खंडवा की महिलाओं ने शुरू की आरंभ मल्टीग्रेन पहल, जानें घर पर एकदम सॉफ्ट रागी रोटी बनाने का आसान तरीका खंडवा में स्मिता बरौले की अगुवाई में महिलाओं ने आरंभ मल्टीग्रेन की शुरुआत की है, जहां मोटे अनाज की थाली परोसी जा रही है। जानिए घर पर बिना टूटे सॉफ्ट रागी रोटी बनाने की आसान विधि। स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ने के कारण आजकल लोग अपनी दैनिक खुराक में गेहूं के साथ बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाजों यानी मिलेट्स को तेजी से शामिल कर रहे हैं। इन पारंपरिक अनाजों में रागी जिसे मड़ुआ भी कहा जाता है, अपने भरपूर पोषक तत्वों के कारण बेहद लोकप्रिय हो रहा है। मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में कुछ महिलाओं ने मिलकर पारंपरिक मोटे अनाज का स्वाद लोगों तक पहुंचाने के लिए आरंभ मल्टीग्रेन नाम से एक खास पहल शुरू की है। यह केंद्र न केवल लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहा है, बल्कि घर पर रागी की नरम और स्वादिष्ट रोटियां तैयार करने का सही तरीका भी सिखा रहा है। खंडवा में आरंभ मल्टीग्रेन की शुरुआत और महिलाओं का योगदान खंडवा में महिलाओं के एक समूह ने स्वास्थ्यवर्धक खानपान को बढ़ावा देने के लिए आरंभ मल्टीग्रेन रसोई की नींव रखी है। इस पहल की शुरुआत करने वाली स्मिता बरौले ने कहा, "कोरोना के समय हमें लगा कि लोगों को पुराने समय के पौष्टिक भोजन की तरफ दोबारा लौटना चाहिए।" इसी विचार को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ज्वार, मक्का, बाजरा और रागी को मिलाकर शुद्ध मल्टीग्रेन रोटियां बनाना शुरू किया। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अनाज चुनने, उनका आटा तैयार करने से लेकर रोटियां बनाने तक का सारा काम महिलाएं खुद अपने हाथों से करती हैं। शुरुआत से ही इस व्यवस्था को लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला है और आज बुजुर्गों से लेकर युवा भी रोजाना यहां पौष्टिक भोजन का आनंद लेने पहुंचते हैं। 100 रुपये की थाली में पौष्टिक और पारंपरिक भोजन का आनंद आरंभ मल्टीग्रेन केंद्र में आने वाले ग्राहकों के लिए 100 रुपये की किफायती कीमत में एक संपूर्ण मल्टीग्रेन थाली परोसी जाती है। इस थाली में ग्राहकों को रागी या मल्टीग्रेन की गर्म रोटियों के साथ ताजी हरी सब्जी, दाल और चावल दिए जाते हैं। इसके अलावा ग्राहकों के पास ज्वार, मक्का और बाजरे की रोटियां चुनने का विकल्प भी उपलब्ध रहता है। यहां नियमित रूप से आने वाले ग्राहक राहुल पवार ने बताया, "घर पर रागी की रोटी बनाना थोड़ा मुश्किल लगता है, इसलिए यहां आकर खाने का मौका मिल जाता है।" थाली के साथ-साथ यहां रागी से बनी इडली भी तैयार की जाती है, जिसे लोग नाश्ते में काफी पसंद कर रहे हैं। रागी के अलावा इससे डोसा और चीला जैसे कई अन्य व्यंजन भी आसानी से बनाए जा सकते हैं। रागी में मौजूद पोषक तत्व और स्वास्थ्य संबंधी लाभ रागी यानी मड़ुआ को पोषण का पावरहाउस माना जाता है, जिसमें शरीर के लिए जरूरी कई प्रमुख तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें फाइबर, कैल्शियम और प्रोटीन की भारी मात्रा होती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और