{
  "type": "article",
  "title": "गोरखपुर की मुरब्बा गली में 70 बरस से अचार बेच रहा है प्राणनाथ का परिवार, बीपी-शुगर मरीज भी लेते हैं सलाह",
  "summary": "गोरखपुर के घंटाघर इलाके की मुरब्बा गली में प्राणनाथ की करीब 70 साल पुरानी दुकान आज भी अपने पारंपरिक अचार-मुरब्बों के लिए मशहूर है, जहां बीपी और शुगर के मरीज भी सलाह लेकर खरीदारी करते हैं।",
  "content": "गोरखपुर के घंटाघर इलाके की मुरब्बा गली में घुसते ही खट्टे-मीठे मसालों की खुशबू रास्ता खुद बता देती है। यहीं एक कोने में प्राणनाथ की दुकान सजी है, जो पिछले करीब सात दशकों से शहर के लोगों की जुबान पर चढ़े स्वाद को संभाले हुए है। यह सिर्फ एक अचार-मुरब्बे की दुकान नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों की मेहनत और भरोसे की कहानी है।\n\nघंटाघर की मुरब्बा गली में 70 साल का सफर\nइस दुकान की नींव प्राणनाथ के दादा ने रखी थी, तब गोरखपुर की गलियां आज जितनी भीड़भाड़ वाली नहीं थीं। समय के साथ कारोबार बदलता गया, लेकिन नुस्खे और तरीके वही पुराने रहे। आज इसी विरासत को प्राणनाथ आगे बढ़ा रहे हैं और दुकान में दर्जनों किस्म के अचार, मुरब्बे और सिरके सजे मिलते हैं, जिनकी हर वैरायटी का अपना अलग जायका है।\n\nग्राहकों को कभी-कभी \"डॉक्टर\" कहा जाने वाला दुकानदार\nइस दुकान की एक अलग पहचान यह भी है कि यहां आने वाला हर ग्राहक सिर्फ स्वाद नहीं, अपनी सेहत का हिसाब भी साथ लेकर आता है। बीपी और शुगर से जूझ रहे कई लोग अचार-मुरब्बा उठाने से पहले प्राणनाथ से पूछताछ करते हैं कि उनके लिए कौन-सा विकल्प ठीक रहेगा। इसी वजह से मोहल्ले में कुछ ग्राहक उन्हें मजाक-मजाक में डॉक्टर तक पुकार बैठते हैं, क्योंकि वह हर किसी को उसकी जरूरत के मुताबिक सलाह देना नहीं भूलते।\n\nफोन पर ऑर्डर, दूसरे शहरों से भी मांग\nप्राणनाथ बताते हैं कि शुगर और हाई ब्लड प्रेशर वाले ग्राहकों के फोन अक्सर आते रहते हैं, जिसमें वे पूछते हैं कि उनके लिए कौन-सा अचार या मुरब्बा मुफीद रहेगा। लोग ऐसी चीजें चाहते हैं जो जायकेदार भी हों और उनके रोजमर्रा के खानपान में आसानी से घुल-मिल जाएं। हालांकि प्राणनाथ हमेशा साफ कर देते हैं कि अचार-मुरब्बे को किसी बीमारी का इलाज मानना ठीक नहीं, इन्हें बस संतुलित डाइट के एक हिस्से के तौर पर ही अपनाना चाहिए। गोरखपुर के बाहर के शहरों से भी लोग इस दुकान का नाम सुनकर फोन पर ऑर्डर बुक कराते हैं और अपनी पसंद के मुताबिक अचार-मुरब्बा मंगवाते हैं। कुछ ग्राहक तो पहले से ही यह भी बता देते हैं कि उन्हें कम तेल या हल्के मसाले वाला विकल्प चाहिए, ताकि उनकी सेहत से जुड़ी जरूरतें भी पूरी हो सकें।\n\nलहसुन, करेला और लौकी के अचार की सबसे ज्यादा डिमांड\nफिलहाल दुकान पर सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले नाम हैं लहसुन, करेला और लौकी के अचार-मुरब्बे। तीनों को बनाने का तरीका पूरी तरह पारंपरिक है। लहसुन का अचार तैयार करने से पहले उसे भाप में मुलायम किया जाता है, उसके बाद उसमें पाचन दुरुस्त रखने वाले मसालों का खास मिश्रण मिलाया जाता है। करेला और लौकी को भी अपनी अलग विधि और मसालों के साथ पकाया जाता है, जिससे इनका स्वाद बाजार में मिलने वाले आम अचारों से जुदा बन जाता है।