# नाश्ते को दें दक्षिण भारतीय स्वाद का तड़का, चावल के आटे और छाछ से ऐसे बनाएं तमिलनाडु की पारंपरिक मोर कली

> सुबह के नाश्ते के लिए तमिलनाडु की पारंपरिक डिश मोर कली एक बेहतरीन और स्वस्थ विकल्प है, जिसे चावल के आटे, छाछ और हल्के मसालों के तड़के से आसानी से तैयार किया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/nashte-ko-den-dakshin-bharatiya-swad-ka-tadka-chawal-ke-aate-aur-chach-se-aise-banayen-tamil-nadu-ki-paramparik-mor-kali-31576 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोर कली रेसिपी, तमिलनाडु नाश्ता, दक्षिण भारतीय व्यंजन, चावल के आटे का नाश्ता, हेल्दी ब्रेकफास्ट, साउथ इंडियन फूड

सुबह की आपाधापी में हर घर की रसोई में एक ही सवाल सबसे ज्यादा गूंजता है कि नाश्ते में आखिर क्या बनाया जाए। गृहिणियों से लेकर खुद खाना बनाने वाले कामकाजी युवाओं तक, सभी एक ऐसी रेसिपी की तलाश में रहते हैं जो फटाफट तैयार हो जाए, खाने में स्वादिष्ट हो और पाचन तंत्र के लिए भी पूरी तरह से अनुकूल हो। अक्सर लोग रोज-रोज पोहा, उपमा, चीला या पराठे खाकर ऊब जाते हैं और कुछ नया स्वाद चखना चाहते हैं। अगर आप भी इसी तरह की कशमकश से जूझ रहे हैं, तो दक्षिण भारत के तमिलनाडु प्रांत की एक बेहद लोकप्रिय और पारंपरिक डिश मोर कली आपके इस सुबह के असमंजस का एक आदर्श समाधान बन सकती है। यह भोजन अपनी सादगी और अद्भुत स्वाद के लिए पीढ़ियों से पसंद किया जा रहा है।

 

## मोर कली क्या है और इसकी लोकप्रियता का राज क्या है
 मोर कली तमिलनाडु के पारंपरिक व्यंजनों का एक अनमोल हिस्सा है। तमिल भाषा में मोर का अर्थ छाछ होता है और कली का तात्पर्य एक पके हुए गाढ़े हलवे या उपमा जैसी बनावट वाले व्यंजन से है। यह डिश मूल रूप से चावल के आटे और हल्की खट्टी छाछ के मिश्रण को पकाकर तैयार की जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में तेल और मसालों का इस्तेमाल नाममात्र का होता है। यही कारण है कि यह खाने में बेहद हल्की और पौष्टिक होती है। यह उन लोगों के लिए भी एक शानदार विकल्प है जो अपने आहार में कम वसा और सुपाच्य भोजन को शामिल करना चाहते हैं। बच्चे हों या बुजुर्ग, हर उम्र के लोग इसे चाव से खा सकते हैं और यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करती है।

 

## मोर कली बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियां
 इस स्वादिष्ट और पारंपरिक डिश को बनाने के लिए किसी विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं होती है। रसोई में आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजों से ही इसे तैयार किया जा सकता है। आपको निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगी।

  - **चावल का आटा:** एक कप बढ़िया पिसा हुआ चावल का आटा लें।
 - **छाछ:** दो कप ताजी छाछ या पानी मिलाकर पतला किया हुआ हल्का खट्टा दही।
 - **नमक:** स्वादानुसार साधारण नमक।
 - **राई या सरसों के दाने:** एक छोटा चम्मच तड़के के लिए।
 - **चना दाल:** एक छोटा चम्मच कुरकुरे स्वाद के लिए।
 - **उड़द दाल:** एक छोटा चम्मच।
 - **सूखी लाल मिर्च:** दो साबुत मिर्च, जो डिश को सौंधापन देती हैं।
 - **हरी मिर्च:** दो बारीक कटी हुई तीखेपन के लिए।
 - **करी पत्ता:** आठ से दस ताजे पत्ते बेहतरीन खुशबू के लिए।
 - **हींग:** एक चुटकी, जो पाचन को बेहतर बनाती है।
 - **तेल:** दो चम्मच नारियल का तेल या सरसों का तेल।
 - **देसी घी:** एक छोटा चम्मच, परोसते समय ऊपर से डालने के लिए (वैकल्पिक)।

 

## मोर कली बनाने की विस्तृत और चरणबद्ध विधि
 इस व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है और इसे कुल तीन प्रमुख चरणों में पूरा किया जा सकता है।

