कमल ककड़ी से घर पर बनाएं कश्मीरी स्ट्रीट फूड नादरू मोनजे, बेहद आसान है कुरकुरे फ्रिटर्स की विधि कश्मीर की सड़कों पर मिलने वाला मशहूर नादरू मोनजे कमल ककड़ी और बेसन के मसालेदार घोल से तैयार किया जाने वाला एक बेहद क्रिस्पी स्नैक है। इसे चाय के साथ नाश्ते या शाम के समय साधारण घरेलू मसालों के साथ मिनटों में बनाया जा सकता है। कश्मीर की पारंपरिक रसोई अपने नायाब मसालों, विशिष्ट खुशबू और समृद्ध स्वादों के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती है। भव्य दावतों में परोसे जाने वाले वाजवान से लेकर ताजगी देने वाले कहवा तक, घाटी की हर एक पाक कला की अपनी अनूठी पहचान है। इस समृद्ध परंपरा के बीच कश्मीर की गलियों और बाजारों में एक ऐसा स्ट्रीट स्नैक भी तैयार होता है, जो स्थानीय निवासियों और पर्यटकों दोनों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इस लजीज व्यंजन को नादरू मोनजे के नाम से जाना जाता है। कमल के तने यानी कमल ककड़ी के प्रयोग से बनने वाला यह तला हुआ पकवान बाहर से अत्यंत कुरकुरा और अंदर से बेहद कोमल बनावट वाला होता है। लोग इसे अक्सर सुबह के नाश्ते में या शाम की चाय के साथ चाव से खाते हैं। इसे घर की रसोई में भी बिल्कुल उसी कश्मीरी स्वाद के साथ सरलता से तैयार किया जा सकता है। क्या है नादरू मोनजे की खासियत कश्मीर में स्ट्रीट फूड की चर्चा नादरू मोनजे के बिना अधूरी मानी जाती है। कश्मीरी भाषा के अनुसार कमल के तने को नादरू कहा जाता है और मोनजे शब्द का प्रयोग पारंपरिक पकोड़ों या फ्रिटर्स के लिए होता है। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले कमल ककड़ी को बहुत पतले टुकड़ों में काटा जाता है। इसके बाद उन टुकड़ों पर बेसन, चावल के आटे और चुनिंदा मसालों का गाढ़ा लेप चढ़ाया जाता है और फिर उन्हें खौलते तेल में डीप फ्राई किया जाता है। आम सब्जियों के पकोड़ों की तुलना में इसका स्वाद और बनावट बिल्कुल अलग अहसास देती है, क्योंकि तलने के बाद भी कमल ककड़ी का प्राकृतिक क्रंच और रेशेदार बनावट पूरी तरह सुरक्षित रहती है। नादरू मोनजे बनाने की आवश्यक सामग्री इस कश्मीरी व्यंजन को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से ताजी कमल ककड़ी की जरूरत होती है। इसके अलावा घोल तैयार करने के लिए बेसन और अतिरिक्त कुरकुरेपन के लिए चावल का आटा लिया जाता है। मसालों में लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, अजवाइन, हींग और स्वादानुसार नमक का इस्तेमाल होता है। तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में कुकिंग ऑयल और घोल तैयार करने के लिए सामान्य पानी की आवश्यकता पड़ती है। कदम दर कदम तैयार करने की पूरी विधि पहला चरण: कमल ककड़ी पानी के भीतर कीचड़ में उगती है, इसलिए इसके छिद्रों में मिट्टी या अवांछित गंदगी जमा रह सकती है। सबसे पहले इसे बहते साफ पानी से बहुत अच्छी तरह धो लें। इसके बाद चाकू या छिलनी की मदद से ऊपर का छिलका उतार लें। अब इसे अपनी पसंद के अनुसार पतले और