झारखंड में गवार की सब्जी की बढ़ी मांग, बाजार में ₹100 किलो तक बिक रही उपज रांची के मनातू में किसान आंगन की जमीन पर गवार सब्जी उगाकर हर दिन ₹500 तक कमा रहे हैं। बीन्स जैसी दिखने वाली यह सब्जी अपने खट्टे-मीठे स्वाद और आसान रेसिपी के कारण ठंड में खूब पसंद की जा रही है। झारखंड की राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में सर्दियों की दस्तक के साथ ही एक खास स्थानीय फसल चर्चा में आ जाती है, जिसे गवार सब्जी कहा जाता है। बीन्स की तरह पतली दिखाई देने वाली यह सब्जी खाने में बेहद स्वादिष्ट मानी जाती है और मांसाहारी भोजन पसंद करने वाले लोग भी इसके स्वाद की खूब तारीफ करते हैं। स्थानीय लोग अक्सर इसे आलू के साथ मिलाकर तैयार करते हैं। बाजार में इसकी उपलब्धता सीमित होने और खास स्वाद के कारण ग्राहकों के बीच इसकी अच्छी मांग रहती है, जहां यह ₹80 से लेकर ₹100 प्रति किलो तक के भाव पर बिकती है। सितंबर से ठंड के दौरान पैदावार और पौधे की खासियत इस सब्जी का उत्पादन मुख्य रूप से सितंबर के महीने से शुरू होकर पूरी सर्दियों के मौसम तक चलता है। इसके पौधे काफी बड़े आकार के होते हैं और इनमें फलियां बेहद तेजी से विकसित होती हैं। पैदावार के लिहाज से यह बेहद फायदेमंद साबित होती है, क्योंकि इसके महज एक ही पौधे से 4 से 5 किलो तक सब्जी आसानी से निकल आती है। रांची के मनातू क्षेत्र के निवासी किसान मुकेश ने अपने घर के आंगन में मौजूद 2 डिसमिल जमीन पर ही इस फसल को लगाया हुआ है। उनका कहना है कि कम जगह में भी इस पौधे से भरपूर उत्पादन मिल जाता है और इसकी गुणवत्ता बहुत अच्छी रहती है। खट्टा-मीठा स्वाद और मशरूम जैसी बनावट गवार सब्जी का प्राकृतिक स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है, जो पकने के बाद एकदम मशरूम जैसा एहसास कराता है। इसे साधारण सूखी भुजिया के तौर पर भी पकाया जा सकता है और तरीदार ग्रेवी वाली सब्जी के रूप में भी। बाजार में ग्राहक सर्दियों के मौसम में इस अनूठी सब्जी का बेसब्री से इंतजार करते हैं। यही वजह है कि मंडियों में पहुंचते ही यह हाथों-हाथ बिक जाती है। घर पर आने वाले खास मेहमानों को भी स्थानीय लोग इसे विशेष व्यंजन के रूप में परोसते हैं, जिसे चखने के बाद लोग अक्सर इसके बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं। रसोई में बनाने की आसान विधि इस सब्जी को पकाना बेहद सरल है और इसे तैयार करने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। सबसे पहले उबले हुए आलू के साथ कटी हुई गवार सब्जी को कढ़ाई में अच्छी तरह फ्राई किया जाता है। इसके बाद इसमें अदरक, लहसुन और टमाटर का ताजा पेस्ट डाला जाता है। फिर हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, नमक और मिक्स मसाला मिलाकर इसे बढ़िया से भूना जाता है। मसालों के अच्छी तरह पक जाने के बाद इसमें आवश्यकतानुसार थोड़ा सा पानी मिला दिया जाता है और धीमी आंच पर 10 से 15 मिनट के लिए पकने छोड़ दिया जाता है। इस तरह तैयार सब्जी को रोटी या चावल किसी के भी साथ खाया जा सकता है। किसानों के लिए मुनाफे का बेहतर जरिया घरेलू स्तर पर खेती करने वाले किसानों के लिए यह सब्जी कमाई का एक बेहतरीन जरिया बन चुकी है। मुकेश बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में केवल आंगन की 2 डिसमिल जमीन में उगी इस सब्जी को बाजार में बेचकर वे प्रतिदिन ₹500 तक की सीधी आमदनी कर लेते हैं। तेजी से फल देने वाले इन पौधों की देखरेख आसान होने से यह स्थानीय उत्पादकों के लिए कम लागत में बढ़िया मुनाफा देने वाली फसल साबित हो रही है। इसका आप पर असर रांची के स्थानीय बाजारों में सर्दियों के दौरान गवार सब्जी की उपलब्धता और कीमतों का उपभोक्ताओं व छोटे उत्पादकों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। • झारखंड