 **पहला चरण: चिकना घोल तैयार करना।** सबसे पहले एक गहरा और बड़ा मिक्सिंग बाउल लें। इसमें एक कप चावल का आटा छानकर डालें। अब इस आटे में धीरे-धीरे दो कप छाछ या पतला किया हुआ दही डालें। एक मथनी या व्हिस्क की मदद से इसे अच्छी तरह मिलाएं। ध्यान रहे कि इस घोल में आटे की छोटी गांठें बिल्कुल नहीं रहनी चाहिए, अन्यथा पकाते समय कली का टेक्सचर खराब हो सकता है। जब यह पूरी तरह से चिकना और एकसार हो जाए, तब इसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं और इस तैयार घोल को एक तरफ रख दें।

 **दूसरा चरण: सुगंधित तड़का लगाना।** अब गैस पर एक भारी तले वाली कढ़ाई या पैन चढ़ाएं और उसमें दो चम्मच नारियल तेल गर्म करें। नारियल तेल का उपयोग करने से डिश को पारंपरिक दक्षिण भारतीय स्वाद मिलता है, हालांकि आप अपनी पसंद का कोई अन्य तेल भी ले सकते हैं। तेल गर्म होने पर इसमें राई के दाने डालें। जब राई पूरी तरह चटकने लगे, तब उसमें चना दाल और उड़द दाल डालें। इन्हें धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि इनका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए और एक अच्छी खुशबू न आने लगे। इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च, सूखी लाल मिर्च, करी पत्ता और एक चुटकी हींग डालें और कुछ सेकंड के लिए भूनें।

 **तीसरा चरण: मिश्रण को पकाना और जमाना।** तड़का तैयार होने के बाद, गैस की आंच को बिल्कुल धीमा कर दें। तैयार किए गए चावल के आटे और छाछ के घोल को एक बार फिर हिला लें ताकि नीचे बैठा आटा मिल जाए, और फिर इसे धीरे-धीरे कढ़ाई में डालें। घोल डालते ही इसे लगातार चम्मच या स्पैटुला से चलाते रहें। धीमी आंच पर पकते हुए यह मिश्रण बहुत तेजी से गाढ़ा होने लगेगा। लगभग तीन से चार मिनट के भीतर यह एक चिकने उपमा की तरह कड़ा होने लगेगा और कढ़ाई के किनारों को छोड़ने लगेगा। जब यह पूरी तरह पक जाए, तो आंच बंद कर दें। अब एक प्लेट या थाली को थोड़े से तेल या घी से चिकना करें। पके हुए मिश्रण को इस प्लेट पर निकालें और चम्मच के पिछले हिस्से से दबाते हुए एक समान परत में फैला दें। इसे पांच मिनट के लिए ठंडा और सेट होने दें। इसके बाद इसे मनचाहे आकार में काट लें या फिर सीधे ही ऊपर से थोड़ा सा देसी घी डालकर गर्मागर्म परोसें।

 

## स्वाद और पोषण को दोगुना करने के बेहतरीन टिप्स
 यदि आप इस पारंपरिक रेसिपी में थोड़ा आधुनिक बदलाव करना चाहते हैं, तो इसमें कई तरह की पौष्टिक चीजें जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, तड़का लगाते समय आप इसमें बारीक कटी गाजर, हरी शिमला मिर्च या फ्रेंच बीन्स मिला सकते हैं। इससे डिश न केवल अधिक रंग-बिरंगी और आकर्षक दिखेगी, बल्कि इसका पोषण मूल्य भी काफी बढ़ जाएगा। इसके अतिरिक्त, डिश को परोसते समय ऊपर से भुनी हुई मूंगफली या हल्के सिंके हुए सफेद तिल छिड़कने से इसमें एक बेहतरीन कुरकुरापन आ जाता है। पारंपरिक रूप से इसे तीखी नारियल की चटनी, भुनी हुई चने की दाल की चटनी या फिर आम के अचार के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।

 

## स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से क्यों फायदेमंद है मोर कली
 आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग ऐसे नाश्ते की तलाश में रहते हैं जो पेट को हल्का रखे और पूरे दिन के लिए पर्याप्त ऊर्जा भी प्रदान करे। मोर कली इन सभी मानकों पर खरी उतरती है। इसमें प्रयुक्त छाछ एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक की तरह काम करती है जो पेट को ठंडक पहुंचाती है और पाचन को दुरुस्त रखती है। चावल का आटा आसानी से पचने वाला कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है, जिससे शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। चूंकि इसमें बहुत ही कम तेल का उपयोग होता है, इसलिए यह वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए भी एक अनुकूल भोजन है। हालांकि, यदि आप मधुमेह या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं या किसी विशेष आहार तालिका का पालन कर रहे हैं, तो अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ आहार विशेषज्ञ से परामर्श के बाद ही इसे अपने नियमित भोजन में शामिल करें।

 

