नरम और फूली हुई पूरियां बनाने के लिए आटा गूंथने से लेकर तलने तक के खास नियम सख्त और बेजान पूरियों से परेशान हैं तो आटा गूंथने के संतुलन, तेल के तापमान और बेलने के सही तरीके को समझकर हलवाई जैसी मुलायम पूरियां तैयार की जा सकती हैं। अक्सर घरों में पूरियां बनाते समय वे कड़क हो जाती हैं या फिर तेल में जाते ही चपटी रह जाती हैं और बिल्कुल नहीं फूलतीं। इस परेशानी से बचने के लिए आटा तैयार करने की विधि से लेकर कड़ाही में तलने तक की पूरी प्रक्रिया में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। जब हर चरण को सही अनुपात और तरीके से पूरा किया जाता है, तो पूरियां एकदम खस्ता, फूली हुई और मुंह में घुलने जैसी मुलायम बनती हैं। आटे का सही लचीलापन और मोयन का अनुपात पूरी के सख्त होने का सबसे मुख्य कारण आटे का जरूरत से ज्यादा कड़ा हो जाना है। आमतौर पर पूरी का आटा सामान्य रोटी के आटे के मुकाबले थोड़ा कड़ा रखा जाता है, लेकिन इसमें इतना ज्यादा खिंचाव या सूखापन नहीं होना चाहिए कि बेलते वक्त किनारों से दरारें पड़ने लगें। आटा गूंथते समय एक साथ सारा पानी डालने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके पानी मिलाएं। इससे आटे में एकसमान खिंचाव पैदा होता है और उसे संभालना काफी आसान हो जाता है। पूरियों को भीतर से नरम बनाए रखने के लिए उसमें उपयुक्त मोयन देना जरूरी है। इसके लिए लगभग 2 कप गेहूं के आटे में 1 से 2 छोटे चम्मच तेल या घी का इस्तेमाल करें। आटे में तेल डालकर पहले हाथों से अच्छी तरह मिला लें, ताकि चिकनाई पूरे मिश्रण में बराबर पहुंच जाए। इसके बाद आवश्यकतानुसार पानी डालते हुए गूंथें। यह ध्यान रखें कि तेल की मात्रा जरूरत से ज्यादा न बढ़े, क्योंकि अत्यधिक चिकनाई आटे की बुनियादी बनावट को बिगाड़ सकती है। आटे को आराम देने का समय और बेलने की तकनीक आटा तैयार हो जाने के तुरंत बाद पूरियां बेलने की जल्दबाजी न करें। गूंथे हुए आटे को किसी साफ कपड़े या बर्तन से ढककर 10 से 15 मिनट के लिए रख देना चाहिए। इतने समय में आटे के कणों में नमी अच्छी तरह समा जाती है, जिससे लोई बेलते समय आसानी से फैलती है। हालांकि, इसे रोटी के आटे की तरह बहुत लंबी अवधि तक छोड़ना भी ठीक नहीं है। यदि गूंथते वक्त आटा बहुत सूखा महसूस हो रहा हो, तो उसी समय थोड़ा सा पानी डालकर उसकी नमी दुरुस्त कर लें। पूरियों को बेलते समय उनकी मोटाई पर खास नजर रखनी चाहिए। पूरी न तो बहुत ज्यादा मोटी होनी चाहिए और न ही कागज की तरह पतली। यदि पूरी एक तरफ से मोटी और दूसरी तरफ से पतली रह जाएगी, तो कड़ाही में वह एकसमान रूप से कभी नहीं फूल पाएगी। सभी पूरियों को एक बराबर मोटाई में बेलना जरूरी है। इसके अलावा, बेलने के दौरान सूखे परथन का इस्तेमाल कम से कम करें। ज्यादा सूखा आटा कड़ाही के गर्म तेल में छूटकर जलने लगता है, जिससे तेल काला पड़ जाता है और पूरियों का स्वाद भी खराब हो जाता है। कड़ाही में तेल का तापमान और तलने की विधि पूरी के न फूलने अथवा बहुत ज्यादा तैलीय बन जाने के पीछे तेल का गलत तापमान सबसे बड़ी वजह होता है। यदि तेल पर्याप्त गर्म नहीं होगा और ठंडा रह जाएगा, तो पूरी अपने अंदर बहुत सारा तेल सोख लेगी और फूलने में नाकाम रहेगी। इसके विपरीत, यदि तेल से बहुत ज्यादा धुआं निकल रहा हो, तो पूरी डालते ही बाहर से तुरंत गहरी भूरी हो जाएगी और अंदर से कच्ची रह सकती है। हमेशा कड़ाही को मध्यम से तेज आंच पर रखकर