# मोरिंगा के पत्तों से एक साथ तैयार करें पौष्टिक चाय और स्वादिष्ट पराठा, जानिए बनाने की खास विधि

> मोरिंगा की पत्तियों को उबालकर पहले हर्बल चाय बनाएं और फिर बची हुई पत्तियों को आटे में गूंथकर सेहतमंद पराठे या रोटियां तैयार करें। इस आसान तरीके से पोषक तत्वों का पूरा लाभ मिलता है और पत्तियां भी व्यर्थ नहीं होतीं।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/moringa-ke-patton-se-eka-satha-taiyara-karen-paushtika-chaya-aura-svadishta-paratha-janie-banane-ki-khasa-vidhi-38224 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोरिंगा रेसिपी, मोरिंगा चाय, मोरिंगा पराठा, सहजन के पत्ते, हेल्दी डाइट, आयुर्वेदिक खानपान, जीरो वेस्ट कुकिंग

आयुर्वेद की परंपरा में मोरिंगा को केवल एक सामान्य आहार नहीं, बल्कि कई औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। घर की बालकनी में गमले में या बगीचे में इसका पौधा बहुत सरलता से पनप जाता है, और स्थानीय बाजारों में भी इसकी ताजी हरी पत्तियां आसानी से मिल जाती हैं। आमतौर पर लोग किसी एक डिश के लिए हरी पत्तियों का उपयोग करते हैं और बचा हुआ हिस्सा हटा देते हैं, लेकिन थोड़ी सी समझदारी से आप एक ही तैयारी में दो अलग-अलग स्वास्थ्यवर्धक चीजें तैयार कर सकते हैं। इस दोहरे नुस्खे में पहले ताजी पत्तियों से ताजगी देने वाली हर्बल चाय बनाई जाती है, और फिर छानने के बाद बची पत्तियों से पौष्टिक पराठा या रोटी सेंकी जाती है।

## पत्तियों की प्रारंभिक सफाई और तैयारी
इस व्यंजन प्रक्रिया को शुरू करने के लिए सबसे पहले ताजी और हरी मोरिंगा की पत्तियां लेकर आएं। इन पत्तियों को साफ बहते पानी में अच्छी तरह धो लें ताकि उन पर जमी धूल और मिट्टी पूरी तरह निकल जाए। धोने के बाद पत्तियों को छलनी या साफ कपड़े पर रखकर अतिरिक्त पानी निथरने दें। इसके बाद एक धारदार चाकू से पत्तियों को बारीक काट लें। बारीक कटी पत्तियों को अदरक कूटने वाले खरल या छोटी ओखली में डालकर हल्का सा कूट लें। पत्तियों को इस तरह कूटने से उनका प्राकृतिक रस और पोषक तत्व पकने के दौरान आसानी से पानी में घुल जाते हैं।

## स्वास्थ्यवर्धक मोरिंगा चाय तैयार करने का तरीका
चाय तैयार करने के लिए एक बर्तन में 1 गिलास पीने का पानी चढ़ाएं। जब पानी थोड़ा गर्म होने लगे, तब उसमें लगभग 1 मुट्ठी बारीक कटी और कुटी हुई मोरिंगा की पत्तियां डाल दें। आंच को मध्यम रखें और पानी को तब तक उबलने दें जब तक कि वह घटकर ठीक 1 कप न रह जाए। ऐसा करने से पत्तियों के सारे लाभदायक तत्व काढ़े जैसे इस पेय में समा जाते हैं। जब पानी 1 कप जितना बचे, तब आंच बंद कर दें और एक छन्नी की मदद से इस गरमा-गरम चाय को कप में छान लें। इसे सीधे सादे रूप में पिया जा सकता है, अथवा स्वाद और ताजगी बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा सा नींबू का रस, चुटकी भर चाट मसाला और शहद भी मिलाया जा सकता है। चाय छानने के बाद छलनी में बचे हुए उबले पत्तों को अलग सुरक्षित रख लें।

