ज्वार के आटे से गाजीपुर की गीतांजलि ने बनाई खास मिठाई, चीनी के बिना गुड़ से तैयार होती है रेसिपी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में श्री अन्न यानी मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी रेसिपी सामने आई है, जहां गीतांजलि राय ने ज्वार के आटे और गुड़ से स्वादिष्ट हलवा तैयार किया है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के शेरपुर गांव की एक स्थानीय निवासी ने पारंपरिक खानपान को नया रूप देते हुए ज्वार के आटे से एक विशेष और स्वास्थ्यवर्धक मिठाई तैयार की है। राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत सामने आई इस अनूठी पहल का उद्देश्य मोटे अनाजों को फिर से आम लोगों की रसोई और थाली तक पहुँचाना है, ताकि आधुनिक खानपान में कम होते पौष्टिक अनाजों को बढ़ावा मिल सके। कैसे तैयार होता है ज्वार का यह खास हलवा इस व्यंजन को बनाने की शुरुआत बाजार से लाए गए ज्वार के आटे को अच्छी तरह साफ करने से होती है। इसके बाद एक कढ़ाई में शुद्ध घी गर्म करके आटे को धीमी आँच पर भुना जाता है, साथ ही कुछ सूखे मेवे भी अलग से भूनकर तैयार किए जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान गुड़ को पानी में घोलकर एक साफ घोल तैयार किया जाता है। जब आटा भुनकर पूरी तरह गर्म हो जाता है, तब उसमें तैयार किया गया गुड़ का घोल, अतिरिक्त घी और भुने हुए मेवे मिला दिए जाते हैं। माप और सामग्री की सटीक मात्रा इस पौष्टिक रेसिपी में एक किलोग्राम ज्वार के आटे के साथ आधा किलोग्राम गुड़ का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा इसमें पचास ग्राम काजू और पचास ग्राम किशमिश मिलाई जाती है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे तैयार करने में परिष्कृत चीनी का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है, जिससे यह स्वास्थ्य के लिहाज से और भी अधिक बेहतर बन जाती है। पोषण मूल्य और स्वास्थ्य से जुड़े पहलू इस व्यंजन के पोषण संबंधी आँकड़ों के बारे में बात करते हुए वंदना यादव ने बताया कि इसमें लगभग तीन सौ अस्सी कैलोरी ऊर्जा, आठ ग्राम प्रोटीन, नौ ग्राम वसा और चार से पाँच ग्राम फाइबर मौजूद होता है। ज्वार में प्राकृतिक रूप से फाइबर और मैग्नीशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। फाइबर की भरपूर मात्रा होने के कारण इसे खाने के बाद पेट काफी लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। हालांकि, इस मिठाई में चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग किया जाता है, इसलिए मधुमेह से पीड़ित मरीजों को इसे अपनी दैनिक डाइट में शामिल करने से पहले किसी चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए। खानपान में मोटे अनाजों की वापसी की पहल इस पूरी रेसिपी के पीछे की सोच को साझा करते हुए गीतांजलि राय ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में लोगों की जीवनशैली और खानपान में मोटे अनाजों का उपयोग लगातार कम हुआ है। इसी चलन को बदलने और लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने यह अनोखा तरीका अपनाया है। