गुड़ की कुरकुरी जलेबी घर पर तैयार करने का सीधा तरीका, बिना चीनी मिठास का अनोखा स्वाद किचन में रखी कुछ सामान्य चीजों की मदद से झटपट कुरकुरी और रसदार गुड़ की जलेबी तैयार की जा सकती है। जानिए सही बैटर और हल्की चिपचिपी चाशनी बनाने की पूरी विधि। मिठाई खाने की इच्छा जब अचानक हो और बाजार जाकर खरीदारी करने का अवसर न हो, तो रसोई में आसानी से मिलने वाली चीजों से तुरंत स्वादिष्ट व्यंजन बनाया जा सकता है। पारंपरिक तौर पर हलवाई के यहां मिलने वाली जलेबी चीनी की चाशनी में डूबी होती है, परंतु चीनी के विकल्प के रूप में गुड़ का उपयोग करके भी उतना ही रसीला और कुरकुरा स्वाद हासिल किया जा सकता है। गुड़ से बनी जलेबी का स्वाद साधारण जलेबी से अलग और काफी मनभावन होता है, जिसे कोई भी अपनी सामान्य रसोई में बिना किसी झंझट के बना सकता है। इस खास मिठास को तैयार करने के लिए बहुत लंबी चौड़ी सामग्रियों की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य मैदा, देशी घी, चावल का आटा और अच्छी गुणवत्ता वाला गुड़ ही इसके मुख्य आधार हैं। यदि बैटर का गाढ़ापन और चाशनी का तापमान बिल्कुल सटीक रखा जाए, तो जलेबियां ऊपर से एकदम करारी और अंदर से पूरी तरह रस से सराबोर बनती हैं। घोल और सामग्री का सही अनुपात जलेबी का मिश्रण बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी मैदा लें। इसमें लगभग डेढ़ चम्मच शुद्ध देशी घी और एक चम्मच चावल का आटा शामिल करें। देशी घी जलेबी के अंदरूनी हिस्से को खस्ता बनाता है, जबकि चावल का आटा तलने के बाद जलेबी को लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखने में मदद करता है। इन सभी सूखी सामग्रियों को पहले हल्के हाथों से आपस में मिला लें। इसके बाद मिश्रण में थोड़ा-थोड़ा करके साधारण पानी मिलाएं। एक साथ ढेर सारा पानी उड़ेलने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि ऐसा करने से घोल में गुठलियां पड़ सकती हैं जिन्हें खत्म करना कठिन होता है। लगातार चम्मच या व्हिस्क चलाते हुए चिकना और एकसार घोल तैयार करें। बैटर का घनत्व ऐसा होना चाहिए जो न तो पानी की तरह बहे और न ही बहुत भारी या सख्त हो। लगभग एक से दो मिनट तक इस घोल को अच्छी तरह फेंटें ताकि उसमें हवा का संचार हो सके। इसके बाद बर्तन को ढककर थोड़ी देर के लिए अलग रख दें ताकि मैदा ठीक से सेट हो जाए। गुड़ की चाशनी पकाने का सटीक तरीका चाशनी बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले गुड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें, ताकि वह पानी में जल्दी और समान रूप से घुल सके। अब एक कढ़ाई अथवा गहरे बर्तन में इन गुड़ के टुकड़ों को डालें और साथ में करीब एक कटोरी पानी मिला दें। गैस की आंच को धीमा से मध्यम रखें और गुड़ को धीरे-धीरे पिघलने दें। जैसे ही गुड़ पूरी तरह पानी में घुल जाए, चाशनी को बहुत अधिक देर तक खौलाने या पकाने से बचें। इसके लिए किसी तार वाली चाशनी की जरूरत नहीं होती, बल्कि चाशनी केवल हल्की चिपचिपी होनी चाहिए। यदि चाशनी बहुत गाढ़ी हो जाएगी, तो जलेबी तलने के बाद रस को अपने अंदर सोख नहीं पाएगी। जब चाशनी हल्की चिपचिपाहट पकड़ ले, तो गैस बंद कर दें और इसे किसी