बंटाना कठिन समय में एक-दूसरे का संबल बनता है।
- **गुणवत्ता और पहचान:** ग्राहक के साथ लंबे समय तक जुड़ाव बनाए रखने के लिए स्वाद और निरंतरता बनाए रखना जरूरी है।

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