हैदराबाद की मंडियों में बिखरी पीले कच्चे खजूर की बहार, गुजरात और तमिलनाडु की खेती से सस्ते हुए अरब के पसंदीदा फल हैदराबाद की प्रमुख फल मंडियों में इन दिनों पीले रंग के ताजे और कुरकुरे कच्चे खजूरों की भारी मांग है। गुजरात और तमिलनाडु में स्थानीय स्तर पर खेती होने से ये अरब के पसंदीदा खजूर अब बेहद किफायती दामों पर मिल रहे हैं। हैदराबाद की प्रसिद्ध फल मंडियों में इन दिनों एक अलग ही तरह की रोनक दिखाई दे रही है। अमूमन खजूर का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में गहरे भूरे रंग के नरम और अत्यधिक मीठे सूखे मेवे की छवि उभरती है। हालांकि, इस समय शहर के प्रमुख बाजारों में चमकीले पीले रंग के, एकदम ताजे और कुरकुरे कच्चे खजूरों की भारी आवक देखी जा रही है। इन सुनहरे खजूरों के ठेले देखकर ऐसा महसूस होता है मानो मध्य पूर्व या किसी अरब देश का कोई पारंपरिक बाजार हैदराबाद की गलियों में आ बसा हो। अरब संस्कृति का स्वाद अब हैदराबाद में मध्य पूर्व के देशों जैसे सऊदी अरब, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में ताजे कच्चे खजूर खाने की एक पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है। वहां इन ताजे कच्चे खजूरों को स्थानीय भाषा में रताब या बलाह कहा जाता है। वहां के लोग पके हुए बहुत मीठे खजूरों की तुलना में इन हल्के मीठे और कुरकुरे खजूरों को बेहद पसंद करते हैं। अब यही पारंपरिक स्वाद और अनुभव हैदराबाद के स्थानीय निवासियों तथा खजूर प्रेमियों को अपनी ही शहर की मंडियों में आसानी से मिल रहा है। प्रमुख फल मंडियों में उमड़ी खरीदारी की भीड़ हैदराबाद के सबसे मशहूर व्यापारिक केंद्रों जैसे बतासिंगाराम फ्रूट मंडी, मोज़म्जाही मार्केट, बेगम बाज़ार और कोठापेट क्षेत्र की फल मंडियों में सुबह से ही इन ताज़े खजूरों को खरीदने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ रहा है। ये खजूर मुख्य रूप से बरही किस्म के हैं। खाने में इनका स्वाद किसी सेब की तरह कुरकुरा और हल्का मीठा होता है। फल व्यापारियों का कहना है कि ये खजूर दिखने में जितने सुंदर और आकर्षक लगते हैं, सेहत के मामले में भी उतने ही गुणकारी होते हैं। स्थानीय खेती से सस्ती हुई कीमतें फल व्यवसाय से जुड़े स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, कुछ समय पहले तक इस तरह के ताजे खजूर पूरी तरह से केवल अरब मुल्कों से आयात किए जाते थे। हवाई मार्ग से आयात होने के कारण इनकी लागत काफी अधिक होती थी और आम खरीदारों के लिए इन्हें नियमित खरीदना थोड़ा मुश्किल होता था। हालांकि, अब भारत में ही गुजरात और तमिलनाडु के शुष्क तथा गर्म इलाकों में अरब के खजूर के पेड़ों की व्यावसायिक खेती सफलतापूर्वक शुरू हो चुकी है। देश के भीतर पैदावार होने से परिवहन खर्च घटा है और अब ये ताजे खजूर हैदराबाद की मंडियों में बहुत ही किफायती और वाजिब दामों में हर किसी के लिए उपलब्ध हैं। सेहत के लिए कई मायनों में फायदेमंद पोषण के नजरिए से कच्चे खजूर सेहत के लिए बहुत उत्तम माने जाते हैं। इनमें फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जो लोग सामान्य रूप से मिलने वाले बेहद मीठे पके खजूरों को खाने से बचते हैं या कम मीठा पसंद करते हैं, उनके लिए यह क्रिस्पी और हल्का मीठा खजूर एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। यही वजह है कि शहर के कोने-कोने से लोग इस अनोखे फल का स्वाद चखने और खरीदने के लिए मंडियों का रुख कर रहे हैं। इस मौसम में हैदराबाद के फल बाजारों में जाकर इन सुनहरे खजूरों को खरीदना एक अलग ही तरह का बढ़िया अनुभव प्रदान करता है। इसका आप पर असर भारत में: देश में ही खजूर की खेती बढ़ने से ताजे फलों के दाम कम हुए हैं और लोगों को सस्ते विकल्प मिल रहे हैं। हैदराबाद में: स्थानीय फल मंडियों में अब अरब शैली के पौष्टिक बरही खजूर किफायती दरों पर आसानी से उपलब्ध हैं। सवाल-जवाब 1. हैदराबाद की मंडियों में किस किस्म के कच्चे खजूर मिल रहे हैं? हैदराबाद के बाजारों में मुख्य रूप से बरही किस्म के पीले और कुरकुरे कच्चे खजूर मिल रहे हैं। 2. अरब मुल्कों में इन कच्चे खजूरों को किस नाम से जाना जाता है? सऊदी अरब, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में इन ताजे कच्चे खजूरों को रताब या बलाह कहा जाता है। 3. भारत में इन अरब शैली के खजूरों की खेती किन राज्यों में हो रही है? भारत में गुजरात और तमिलनाडु के शुष्क और गर्म इलाकों में इन खजूरों की खेती की जा रही है। 4. सेहत के लिहाज से कच्चे खजूरों में कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? कच्चे खजूर में प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। https://trendkia.com/food/hyderabad-ki-mndiyon-men-bikhari-pile-kachche-khajura-ki-bahara-gujarat-aura-tamil-nadu-ki-kheti-se-saste-hue-araba-ke-pasndida-ph-15305 TrendKia — Har trend, sabse pehle.