कम तेल में बनाएं भाप वाले देसी फरे, नाश्ते के लिए प्रोटीन से भरपूर पारंपरिक रेसिपी दाल और चावल के संयोजन से तैयार होने वाला यह पारंपरिक व्यंजन सुबह के नाश्ते और शाम के स्नैक के लिए एक पौष्टिक व स्वादिष्ट विकल्प है। सुबह के भोजन में रोजमर्रा के सामान्य विकल्पों से हटकर कुछ पौष्टिक और तृप्त करने वाला पकाना अक्सर एक चुनौती बन जाता है। यदि आप नियमित पराठे या उपमा के स्थान पर पारंपरिक देसी खानपान की ओर रुख करना चाहते हैं, तो भाप से तैयार किए जाने वाले फरे एक शानदार पकवान हैं। उत्तर भारत के पारंपरिक घरों में पीढ़ियों से लोकप्रिय यह व्यंजन अब पूरे देश में अपनी सादगी और स्वाद के कारण पसंद किया जा रहा है। इस डिश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें तलने की प्रक्रिया शामिल नहीं होती, जिससे यह पेट के लिए काफी हल्की रहती है और शरीर को ऊर्जा भी देती है। पोषण और स्वाद का संतुलित मेल इस पारंपरिक डिश की मुख्य ताकत इसकी पोषण सामग्री है। अंदर भरी जाने वाली दाल शरीर को पर्याप्त प्रोटीन उपलब्ध कराती है, वहीं बाहरी आवरण चावल से तैयार होने के कारण सुपाच्य और कोमल बना रहता है। चाहे बच्चों के लिए शाम के समय कुछ नया और चटपटा परोसना हो या दिन के किसी पहर पौष्टिक भोजन की जरूरत हो, यह तरीका सभी की पसंद पर खरा उतरता है। तेल का न्यूनतम इस्तेमाल इसे स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने वाले लोगों के लिए भी एक बेहतरीन भोजन बनाता है। मसालेदार दाल भरावन के लिए आवश्यक सामग्री इस व्यंजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए भरावन का सही अनुपात में तैयार होना बेहद जरूरी है। इसके लिए करीब एक कप चना दाल लें। साथ में एक इंच अदरक का टुकड़ा, चार से पांच लहसुन की कलियां, दो हरी मिर्च, एक छोटा चम्मच जीरा, स्वादानुसार नमक, एक चुटकी हींग, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर और थोड़ी बारीक कटी हरी धनिया पत्ती की आवश्यकता होगी। यह सभी देसी मसाले दाल को तीखापन और सौंधी खुशबू प्रदान करते हैं। बाहरी परत और तड़के का सामान फरे का बाहरी आवरण बनाने के लिए दो कप चावल का आटा, लगभग दो कप पानी, स्वादानुसार थोड़ा नमक और एक छोटा चम्मच कुकिंग ऑयल चाहिए। अंत में भाप में पके टुकड़ों को कुरकुरा और खुशबूदार बनाने के लिए तड़का तैयार किया जाता है। तड़के के लिए एक से दो बड़े चम्मच सरसों का तेल, आधा छोटा चम्मच राई, कुछ ताजे करी पत्ते, एक चुटकी हींग और साबुत सूखी लाल मिर्च की जरूरत पड़ती है। सरसों के तेल का तीखापन इस डिश के स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है। मसालेदार भरावन तैयार करने की विधि सबसे पहले चना दाल को साफ पानी से धोकर तीन से चार घंटे के लिए भिगो दें। जब दाल पूरी तरह से फूल जाए, तब छलनी की मदद से उसका सारा अतिरिक्त पानी पूरी तरह बाहर निकाल लें। अब इस भीगी हुई दाल को मिक्सर जार में डालें और साथ में अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और जीरा मिलाएं। बिना पानी मिलाए इसे दरदरा पीसना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि महीन पेस्ट बन जाने से इसका पारंपरिक टेक्सचर बिगड़ जाता है। पीसने के बाद इस मिश्रण में हल्दी, नमक, हींग और कटी हुई हरी धनिया अच्छी तरह मिला लें। चावल का मुलायम आटा गूंथने का तरीका एक गहरे बर्तन में पानी उबलने के लिए रखें। इसमें हल्का नमक और एक छोटा चम्मच तेल मिला दें। जैसे ही पानी खौलने लगे, गैस बंद कर दें और गर्म पानी में चावल का आटा डालकर करछुल से मिला लें। इसके बाद बर्तन को लगभग पांच मिनट के लिए ढंककर भाप में छोड़ दें ताकि आटा नमी सोख ले। जब आटा छूने लायक गुनगुना रह जाए, तो हथेलियों से मसलते हुए नरम गूंथ लें। यदि आटा सूखा या कड़ा लगे, तो कुछ बूंदें गुनगुने पानी की छिड़क कर दोबारा चिकना किया जा सकता है। पारंपरिक आकार देने की तकनीक तैयार आटे से छोटी-छोटी लोइयां तोड़ें और उन्हें गोल आकार में थोड़ा मोटा