# लहसुन और देसी मसालों का जादू, इस राजस्थानी चना दाल-दाना मेथी की सब्जी से दूर करें कड़वापन

> राजस्थानी रसोई की पारंपरिक चना दाल और दाना मेथी की सब्जी का स्वाद अनोखा होता है। इसे बनाने की सही विधि और सीक्रेट टिप्स से मेथी का कड़वापन आसानी से दूर किया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-10-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/lahsun-aur-desi-masalon-ka-jaadu-is-rajasthani-chana-dal-dana-methi-ki-sabzi-se-dur-karein-kadwahat-51526 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थानी रेसिपी, चना दाल सब्जी, दाना मेथी, राजस्थानी खानपान, देसी तड़का, इंडियन फूड

पारंपरिक राजस्थानी रसोई में कई ऐसी बेहतरीन रेसिपी मौजूद हैं जो बेहद साधारण सामग्री से तैयार होने के बावजूद खाने में बेजोड़ स्वाद देती हैं। ऐसी ही एक लोकप्रिय देसी डिश चना दाल और दाना मेथी की सब्जी है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं। चना दाल का स्वाद तो अमूमन सभी ने चखा होता है, लेकिन जब इसमें दाना मेथी और पारंपरिक राजस्थानी मसालों का तड़का लगाया जाता है, तो इसकी खुशबू और स्वाद बिल्कुल अलग स्तर पर पहुँच जाते हैं। इस लजीज डिश की सबसे खास बात यह है कि इसे अपनी पसंद के अनुसार खट्टा-मीठा भी तैयार किया जा सकता है। इसे गरमागरम रोटियों या पराठों के साथ परोसा जाए तो भोजन का आनंद दोगुना हो जाता है।

## जरूरी सामग्री
इस पारंपरिक राजस्थानी सब्जी को घर पर आसानी से तैयार करने के लिए कुछ बुनियादी चीजों की जरूरत होती है। इसमें मुख्य रूप से चना दाल, दाना मेथी, खाना पकाने के लिए तेल, राई, जीरा, तेज पत्ता, लहसुन, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर और नमक शामिल हैं। इसके अलावा स्वाद को और ज्यादा बढ़ाने के लिए अमचूर पाउडर और थोड़े से गुड़ का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ये सभी सामग्रियां आमतौर पर हर रसोई में आसानी से मिल जाती हैं, जिनकी मदद से यह शानदार डिश तैयार की जाती है।

## दाल और मेथी को उबालने की प्रक्रिया
इस स्वादिष्ट सब्जी को बनाने की शुरुआत मुख्य सामग्री को तैयार करने से होती है। जालोर की रहने वाली प्रीति सेन के अनुसार, सबसे पहले चना दाल को पूरी रात पानी में भिगोकर रखना जरूरी होता है। अगली सुबह इस दाल को पानी में दो उबाल आने तक पकाना चाहिए। इस दौरान इस बात का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है कि दाल जरूरत से ज्यादा न गले, क्योंकि इसे मसालों और दाना मेथी के साथ दोबारा भी पकाना होता है। इसके साथ ही दाना मेथी को भी हल्का उबाल लेना चाहिए। मेथी को बहुत ज्यादा देर तक नहीं पकाना चाहिए, बल्कि उसे केवल इतना ही उबालना चाहिए कि उसका प्राकृतिक कड़वापन कम हो सके। इन दोनों प्रक्रियाओं के बाद दाल और मेथी को अलग-अलग बर्तन में रख लेना चाहिए।

## तड़का लगाने और मसाले पकाने का तरीका
दाल और मेथी तैयार होने के बाद बारी आती है कड़ाही में तड़का तैयार करने की। सबसे पहले कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें राई, जीरा और तेज पत्ता डालें। इसके तुरंत बाद छह से सात कटी हुई लहसुन की कलियां डालकर उन्हें अच्छी तरह भून लें। अब एक अलग कटोरी में लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर और नमक को थोड़ा सा पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। इस तैयार मसाले के मिश्रण को कड़ाही में डालें और मध्यम आँच पर अच्छी तरह पकने दें। मसाले को कड़ाही में जलने से बचाने के लिए जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी भी मिलाया जा सकता है। जब मसाला तेल छोड़ने लगे और अच्छी तरह पक जाए, तब इसमें पहले से उबली हुई चना दाल और दाना मेथी को डाल दें। इन सभी चीजों को कुछ देर तक अच्छी तरह पकाएं ताकि मसाले दाल और मेथी के कण-कण में अच्छी तरह समा जाएं।

