# मिथिला स्टाइल में ऐसे बनाएं खट्टी-चटपटी रसेदार भरवां परवल की सब्जी, परवल खाने से नहीं कतराएंगे लोग

> अगर आप परवल की आम भुजिया या सूखी सब्जी खाकर बोर हो चुके हैं, तो पारंपरिक मिथिला शैली में बनने वाली इस रसेदार और मसालेदार भरवां परवल की रेसिपी को जरूर आजमाएं। आमिल या अमचूर के इस्तेमाल से बनने वाली यह स्वादिष्ट डिश रोटी, पराठे और चावल तीनों के साथ बेहद शानदार लगती है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/mithila-staila-men-aise-banaen-khatti-chatapati-rasedara-bharavan-paravala-ki-sabji-29803 · **Language:** Hindi
**Tags:** परवल की सब्जी, मिथिला रेसिपी, भरवां परवल, भारतीय व्यंजन, पारंपरिक खाना

यदि आप रोजाना परवल की एक जैसी सूखी सब्जी या भुजिया खाकर ऊब चुके हैं, तो अब अपनी रसोई में एक नए और स्वादिष्ट स्वाद को शामिल करने का सही समय है। आज हम आपको एक ऐसी खास रेसिपी के बारे में बता रहे हैं जिसमें कच्चे आम के खट्टेपन यानी आमिल या अमचूर के साथ मसालेदार भरवां परवल तैयार किया जाता है। परवल का यह सीजन चल रहा है और इस समय यह बाजार में काफी किफायती दामों पर उपलब्ध होता है, लेकिन अक्सर लोग इसे देखकर मुंह फेर लेते हैं। यदि आप पकौड़े, भुजिया, भरता और सामान्य सब्जी जैसे पुराने तरीकों से हटकर कुछ नया आजमाना चाहते हैं, तो यह खट्टी और चटपटी भरवां परवल की ग्रेवी वाली डिश आपके लिए एकदम सही विकल्प है।

इस रेसिपी में आमिल या अमचूर का इस्तेमाल सबसे अहम हिस्सा है। पारंपरिक देसी शैली में बनने वाली यह सब्जी इतनी स्वादिष्ट होती है कि इसे खाने के बाद आप परवल की पुरानी और साधारण रेसिपी भूल जाएंगे और बार-बार इसे बनाने की डिमांड करेंगे।

मिथिला क्षेत्र में आम के सीजन के दौरान कच्चे आमों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर धूप में सुखाया जाता है ताकि सालभर उनका इस्तेमाल किया जा सके। इसे साग, दाल या किसी भी अन्य व्यंजन में खट्टापन और बेहतरीन स्वाद लाने के लिए डाला जाता है। इस पारंपरिक विधि में बाजार के आमचूर पाउडर की बजाय घर के बने आमिल का उपयोग किया जाता है। भरवां परवल की इस सब्जी में आमिल का प्रचुर मात्रा में प्रयोग किया जाता है, जिससे इसकी हर एक बाइट में एक अनोखा और खट्टा-चटपटा स्वाद मिलता है।

भरवां परवल बनाने की शुरुआत सबसे पहले परवल को छीलकर अच्छी तरह साफ करने से होती है। इसके बाद परवल को बीच से चीरा लगाकर उसके अंदर के बीजों को सावधानीपूर्वक बाहर निकाल लिया जाता है, क्योंकि इन्हीं बीजों को बाद में मसालों के साथ पीसकर भरावन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके पश्चात परवल के छिले हुए टुकड़ों को कड़ाही में तेल डालकर अच्छी तरह फ्राई कर लिया जाता है।

मसाला तैयार करने के लिए परवल से निकाले गए बीजों के साथ लहसुन, मिर्च और पानी में भिगोए गए आमिल को एक साथ पीस लिया जाता है। इसके बाद कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करके उसमें जीरा और तेजपत्ता का तड़का लगाया जाता है। तड़का चटकने पर कटा हुआ प्याज और पिसा हुआ बीज-मसाला मिश्रण मिलाया जाता है। साथ ही नमक, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और हल्दी पाउडर डालकर मसाले को अच्छी तरह पकाया जाता है। जब मसाला तैयार हो जाता है, तब इसे पहले से फ्राई किए गए परवल के अंदर भर दिया जाता है।

इस डिश की ग्रेवी तैयार करने के लिए पिसे हुए प्याज, लहसुन और अदरक को कड़ाही में गर्म तेल और जीरे के साथ भुना जाता है। इसके बाद पिसा हुआ मसाला और अन्य घरेलू मसाले जैसे हल्दी, मिर्च, धनिया और गरम मसाला डालकर ग्रेवी को अच्छी तरह पकाया जाता है। जब मसाला तेल छोड़ने लगे तो इसमें आवश्यकतानुसार पानी डालकर रस या ग्रेवी तैयार की जाती है। जब ग्रेवी में उबाल आ जाता है, तब मसाले से भरे हुए परवल को इस रस में सावधानी से डालकर थोड़ी देर पकाया जाता है। इस प्रकार तैयार होने वाली यह स्वादिष्ट रसेदार भरवां परवल की सब्जी बनकर पूरी तरह तैयार हो जाती है, जिसे गर्मागर्म चावल, रोटी या पराठे के साथ परोसा जा सकता है।

## इसका आप पर असर
यह पारंपरिक रेसिपी उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो घर पर रोजाना बनने वाली सब्जियों से ऊब चुके हैं और कुछ नया तथा स्वादिष्ट ट्राई करना चाहते हैं।

- **दैनिक खानपान में विविधता:** इस अनोखी खट्टी-चटपटी रेसिपी से बोरिंग खाने को एक नया और मजेदार स्वाद मिलता है।
- **किफायती सामग्री:** सीजन के दौरान परवल बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध होते हैं, जिससे यह बजट में आसानी से बनने वाला व्यंजन बन जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पारंपरिक व्यंजन खास तौर पर ग्रामीण और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों की खानपान पद्धतियों से विकसित हुआ है, जहां मौसमी सब्जियों और दीर्घकालिक परिरक्षण विधियों का उपयोग किया जाता है।

- **मौसमी उपलब्धता:** परवल की बंपर पैदावार के समय इसके उपयोग को विविधतापूर्ण बनाने की आवश्यकता से ऐसी अनूठी रेसिपी सामने आती हैं।
- **स्वाद संतुलन:** आमिल या अमचूर का उपयोग वसायुक्त और मसालेदार सब्जियों में प्राकृतिक खट्टापन लाने के लिए किया जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. भरवां परवल की इस सब्जी को बनाने के लिए मुख्य रूप से किस खट्टी चीज का उपयोग होता है?
इस रेसिपी में पारंपरिक रूप से आमिल या अमचूर का उपयोग किया जाता है।

### 2. परवल के अंदर भरने के लिए मसाले में क्या-क्या पीसकर मिलाया जाता है?
मसाले में परवल के निकले हुए बीज, लहसुन, मिर्च और पानी में भीगा हुआ आमिल पीसकर मिलाया जाता है।

### 3. इस सब्जी को किसके साथ खाया जा सकता है?
इस रसेदार भरवां सब्जी को चावल, रोटी या पराठे के साथ खाया जा सकता है।

### 4. मिथिला क्षेत्र में आमिल कैसे तैयार किया जाता है?
आम के मौसम में कच्चे आम को टुकड़ों में काटकर सुखा लिया जाता है, जिसे सालभर खट्टापन लाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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