कड़वाहट भूलकर उंगलियां चाटेंगे सब, घर पर इस आसान विधि से बनाएं तरीदार करेला मसाला सूखी भुजिया और भरवां सब्जी के पारंपरिक स्वाद से हटकर गाढ़ी मसालेदार ग्रेवी में तैयार रसदार करेला न केवल कड़वाहट को संतुलित करता है, बल्कि रोजमर्रा के खाने को भी खास बना देता है। अक्सर भोजन की मेज पर करेले का नाम सुनते ही कई सदस्य नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं, जिसकी मुख्य वजह इसका तीखा कड़वापन होता है। अधिकांश रसोइयों में इसे केवल सूखी भुजिया या फिर पारंपरिक भरवां रूप में ही पकाया जाता है। इसके विपरीत, तरीदार करेला मसाला एक ऐसा बेहतरीन और अनूठा पकवान है जो अपनी समृद्ध ग्रेवी की वजह से करेले के तीखेपन को पूरी तरह साध लेता है। प्याज, टमाटर, अदरक और लहसुन के मेल से तैयार होने वाला यह रसेदार व्यंजन सादी रोटी, परांठे अथवा गरमा-गरम दाल-चावल के साथ परोसने पर बेहद लजीज साबित होता है। रसोई के साधारण मसालों से भरपूर तैयारी इस स्वादिष्ट सब्जी को तैयार करने के लिए किसी भी दुर्लभ या महंगे सामान की दरकार नहीं होती। आपकी रसोई में नियमित इस्तेमाल होने वाले सामान्य मसालों और ताजी सब्जियों से ही यह शानदार तरी तैयार की जा सकती है। • 500 ग्राम ताजा हरा करेला • एक बड़ा प्याज बारीक कटा हुआ • दो मध्यम आकार के लाल टमाटर • एक इंच लंबा अदरक का टुकड़ा • 5-6 छिली हुई लहसुन की कलियां • दो हरी मिर्च • एक छोटा चम्मच साबुत जीरा • आधा छोटा चम्मच पिसी हल्दी • एक छोटा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर • डेढ़ छोटा चम्मच धनिया पाउडर • आधा छोटा चम्मच खुशबूदार गरम मसाला • एक छोटा चम्मच चटपटा चाट मसाला • एक छोटा चम्मच खट्टा अमचूर पाउडर • स्वादानुसार सफेद नमक • एक छोटा चम्मच दानेदार चीनी • तलने व पकाने के लिए कुकिंग तेल • ग्रेवी की जरूरत के मुताबिक गर्म पानी • बारीक कटा हुआ हरा धनिया सजावट के लिए सब्जी की कड़वाहट कम करने का प्रारंभिक तरीका सब्जी पकाने की शुरुआत हमेशा करेले की सही सफाई से होती है। करेलों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर उनके बीच में सीधा चीरा लगाएं। चाकू या चम्मच की मदद से भीतरी कड़े बीज और गूदे का सफेद भाग बाहर निकाल दें। यदि आप भरवां जैसा रूप देना पसंद करते हैं, तो इन्हें साबुत लंबा रखें और सिर्फ एक तरफ से खुला छोड़ें, अन्यथा मनपसंद टुकड़ों में काट लें। इसके बाद एक गहरे बर्तन में पानी लेकर उसमें थोड़ी हल्दी और नमक घोलें। करेलों को इस नमकीन पानी में कुछ समय के लिए डुबोकर छोड़ दें। इस साधारण प्रक्रिया से करेले का अतिरिक्त कसैलापन पानी में निकल जाता है। तय समय के उपरांत इन्हें पानी से बाहर निकालें और किसी साफ सूती कपड़े से थपथपाकर अच्छी तरह सुखा लें, ताकि तलते वक्त तेल के छींटे न उड़ें। करेलों को बहुत ज्यादा समय तक भिगोकर रखने की कतई आवश्यकता नहीं होती। ग्रेवी के लिए प्याज-टमाटर का पेस्ट भूनने की विधि एक कड़ाही में थोड़ा तेल डालकर