## खट्टा-मीठा स्वाद देने के लिए अंतिम चरण
सब्जी को अंतिम रूप देते समय स्वाद के अनुसार अमचूर पाउडर मिलाया जाता है, जिससे इसमें एक हल्का और बेहतरीन खट्टापन आ जाता है। यदि आपको चटपटा और खट्टा-मीठा स्वाद पसंद है, तो इस चरण में थोड़ा सा गुड़ भी मिलाया जा सकता है। गुड़ का इस्तेमाल करने से सब्जी में एक हल्की सी मिठास घुल जाती है जो इसके पूरे जायके को और भी अधिक खास बना देती है। इस प्रकार पूरी प्रक्रिया के बाद राजस्थानी चना दाल और दाना मेथी की पारंपरिक सब्जी बनकर पूरी तरह तैयार हो जाती है। देसी मसालों और लहसुन के बेहतरीन तड़के वाली यह सब्जी आपके रोजमर्रा के खाने में एक नया और अनूठा स्वाद जोड़ सकती है। इसे आप गरमागरम रोटियों या पराठों के साथ परोस सकते हैं और राजस्थानी संस्कृति के इस पारंपरिक जायके का लुत्फ उठा सकते हैं।

## इसका आप पर असर
इस पारंपरिक रेसिपी को अपने घर पर बनाने से आपके रोजमर्रा के खाने में एक नया और पौष्टिक स्वाद जुड़ता है, जो परिवार के सभी सदस्यों को पसंद आएगा।

- **भारत में:** यह पारंपरिक डिश विभिन्न राज्यों के लोगों को राजस्थानी संस्कृति के अनूठे जायके से रूबरू कराती है।
- **जालोर में:** स्थानीय निवासियों के लिए यह घरेलू और आसानी से उपलब्ध सामग्री से बनने वाला एक बेहतरीन व स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पारंपरिक व्यंजन सदियों पुरानी राजस्थानी culinary परंपराओं का हिस्सा है, जहाँ स्थानीय और सुलभ सामग्रियों का उपयोग करके बेहतरीन स्वाद और पोषण संतुलन प्राप्त किया जाता है।

- **सामग्री की उपलब्धता:** जालोर और पूरे राजस्थान में चना दाल और मेथी जैसी चीजें आसानी से मिल जाती हैं, जो इस डिश का आधार बनती हैं।
- **कड़वापन दूर करने की तकनीक:** मेथी को हल्का उबालने और सही मसालों का मेल बिठाने से इसका स्वाद कड़वा न होकर संतुलित हो जाता है।
- **स्वाद का संतुलन:** अमचूर और गुड़ का उपयोग इसके प्राकृतिक स्वाद को खट्टा-मीठा और संतुलित बनाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थानी चना दाल-दाना मेथी की सब्जी बनाने के लिए मुख्य सामग्रियां क्या हैं?
इसके लिए चना दाल, दाना मेथी, तेल, राई, जीरा, तेज पत्ता, लहसुन, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर और नमक की आवश्यकता होती है।

### 2. दाना मेथी का कड़वापन कैसे दूर किया जाता है?
दाना मेथी को हल्का उबालकर इसका कड़वापन कम किया जाता है, जिससे यह सब्जी में स्वाद अच्छी तरह घुलमिल जाता है।

### 3. चना दाल को पकाने से पहले क्या करना पड़ता है?
चना दाल को सबसे पहले रातभर पानी में भिगोकर रखना होता है और फिर सुबह दो उबाल आने तक पकाना पड़ता है।

### 4. सब्जी में खट्टा-मीठा स्वाद लाने के लिए क्या मिलाया जाता है?
स्वाद के अनुसार अमचूर पाउडर और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर इसे खट्टा-मीठा बनाया जाता है।

### 5. इस सब्जी को किसके साथ परोसा जाता है?
इस पारंपरिक सब्जी को गरमागरम रोटी या पराठे के साथ परोसा जाता है।

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