# लौकी नहीं पसंद करने वालों के लिए बनाएं यह कुरकुरी कचौड़ी, आटा तैयार करते वक्त बरतें जरूरी सावधानी

> घिया या लौकी खाने से बचने वाले बच्चों और बड़ों के लिए गेहूं के आटे, सूजी और बेसन के मिश्रण से खास खस्ता कचौड़ी बनाई जा सकती है। आटा गूंथते समय लौकी की अपनी नमी और तलते वक्त तेल की आंच का सही संतुलन रखना बेहद अहम है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/lauki-nahin-pasnda-karane-valon-ke-lie-banaen-yaha-kurakuri-kachauri-ata-taiyara-karate-vakta-baraten-jaruri-savadhani-47603 · **Language:** Hindi
**Tags:** लौकी कचौड़ी रेसिपी, नाश्ता रेसिपी, खस्ता कचौड़ी, लौकी के व्यंजन, कुकिंग टिप्स

अक्सर घरों में जब भोजन में लौकी की साधारण सब्जी बनती है, तो परिवार के कई सदस्य, विशेषकर बच्चे, खाने में आनाकानी करने लगते हैं। ऐसे में पौष्टिक लौकी को भोजन का हिस्सा बनाने के लिए उसे एक नए और स्वादिष्ट रूप में ढाला जा सकता है। गेहूं के आटे में कद्दूकस की हुई ताजी लौकी, सूजी, बेसन और पारंपरिक भारतीय मसाले मिलाकर तैयार की जाने वाली खस्ता कचौड़ी एक बेहतरीन व्यंजन साबित होती है। सुबह के नाश्ते से लेकर शाम की गर्मागर्म चाय के साथ परोसने के लिए यह एक बहुत ही उम्दा विकल्प है। इसे बनाने में किसी खास जटिल तैयारी की आवश्यकता नहीं पड़ती, बस रसोई में मौजूद आम सामग्रियों से यह आसानी से तैयार हो जाती है।

## स्वाद और बेहतर बनावट के लिए आवश्यक सामग्री
इस कचौड़ी को कुरकुरा और खस्ता बनाने के लिए सामग्री का सही अनुपात महत्वपूर्ण होता है। मुख्य आधार के रूप में गेहूं का आटा, थोड़ा बेसन और सूजी का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा स्वाद बढ़ाने के लिए 1 छोटा चम्मच अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट, आधा छोटा चम्मच दरदरी पिसी सौंफ तथा आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर लिया जाता है। रंग और सुगंध के लिए हल्दी, गरम मसाला, हींग, अजवाइन और सफेद तिल का मिश्रण आटे में मिलाया जाता है। साथ ही स्वादानुसार नमक और बारीक कटा हरा धनिया लिया जाता है। आटे में खस्तापन लाने के लिए मोयन के रूप में 2 बड़े चम्मच तेल या घी और तलने के लिए आवश्यकतानुसार कुकिंग ऑयल की जरूरत होती है। मुख्य घटक के तौर पर कद्दूकस की हुई ताजी लौकी ली जाती है।

## मसालों का मिश्रण और मोयन तैयार करने का चरण
कचौड़ी बनाने की शुरुआत एक बड़े और खुले बर्तन में सूखा मिश्रण तैयार करने से होती है। परात में गेहूं का आटा, बेसन और सूजी को एक साथ निकाल लें। अब इसमें अजवाइन, दरदरी सौंफ, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, गरम मसाला, हींग, सफेद तिल और स्वादानुसार नमक डालें। इन सूखे मसालों को आटे में अच्छी तरह से मिला लें। इसके बाद मोयन के लिए 2 बड़े चम्मच तेल या शुद्ध घी डालें। हाथों से आटे और तेल को तब तक अच्छी तरह मसलें जब तक कि मोयन पूरे आटे में समान रूप से समा न जाए। मोयन की यह प्रक्रिया कचौड़ी को खस्ता और परतदार बनाने में मदद करती है।