मध्यम आंच पर चढ़ाएं। तेल गर्म होते ही साबुत जीरा डालें और उसके चटकने की प्रतीक्षा करें। इसके तुरंत बाद कटी हुई प्याज डालकर करछी से चलाते हुए हल्का बादामी या सुनहरा होने तक भूनें। अब इसमें कटी हरी मिर्च, अदरक और लहसुन की कलियां शामिल करें और धीमी आंच पर महक आने तक पकाएं। जब यह सामग्री अच्छी तरह पक जाए, तो चूल्हा बंद कर दें और मिश्रण को सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें। ठंडा होने पर इसे मिक्सी के जार में डालकर बारीक पीस लें। दूसरी तरफ, दोनों टमाटरों को भी मिक्सी में पीसकर एक चिकनी प्यूरी तैयार कर लें। अब दोबारा कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें, उसमें हल्का जीरा तड़काएं और तैयार प्याज वाला पेस्ट डालकर अच्छी तरह भूनें। इसके बाद टमाटर की प्यूरी डालें और तब तक पकाते रहें जब तक कि टमाटर का कच्चा स्वाद पूरी तरह समाप्त न हो जाए। मसालों का संतुलन और ग्रेवी की भुनाई टमाटर के पकने के पश्चात आंच को धीमा करें और इसमें हल्दी, कश्मीरी लाल मिर्च, धनिया पाउडर, गरम मसाला, चाट मसाला और अमचूर पाउडर मिला दें। साथ ही स्वादानुसार नमक और एक छोटा चम्मच चीनी भी डालें। चीनी और अमचूर का यह अनूठा संगम करेले के बचे-खुचे कड़वेपन को शानदार तरीके से दबा देता है और तरी को चटपटा स्वाद देता है। मसालों को धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनें जब तक कि मसालों के किनारों से तेल अलग होता दिखाई न देने लगे। यदि मसाला कड़ाही के तले में चिपकने लगे या अत्यधिक सूखा लगे, तो उसमें हल्का सा गुनगुना पानी छिड़क सकते हैं। तेल छोड़ने का मतलब है कि ग्रेवी का आधार पूरी तरह तैयार है। इस मोड़ पर ग्रेवी को हल्का सा चख लें ताकि नमक या खटास को अपनी रुचि के अनुसार तुरंत संतुलित किया जा सके। करेलों को सुनहरा तलना और तरी में पकाना एक अलग कड़ाही में पर्याप्त तेल गर्म करें और सुखाए हुए करेलों को मध्यम आंच पर डालें। इन्हें तब तक फ्राई करें जब तक कि बाहरी परत हल्की कुरकुरी और सुनहरी न हो जाए। ध्यान रहे कि इन्हें ज्यादा जलाना या सुखाना नहीं है। तले हुए करेलों को तेल से छानकर एक अलग प्लेट में निकाल लें। अब इन तले हुए करेलों को पहले से तैयार तरी वाली कड़ाही में पलट दें और करछी की मदद से मसाले के साथ अच्छी तरह लपेट दें। तरी को अपनी पसंद के अनुसार गाढ़ा या पतला रखने के लिए आवश्यकतानुसार गर्म पानी मिलाएं। कड़ाही पर ढक्कन लगाएं और धीमी आंच पर कुछ मिनटों तक पकने दें, जिससे रस और मसालों का पूरा स्वाद करेले के भीतरी रेशों में समा जाए। अंत में आंच बंद करके ऊपर से ताजी कटी हरी धनिया पत्ती छिड़कें और गर्मागर्म परोसें। इसका आप पर असर करेले की कड़वाहट कम करने और उसे स्वादिष्ट गाढ़ी तरी में पकाने की यह विधि रोजमर्रा के घरेलू भोजन में पौष्टिकता शामिल करना आसान बनाती है। • स्वाद और पसंद: बच्चे और बड़े जो कड़वाहट के डर से करेला खाने से बचते हैं, वे भी इस चटपटी ग्रेवी