छलनी की मदद से दूसरे बर्तन में छान लें। छानने से गुड़ में मौजूद अशुद्धियां और बारीक कण पूरी तरह अलग हो जाते हैं, जिससे चाशनी बिल्कुल साफ और पारदर्शी बन जाती है। तलने से पहले बैटर की अंतिम तैयारी जलेबी तलने की शुरुआत करने से ठीक पहले रखे हुए बैटर को एक बार दोबारा चम्मच से अच्छी तरह चला लें। अब इस मिश्रण में लगभग आधा पैकेट इनो डालें और हल्के हाथों से एक ही दिशा में मिला लें। एक कटोरी मैदे के अनुपात के अनुसार आधा पैकेट इनो पर्याप्त उभार देने के लिए काफी है, इससे ज्यादा मात्रा की जरूरत नहीं होती। इनो मिलाते ही बैटर हल्का और फूला हुआ नजर आने लगेगा। इनो मिलाने के पश्चात बैटर को ज्यादा देर तक खुला या रखा न छोड़ें, इसे तुरंत इस्तेमाल में लाना जरूरी होता है। इस तैयार घोल को किसी साफ सॉस की बोतल में भर लें। यदि घर पर सॉस की बोतल मौजूद न हो, तो दूध या किसी अन्य साफ और मजबूत प्लास्टिक पैकेट का कोन बनाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बोतल के ऊपरी ढक्कन में एक छोटा सा छेद होना चाहिए, ताकि दबाने पर बैटर बिना रुके पतली धार में आसानी से बाहर आ सके। कढ़ाई में तलने और आकार देने की विधि एक चौड़े मुंह वाली कढ़ाई में तलने के लिए तेल गर्म करें और आंच को मध्यम स्तर पर नियंत्रित रखें। जब तेल सही तापमान पर आ जाए, तो बोतल को हल्का दबाते हुए तेल के ऊपर गोल-गोल चक्राकार घुमाते हुए जलेबी का सुंदर आकार दें। कढ़ाई में एक बार में केवल उतनी ही जलेबियां डालें जितनी आसानी से तैर सकें और आपस में चिपके नहीं। इससे उन्हें पलटना और दोनों तरफ से एक समान पकाना काफी आसान हो जाता है। जलेबियों को तब तक मध्यम आंच पर तलें जब तक वे हल्की सुनहरी और कुरकुरी न हो जाएं। गुड़ की स्वाभाविक बनावट की वजह से इसका रंग पारंपरिक चीनी वाली जलेबी से थोड़ा गहरा हो सकता है, इसलिए इसे बहुत अधिक देर तक न तलें ताकि यह जलने न पाए। इस रेसिपी में किसी भी प्रकार का कृत्रिम फूड कलर मिलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि गुड़ का प्राकृतिक रंग ही इसे सुंदर आभा देता है। चाशनी में डुबोने का नियम और समय कढ़ाई से करारी जलेबी को चिमटे या झारे की सहायता से निकालते ही सीधे गुनगुनी चाशनी के बर्तन में डाल दें। चाशनी का तापमान यहां बेहद महत्वपूर्ण है; चाशनी न तो खौलती हुई अत्यधिक गर्म होनी चाहिए और न ही पूरी तरह ठंडी। यदि चाशनी बहुत ठंडी होगी, तो जलेबी रस को अंदर तक नहीं खींचेगी, और यदि बहुत ज्यादा गर्म होगी, तो जलेबी का कुरकुरापन खत्म होकर वह तुरंत नरम पड़ जाएगी। जलेबी को चाशनी के अंदर मात्र पांच से छह सेकंड के लिए डुबोकर रखें और फिर तुरंत बाहर किसी प्लेट में निकाल लें। चाशनी में बहुत लंबे समय तक डुबोए रखने से जलेबी की ऊपरी परत अपनी करारापन खो देती है। सही समय और तापमान के संतुलन से गुड़ की यह रसीली जलेबी बाहर से बेहद क्रिस्पी और अंदर से मीठे रस से भरी तैयार होती है। इसका आप पर असर यह तरीका उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो घर पर ही बिना चीनी के पारंपरिक स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं। • किचन बजट: बाजार की महंगी मिठाइयों के मुकाबले