जच्चा की कमजोरी दूर करने वाला बघेलखंड का यह पारंपरिक लड्डू बस 15 मिनट के भीतर घर पर बनाएं बघेलखंड के सतना इलाके में सर्दियों में बनने वाला सोंठाउरा लड्डू सिर्फ 15 मिनट में तैयार हो जाता है और प्रसव के बाद महिलाओं की कमजोरी दूर करने के लिए पीढ़ियों से इस्तेमाल होता आ रहा है. बघेलखंड के सतना इलाके में सर्दी के मौसम में एक देसी लड्डू आज भी हर घर की रसोई में अपनी जगह बनाए रखता है, जिसका नाम है सोंठाउरा. महंगे विदेशी सप्लीमेंट्स और प्रोटीन पाउडर के दौर में यह पारंपरिक मिठाई सोंठ, गुड़, महुआ और तरह-तरह के मेवों को मिलाकर बनाई जाती है और शरीर को भीतर से मजबूत बनाने के लिए जानी जाती है. विंध्य क्षेत्र में आज भी यह घरेलू खानपान और सेहत की देखभाल का जरूरी हिस्सा माना जाता है, क्योंकि इसे खाने से शरीर में ताकत आती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी भी मजबूत होती है. जच्चा की सेहत सुधारने वाला घरेलू नुस्खा सतना की रहने वाली मीना द्विवेदी बताती हैं कि घर में जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है तो सबसे पहले नई मां को सोंठाउरा ही खिलाया जाता है, ताकि प्रसव के बाद आई शारीरिक कमजोरी जल्दी दूर हो सके. डिलीवरी के बाद महिलाओं को होने वाला कमर दर्द, थकान और कमजोरी दूर करने में इसे रामबाण माना जाता है. इसमें मौजूद औषधीय गुण नई माताओं के शरीर को भीतर से मजबूती देते हैं और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं. यही वजह है कि गांव-देहात में आज भी इसे जच्चा की सेहत सुधारने की सबसे भरोसेमंद देसी दवा माना जाता है. आयरन, कैल्शियम और गर्माहट का पैकेज गुड़ और मेवों से तैयार यह लड्डू आयरन का बड़ा स्रोत माना जाता है, जिससे शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया की दिक्कत तेजी से दूर होती है. इसमें डाली जाने वाली सोंठ और गोंद सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखने का काम करते हैं और जोड़ों व कमर के दर्द में तुरंत आराम देते हैं. वहीं मखाना और बाकी सूखे मेवे हड्डियों को कैल्शियम देकर उन्हें मजबूत बनाते हैं. रोज सुबह एक सोंठाउरा खाने से दिनभर की थकान और कमजोरी दूर हो जाती है और शरीर में तुरंत ऊर्जा महसूस होने लगती है. महज 15 मिनट में तैयार होने वाली रेसिपी सोंठाउरा बनाना बेहद आसान है और पूरी प्रक्रिया में कुल 15 मिनट का समय लगता है. इसमें से पांच मिनट मेवों को काटने और बाकी सामग्री तैयार करने में लगते हैं, जबकि बचे हुए 10 मिनट में मेवों को भूनकर गुड़ की चाशनी के साथ लड्डू बांधे जाते हैं. सबसे पहले कड़ाही में देसी घी गर्म करके बारीक कटे काजू, बादाम, अखरोट, पिस्ता और मखाने डाले जाते हैं और मध्यम आंच पर इन्हें तब तक भूना जाता है जब तक ये क्रिस्पी न हो जाएं. इसके बाद मखानों को दरदरा कूट लिया जाता है. फिर उसी कड़ाही में थोड़ा और घी डालकर कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल और किशमिश भी हल्का भूनकर अलग निकाल लिए जाते हैं. गुड़ की चाशनी बनाने और लड्डू बांधने का सही तरीका अगले चरण में कड़ाही में बारीक कटा गुड़ और दो चम्मच पानी डालकर मध्यम आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक वह पिघलकर झाग न छोड़ने लगे. यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि चाशनी बहुत कड़क न हो, वरना लड्डू सख्त बन जाएंगे. चाशनी तैयार होते ही गैस बंद कर दी जाती है और इस गर्म गुड़ में भुने हुए सारे मेवे, मखाने, इलायची पाउडर और सर्दियों के लिए खास सोंठ पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. जब यह मिश्रण थोड़ा ठंडा होकर हाथ से छूने लायक रह जाता है, तो हथेलियों पर हल्का घी लगाकर इसे गोल-गोल आकार देते हुए लड्डू बांध लिए जाते हैं. इस तरह विंध्य इलाके का खास और सेहतमंद सोंठाउरा खाने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाता है. इसका आप पर असर • भारत में: सर्दियों में घर पर बिना महंगे सप्लीमेंट्स के सोंठ, गुड़ और मेवों से बना यह लड्डू सिर्फ 15 मिनट में तैयार किया जा सकता है, जो शरीर को गर्माहट और ताकत देने का एक सस्ता देसी विकल्प है. • सतना और बघेलखंड में: यहां प्रसव के बाद नई मांओं को कमजोरी दूर करने के लिए आज भी सोंठाउरा खिलाने की परंपरा जारी है, जिससे यह इलाका अपने घरेलू इलाज की पहचान बनाए रखता है. सवाल-जवाब 1. सोंठाउरा किन चीजों से बनाया जाता है? इसे सोंठ, गुड़, महुआ, देसी घी और काजू, बादाम, अखरोट, पिस्ता, मखाना, सूखा नारियल व किशमिश जैसे मेवों से बनाया जाता है. 2. सोंठाउरा बनाने में कुल कितना समय लगता है? पूरी प्रक्रिया में 15 मिनट लगते हैं, जिसमें 5 मिनट मेवे काटने में और 10 मिनट भूनने व लड्डू बांधने में लगते हैं. 3. सोंठाउरा खासतौर पर किसे खिलाया जाता है? बघेलखंड में प्रसव के बाद नई मांओं को शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए सबसे पहले सोंठाउरा ही खिलाया जाता है. 4. सोंठाउरा खाने से सेहत को क्या फायदे होते हैं? यह आयरन देकर एनीमिया दूर करता है, शरीर को सर्दियों में गर्म रखता है, जोड़ों-कमर दर्द में राहत देता है और हड्डियों को कैल्शियम देकर मजबूत बनाता है. 5. गुड़ की चाशनी बनाते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए? चाशनी को ज्यादा गाढ़ा या कड़क नहीं पकाना चाहिए, वरना लड्डू सख्त बन जाएंगे. 6. सोंठाउरा किस इलाके की पारंपरिक मिठाई है? यह मध्य प्रदेश के बघेलखंड और विंध्य क्षेत्र, खासकर सतना इलाके की पारंपरिक मिठाई है. https://trendkia.com/food/jachcha-ki-kamajori-dura-karane-vala-baghelkhand-ka-yaha-parnparika-laddu-basa-15-minata-ke-bhitara-ghara-para-banaen-4037 TrendKia — Har trend, sabse pehle.