शारीरिक ऊर्जा को बनाए रखने में मदद करती है। गेहूं के मुकाबले रागी में कई ऐसे गुण होते हैं जो सेहत के लिए अधिक फायदेमंद माने जाते हैं। यही वजह है कि बाजार में रेडीमेड रागी का आटा आसानी से उपलब्ध होने के बावजूद लोग अब घर पर ही शुद्ध रागी लाकर उसका आटा तैयार करने और उससे ताजा रोटियां बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। भाप तकनीक से घर पर रागी का आटा गूंथने का सही तरीका घर पर रागी की नरम और फूली हुई रोटी बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि रागी के आटे में गेहूं की तरह प्राकृतिक लोच या चिपचिपाहट नहीं होती है। इस समस्या से निपटने के लिए गर्म पानी की मदद से आटा गूंथने की तकनीक सबसे कारगर साबित होती है। सबसे पहले एक बर्तन में आवश्यकतानुसार पानी डालकर गर्म करें। इसमें स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा शुद्ध घी मिला लें। जब पानी में अच्छी तरह उबाल आ जाए, तब गैस की आंच धीमी कर दें और उसमें रागी का आटा डालें। चम्मच की सहायता से आटे और पानी को अच्छी तरह मिलाएं ताकि आटा पानी को पूरी तरह सोख ले। इसके बाद तुरंत गैस बंद कर दें और बर्तन को 5 मिनट के लिए ढक्कन से ढककर छोड़ दें। इस प्रक्रिया से आटा भाप में हल्का पक जाता है, जिससे उसमें नरमी आती है और उसे गूंथना बहुत आसान हो जाता है। सॉफ्ट रागी रोटी बनाने और सेकने की स्टेप बाय स्टेप विधि भाप में पके हुए आटे को हल्का गुनगुना रहने पर एक बड़ी परात में निकाल लें। अब अपने हाथों में थोड़ा सा पानी या घी लगाकर आटे को लगातार 2 से 3 मिनट तक अच्छी तरह गूंथें। ऐसा करने से आटा एकदम चिकना और सॉफ्ट हो जाता है। अगर गूंथते समय आटा ज्यादा सूखा या कड़ा लगे, तो उसमें थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी छिड़ककर उसे इच्छानुसार कड़ा या नरम किया जा सकता है। इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां तैयार कर लें। चूंकि रागी की रोटी को बेलन से सीधे बेलना मुश्किल होता है, इसलिए इसे प्लास्टिक शीट या गीले कपड़े पर रखकर हाथों से हल्के थपथपाकर गोलाकार रूप दिया जा सकता है। जब रोटी सही आकार में आ जाए, तो उसे गर्म तवे पर डालें। रोटी को दोनों तरफ से मध्यम आंच पर अच्छी तरह सेंक लें। पकने के बाद इसके ऊपर थोड़ा सा देसी घी लगाकर गर्मागर्म परोसें। इसका आप पर असर आरंभ मल्टीग्रेन पहल और घर पर रागी रोटी बनाने की यह विधि पाठकों के स्वास्थ्य और दैनिक खानपान पर सीधा सकारात्मक प्रभाव डालती है। • भारत में: गेहूं के विकल्प के रूप में मिलेट्स को डाइट में शामिल करने से लोगों को पाचन और डायबिटीज नियंत्रण में मदद मिलती है। इससे दैनिक पोषण स्तर में सुधार होता है और बीमारियों का खतरा कम होता है। • खंडवा में: स्थानीय निवासियों को 100 रुपये की किफायती दर पर शुद्ध और पौष्टिक मोटे अनाज की थाली उपलब्ध हो रही है। इससे शहर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को बाहर भी घर जैसा पौष्टिक विकल्प मिल रहा है। • रसोई बजट पर असर: घर पर शुद्ध रागी का आटा तैयार करने से बाजार के महंगे प्रोसेस्ड पैकेट पर निर्भरता खत्म होती है। इससे कम लागत में पूरा परिवार बेहतर और मिलावट-रहित पोषण प्राप्त कर सकता