लंबे टुकड़ों में अथवा गोल चिप्स के आकार में बारीक काट लें। दूसरा चरण: कटे हुए टुकड़ों को एक बार फिर से पानी में धोएं और छलनी में रखकर सारा पानी निकाल लें। अब एक गहरे बर्तन में बेसन निकालें और उसमें थोड़ा चावल का आटा मिलाएं। इसी मिश्रण में लाल मिर्च, हल्दी, अजवाइन, हींग और नमक डालें। अब थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए एक चिकना और गाढ़ा घोल तैयार करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घोल न तो बहुत अधिक पतला बहे और न ही इतना गाढ़ा हो कि ककड़ी पर भारी गांठ बन जाए। तीसरा चरण: धुली और सुखाई गई कमल ककड़ी के टुकड़ों को तैयार किए गए मसालेदार घोल में डालें। चम्मच या हाथों की सहायता से इसे हल्के हाथों मिलाएं ताकि प्रत्येक टुकड़े पर बेसन के मसालेदार मिश्रण की एक समान और पतली परत अच्छी तरह चिपक जाए। चौथा चरण: एक कड़ाही में तलने के लिए तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए, तब आंच को मध्यम कर दें और घोल में लिपटे कमल ककड़ी के टुकड़ों को एक-एक करके सावधानीपूर्वक तेल में छोड़ें। कड़ाही में एक साथ बहुत ज्यादा टुकड़े डालने से बचें, क्योंकि ऐसा करने से वे आपस में चिपक सकते हैं और तेल का तापमान गिर सकता है। टुकड़ों को मध्यम आंच पर तब तक उलट-पुलट कर तलें जब तक कि वे सुनहरे और पूरी तरह कुरकुरे न हो जाएं। पांचवां चरण: जब नादरू मोनजे दोनों तरफ से अच्छी तरह सिक जाएं, तो उन्हें छलनी से छानकर बाहर निकालें और अतिरिक्त तेल सोखने के लिए टिश्यू पेपर लगी प्लेट में रख लें। गर्मागर्म नादरू मोनजे को ताजी पिसी हुई तीखी हरी चटनी अथवा अपनी मनपसंद सॉस के साथ परोसें। स्वाद और बनावट सुधारने के उपयोगी नुस्खे नादरू मोनजे को बाजार जैसा कुरकुरा बनाने के लिए बेसन के घोल में चावल का आटा जरूर शामिल करना चाहिए। इसके साथ ही कमल ककड़ी के टुकड़ों को बेसन में लपेटने से पूर्व पूरी तरह सूखा होना चाहिए, क्योंकि गीले टुकड़ों पर घोल ठीक से नहीं टिकता और तलते समय छूटने लगता है। तलने की प्रक्रिया हमेशा मध्यम आंच पर ही पूरी करें, जिससे बाहरी आवरण जलने से बचे और अंदर का कमल ककड़ी का तना पूरी तरह से पक जाए। इन आसान सावधानियों के साथ कोई भी अपने घर पर कश्मीर के इस पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकता है। इसका आप पर असर यह पारंपरिक रेसिपी घर की रसोई में कश्मीरी खानपान का प्रामाणिक स्वाद और विविधता लाने का एक आसान विकल्प प्रदान करती है। • नाश्ते में नया विकल्प: आम आलू या प्याज के पकौड़ों की जगह कमल ककड़ी के पौष्टिक और कुरकुरे फ्रिटर्स बनाए जा सकते हैं। शाम की चाय के साथ यह एक बेहतरीन स्नैक साबित होता है। • आसान तैयारी: इस व्यंजन को बनाने के लिए किसी खास सामग्री की जरूरत नहीं होती है। रसोई में मौजूद सामान्य मसालों और बेसन के साथ इसे कुछ ही मिनटों में तला जा सकता है। • किफायती और सुलभ: स्थानीय बाजारों में कमल ककड़ी आसानी से मिल जाती है। इसके इस्तेमाल से घर पर ही होटल या स्ट्रीट फूड