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि मोटे अनाजों से स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर समाज के हर वर्ग तक उनके पोषण संबंधी लाभ पहुँचाए जाएँ। उनके अनुसार, इस व्यंजन को लोग काफी पसंद कर रहे हैं और इसे एक बार चखने के बाद वे इसकी दोबारा माँग भी कर रहे हैं। इसका आप पर असर इस पौष्टिक रेसिपी का सीधा असर आम लोगों के खानपान और स्वास्थ्य पर पड़ेगा, जो चीनी के विकल्प के रूप में गुड़ और मोटे अनाजों को अपनाना चाहते हैं। • भारत में: यह पहल देश भर में मोटे अनाजों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पारंपरिक खानपान को फिर से बढ़ावा देने का काम करती है। • गाजीपुर में: स्थानीय नागरिकों और ग्रामीण महिलाओं को पोषणयुक्त व्यंजनों के जरिए नए तरीके से खानपान सुधारने की प्रेरणा मिलती है। • खानपान में बदलाव: लोग अपने दैनिक आहार में परिष्कृत चीनी की जगह गुड़ और ज्वार जैसे पौष्टिक विकल्पों को शामिल कर सकते हैं। • मधुमेह रोगी: इस रेसिपी में गुड़ का उपयोग होने के कारण शुगर के मरीजों को सेवन से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। • ऊर्जा और फाइबर: इस मिठाई से शरीर को जरूरी फाइबर, प्रोटीन और पर्याप्त ऊर्जा मिलती है जो पेट को लंबे समय तक भरा रखती है। ऐसा क्यों हुआ खानपान की बदलती आदतों और पारंपरिक अनाजों के प्रति घटते रुझान के कारण इस तरह की अनूठी रेसिपी तैयार करने की आवश्यकता पड़ी। • मोटे अनाजों का प्रसार: आधुनिक खानपान शैली के कारण लोग श्री अन्न को भूलते जा रहे थे, जिसे वापस थाली तक पहुँचाना इस पहल का मुख्य कारण था। • पोषण माह की पहल: राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए यह कदम उठाया गया। • विशेष मार्गदर्शन: गृह विज्ञान की प्रोफेसर से मिले सुझाव के बाद गीतांजलि ने इस रेसिपी को सीखने और लोगों के सामने लाने का निर्णय लिया। सवाल-जवाब 1. ज्वार का यह हलवा किसने तैयार किया है? इसे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के शेरपुर गाँव की रहने वाली गीतांजलि राय ने तैयार किया है। 2. इस रेसिपी को बनाने का विचार कहाँ से आया? गीतांजलि को यह रेसिपी बनाने का सुझाव गृह विज्ञान की प्रोफेसर नेहा ने दिया था। 3. इस व्यंजन में चीनी की जगह क्या इस्तेमाल किया जाता है? इस रेसिपी में चीनी के स्थान पर गुड़ के घोल का उपयोग किया जाता है। 4. एक किलो आटे में कितना गुड़ और मेवे डाले जाते हैं? इसमें एक किलोग्राम ज्वार के आटे के साथ आधा किलोग्राम गुड़ और पचास-पचास ग्राम काजू व किशमिश मिलाए जाते हैं। 5. इस व्यंजन में पोषण की मात्रा कितनी होती है? इसमें लगभग 380 कैलोरी ऊर्जा, 8 ग्राम प्रोटीन, 9 ग्राम वसा और 4 से 5 ग्राम फाइबर पाया जाता है। 6. क्या मधुमेह के मरीज इसे खा सकते हैं? चूंकि इसमें गुड़ का इस्तेमाल होता है, इसलिए मधुमेह के मरीजों को इसे खाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। प्रेरणा और सबक गीतांजलि राय की यह पहल उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो पारंपरिक और पौष्टिक खानपान को बढ़ावा देना चाहते हैं। • पारंपरिक अनाजों का उपयोग: भूल चुके मोटे अनाजों को आधुनिक और स्वादिष्ट तरीकों से दोबारा दैनिक भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। • चीनी का विकल्प: मिठाई तैयार करते समय परिष्कृत चीनी के स्थान पर गुड़ जैसे प्राकृतिक और सेहतमंद विकल्पों को चुना जा सकता है। • समुदाय में जागरूकता: स्थानीय स्तर पर छोटे प्रयासों से भी समाज के बीच स्वास्थ्य और पोषण के प्रति बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। https://trendkia.com/food/ghazipur-ki-geetanjali-ne-banayi-jowar-ke-aate-se-mithai-49951 TrendKia — Har trend, sabse pehle.