है। • स्वास्थ्य लाभ: नियमित रागी के सेवन से शरीर को प्रचुर कैल्शियम, फाइबर और प्रोटीन की प्राप्ति होती है। यह हड्डियों की मजबूती और वजन नियंत्रित रखने में काफी सहायक सिद्ध होता है। • कुकिंग स्किल में सुधार: भाप तकनीक से रागी गूंथने का तरीका सीखने के बाद रोटियां बेलते समय टूटती नहीं हैं। इससे घर की महिलाएं बिना किसी परेशानी के नरम और फूली हुई रागी रोटियां बना सकती हैं। • महिला सशक्तिकरण: इस तरह के स्थानीय प्रयासों से महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया माध्यम मिल रहा है। इससे समाज में पारंपरिक ज्ञान को व्यावसायिक पहचान भी प्राप्त हो रही है। सवाल-जवाब 1. खंडवा में आरंभ मल्टीग्रेन केंद्र की शुरुआत किसने की? इसकी शुरुआत स्मिता बरौले ने स्थानीय महिलाओं के साथ मिलकर की है, जो पारंपरिक मोटे अनाज से भोजन तैयार करती हैं। 2. आरंभ मल्टीग्रेन में 100 रुपये की थाली में क्या-क्या मिलता है? इस थाली में रागी या मल्टीग्रेन की रोटियों के साथ ताजी सब्जी, दाल और चावल परोसे जाते हैं। 3. रागी का आटा गूंथने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल क्यों किया जाता है? रागी में ग्लूटेन नहीं होता, इसलिए उबलते पानी और भाप की मदद से आटा गूंथने पर वह नरम और लचीला बनता है। 4. रागी में कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं? रागी में प्रचुर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है जो सेहत और हड्डियों के लिए फायदेमंद है। 5. रागी की रोटी बेलते समय टूटने से कैसे बचाएं? आटे को 5 मिनट भाप में रखने के बाद 2 से 3 मिनट गूंथें और बेलन की जगह प्लास्टिक शीट या गीले कपड़े पर हाथ से थपथपाकर बनाएं। 6. आरंभ मल्टीग्रेन में रागी के अलावा कौन सी रोटियां उपलब्ध हैं? वहां रागी के साथ-साथ ज्वार, मक्का और बाजरे की मल्टीग्रेन रोटियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रेरणा और सबक आरंभ मल्टीग्रेन की संस्थापक स्मिता बरौले और खंडवा की महिलाओं की यह सफलता की कहानी प्रेरणादायक पाठ प्रदान करती है। • संकट में अवसर की खोज: कोरोना काल की चुनौतियों के बीच स्वास्थ्यवर्धक भोजन की जरूरत को पहचानकर व्यवसाय शुरू करना साहसिक निर्णय था। कठिन परिस्थितियों में भी सही विचार से नई राह निकाली जा सकती है। • पारंपरिक ज्ञान का सम्मान: आधुनिक फास्ट फूड के दौर में पुराने जमाने के मोटे अनाजों का महत्व समझा और उसे नया रूप दिया। अपनी सांस्कृतिक और खानपान की जड़ों से जुड़कर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। • सामूहिक महिला शक्ति: अकेली शुरुआत करने के बजाय अन्य महिलाओं को जोड़कर हाथ से आटा तैयार करने और खाना पकाने का काम संभाला। टीमवर्क और महिला आत्मनिर्भरता से किसी भी उद्यम को मजबूत बनाया जा सकता है। • गुणवत्ता और शुद्धता पर ध्यान: बाजार के तैयार आटे पर निर्भर रहने की जगह खुद अनाज पीसकर शुद्ध रोटियां बनाईं। उत्पाद की गुणवत्ता ही ग्राहकों के भरोसे की सबसे बड़ी कुंजी होती है। https://trendkia.com/food/khandwa-ki-mahilaon-ne-shuru-ki-aarambh-multigrain-pahala-janen-ghara-para-ekadama-sophta-ragi-roti-banane-ka-asana-tarika-26370 TrendKia — Har trend, sabse pehle.