में: रांची की मंडियों में गवार सब्जी ₹80 से ₹100 प्रति किलो के भाव बिक रही है। मौसमी सब्जी खरीदने वाले उपभोक्ताओं को इसके अनूठे स्वाद के लिए सामान्य बीन्स से अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। • रांची में: मनातू जैसे उपनगरीय इलाकों के निवासी अपने आंगन की 2 डिसमिल जमीन पर यह फसल उगाकर दैनिक आमदनी जुटा सकते हैं। छोटे स्तर पर उगाने वाले किसान प्रतिदिन ₹500 तक का अतिरिक्त लाभ प्राप्त कर रहे हैं। • रसोई बजट पर: घर में शाकाहारी विकल्प के तौर पर यह सब्जी मशरूम जैसा स्वाद देती है। चिकन या मटन की तुलना में यह काफी किफायती विकल्प साबित होती है। • मौसम चक्र: इसकी खेती मुख्य रूप से सितंबर से लेकर ठंड के महीनों तक ही होती है। इसका ताजा स्वाद लेने के लिए उपभोक्ताओं को सर्दियों के इसी सीमित समय में खरीदारी करनी होगी। ऐसा क्यों हुआ रांची और आसपास के इलाकों में गवार सब्जी की बढ़ती लोकप्रियता और किसानों के मुनाफे के पीछे इसके पौधे की तेज उपज और स्थानीय स्वाद की मांग मुख्य वजह है। • उच्च पैदावार दर: इस फसल का पौधा आकार में काफी बड़ा होता है और बेहद तेजी से फलियां देता है। एक ही पौधे से 4 से 5 किलो तक की उपज निकलना किसानों के लिए इसे बेहद व्यावहारिक बनाता है। • विशिष्ट स्वाद और बनावट: इसका प्राकृतिक स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है जो आलू और मसालों के साथ पककर मशरूम जैसी अनुभूति देता है। यही अनोखा स्वाद मांसाहारी भोजन पसंद करने वालों को भी आकर्षित करता है। • सीमित मौसमी उपलब्धता: यह फसल केवल सितंबर से ठंड के मौसम के बीच ही उपलब्ध होती है। सीमित आपूर्ति और उच्च मांग के चलते बाजार में इसका मूल्य ₹80 से ₹100 प्रति किलो पर स्थिर बना रहता है। सवाल-जवाब 1. गवार सब्जी बाजार में किस कीमत पर बिकती है? रांची के स्थानीय बाजारों में गवार सब्जी की कीमत ₹80 से लेकर ₹100 प्रति किलो के बीच रहती है। 2. इस सब्जी की खेती किस मौसम में की जाती है? यह सब्जी सितंबर के महीने से शुरू होकर पूरी सर्दियों के मौसम में उगाई और तोड़ी जाती है। 3. एक पौधे से औसतन कितनी सब्जी प्राप्त होती है? गवार सब्जी का पौधा काफी बड़ा होता है और एक ही पौधे से लगभग 4 से 5 किलो तक सब्जी निकल आती है। 4. किसान मुकेश अपने आंगन से रोजाना कितना मुनाफा कमा रहे हैं? मुकेश अपने 2 डिसमिल आंगन में उगी इस फसल को बेचकर ठंड के मौसम में हर दिन ₹500 तक कमा लेते हैं। 5. गवार सब्जी का स्वाद कैसा होता है और इसे कैसे पकाया जाता है? इसका स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है जो पकने पर मशरूम जैसा लगता है। इसे उबले आलू, अदरक-लहसुन-टमाटर के पेस्ट और मसालों के साथ 10-15 मिनट पकाकर तैयार किया जाता है। प्रेरणा और सबक रांची के किसान मुकेश ने यह साबित किया है कि घर के छोटे से आंगन का सही उपयोग करके भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है। • सीमित जगह का सदुपयोग: मुकेश ने किसी बड़े खेत के बजाय अपने आंगन की महज 2 डिसमिल जमीन पर खेती की। यह दिखाता है कि उपलब्ध छोटे संसाधनों से भी उत्पादक काम शुरू किया जा सकता है। • स्थानीय मांग की पहचान: उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय बाजार में अधिक कीमत देने वाली गवार सब्जी को चुना। बाजार की पसंद समझकर फसल चुनने से लाभ कई गुना बढ़ जाता है। • कम समय में नियमित आय: सर्दियों के सीजन में रोज की तुड़ाई से वे हर दिन ₹500 तक कमा रहे हैं। सही फसल चक्र छोटे उत्पादकों को निरंतर नकदी प्रवाह प्रदान कर सकता है। https://trendkia.com/food/jharkhand-men-gawar-ki-sabji-ki-barhi-manga-bajara-men-100-kilo-taka-bika-rahi-upaja-36058 TrendKia — Har trend, sabse pehle.