जयपुर के चौड़ा रास्ता में तेज लपटों पर सिकता है कुलचा, ताड़केश्वर मंदिर में भोग के बाद शुरू होती है बिक्री जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में जय गोविंद फायर कुलचा अपने अनूठे अंदाज, पनीर और चीज की टॉपिंग तथा पहले ताड़केश्वर महादेव को भोग लगाने की परंपरा के लिए मशहूर हो चुका है। गुलाबी नगर जयपुर की ऐतिहासिक चारदीवारी अपने भव्य महलों और विरासती किलों के अलावा अनोखे खानपान के ठिकानों के लिए भी जानी जाती है। इसी चारदीवारी के व्यस्त बाजार चौड़ा रास्ता में सड़क किनारे लगने वाला जय गोविंद फायर कुलचा इन दिनों खानपान के शौकीनों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सामान्य तौर पर छोले कुलचे को तवे पर धीमी आंच पर सेका जाता है, लेकिन यहां कुलचे को तेज लपटों के बीच पकाने की खास शैली लोगों को अपनी ओर खींचती है। शाम ढलते ही इस छोटे से ठेले पर स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों का मजमा लग जाता है। तेज आग पर सिकाई और खास सामग्री का मेल इस स्ट्रीट फूड की सबसे बड़ी पहचान इसे तैयार करने का तरीका है। कारीगर जब कुलचे को तेज आग की लपटों पर सेंकते हैं, तो यह नजारा राहगीरों को ठहरने पर मजबूर कर देता है। लपटों के संपर्क में आने से कुलचे का ऊपरी हिस्सा क्रिस्पी बनता है। सिकाई के साथ ही इसमें प्याज, टमाटर, पनीर के टुकड़े, प्रचुर मात्रा में चीज और गाढ़ी क्रीम मिलाई जाती है। इन तमाम सामग्रियों के ऊपर परोसी जाने वाली तीखी हरी चटनी कुलचे के स्वाद को बेहद लाजवाब बना देती है। सोशल मीडिया पर इस कुलचे को तैयार करने और परोसने के वीडियो लगातार वायरल होते रहते हैं, जिन्हें देखकर कई लोग खास तौर पर इस ठेले को खोजते हुए यहां पहुंचते हैं। ताड़केश्वर महादेव मंदिर में भोग की अनूठी परंपरा इस ठेले पर कारोबार शुरू करने से पहले एक विशेष धार्मिक नियम का पालन किया जाता है। दिन की शुरुआत में सबसे पहले बिना प्याज और लहसुन का उपयोग किए खास फायर कुलचे तैयार किए जाते हैं। इन कुलचों को पास ही स्थित ऐतिहासिक ताड़केश्वर महादेव मंदिर ले जाया जाता है, जहां भगवान भोलेनाथ को इसका भोग अर्पित किया जाता है। पूजा और भोग की यह रस्म पूरी होने के बाद ही आम ग्राहकों के लिए कुलचे बनाने और बेचने की प्रक्रिया शुरू होती है। इस परंपरा की वजह से भी श्रद्धालुओं और खाने के शौकीनों में इस जगह के प्रति एक अलग आकर्षण बना हुआ है। कीमत और पिछले पांच साल का सफर जयपुर शहर में सामान्य छोले कुलचे की एक प्लेट 50 से 60 रुपये के दायरे में मिल जाती है। वहीं जय गोविंद के इस स्पेशल फायर कुलचे की एक प्लेट की कीमत 100 रुपये रखी गई है। इस प्लेट में आग की लपटों पर तैयार किए गए कुलचे के साथ मसालेदार छोले और अन्य सामग्री परोसी जाती है। चौड़ा रास्ता में यह ठेला पिछले लगभग 5 साल से संचालित हो रहा है। पांच वर्षों के इस सफर में यह छोटा सा ठेला शहर के प्रमुख स्ट्रीट फूड पॉइंट्स में अपनी जगह बना चुका है, जहां शाम के वक्त खाने के शौकीनों की कतारें देखने को मिलती हैं। इसका आप पर असर जयपुर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों और स्थानीय स्ट्रीट फूड प्रेमियों के लिए यह अनूठा स्वाद बजट और अनुभव दोनों को प्रभावित करता है। • भारत भर के पर्यटकों के लिए: यदि आप जयपुर के हेरिटेज वॉक या चारदीवारी के दौरे पर हैं, तो शाम के समय इस अनूठे स्ट्रीट फूड का अनुभव ले सकते हैं। सोशल मीडिया पर लोकप्रिय इस व्यंजन