मुरादाबाद की बिना चीनी वाली ज्वार बर्फी का उत्तर प्रदेश में बढ़ा क्रेज, जानिए 13 मिलेट्स व्यंजनों का अनोखा प्रयोग मुरादाबाद और संभल प्रशासन की पहल पर तैयार की गई 100 प्रतिशत मिलेट्स से बनी ज्वार बर्फी और लंच बॉक्स यूपी में लोकप्रिय हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्वास्थ्यप्रद खानपान की दिशा में एक नया और अनोखा नवाचार देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर ज्वार और बाजरे जैसे पारंपरिक मोटे अनाजों का उपयोग करके कई तरह के लजीज व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। इनमें विशेष रूप से ज्वार की बर्फी ग्राहकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वाद में बेहतरीन होने के साथ-साथ यह बर्फी सेहत के लिए भी अत्यंत लाभकारी मानी जा रही है। बाजार में इस समय इस बर्फी की भारी मांग बनी हुई है और लोग इसे बड़े चाव से खरीद रहे हैं। मिलेट्स यानी मोटे अनाज से निर्मित होने के कारण यह मानव शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करती है और बिना परिष्कृत चीनी के तैयार होने के कारण स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। प्रशासनिक निर्देश और 100 प्रतिशत मिलेट्स लंच बॉक्स का निर्माण इस नवाचार की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए सीईओ विकास कुमार ने बताया कि इस पूरी पहल की शुरुआत प्रशासनिक अधिकारियों के एक विशेष सुझाव से हुई थी। संभल के डीएम और मुरादाबाद के डीएम ने उनसे एक ऐसा विशेष लंच पैकेट तैयार करने का अनुरोध किया था, जो पारंपरिक भोजन की अवधारणा से पूरी तरह अलग हो। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि इस बॉक्स में पनीर, दाल, चावल, सब्जी या गेहूं की रोटी जैसी सामान्य चीजें शामिल नहीं होनी चाहिए। इसके स्थान पर शत-प्रतिशत मिलेट्स से तैयार व्यंजनों का उपयोग करने की शर्त रखी गई थी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया था कि इस भोजन को ग्रहण करने के बाद कोई भी व्यक्ति भूखा न महसूस करे और उसका पेट पूरी तरह भर जाए। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए विकास कुमार और उनकी टीम ने मोटे अनाजों से कुल 13 अलग-अलग प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए। जब यह भोजन प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो उन्हें यह अभिनव प्रयोग बेहद पसंद आया। इस मिलेट्स लंच पैकेट की शुरुआत सबसे पहले संभल जिले में हुई, जिसके बाद इसे मुरादाबाद में भी काफी सराहना मिली। इसके उपरांत सहारनपुर के डीएम ने भी इस विशेष लंच पैकेट को अपने यहां मंगवाया। सहारनपुर के डीएम पहले संभल में आयोजित मिलेट्स रेसिपी कार्यक्रम में भाग ले चुके थे और वे इस भोजन की गुणवत्ता से काफी प्रभावित थे। इस लंच पैकेट में ज्वार और बाजरे से बने मिलेट्स कटलेट शामिल किए गए थे। इन कटलेट के साथ मौसम के अनुसार कटहल परोसा गया, और जहां कटहल उपलब्ध नहीं था, वहां कच्चे केले का उपयोग किया गया क्योंकि कच्चा केला बाजार में हर समय आसानी से मिल जाता है। गेहूं के ग्लाइसेमिक इंडेक्स और शरीर में शुगर का वैज्ञानिक गणित मिलेट्स के प्रयोग और खानपान की आदतों पर अपने विचार साझा करते हुए विकास कुमार ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहलू को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर हमारे समाज में मिठास और चीनी को बीमारियों के लिए बेवजह बदनाम किया जाता है। अगर व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो एक सामान्य व्यक्ति दिनभर में ज्यादा से ज्यादा एक या दो पीस मिठाई खाता है, या फिर अत्यधिक मिठाई पसंद करने वाले लोग रोजाना 100 ग्राम, 200 ग्राम या 250 ग्राम तक मिठाई का सेवन करते हैं। लेकिन चिकित्सा जगत में इस बात पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है कि हम रोजाना औसतन 100 से 200 ग्राम तक गेहूं का सेवन रोटी या अन्य रूपों में कर लेते हैं। विकास कुमार के अनुसार गेहूं एक लो कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट की श्रेणी में आता है, जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 65 से 67 के बीच दर्ज किया जाता है। जब कोई व्यक्ति नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के खाने में लगातार उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले गेहूं का सेवन करता है, तो उसके शरीर को आवश्यक अधिकांश शुगर सीधे रोटी से ही प्राप्त हो जाती है। इस प्रकार मानव शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने का मुख्य कारण केवल मिठाइयां नहीं हैं, बल्कि रोजाना खाया जाने वाला गेहूं है। इसी वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए गेहूं के विकल्प के रूप में मिलेट्स पर आधारित