## उबली पत्तियों से बनाएं पौष्टिक पराठे
छलनी में बची हुई उबली पत्तियों को फेंकने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। इन पत्तियों को आवश्यकतानुसार गेहूं के आटे में मिला लें। आटे का स्वाद और पोषक मूल्य और अधिक बढ़ाने के लिए उसमें हल्का नमक, थोड़ी सी अजवाइन और थोड़ा बेसन भी मिलाया जा सकता है। इन सभी सामग्रियों को एक साथ मिलाकर गुनगुने पानी की मदद से एक नरम और लचीला आटा गूंथ लें। अब इस गूंथे हुए आटे की लोइयां बनाकर तवे पर गरमा-गरम पराठे या सादी रोटियां सेकें। उबली हुई पत्तियों में मौजूद फाइबर सुरक्षित रहता है, जो पाचन तंत्र और गट हेल्थ को सुधारने में बेहद मददगार सिद्ध होता है। इस दोहरे उपयोग से पत्तियों की बर्बादी शून्य हो जाती है और शरीर को भरपूर पोषण मिल जाता है।

## इसका आप पर असर
यह तरीका दैनिक रसोई में पोषण बढ़ाने और खाद्य सामग्री की बर्बादी रोकने का आसान उपाय प्रदान करता है।

- **दैनिक पोषण:** पत्तियों को फेंकने के बजाय दोबारा आटे में मिलाने से शरीर को अधिक मात्रा में फाइबर और आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। यह पाचन क्रिया और गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है।
- **रसोई का बजट:** एक ही मुट्ठी पत्तियों से पेय और मुख्य भोजन दोनों तैयार हो जाते हैं। इससे सामग्री का पूरा सदुपयोग होता है और रसोई का खर्च तथा बर्बादी घटती है।
- **आसान उपलब्धता:** बालकनी या बगीचे में लगे पौधे से ताजी पत्तियां तोड़कर इसे बिना किसी जटिल उपकरण के बनाया जा सकता है। व्यस्त दिनचर्या में भी इसे आसानी से आजमाया जा सकता है।
- **स्वाद और विविधता:** उबली पत्तियों के पराठे में अजवाइन और बेसन मिलाने से रोज के सादे नाश्ते को एक नया और स्वादिष्ट विकल्प मिलता है। इसे परिवार के सभी सदस्य आसानी से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
आमतौर पर हरी पत्तियों के काढ़े या चाय बनाने के बाद लोग बची हुई सामग्री को अनुपयोगी मानकर फेंक देते हैं। इस दोहरे नुस्खे को अपनाने का मुख्य कारण पोषक तत्वों की पूरी खपत सुनिश्चित करना और खाद्य बर्बादी को खत्म करना है।

- **पोषक तत्वों का निष्कर्षण:** पत्तियों को कूटकर उबालने से उनके पानी में घुलनशील पोषक तत्व चाय में आ जाते हैं। पानी के 1 कप रहने तक पकने से काढ़ा सांद्र और गुणकारी बन जाता है।
- **फाइबर का संरक्षण:** पानी में उबालने के बाद भी पत्तियों का अघुलनशील रेशा यानी फाइबर छन्नी में सुरक्षित बच जाता है। इसे आटे में गूंथ देने से गट हेल्थ के लिए जरूरी रेशा नष्ट होने से बच जाता है।
- **सॉफ्ट टेक्सचर:** उबली हुई पत्तियां पहले से ही नरम हो चुकी होती हैं, जिससे वे बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के आटे में एकसार मिल जाती हैं। इससे पराठे बेलते समय फटते नहीं हैं और नरम बनते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. मोरिंगा की चाय बनाने के लिए कितना पानी लेना चाहिए?
चाय बनाने के लिए 1 गिलास पानी लें और उसमें 1 मुट्ठी कुटी हुई पत्तियां डालकर तब तक पकाएं जब तक वह घटकर 1 कप न रह जाए।

### 2. मोरिंगा की चाय का स्वाद कैसे बेहतर किया जा सकता है?
छानी हुई चाय में थोड़ा सा नींबू का रस, चुटकी भर चाट मसाला और शहद मिलाकर इसका स्वाद बढ़ाया जा सकता है।

### 3. चाय छानने के बाद बची पत्तियों का क्या करना चाहिए?
बची हुई उबली पत्तियों को फेंकने के बजाय गेहूं के आटे में नमक, अजवाइन और थोड़ा बेसन मिलाकर पराठे या रोटियां बनानी चाहिए।

### 4. मोरिंगा के पराठे खाने से क्या स्वास्थ्य लाभ होता है?
मोरिंगा की पत्तियों में प्रचुर फाइबर होता है, जो आटे में मिलकर शरीर को पोषण देता है और गट हेल्थ को दुरुस्त रखता है।

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