बेल लें। अब बेली हुई पूरी के केंद्र में चम्मच से तैयार चना दाल का भरावन रखें। इसके बाद पूरी को आधा मोड़ दें, जिससे यह अर्धचंद्राकार बन जाए। ध्यान देने योग्य बात यह है कि किनारों को पूरी तरह से दबाकर चिपकाना नहीं है। इसका खुला हुआ मुंह भाप को अंदर तक जाने देता है, जिससे अंदर भरी दाल अच्छी तरह से पक जाती है और इसका असली पारंपरिक स्वरूप निखर कर सामने आता है। भाप में पकाना और सरसों का तड़का स्टीमर में पानी गर्म करें और जालीदार बर्तन पर फरे रखकर पंद्रह से बीस मिनट तक भाप में अच्छी तरह पकाएं। भाप में पकने के बाद ये ठोस और चमकदार हो जाते हैं। अब एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें। तेल से धुआं निकलने पर उसमें राई, हींग, करी पत्ते और सूखी लाल मिर्च डालें। जैसे ही राई चटकने लगे, भाप में पके हुए फरे कड़ाही में डाल दें और मध्यम आंच पर दो से तीन मिनट तक हल्का सा भून लें। तड़के से बाहरी सतह पर हल्का कुरकुरापन आ जाता है। परोसने के सुझाव यह गर्मागर्म देसी नाश्ता ताजी हरी धनिया की तीखी चटनी, लहसुन की लाल चटनी, टमाटर की चटनी या भुनी मूंगफली की चटनी के साथ बेहद लजीज लगता है। कई लोग इसे नारियल की चटनी के साथ भी आनंद लेकर खाते हैं। शाम के समय अदरक वाली गरमागरम चाय के साथ यह एक आदर्श, पौष्टिक और पेट भरने वाला व्यंजन साबित होता है। इसका आप पर असर यह पारंपरिक व्यंजन नाश्ते में तेल और वसा की मात्रा घटाकर प्राकृतिक प्रोटीन शामिल करने का एक व्यावहारिक उपाय प्रदान करता है। • दैनिक खानपान: सुबह के समय तले हुए व्यंजनों की जगह भाप से पके खाद्य पदार्थों को शामिल करने से पाचन हल्का रहता है। इससे दिनभर सुस्ती महसूस नहीं होती और शरीर को निरंतर ऊर्जा मिलती है। • रसोई का बजट: चना दाल और चावल का आटा हर भारतीय घर में आसानी से उपलब्ध रहने वाली सस्ती सामग्रियां हैं। बिना किसी महंगे विदेशी सामग्री के घर पर ही पौष्टिक व्यंजन तैयार किया जा सकता है। • बच्चों का पोषण: यह उन बच्चों के लिए एक बेहतरीन नाश्ता है जो साधारण दाल खाने में आनाकानी करते हैं। नए आकार और हल्के तड़के के कारण वे इसे चाव से खा लेते हैं। • वजन नियंत्रण: कम तेल में तैयार होने और उच्च फाइबर व प्रोटीन युक्त होने से यह लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह आदर्श विकल्प है। ऐसा क्यों हुआ उत्तर भारतीय रसोई में यह व्यंजन सदियों से स्थानीय अनाज और दलहन के पौष्टिक इस्तेमाल के रूप में विकसित हुआ है। • भाप से पकाने की परंपरा: ग्रामीण क्षेत्रों में तेल का संतुलित उपयोग करने और भोजन की प्राकृतिक मिठास बरकरार रखने के लिए भाप तकनीक का उपयोग किया जाता रहा है। इससे पोषक तत्व नष्ट नहीं होते। • दाल का गाढ़ापन: बिना पानी डाले चना दाल को पीसने की विधि भरावन को गीला होने से बचाती है। इससे स्टीमिंग के दौरान दाल बाहर नहीं बहती और अंदर ही ठीक से पकती है। • आटे का खुला आकार: किनारों को न चिपकाने का पारंपरिक तरीका इसलिए अपनाया गया ताकि भाप सीधे दाल तक पहुंच सके। बंद कर देने से दाल अंदर से कच्ची रहने का जोखिम रहता है। सवाल-जवाब 1. चना दाल को पीसते समय क्या पानी डालना चाहिए? नहीं, दाल को बिना पानी मिलाए दरदरा पीसना चाहिए ताकि भरावन गीला न हो और फरे का स्वाद बना रहे। 2. फरे को स्टीमर में कितनी देर पकाना चाहिए? फरे को लगभग 15 से 20 मिनट तक मध्यम से तेज भाप में पकाना पर्याप्त होता है। 3. चावल का आटा गूंथते समय पानी कैसा होना चाहिए? चावल के आटे को हमेशा उबलते हुए गर्म पानी में मिलाकर पांच मिनट ढकना चाहिए, फिर गुनगुना होने पर गूंथना चाहिए। 4. क्या फरे के किनारों को गुजिया की तरह पूरी तरह बंद करना होता है? नहीं, इसके किनारों को खुला छोड़ा जाता है ताकि भाप अंदर तक जाकर दाल को अच्छी तरह पका सके। https://trendkia.com/food/kama-tela-men-banaen-bhapa-vale-desi-phare-nashte-ke-lie-protina-se-bharapura-parnparika-resipi-34659 TrendKia — Har trend, sabse pehle.