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  "title": "उत्तर प्रदेश के मऊ की बालूशाही विदेश में भी लोकप्रिय, 180 रुपये किलो है भाव",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रानीपुर बाजार की प्रसिद्ध बालूशाही का स्वाद विदेशों तक पहुंच गया है। यह पारंपरिक मिठाई 180 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकती है और अपनी लंबी शेल्फ लाइफ के लिए जानी जाती है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश का मऊ जिला अपने अनूठे पारंपरिक व्यंजनों और खास मिठाइयों के लिए अपनी एक अलग पहचान रखता है। यहां के स्थानीय खानपान की कई वैराइटी ऐसी हैं जो न केवल क्षेत्रीय स्तर पर लोकप्रिय हैं, बल्कि दूर-दराज के महानगरों और अन्य प्रांतों तक पसंद की जाती हैं। इन्हीं जायकेदार मिठाइयों में बालूशाही का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, जिसकी बनावट बाहर से हल्की खस्ता और अंदर से बेहद नरम होती है। मऊ के रानीपुर बाजार में तैयार होने वाली यह बालूशाही अब अपनी खास खूशबू और मिठास के कारण विदेशों तक में अपनी पैठ बना चुकी है और ग्लोबल स्तर पर पसंद की जा रही है।\n\nजिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रानीपुर बाजार में रविंद्र स्वीट हाउस नाम की दुकान पर पिछले करीब 20 वर्षों से लगातार बालूशाही बनाई जा रही है। दुकान संचालक रविंद्र के अनुसार, इस लजीज मिठाई का स्वाद चखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग खींचे चले आते हैं। मऊ के स्थानीय निवासियों के अलावा देश के अन्य बड़े शहरों से भी लोग विशेष तौर पर इस मिठाई की मांग करते हैं। इतना ही नहीं, विदेश यात्रा पर जाने वाले प्रवासी भी यहां से आर्डर देकर विशेष रूप से बालूशाही पैक करवाते हैं और अपने साथ विदेश ले जाते हैं। इस मिठाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लंबे समय तक खराब नहीं होती है, जिससे इसकी मांग लगातार बनी रहती है।\n\nपारंपरिक तरीके से बालूशाही तैयार करने की प्रक्रिया में सबसे पहले शुद्ध मैदा का इस्तेमाल किया जाता है। मैदे में निश्चित मात्रा में घी और थोड़ा सा सोडा मिलाकर इसे अच्छी तरह गूंथा और मिलाया जाता है। इसके पश्चात तैयार किए गए मिश्रण को कुछ देर के लिए रख दिया जाता है ताकि आटा अच्छी तरह सेट हो जाए। इसके बाद गुंथे हुए मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से तोड़कर उन्हें गोल आकार दिया जाता है। इन गोल टुकड़ों को बेहद धीमी से मध्यम आंच पर बहुत ही इत्मीनान से फ्राई किया जाता है। बालूशाही को कभी भी तेज आंच पर नहीं तला जाता है, क्योंकि धीमी आंच पर पकाने से ही इसका बाहरी आवरण कुरकुरा और भीतर का हिस्सा मुलायम बनता है।\n\nजब बालूशाही को सुनहरे रंग में तल लिया जाता है, उसके बाद चीनी और पानी का उपयोग करके चाशनी तैयार की जाती है। चाशनी को सही गाढ़ापन आने तक धीमी आंच पर उबाला जाता है ताकि उसकी चाशनी परफेक्ट बने। इसके बाद तली हुई बालूशाही को इस तैयार चाशनी में डुबोया जाता है और कुछ समय पश्चात बाहर निकाल लिया जाता है। चाशनी की एक समान परत चढ़ने के बाद इस मिठाई का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है। बाहर से हल्की कुरकुरी और अंदर से रसभरी व नरम होने की यही खासियत इस मिठाई को ग्राहकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती है।\n\nदुकानदार रविंद्र बताते हैं कि उनकी दुकान पर बालूशाही बनाने का सिलसिला सुबह लगभग 5 बजे से ही शुरू हो जाता है। तड़के की मेहनत के बाद सुबह 6 से 7 बजे के बीच बालूशाही की पहली खेप बनकर पूरी तरह तैयार हो जाती है। इसके तुरंत बाद दुकान पर इसकी बिक्री का कार्य आरंभ हो जाता है और कई बार तो दोपहर होते-होते ही सारी बालूशाही हाथों-हाथ बिक जाती है और स्टॉक खत्म हो जाता है।\n\nयदि किसी खरीदार को एक साथ बहुत बड़ी मात्रा में बालूशाही की आवश्यकता होती है, तो उसे कम से कम एक दिन पहले अपना आर्डर देना पड़ता है। विशेष रूप से जो लोग इस मिठाई को दूसरे शहरों या विदेश ले जाना चाहते हैं, वे एडवांस में आर्डर देकर इसे तैयार करवाते हैं ताकि समय पर फ्रेश माल मिल सके।\n\nरविंद्र के अनुसार, उनकी दुकान पर बालूशाही की कीमत बेहद किफायती रखी गई है और इसे 180 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाता है। स्थानीय ग्राहकों के साथ-साथ अन्य शहरों और विदेशों की यात्रा करने वाले लोगों की तरफ से भी इसकी लगातार मांग आती रहती है। यही मुख्य वजह है कि रानीपुर की यह पारंपरिक बालूशाही आज भी लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए है और लगातार लोकप्रियता के नए आयाम छू रही है।\n\nइसका आप पर असर\nमऊ की बालूशाही की लोकप्रियता बढ़ने और विदेश तक मांग होने से स्थानीय मिष्ठान कारोबारियों को बढ़ावा मिल रहा है और ग्राहकों के लिए गुणवत्तापूर्ण पारंपरिक मिठाइयां उपलब्ध हो रही हैं।\n\n• भारत में: पारंपरिक और लंबी शेल्फ लाइफ वाली मिठाइयों के कारोबार को बढ़ावा मिलता है जिससे स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ती है।\n• मऊ में: रानीपुर बाजार के स्थानीय दुकानदारों और हलवाइयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से व्यापार में वृद्धि होती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मऊ की प्रसिद्ध बालूशाही कहाँ बनाई जाती है?\nयह बालूशाही मऊ मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर रानीपुर बाजार स्थित रविंद्र स्वीट हाउस पर बनाई जाती है।\n\n2. मऊ की बालूशाही की कीमत क्या है?\nमऊ की इस पारंपरिक बालूशाही की कीमत 180 रुपये प्रति किलोग्राम है।\n\n3. बालूशाही की मांग कहाँ तक पहुँची है?\nइस बालूशाही की मांग स्थानीय स्तर के अलावा दूसरे शहरों और विदेशों तक पहुँच चुकी है।\n\n4. बड़ी मात्रा में बालूशाही खरीदने के लिए क्या नियम है?\nबड़ी मात्रा में बालूशाही या विदेश ले जाने के लिए ग्राहकों को एक दिन पहले ऑर्डर देना पड़ता है।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-09-04",
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    "मऊ बालूशाही",
    "उत्तर प्रदेश मिठाई",
    "रानीपुर बाजार",
    "पारंपरिक व्यंजन",
    "रविंद्र स्वीट हाउस",
    "मऊ न्यूज"
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  "site": "TrendKia"
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