तेल को गर्म करें। तेल सही से गर्म हुआ है या नहीं, इसकी जांच करने के लिए आटे की एक नन्हीं सी गोली तेल में डालें। अगर वह गोली पेंदे में बैठने के बजाय तुरंत ऊपर आकर धीरे-धीरे तलने लगे, तो समझ लें कि तेल पूरी तलने के लिए एकदम मुफीद है। गर्म तेल में पूरी डालने के फौरन बाद कलछी से उसके ऊपरी हिस्से पर हल्का सा दबाव बनाएं। इस हल्के दबाव से पूरी के अंदर भाप का दबाव बनता है और वह गेंद की तरह फूल जाती है। जब पूरी एक तरफ से अच्छी तरह फूल जाए, तो उसे पलट दें और दूसरी तरफ से भी हल्का सुनहरा होने तक सेंक लें। तलते समय एक साथ बहुत सारी पूरियां कड़ाही में डालने की गलती न करें, क्योंकि इससे तेल का तापमान अचानक गिर जाता है और पूरियां ठीक से नहीं सिक पातीं। इसका आप पर असर रसोई में सही तकनीक अपनाने से खाना बनाने का अनुभव और भोजन की गुणवत्ता दोनों बेहतर होते हैं। • तेल की बचत: सही तापमान पर तलने से पूरियां अतिरिक्त तेल नहीं सोखती हैं। इससे भोजन हल्का रहता है और सेहत पर भारी नहीं पड़ता। • आटे का सही इस्तेमाल: सूखा आटा कम लगाने से कड़ाही का तेल जलकर काला नहीं पड़ता। आप बचे हुए तेल को बिना किसी दुर्गंध या जले कणों के दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। • समय और मेहनत: 10 से 15 मिनट आटा ढककर रखने से बेलने में जोर नहीं लगाना पड़ता। पूरियां तेजी से और बिना फटे गोल तैयार होती हैं। • खाने का बेहतर स्वाद: एकसमान बेलने और उचित मोयन से पूरियां लंबे समय तक मुलायम बनी रहती हैं। टिफिन या यात्रा में ले जाने पर भी वे कड़ी नहीं होतीं। ऐसा क्यों हुआ पूरियों का सख्त बनना या ठीक से न फूलना मुख्य रूप से आटे में नमी की कमी, असमान मोटाई और तेल के अनुचित तापमान की वजह से होता है। इन तकनीकी गलतियों के कारण भाप सही तरीके से अंदर नहीं बन पाती। • आटे का सूखापन: जब आटा बहुत ज्यादा कड़ा गूंथा जाता है, तो उसमें लोच खत्म हो जाता है। बिना पर्याप्त नमी के आटा भाप के दबाव से फैल नहीं पाता और तलने के बाद कड़ा हो जाता है। • तेल का कम तापमान: ठंडे या कम गर्म तेल में डालने पर पूरी को तुरंत उठने वाली भाप का झटका नहीं मिलता। इस वजह से वह फूलने के बजाय सिर्फ तेल सोखती रहती है। • असमान मोटाई: बेलते समय कहीं मोटा और कहीं पतला रह जाने से भाप एक जगह से बाहर निकल जाती है। पूरी के दोनों परतें अलग होकर फूल नहीं पातीं। सवाल-जवाब 1. 2 कप गेहूं के आटे में कितना तेल मिलाना चाहिए? 2 कप गेहूं के आटे में लगभग 1 से 2 छोटे चम्मच तेल या घी डालना पर्याप्त होता है। 2. आटा गूंथने के बाद उसे कितनी देर तक ढककर रखना चाहिए? गूंथे हुए आटे को 10 से 15 मिनट के लिए ढककर रखना चाहिए ताकि उसमें नमी बराबर फैल जाए। 3. पूरी बेलते समय सूखा आटा क्यों नहीं लगाना चाहिए? सूखा आटा कड़ाही के गर्म तेल में जल जाता है, जिससे तेल काला पड़ता है और पूरी का स्वाद बिगड़ जाता है। 4. तेल का तापमान सही है या नहीं, यह कैसे जांचें? आटे का एक छोटा टुकड़ा तेल में डालें; अगर वह तुरंत ऊपर आकर धीरे-धीरे तलने लगे, तो तेल तैयार है। 5. पूरी को तेल में डालते ही क्या करना चाहिए? पूरी को तेल में डालते ही कलछी से उसके ऊपर हल्का दबाव देना चाहिए ताकि वह आसानी से फूल जाए। https://trendkia.com/food/narama-aura-phuli-hui-puriyan-banane-ke-lie-ata-gunthane-se-lekara-talane-taka-ke-khasa-niyama-46099 TrendKia — Har trend, sabse pehle.