खाद्य पदार्थों को विकसित किया गया है। मावे की प्राकृतिक मिठास और ग्राहकों की मांग के अनुसार बदलाव गेहूं से होने वाले नुकसान से बचाने और लोगों को स्वस्थ विकल्प देने के उद्देश्य से स्थानीय किसानों के दूध से शुद्ध मावा तैयार किया गया। इस शुद्ध मावे और मोटे अनाजों के मिश्रण से ज्वार की बर्फी और बाजरे की बर्फी तैयार की गई है। इस बर्फी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ऊपर से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त चीनी नहीं मिलाई जाती है। इसकी मिठास पूरी तरह से दूध के मावे में मौजूद प्राकृतिक शर्करा पर निर्भर करती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में ग्राहकों की अपनी-अपनी स्वाद संबंधी प्राथमिकताएं होती हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए रेसिपी में मामूली बदलाव भी किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर मुजफ्फरनगर में जब यह बर्फी उपलब्ध कराई गई, तो वहां के लोगों ने थोड़े अधिक मीठे स्वाद की इच्छा जताई। ग्राहकों की इस मांग का सम्मान करते हुए उनके लिए तैयार की गई बर्फी में मिठास का स्तर 6 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि उत्पाद को पूरी तरह से उपभोक्ता की पसंद के अनुसार ढाला जा रहा है। इस विशेष लंच पैकेट के संग्रह में कुल 9 प्रकार के मिलेट्स कुकीज और बिस्किट, मिलेट्स मोदक, मिलेट्स बर्फी, ज्वार-बाजरे के कटलेट और मिलेट्स समोसे शामिल किए गए हैं। केवल तीन सामग्रियों से निर्मित बर्फी और उसकी बाजार कीमत ज्वार की बर्फी की शुद्धता का जिक्र करते हुए विकास कुमार ने बताया कि इसे बनाने में किसी भी कृत्रिम तत्व या रसायन का प्रयोग नहीं किया जाता। इस बर्फी के निर्माण में केवल तीन मुख्य सामग्रियां इस्तेमाल की जाती हैं: शुद्ध ज्वार का आटा, स्थानीय किसानों के दूध से तैयार मावा और महक के लिए इलायची का फ्लेवर। इन तीनों के अलावा इसमें चौथी कोई चीज नहीं मिलाई जाती। बाजार में इस विशुद्ध और पौष्टिक ज्वार बर्फी की कीमत 500 रुपये प्रति किलोग्राम रखी गई है। अपने अनूठे स्वाद और स्वास्थ्यप्रद गुणों के कारण यह बर्फी पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी खास पहचान बना रही है। इसका आप पर असर भारत में: मिलेट्स आधारित पौष्टिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से पारंपरिक अनाज और स्वास्थ्यप्रद खानपान को प्रोत्साहन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में: मुरादाबाद, संभल, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के स्थानीय किसानों के दूध और मिलेट्स से बने उत्पादों को नया बाजार मिल रहा है। सवाल-जवाब 1. मुरादाबाद में तैयार ज्वार बर्फी की कीमत क्या है? मिलेट्स से बनी शुद्ध ज्वार और मावे वाली इस बर्फी की कीमत 500 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है। 2. ज्वार बर्फी को बनाने में किन मुख्य सामग्रियों का प्रयोग होता है? इस बर्फी में केवल तीन मुख्य सामग्रियां शुद्ध ज्वार, किसानों के दूध से बना मावा और इलायची का फ्लेवर शामिल हैं। 3. इस मिलेट्स लंच पैकेट की शुरुआत किस प्रशासनिक पहल से हुई? संभल और मुरादाबाद के डीएम अधिकारियों ने विकास कुमार को 100 प्रतिशत मिलेट्स आधारित और पेट भरने वाला विशेष लंच बॉक्स तैयार करने का कार्य सौंपा था। 4. इस मिलेट्स बॉक्स में कौन-कौन से व्यंजन शामिल किए गए हैं? इस लंच बॉक्स में 13 प्रकार के व्यंजन शामिल हैं, जिनमें 9 तरह के कुकीज-बिस्किट, ज्वार-बाजरे के कटलेट, मिलेट्स समोसे, मोदक और ज्वार बर्फी शामिल हैं। 5. गेहूं के ग्लाइसेमिक इंडेक्स के बारे में क्या जानकारी सामने आई है? गेहूं का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 65 से 67 के बीच होता है, जिससे रोजाना 100 से 200 ग्राम गेहूं की रोटी खाने से शरीर में शुगर का स्तर बढ़ता है। प्रेरणा और सबक प्रेरणादायक संदेश: प्रशासनिक चुनौतियों को नवाचार में बदलकर मिलेट्स से बने व्यंजनों का एक नया बाजार तैयार किया जा सकता है। • नवाचार की सोच: पारंपरिक भोजन के स्थान पर 100 प्रतिशत मिलेट्स आधारित स्वास्थ्यप्रद विकल्पों का निर्माण करना। • स्वास्थ्य पर ध्यान: परिष्कृत चीनी के स्थान पर मावे की प्राकृतिक मिठास का उपयोग कर बिना चीनी की मिठाई तैयार करना। • स्थानीय आपूर्ति का उपयोग: मौसमी कटहल या आसानी से उपलब्ध कच्चे केले का उपयोग कर व्यंजनों की उपलब्धता बनाए रखना। • ग्राहक की आवश्यकता के अनुसार बदलाव: विभिन्न क्षेत्रों की पसंद के अनुसार मिठास और स्वाद को अनुकूलित करना। https://trendkia.com/food/moradabad-ki-bina-chini-vali-jowar-barfi-ka-uttar-pradesh-men-barha-kreja-janie-13-millets-vynjanon-ka-anokha-prayoga-18224 TrendKia — Har trend, sabse pehle.