## आटा गूंथते समय लौकी की नमी का रखें खास ध्यान
मिश्रण में मोयन मिलाने के बाद कद्दूकस की हुई लौकी, अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट और बारीक कटा हरा धनिया डालें। अब सभी चीजों को एक साथ मिलाते हुए आटा गूंथना शुरू करें। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लौकी में प्राकृतिक रूप से काफी पानी मौजूद होता है। इसलिए शुरुआत में बिल्कुल भी अतिरिक्त पानी न डालें। लौकी के अपने ही रस से आटा बंधने लगता है। यदि मिश्रण बहुत ज्यादा सूखा और बिखरा हुआ महसूस हो, तभी केवल कुछ बूंदें या बहुत थोड़ा पानी छिड़कें। ध्यान रहे कि कचौड़ी का आटा सामान्य रोटी या चपाती के आटे से थोड़ा कड़ा और सख्त होना चाहिए। आटा अच्छी तरह बंध जाने के बाद उसे गीले कपड़े या ढक्कन से ढककर लगभग 10 मिनट के लिए आराम करने दें, जिससे सूजी अच्छी तरह फूल जाए।

## लोइयां तैयार करना और बेलने की सही तकनीक
लगभग 10 मिनट बाद तैयार आटे को एक बार फिर हल्के हाथों से मसल लें। अब इस आटे से छोटी-छोटी समान आकार की लोइयां काट लें। चकले पर लोई रखकर बेलन की सहायता से हल्के हाथों से बेलें। ध्यान रखें कि कचौड़ी को बहुत अधिक पतला नहीं बेलना चाहिए। इसे मध्यम मोटाई का रखें, ताकि तलते समय यह फूले और इसका खस्ता टेक्सचर बरकरार रहे। बहुत पतली बेली गई कचौड़ी मनचाहा कुरकुरापन नहीं दे पाती। यदि बेलते समय आटा चकले या बेलन पर चिपकने लगे, तो थोड़ा सा सूखा आटा या परोथन इस्तेमाल किया जा सकता है।

## तलने के लिए तेल का सही तापमान और धीमी आंच
कड़ाही में कचौड़ी तलने के लिए पर्याप्त तेल डालकर गरम करें। तेल का तापमान मध्यम होना चाहिए, न तो बहुत ठंडा और न ही अत्यधिक गर्म। जब तेल सही गर्म हो जाए, तब इसमें बेली हुई कचौड़ी धीरे से डालें। आंच को मध्यम रखें और कचौड़ी को पकने दें। कचौड़ी को कलछी से हल्का-हल्का दबाएं जिससे वह अच्छी तरह फूल जाए और अंदर तक सिंक सके। जब एक तरफ से हल्की सुनहरी होने लगे, तब उसे पलट दें। दोनों तरफ से हल्का बादामी और सुनहरा रंग आने तक तलें। इसके बाद कचौड़ियों को जालीदार कलछी से निकाल लें ताकि उनका अतिरिक्त तेल निकल जाए। तेज आंच पर तलने की भूल बिल्कुल न करें, क्योंकि तेज आंच पर कचौड़ी बाहर से जल्दी लाल हो जाती है लेकिन अंदर से कच्ची रह जाती है।

## कुरकुरापन बनाए रखने के जरूरी टिप्स और परोसने का तरीका
इस व्यंजन को बनाते समय अक्सर लोग आटे में पहले ही पानी डालकर गलती कर बैठते हैं। अतिरिक्त पानी से आटा ढीला हो जाता है और कचौड़ी खस्ता बनने के बजाय नरम पड़ जाती है या तलते समय तेल सोखने लगती है। सूजी और बेसन का इस्तेमाल कचौड़ी को बढ़िया बनावट देता है, लेकिन सख्त आटा और नियंत्रित आंच ही असली खस्तापन तय करते हैं। इन गरमा-गरम कचौड़ियों को तीखी हरी धनिया-पुदीने की चटनी, खट्टी-मीठी इमली की चटनी, ताजे सादे दही या फिर रसेदार आलू-टमाटर की सब्जी के साथ परोसा जा सकता है। शाम की चाय की चुस्कियों के साथ यह एक मनपसंद नाश्ता बन जाता है। यदि छोटे बच्चों को परोसना हो, तो इसे छोटे-छोटे बाइट साइज के आकार में बनाकर दिया जा सकता है। व्यक्तिगत पसंद के आधार पर मसालों का स्वाद थोड़ा बहुत घटाया या बढ़ाया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
यह आसान घरेलू रेसिपी पौष्टिक सब्जियों से परहेज करने वाले परिजनों को सेहतमंद आहार स्वादिष्ट तरीके से खिलाने में सीधी मदद करती है।

