{
  "type": "article",
  "title": "मानसून में छत्तीसगढ़ के इस खास पारंपरिक व्यंजन की उठती है महक, स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएंगे",
  "summary": "छत्तीसगढ़ में बरसात के मौसम के दौरान अरबी के पत्तों और उड़द दाल से पारंपरिक 'ईढर' डिश बड़े चाव से बनाई जाती है। यह स्वादिष्ट और चटपटी सब्जी अपने अनोखे स्वाद की वजह से स्थानीय युवा पीढ़ी के बीच भी काफी लोकप्रिय हो रही है।",
  "content": "बरसात का मौसम आते ही छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी इलाकों में एक खास तरह की प्राकृतिक छटा बिखर जाती है। इस सुहावने मौसम के साथ ही राज्य की रसोई में एक बेहद खास और पारंपरिक व्यंजन की महक उठने लगती है। बालोद जिले से लेकर पूरे प्रदेश में कोचई के पत्तों यानी अरबी के पत्तों से एक लाजवाब डिश तैयार की जाती है जिसे स्थानीय भाषा में ईढर कहा जाता है। यह स्वादिष्ट व्यंजन अरबी के पत्तों और उड़द दाल के बेहतरीन तालमेल से बनता है जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध खानपान संस्कृति का एक शानदार और बेहद लोकप्रिय उदाहरण है।\n\nसंस्कृति और स्वाद का अनोखा संगम\nस्थानीय गृहिणी अन्नू नायक बताती हैं कि यह व्यंजन छत्तीसगढ़ की जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है। त्योहारों और खास आयोजनों में इस डिश को बनाना लगभग अनिवार्य माना जाता है, लेकिन बारिश के सुहावने और सामान्य दिनों में भी लोग इसे अपने घरों में बड़े चाव से पकाते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर इसे पारंपरिक विधि का पालन करते हुए सही तरीके से बनाया जाए, तो इसका बेमिसाल स्वाद हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बना देता है। मानसून के महीनों में इस व्यंजन की लोकप्रियता अपने चरम पर होती है क्योंकि इसके मुख्य घटक यानी अरबी के ताजे और हरे पत्ते इस मौसम में आसानी से और भरपूर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।\n\nदाल को तैयार करने की अहम प्रक्रिया\nइस शानदार सब्जी की नींव उड़द दाल से तैयार होती है। ईढर को पकाने की शुरुआत उड़द दाल को साफ पानी में करीब 4 से 6 घंटे तक भिगोने के साथ होती है। जब दाल अच्छी तरह फूल जाती है, तो इसका सारा पानी निकालकर इसे सिलबट्टे या मिक्सर में एकदम बारीक पीस लिया जाता है। दाल का एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करना इस प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा है। पीसने के बाद इस गाढ़े पेस्ट को हाथों से या चम्मच की मदद से बहुत अच्छी तरह फेंटा जाता है। लगातार फेंटने से पेस्ट के अंदर हवा भर जाती है और वह एकदम हल्का और मुलायम हो जाता है। इसी फेंटने की प्रक्रिया से डिश की असली बनावट और बेहतरीन स्वाद उभरकर सामने आता है।\n\nपत्तों पर लेप और सेंकने का तरीका\nदाल का मिश्रण तैयार होने के बाद कोचई के बड़े और साफ पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोकर सुखा लिया जाता है। इसके बाद पत्ते के पिछले हिस्से पर उड़द दाल का तैयार और फेंटा हुआ गाढ़ा पेस्ट बिल्कुल एक समान रूप से फैलाकर लगाया जाता है ताकि कोई भी हिस्सा खाली न रहे। लेप लगाने के बाद पत्ते को बहुत सावधानी से गोल आकार में लपेट कर एक कड़ा रोल तैयार किया जाता है जिससे दाल अंदर सुरक्षित रहे। अब गैस पर तवा गरम करके उस पर थोड़ा सा तेल डाला जाता है। इस गरम तवे पर पत्ते वाले रोल को रखकर चारों तरफ से हल्का सुनहरा रंग आने तक बहुत ही धीमी आंच पर फ्राई किया जाता है या सेंका जाता है। जब यह रोल अच्छी तरह सिंक कर ठंडा हो जाता है, तो चाकू की मदद से इसे छोटे और गोल टुकड़ों में काट कर अलग रख लिया जाता है।\n\nचटपटी और खट्टी ग्रेवी का जादू\nईढर का असली स्वाद इसकी मसालेदार ग्रेवी में छिपा होता है। ग्रेवी तैयार करने के लिए एक भारी तले वाली कड़ाही में तेल गरम किया जाता है। तेल गरम होते ही सबसे पहले सरसों का तेज तड़का लगाया जाता है। सरसों के चटकने के बाद इसमें बारीक कटा हुआ लहसुन, ताजी हरी मिर्च और मूंगफली का चिकना पेस्ट डालकर थोड़ी देर तक अच्छी तरह भूना जाता है। इसके बाद कड़ाही में हल्दी, स्वाद के अनुसार नमक और घर के अन्य नियमित मसाले मिलाए जाते हैं। ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए इसमें 3 से 4 बारीक कटे हुए टमाटर डाले जाते हैं। सब्जी में एक हल्का और बहुत ही स्वादिष्ट खट्टापन लाने के लिए सूखे आम का एक टुकड़ा भी मसाले में मिला दिया जाता है।\n\nधीमी आंच पर पकने की प्रक्रिया\nटमाटर और मसालों के इस मिश्रण को तब तक पकाया जाता है जब तक कि टमाटर पूरी तरह से गल कर मसाले के साथ एकसार न हो जाएं। जब मसाला तेल छोड़ने लगता है, तब ग्रेवी की जरूरत के हिसाब से कड़ाही में गरम पानी डाला जाता है। पानी में उबाल आने के बाद, पहले से काट कर रखे गए ईढर के गोल टुकड़ों को आहिस्ता से ग्रेवी में छोड़ दिया जाता है। इसके बाद कड़ाही को ढक कर करीब 10 मिनट तक बहुत ही धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस धीमी आंच पर पकने के कारण मसालों का तीखा और खट्टा स्वाद पत्तों और दाल के टुकड़ों के भीतर तक पूरी तरह समा जाता है।\n\nनई पीढ़ी भी हुई स्वाद की दीवानी\nइस पूरी प्रक्रिया के बाद छत्तीसगढ़ की पारंपरिक और बेहद स्वादिष्ट ईढर की डिश परोसने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाती है। इसे थाली में गरमागरम चावल के साथ परोसा जाता है। इसके अलावा यह गेहूं की रोटी या फिर स्थानीय ज्वार और बाजरे की रोटी के साथ भी बेहद स्वादिष्ट लगती है। बालोद और आसपास के इलाकों में यह डिश आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। सबसे अच्छी बात यह है कि घर के बड़े बुजुर्गों के साथ साथ आज की युवा और नई पीढ़ी भी बाहर के खाने के बजाय इस पारंपरिक स्वाद को बहुत पसंद कर रही है। बरसात के इस ठंडे मौसम में पारंपरिक भोजन का आनंद लेने के लिए ईढर एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है।\n\nइसका आप पर असर\n• छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए: यह पारंपरिक रेसिपी बारिश के मौसम में स्थानीय खानपान को बढ़ावा देती है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है।\n• अन्य राज्यों के लोगों के लिए: यह डिश घर पर आसानी से बनने वाले नए और सेहतमंद व्यंजनों का एक शानदार विकल्प देती है, जिसे ज्वार या बाजरे जैसी पौष्टिक रोटियों के साथ खाया जा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ईढर मुख्य रूप से किन चीजों से बनाया जाता है?\nयह छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक व्यंजन है जिसे मुख्य रूप से अरबी के पत्तों (कोचई पान) और उड़द दाल के फेंटे हुए पेस्ट से तैयार किया जाता है।\n\n2. उड़द दाल को ईढर बनाने के लिए कितनी देर भिगोना चाहिए?\nदाल को बारीक पीसने से पहले साफ पानी में करीब 4 से 6 घंटे तक भिगोकर रखना बहुत जरूरी होता है ताकि वह नरम हो जाए।\n\n3. ग्रेवी में चटपटा और खट्टा स्वाद लाने के लिए क्या इस्तेमाल किया जाता है?\nग्रेवी में एक स्वादिष्ट खट्टापन जोड़ने के लिए 3 से 4 कटे हुए टमाटरों के साथ सूखे आम का एक टुकड़ा भी डाला जाता है।\n\n4. ईढर के टुकड़ों को ग्रेवी में डालने के बाद कितनी देर तक पकाया जाता है?\nग्रेवी में ईढर के गोल टुकड़े डालने के बाद, उन्हें मसालों का स्वाद सोखने के लिए लगभग 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है।",
  "url": "https://trendkia.com/food/manasuna-men-chhattisgarh-ke-isa-khasa-parnparika-vynjana-ki-uthati-hai-mahaka-svada-aisa-ki-ungaliyan-chatate-raha-jaenge-10014",
  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-07-23",
  "tags": [
    "छत्तीसगढ़ी व्यंजन",
    "ईढर रेसिपी",
    "अरबी के पत्ते",
    "मानसून रेसिपी",
    "बालोद",
    "पारंपरिक खाना"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}