\n\nस्वाद के साथ गुणवत्ता ही पहचान\nप्राणनाथ का कहना है कि अचार-मुरब्बा तैयार करते वक्त वह जायके से समझौता किए बिना गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखते हैं। शायद यही वजह है कि कई ग्राहक पूरे साल भर के लिए एक साथ अचार-मुरब्बा बनवाकर ले जाते हैं। घंटाघर की यह करीब 70 साल पुरानी दुकान अब गोरखपुर की खानपान संस्कृति का एक जीता-जागता हिस्सा बन चुकी है। पुराना जायका, दादा से चली आ रही विधि और ग्राहकों का बरसों पुराना भरोसा, इन्हीं तीन चीजों ने इस दुकान को शहर में एक खास मुकाम दिला दिया है।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे तौर पर घंटाघर की मुरब्बा गली आने वाले या स्वाद के साथ सेहत का ध्यान रखने वाले लोगों के काम की है।\n\n• भारत में: यह कहानी दिखाती है कि पारंपरिक तरीके से बना खाना और परिवार से चली आ रही रेसिपी आज भी सेहत का ध्यान रखने वाले ग्राहकों का भरोसा जीत सकती है।\n• गोरखपुर में: घंटाघर के आसपास रहने वाले या वहां से खरीदारी करने वाले बीपी-शुगर के मरीज सीधे दुकान पर जाकर या फोन करके अपनी सेहत के हिसाब से अचार-मुरब्बा चुनने की सलाह ले सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्राणनाथ की दुकान कहां स्थित है?\nयह दुकान गोरखपुर के घंटाघर इलाके की मशहूर मुरब्बा गली में है।\n\n2. यह दुकान कितने साल पुरानी है?\nकरीब 70 साल पुरानी है, इसे प्राणनाथ के दादा ने शुरू किया था और अब प्राणनाथ इसे संभाल रहे हैं।\n\n3. इस समय सबसे ज्यादा मांग किस अचार की है?\nलहसुन, करेला और लौकी के अचार व मुरब्बे की मांग सबसे ज्यादा है।\n\n4. क्या बीपी और शुगर के मरीज यहां का अचार खा सकते हैं?\nप्राणनाथ ग्राहकों को उनकी सेहत के हिसाब से अचार-मुरब्बा चुनने में मदद करते हैं, लेकिन वह इसे दवा नहीं बल्कि संतुलित खानपान का हिस्सा मानने की सलाह देते हैं।\n\n5. लहसुन का अचार कैसे तैयार किया जाता है?\nपहले लहसुन को भाप देकर मुलायम किया जाता है, फिर उसमें पाचन में मदद करने वाले मसाले मिलाए जाते हैं।\n\n6. क्या दूसरे शहरों से भी ऑर्डर आते हैं?\nहां, गोरखपुर के अलावा दूसरे शहरों से भी लोग फोन पर ऑर्डर देकर अचार-मुरब्बा मंगवाते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्राणनाथ की कहानी बताती है कि पुरानी विरासत को सही तरीके से आगे बढ़ाकर भी एक छोटा कारोबार दशकों तक जिंदा रखा जा सकता है।\n\n• दादा से शुरू हुए कारोबार को उसी नुस्खे और तरीके के साथ आगे बढ़ाने से ब्रांड की पहचान बनी रहती है।\n• ग्राहक की जरूरत, यहां तक कि उसकी सेहत, को समझकर सलाह देने से लंबे समय का भरोसा बनता है।\n• स्वाद के साथ गुणवत्ता पर कभी समझौता न करना ग्राहकों को साल भर तक जोड़े रखता है।\n• फोन पर ऑर्डर लेकर दूसरे शहरों तक पहुंच बनाना दिखाता है कि पारंपरिक कारोबार भी बदलते वक्त के साथ ढल सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/food/gorakhpur-ki-murabba-gali-men-70-barasa-se-achara-becha-raha-hai-prannath-ka-parivara-bipi-shugara-marija-bhi-lete-hain-salaha-9111",
  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-07-20",
  "tags": [
    "गोरखपुर अचार",
    "मुरब्बा गली",
    "प्राणनाथ अचार",
    "घंटाघर गोरखपुर",
    "पारंपरिक अचार",
    "बीपी शुगर डाइट",
    "फैमिली बिजनेस",
    "यूपी फूड"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}