# उत्तर प्रदेश के कन्नौज की 103 साल पुरानी कलावती गट्टा मिठाई, देशी घी और इत्र से मिलती है अनोखी पहचान

> कन्नौज की 103 साल पुरानी पारंपरिक कलावती गट्टा मिठाई अपनी अनोखी खुशबू और स्वाद के कारण देश और दुनिया भर में काफी पसंद की जाती है। इस मिठाई को बनाने में शुद्ध देशी घी, चीनी की चाशनी, इलायची और खास इत्र का इस्तेमाल किया जाता है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-10-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/kannauj-ke-103-sala-purane-kalavati-gatta-sweets-deshi-ghi-aura-itra-se-milati-hai-anokhi-pahachana-51789 · **Language:** Hindi
**Tags:** कन्नौज, कलावती गट्टा, उत्तर प्रदेश, पारंपरिक मिठाई, इत्र

कन्नौज शहर केवल अपनी खास इत्र की महक के लिए ही नहीं बल्कि एक सदियों पुरानी पारंपरिक मिठाई के लिए भी वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान रखता है। यहां लगभग 103 साल से अधिक पुरानी पारंपरिक मिठाई कलावती गट्टा तैयार की जाती है, जिसे पूरी साफ-सफाई और देसी तरीकों से बनाया जाता है। इस पारंपरिक मिठाई का उपयोग विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ प्रमुख त्योहारों पर भी विशेष रूप से किया जाता है। इसका बेजोड़ स्वाद न केवल कन्नौज बल्कि उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों और देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया जाता है, जहां लोग इसे चाव से खाते हैं।

 

## इस तरह तैयार होती है पारंपरिक कलावती गट्टा मिठाई

कलावती गट्टा मिठाई को बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले चीनी की चाशनी का उपयोग करके इसका मुख्य मिश्रण तैयार किया जाता है। उस तैयार मिश्रण को कुछ देर ठंडा करने के बाद उसकी विशेष रूप से कुटाई और फेंटाई की जाती है। मिश्रण को फेंटने के दौरान ही उसमें खुशबूदार इत्र और इलायची मिला दी जाती है, जिससे इस मिठाई का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है। इस पूरी रेसिपी में शुद्ध देशी घी का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कारण गट्टे का स्वाद कई गुना अधिक बढ़ जाता है। मिश्रण तैयार होने के बाद इसे कारीगरों द्वारा छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है।

 

## कई वैरायटी और अलग-अलग फ्लेवर में मिलती है यह मिठाई

गट्टे के रूप-रंग और स्वाद को और अधिक बढ़ाने के लिए इस पर सूखे मेवे यानी ड्राई फ्रूट्स और ताजे गुलाब के फूलों की पत्तियां भी सजाई जाती हैं। यह मिठाई कई अलग-अलग प्रकारों में उपलब्ध होती है, जिसमें रोज फ्लेवर गट्टा और ड्राई फ्रूट्स गट्टा प्रमुख हैं। इसके अलावा ग्राहकों की पसंद के अनुसार और भी कई क्वालिटी के गट्टे बाजार में मिल जाते हैं। हर अलग किस्म के गट्टे की कीमत और वैरायटी के अनुसार इसके दाम भी अलग-अलग तय किए जाते हैं, जिन्हें लोग अपनी पसंद के अनुसार खरीदते हैं।

 

## मेहमाननवाजी में गट्टे का होता है खास इस्तेमाल

दुकानदार **अभिषेक कुमार वैश्य** ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष गट्टे में खुशबू के लिए मुख्य रूप से गुलाब के इत्र का प्रयोग किया जाता है, जिससे गट्टे का स्वाद और उसकी महक दोनों ही काफी बढ़ जाते हैं। कन्नौज आने वाले देश-विदेश के मेहमानों को यह गट्टा सप्रेम भेंट के रूप में भी दिया जाता है। स्थानीय लोग अपने यहां आने वाले देसी और विदेशी मेहमानों का स्वागत इसी पारंपरिक गट्टे से करते हैं, यही वजह है कि यह मिठाई देश के साथ-साथ विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हो चुकी है और गट्टा तैयार होते ही इसकी नियमित सप्लाई विभिन्न स्थानों पर शुरू कर दी जाती है।

## इसका आप पर असर
कन्नौज की इस ऐतिहासिक और पारंपरिक मिठाई के बारे में जानने से स्थानीय खाद्य संस्कृति और घरेलू खान-पान के कारोबार को बढ़ावा मिलता है।

  - **उत्तर प्रदेश में:** स्थानीय कारीगरों और मिष्ठान विक्रेताओं को अपनी पारंपरिक कला को सहेजने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

  - **कन्नौज में:** शहर आने वाले पर्यटकों और मेहमानों के लिए यह गट्टा एक प्रमुख सांस्कृतिक पहचान और उपहार का माध्यम बनता है।

  - **खरीदारों के लिए:** त्योहारों और विशेष आयोजनों पर लोगों को एक अनूठा और पारंपरिक स्वाद चखने का मौका मिलता है।

  - **स्थानीय व्यापार:** देश और विदेश में नियमित सप्लाई होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कुटीर उद्योगों को मजबूती मिलती है।

  - **सांस्कृतिक महत्व:** धार्मिक आयोजनों में इस पारंपरिक मिठाई की मांग बनी रहने से पुश्तैनी हुनर जीवित रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कन्नौज की कलावती गट्टा मिठाई की लोकप्रियता और लंबी निरंतरता के पीछे इसकी पुश्तैनी रेसिपी और खास सामग्रियां हैं।

  - **पारंपरिक रेसिपी:** इस मिठाई को पिछले 103 वर्षों से अधिक समय से एक ही पारंपरिक और देसी विधि से तैयार किया जाता आ रहा है।

  - **शुद्ध सामग्री का प्रयोग:** इसमें चीनी की चाशनी के साथ शुद्ध देशी घी, इलायची और गुलाब के इत्र का इस्तेमाल स्वाद को खास बनाता है।

  - **सांस्कृतिक पहचान:** कन्नौज की इत्र नगरी होने की ख्याति ने इस मिठाई में प्राकृतिक इत्र के प्रयोग को स्वाभाविक रूप से बढ़ावा दिया है।

  - **मेहमाननवाजी की परंपरा:** स्थानीय निवासियों द्वारा देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को गट्टा भेंट करने की परंपरा ने इसकी मांग को हमेशा जीवित रखा है।

## सवाल-जवाब

### 1. कलावती गट्टा मिठाई कितने साल पुरानी है?
कलावती गट्टा मिठाई लगभग 103 साल से भी ज्यादा पुरानी पारंपरिक मिठाई है।

### 2. इस मिठाई को तैयार करने में मुख्य रूप से किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
इसे बनाने के लिए चीनी की चाशनी, देशी घी, इलायची और इत्र का उपयोग किया जाता है।

### 3. गट्टे के स्वाद और खुशबू को बढ़ाने के लिए क्या मिलाया जाता है?
फेंटने के दौरान इसमें इत्र और इलायची मिलाई जाती है, तथा ऊपर से ड्राई फ्रूट्स और गुलाब के फूल की पत्तियां लगाई जाती हैं।

### 4. कलावती गट्टा कितने प्रकार का मिलता है?
यह गट्टा कई प्रकार का होता है, जिसमें रोज फ्लेवर गट्टा और ड्राई फ्रूट्स गट्टा प्रमुख हैं।

### 5. दुकानदार का क्या नाम है जो इस गट्टे की जानकारी देते हैं?
गट्टा दुकानदार अभिषेक कुमार वैश्य ने इसके बारे में जानकारी दी है।

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