घर में उपलब्ध गुड़ और मैदे से कम खर्च में ताजा मिठाई तैयार हो जाती है। बाहर जाने का समय और पैसा दोनों बचते हैं। • चीनी का विकल्प: परिष्कृत सफेद चीनी से परहेज करने वाले परिवारों के लिए गुड़ की यह चाशनी एक नया और अलग स्वाद प्रदान करती है। मीठा खाने की तलब मिटाने के लिए यह एक आसान घरेलू विकल्प बनता है। • बनावट का ख्याल: चावल का आटा और घी का सही अनुपात रखने से जलेबी ठंडी होने के बाद भी नरम नहीं पड़ती। कम समय में बिना हलवाई की तकनीक के भी कुरकुरापन बना रहता है। • समय की बचत: घोल को घंटों फर्मेंट करने के झंझट के बिना केवल आधा पैकेट इनो डालकर तुरंत तलने के लिए तैयार किया जा सकता है। अचानक मेहमान आने पर 15-20 मिनट में मिठाई परोसी जा सकती है। ऐसा क्यों हुआ गुड़ की जलेबी बनाने का यह तरीका उन लोगों के लिए विकसित हुआ है जो कम समय में बिना जटिल किण्वन के करारी मिठाई चाहते हैं। • फर्मेंटेशन की जगह इनो: पारंपरिक जलेबी बैटर को खट्टापन और उभार देने के लिए घंटों पहले भिगोकर छोड़ना पड़ता है। तुरंत बनाने के लिए इनो का उपयोग तीव्र रासायनिक उभार पैदा करता है, जिससे जलेबी तेल में जाते ही फूल जाती है। • चावल के आटे की भूमिका: केवल मैदे से बनी जलेबी चाशनी सोखते ही तेजी से नरम पड़ने लगती है। चावल का आटा नमी को संतुलित रखकर बाहरी आवरण को अधिक समय तक कड़ा और कुरकुरा बनाए रखता है। • हल्की चिपचिपी चाशनी का नियम: गुड़ जल्दी गाढ़ा होने लगता है और तार वाली चाशनी जलेबी के छिद्रों में प्रवेश नहीं कर पाती। एक कटोरी पानी के साथ केवल घुलने तक पकाने से चाशनी पतली रहती है और जलेबी उसे चंद सेकंड में अंदर सोख लेती है। • रंग में बदलाव: सफेद चीनी के मुकाबले गुड़ का प्राकृतिक रंग सुनहरा भूरा होता है। इसलिए बिना किसी कृत्रिम रंग के भी जलेबी गहरे आकर्षक रंग में तैयार होती है। सवाल-जवाब 1. जलेबी को कुरकुरा बनाने के लिए बैटर में क्या मिलाया जाता है? बैटर में एक कटोरी मैदे के साथ करीब डेढ़ चम्मच देशी घी और एक चम्मच चावल का आटा मिलाया जाता है, जिससे जलेबी करारी बनती है। 2. बैटर को तुरंत फुलाने के लिए किसका इस्तेमाल किया जाता है? तलने से ठीक पहले बैटर में लगभग आधा पैकेट इनो मिलाकर तुरंत इस्तेमाल किया जाता है। 3. गुड़ की चाशनी कितनी गाढ़ी होनी चाहिए? चाशनी में तार बनाने की जरूरत नहीं होती, इसे केवल हल्का चिपचिपा रखा जाता है ताकि यह जलेबी के अंदर आसानी से समा सके। 4. जलेबी को चाशनी में कितनी देर तक डुबोकर रखना चाहिए? जलेबी को हल्की गर्म चाशनी में केवल 5 से 6 सेकंड तक रखकर तुरंत बाहर निकाल लेना चाहिए। 5. क्या गुड़ की जलेबी में कृत्रिम फूड कलर डालना जरूरी है? नहीं, गुड़ की वजह से जलेबी का प्राकृतिक रंग पहले से ही गहरा और सुनहरा हो जाता है, इसलिए फूड कलर की जरूरत नहीं होती। 6. चाशनी को पकाने के बाद छानना क्यों आवश्यक है? चाशनी को छानने से गुड़ में मौजूद बारीक अशुद्धियां और छोटे कण अलग हो जाते हैं, जिससे चाशनी बिल्कुल साफ हो जाती है। https://trendkia.com/food/gud-ki-kurkuri-jalebi-ghar-par-taiyar-karne-ka-seedha-tarika-bina-chini-mithas-ka-anokha-swad-37392 TrendKia — Har trend, sabse pehle.