- **घरेलू भोजन में बदलाव:** अक्सर बच्चे और बड़े लौकी की सादी सब्जी खाने में रुचि नहीं दिखाते, जिससे यह व्यंजन बिना किसी झंझट के उनकी थाली में लौकी शामिल करने का रुचिकर साधन बनता है। इसे तैयार करके आप सामान्य नाश्ते को अधिक विविधतापूर्ण बना सकते हैं।
- **रसोई का बजट और सामग्री:** इसमें किसी विदेशी या महंगी सामग्री की जरूरत नहीं होती, बल्कि घर में पहले से मौजूद गेहूं का आटा, बेसन, सूजी और सामान्य मसालों से ही काम चल जाता है। इससे बाजार से महंगे स्नैक्स मंगवाने के खर्चे की बचत होती है।
- **पकाने की समय सीमा:** आटा गूंथने के बाद इसे केवल 10 मिनट आराम देने की जरूरत होती है, जिससे यह सुबह के नाश्ते या शाम की चाय के वक्त बेहद कम समय में झटपट तैयार हो जाता है। व्यस्त दिनचर्या में भी इसे आसानी से बनाया जा सकता है।
- **खानपान की आदतों में सुधार:** हरी मिर्च और मसालों का संतुलन अपने अनुसार तय करके छोटे बच्चों के लिए इसे सुपाच्य और रुचिकर बनाया जा सकता है। इससे परिवार के सभी सदस्यों को पौष्टिक तत्वों का लाभ मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक सब्जियों को कचौड़ी के रूप में तैयार करने का विचार उन परिवारों के लिए उभरा है जहां बच्चे हरी सब्जियां खाने से बचते हैं। इसके अलावा सही तकनीक न अपनाने से कचौड़ी की बनावट बिगड़ जाती है, जिसके पीछे कुछ खास पाक कला कारण मौजूद हैं।

- **लौकी की स्वाभाविक नमी:** कद्दूकस की गई लौकी में अत्यधिक जल तत्व होता है, जो नमक के संपर्क में आते ही तेजी से बाहर निकलने लगता है। यदि आटा लगाते समय पहले ही पानी डाल दिया जाए, तो वह चिपचिपा और अत्यधिक ढीला हो जाता है, जिससे खस्तापन खत्म हो जाता है।
- **सूजी और बेसन की भूमिका:** गेहूं के सादे आटे की तुलना में बेसन स्वाद और सोंधापन बढ़ाता है, जबकि सूजी कचौड़ी की बाहरी परत को सख्त और लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखने में मदद करती है। इन दोनों का उचित मेल कचौड़ी को मनचाहा टेक्सचर देता है।
- **तलने की आंच का प्रभाव:** अत्यधिक तेज आंच पर तलने से बाहर की परत तेजी से जल जाती है और अंदर का आटा कच्चा रह जाता है, जबकि बहुत धीमी आंच कचौड़ी को तेल सोखने पर मजबूर कर देती है। इसलिए मध्यम आंच पर तलने से भाप धीरे-धीरे निकलती है और कचौड़ी खस्ता बनती है।

## सवाल-जवाब

### 1. लौकी की कचौड़ी का आटा गूंथते समय सबसे बड़ी सावधानी क्या रखनी चाहिए?
आटा गूंथते समय शुरुआत में अतिरिक्त पानी बिल्कुल न डालें, क्योंकि कद्दूकस की गई लौकी अपना काफी पानी छोड़ती है।

### 2. कचौड़ी के आटे में सूजी और बेसन मिलाने का क्या फायदा होता है?
सूजी कचौड़ी को बाहरी रूप से कुरकुरी और खस्ता बनाती है, जबकि बेसन इसके स्वाद और सोंधेपन को बेहतर करता है।

### 3. कचौड़ियों को किस तापमान पर और किस आंच पर तलना चाहिए?
कचौड़ियों को मध्यम गर्म तेल में और मध्यम आंच पर ही दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलना चाहिए।

### 4. कचौड़ी बेलते समय मोटाई कितनी रखनी चाहिए?
कचौड़ी को बहुत पतला नहीं बेलना चाहिए; इसे मध्यम मोटाई का रखें ताकि तलने पर यह ठीक से फूल सके।

### 5. आटा गूंथने के बाद उसे कितनी देर तक ढककर रखना जरूरी है?
आटा गूंथने के बाद उसे लगभग 10 मिनट के लिए ढककर रखना चाहिए ताकि मिश्रण अच्छी तरह सैट हो जाए।

### 6. यह कचौड़ी किन-किन चीजों के साथ परोसी जा सकती है?
इसे हरी चटनी, मीठी चटनी, ताजा दही या रसेदार आलू की सब्जी और शाम की चाय के साथ परोसा जा सकता है।

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