को आजमाने के लिए चौड़ा रास्ता को अपनी यात्रा सूची में शामिल किया जा सकता है। • जयपुर के निवासियों के लिए: शहर में सामान्य छोले कुलचे 50 से 60 रुपये में मिलते हैं, जबकि यहां एक प्लेट के लिए 100 रुपये चुकाने होंगे। चीज, पनीर और क्रीम की अतिरिक्त सामग्री के शौकीनों के लिए यह शाम के नाश्ते का एक नया विकल्प प्रस्तुत करता है। • धार्मिक आस्था का सम्मान करने वालों के लिए: यहां बिक्री शुरू होने से पहले ताड़केश्वर मंदिर में सात्विक भोग लगाने का नियम निभाया जाता है। शुद्धता और आस्था को महत्व देने वाले ग्राहक इस परंपरा की सराहना करते हैं। • शाम के समय आवागमन करने वालों के लिए: चौड़ा रास्ता में शाम के वक्त इस ठेले पर ग्राहकों की भारी भीड़ एकत्रित होती है। इस बाजार से गुजरने वाले वाहन चालकों को व्यस्त समय में हल्की भीड़ और जाम का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक छोले कुलचे से अलग हटकर अपनी पहचान बनाने और धार्मिक मर्यादा का पालन करने के उद्देश्य से यह अनूठी कार्यशैली विकसित हुई। • सीधी आग पर पकाने की तकनीक: सामान्य तवे की सिकाई के मुकाबले कुलचे को खुली लपटों पर रखकर तैयार करने से इसमें कुरकुरापन आता है और यह दृश्य दर्शकों को आकर्षित करता है। इस प्रक्रिया को देखने की उत्सुकता ग्राहकों की संख्या बढ़ाने में प्रमुख कारण बनी है। • सामग्रियों का समृद्ध मिश्रण: सामान्य कुलचे की तुलना में पनीर, चीज, मक्खननुमा क्रीम और ताजी हरी चटनी का समावेश इसे भारी और अधिक स्वादिष्ट बनाता है। स्वाद में यही नवीनता इसे अन्य पारंपरिक ठेलों से अलग खड़ा करती है। • मंदिर भोग की परंपरा का निर्वहन: निकट स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर के प्रति आस्था के चलते दिन का पहला बैच बिना लहसुन-प्याज के बनाया जाता है। स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखने के लिए संचालक ने इस भक्तिपूर्ण क्रम को अपने दैनिक नियम का हिस्सा बनाया है। • सोशल मीडिया का प्रभाव: आग की लपटों के बीच खाना पकाने के वीडियो डिजिटल मंचों पर तेजी से देखे और साझा किए जाते हैं। इस दृश्य प्रभाव ने पिछले 5 वर्षों में दूर-दराज के पर्यटकों को यहां तक खींचने में अहम भूमिका निभाई है। सवाल-जवाब 1. जय गोविंद फायर कुलचा जयपुर में कहां स्थित है? यह ठेला जयपुर की चारदीवारी क्षेत्र के चौड़ा रास्ता में सड़क किनारे स्थित है। 2. इस फायर कुलचे को पकाने का क्या तरीका है? सामान्य तवे के बजाय इस कुलचे को तेज आग की खुली लपटों पर रखकर सेका जाता है। 3. फायर कुलचे में किन-किन मुख्य सामग्रियों का इस्तेमाल होता है? इसमें प्याज, टमाटर, पनीर, चीज, गाढ़ी क्रीम और तीखी हरी चटनी का उपयोग किया जाता है। 4. बिक्री शुरू करने से पहले कौन सी धार्मिक परंपरा निभाई जाती है? दुकानदार सबसे पहले बिना प्याज और लहसुन के कुलचे बनाकर पास के ताड़केश्वर महादेव मंदिर में भोग लगाता है। 5. इस स्पेशल फायर कुलचे की प्रति प्लेट कीमत कितनी है? जय गोविंद फायर कुलचे की एक प्लेट की कीमत 100 रुपये है, जिसमें कुलचे और छोले दिए जाते हैं। 6. यह ठेला कितने समय से चौड़ा रास्ता में चल रहा है? यह ठेला पिछले करीब 5 साल से चौड़ा रास्ता में लोगों को फायर कुलचा परोस रहा है। https://trendkia.com/food/jaipur-ke-chaura-rasta-men-teja-lapaton-para-sikata-hai-kulacha-tadkeshwar-mndira-men-bhoga-ke-bada-shuru-hoti-hai-bikri-42645 TrendKia — Har trend, sabse pehle.