वाली सब्जी को पसंद करेंगे। इससे परिवार के सभी सदस्यों की थाली में हरी सब्जियों का संतुलन बनाना सरल हो जाता है। • रसोई का बजट: इस व्यंजन को तैयार करने के लिए केवल घर में मौजूद सामान्य प्याज, टमाटर और बुनियादी मसालों की जरूरत होती है। बाहर से कोई विशेष या महंगी सामग्री खरीदे बिना बेहद कम लागत में एक खास सब्जी तैयार हो जाती है। • समय की बचत: करेले को घंटों धूप में सुखाने या बहुत देर तक पानी में भिगोने की आवश्यकता नहीं पड़ती। झटपट हल्दी-नमक वाले पानी से धोकर इसे आधे घंटे के भीतर आसानी से पकाया जा सकता है। • डाइट और स्वास्थ्य: करेला प्राकृतिक रूप से सेहत के लिए गुणकारी माना जाता है और यह विधि उसके पोषण को सुरक्षित रखती है। भारी तली हुई या जली हुई भुजिया के मुकाबले यह तरीदार रूप पचने में भी हल्का और बेहतर रहता है। ऐसा क्यों हुआ करेले की स्वाभाविक कड़वाहट को संतुलित करने के लिए इस रेसिपी में वैज्ञानिक और पारंपरिक कुकिंग तकनीकों का सटीक तालमेल बैठाया गया है। खटास, हल्की मिठास और भुनी हुई ग्रेवी का संगम इस सब्जी के स्वाद को पूरी तरह बदल देता है। • नमक और हल्दी का प्रभाव: करेले के भीतरी हिस्से को नमक और हल्दी वाले पानी में भिगोने से परासरण क्रिया के जरिए अतिरिक्त कड़वा रस बाहर निकल जाता है। इसी वजह से सब्जी का तीखापन काफी हद तक कम हो जाता है। • खट्टे और मीठे का संतुलन: अमचूर पाउडर की खटास और एक चुटकी चीनी का मिश्रण जीभ की स्वाद ग्रंथियों पर कड़वाहट के असर को धीमा कर देता है। चाट मसाला और कश्मीरी मिर्च मिलकर तीखेपन की जगह चटपटा स्वाद उभारते हैं। • ग्रेवी का आवरण: प्याज, लहसुन और टमाटर को पहले भूनकर पेस्ट बनाने से एक गाढ़ी पकी हुई तरी बनती है। यह तरी तले हुए करेले के रेशों के चारों ओर लिपट जाती है, जिससे मुंह में कड़वाहट की जगह मसालों का स्वाद पहले आता है। सवाल-जवाब 1. करेले की कड़वाहट कम करने के लिए क्या करना चाहिए? करेले के बीज और भीतरी सफेद भाग निकाल दें, फिर उसे नमक और हल्दी मिले पानी में थोड़ी देर भिगोकर सुखा लें। 2. करेला मसाला बनाने के लिए कितनी मात्रा में करेले चाहिए? इस रेसिपी के अनुसार लगभग 500 ग्राम ताजा करेला लेना चाहिए। 3. ग्रेवी में अमचूर और चीनी डालने का क्या फायदा है? अमचूर की खटास और चीनी की हल्की मिठास करेले के कड़वेपन को संतुलित करके तरी को चटपटा बनाती है। 4. प्याज और लहसुन का पेस्ट कब बनाना चाहिए? कड़ाही में प्याज, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च को हल्का सुनहरा भूनने के बाद ठंडा करके मिक्सी में पीसना चाहिए। 5. करेले को ग्रेवी में डालने से पहले क्या करना होता है? करेले को दूसरी कड़ाही में तेल गर्म करके हल्का क्रिस्पी और सुनहरा होने तक फ्राई कर लेना चाहिए। https://trendkia.com/food/karavahata-bhulakara-ungaliyan-chatenge-saba-ghara-para-isa-asana-vidhi-se-banaen-taridara-karela-masala-46398 TrendKia — Har trend, sabse pehle.