जैसा क्रिस्पी स्वाद तैयार किया जा सकता है। • पकाने की सही तकनीक: कमल ककड़ी की सफाई और मध्यम आंच पर तलने की विधि सीखकर अन्य सब्जियों के पकौड़ों को भी अधिक क्रिस्पी बनाया जा सकता है। इससे घरेलू कुकिंग में सुधार होता है। ऐसा क्यों हुआ नादरू मोनजे का जन्म कश्मीर की भौगोलिक स्थिति और वहां की झीलों में प्रचुर मात्रा में उगने वाली कमल ककड़ी के पारंपरिक उपयोग से हुआ है। स्थानीय संसाधनों से स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन तैयार करने की कश्मीरी संस्कृति ने इसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड बना दिया। • झीलों में कमल ककड़ी की बहुतायत: कश्मीर की डल और वुलर जैसी झीलों में कमल के तने भारी मात्रा में पैदा होते हैं। स्थानीय लोगों ने इस मौसमी उपज का उपयोग विभिन्न व्यंजनों और तले हुए स्नैक्स में करना शुरू किया। • कुरकुरेपन की अनूठी बनावट: कमल ककड़ी में एक प्राकृतिक फाइबर और क्रंच होता है जो तलने के बाद भी बना रहता है। साधारण सब्जियों की तुलना में यह अनोखी बनावट लोगों को स्वाद में अधिक भाती है। • सर्द मौसम में गर्म नाश्ते की जरूरत: घाटी के ठंडे मौसम में गर्मागर्म और मसालेदार तले हुए पकवान शरीर को गर्माहट देते हैं। इसलिए चाय के साथ इस तरह के गर्म फ्रिटर्स वहां की रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा बन गए। • स्ट्रीट वेंडरों द्वारा सरलीकरण: स्थानीय रेहड़ी-पटरी वालों ने इसे बेसन और साधारण मसालों में लपेटकर तुरंत तलने की सरल विधि विकसित की। इसने इसे आम जनता और पर्यटकों दोनों के लिए बेहद सुलभ और लोकप्रिय बना दिया। सवाल-जवाब 1. नादरू मोनजे क्या है? नादरू मोनजे कश्मीर का एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है, जिसे कमल ककड़ी को बेसन के मसालेदार घोल में लपेटकर कुरकुरा तला जाता है। 2. कश्मीरी भाषा में नादरू का क्या अर्थ होता है? कश्मीरी भाषा में कमल के तने यानी कमल ककड़ी को नादरू कहा जाता है और मोनजे का अर्थ पकौड़े या फ्रिटर्स होता है। 3. नादरू मोनजे को ज्यादा कुरकुरा बनाने के लिए क्या मिलाया जाता है? घोल में बेसन के साथ थोड़ा चावल का आटा मिलाने से नादरू मोनजे अधिक कुरकुरे और खस्ता बनते हैं। 4. कमल ककड़ी को तलने से पहले अच्छी तरह धोना क्यों जरूरी है? कमल ककड़ी कीचड़ में उगती है और इसके आंतरिक छिद्रों में मिट्टी जमा हो सकती है, इसलिए इसे छीलकर अच्छी तरह धोना आवश्यक होता है। 5. नादरू मोनजे को किस आंच पर तलना चाहिए? इन्हें हमेशा मध्यम आंच पर तलना चाहिए ताकि बाहर की परत जले बिना सुनहरी हो जाए और अंदर से ककड़ी अच्छी तरह पक जाए। 6. नादरू मोनजे को आमतौर पर किसके साथ परोसा जाता है? इसे गर्मागर्म हरी चटनी या अपनी पसंद की किसी अन्य चटनी और गर्म चाय के साथ परोसा जाता है। https://trendkia.com/food/kamala-kakari-se-ghara-para-banaen-kashmiri-strita-phuda-nadru-monje-behada-asana-hai-kurakure-phritarsa-ki-vidhi-55791 TrendKia — Har trend, sabse pehle.