## निष्कर्ष: घर पर लें तमिलनाडु की विरासत का स्वाद
 मोर कली एक ऐसा व्यंजन है जो दर्शाता है कि कैसे न्यूनतम और बेहद सस्ती सामग्रियों के माध्यम से एक शानदार और स्वास्थ्यवर्धक भोजन तैयार किया जा सकता है। दक्षिण भारतीय घरों में सदियों से बनाई जाने वाली यह डिश अब उत्तर भारत के परिवारों में भी अपनी जगह बना रही है। इस आने वाले सप्ताहांत पर यदि आप भी अपने नाश्ते के मेन्यू में कुछ नया और सेहतमंद जोड़ना चाहते हैं, तो तमिलनाडु की इस पारंपरिक मोर कली को जरूर आजमाएं। यह आपके परिवार के सभी सदस्यों को बेहद पसंद आएगी और सेहत के लिहाज से भी एक बेहतरीन बदलाव साबित होगी।

## इसका आप पर असर
मोर कली जैसे झटपट और स्वस्थ विकल्प को अपनाने से आपको सुबह के भारीपन से मुक्ति मिलेगी और नाश्ते में एक नया स्वाद मिलेगा।

- **आहार में विविधता:** इस पारंपरिक डिश को अपने साप्ताहिक मेन्यू में शामिल करने से रोज-रोज पोहा या उपमा खाने की ऊब दूर होगी। इससे आपके सुबह के भोजन में नयापन और पोषण बना रहेगा।
- **समय की बचत:** रसोई में मौजूद बुनियादी सामग्रियों से यह डिश महज पंद्रह मिनट में तैयार हो जाती है। सुबह के समय काम पर जाने वाले लोगों या छात्रों के लिए यह एक बेहतरीन और त्वरित विकल्प है।
- **बेहतर पाचन क्रिया:** छाछ और बहुत कम तेल से बनने के कारण यह पेट के लिए बेहद हल्की होती है। इसे खाने से सुबह के समय गैस या भारीपन की समस्या नहीं होती और आप दिनभर ऊर्जावान महसूस करते हैं।
- **पोषण में बदलाव:** आप इस डिश में अपनी पसंद की हरी सब्जियां और भुने हुए ड्राई फ्रूट्स मिला सकते हैं। इससे आप अपने परिवार की जरूरत के हिसाब से फाइबर और प्रोटीन की मात्रा को आसानी से बढ़ा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
मोर कली जैसे पारंपरिक क्षेत्रीय व्यंजनों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे आधुनिक जीवनशैली में स्वस्थ खान-पान और पाचन स्वास्थ्य के प्रति बढ़ता झुकाव है।

- **पारंपरिक स्वास्थ्य की ओर झुकाव:** आधुनिक उपभोक्ता अब प्रोसेस्ड फूड से दूरी बना रहे हैं और पुराने क्षेत्रीय व्यंजनों की ओर लौट रहे हैं। मोर कली जैसे पारंपरिक व्यंजन बिना किसी कृत्रिम मिलावट के शुद्ध पोषण प्रदान करते हैं।
- **सांस्कृतिक विरासत:** तमिलनाडु में मोर कली का विकास रसोई में बची हुई छाछ और चावल के आटे का सदुपयोग करने के एक स्मार्ट तरीके के रूप में हुआ था। इसने एक ऐसे सुपाच्य भोजन को जन्म दिया जो उष्णकटिबंधीय मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाता है।
- **झटपट कुकिंग की मांग:** व्यस्त दिनचर्या के कारण लोगों को ऐसे भोजन की आवश्यकता होती है जिसे बनाने में कम समय लगे। यह रेसिपी इस जरूरत पर खरी उतरती है क्योंकि इसमें अन्य दक्षिण भारतीय व्यंजनों की तरह खमीर उठाने या भिगोने की आवश्यकता नहीं होती है।

## सवाल-जवाब

### 1. मोर कली बनाने के लिए मुख्य सामग्रियां क्या हैं?
इसे चावल के आटे, छाछ या पतले दही, और सरसों, दालों, करी पत्ते, मिर्च व हींग के तड़के से बनाया जाता है।

### 2. इस दक्षिण भारतीय व्यंजन को पकने में कितना समय लगता है?
घोल तैयार करने और तड़का लगाने के बाद यह डिश महज कुछ ही मिनटों में बनकर तैयार हो जाती है।

### 3. क्या मोर कली को अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए इसमें सब्जियां मिलाई जा सकती हैं?
हां, आप इसमें बारीक कटी गाजर, शिमला मिर्च, बीन्स या भुनी हुई मूंगफली मिलाकर इसका पोषण और स्वाद बढ़ा सकते हैं।

### 4. मोर कली को परोसने का सबसे सही तरीका क्या है?
इसे ऊपर से थोड़ा देसी घी डालकर गर्मागर्म परोसा जाता है, और इसके साथ नारियल की चटनी या अचार लिया जा सकता है।

### 5. क्या मोर कली वजन घटाने के लिए उपयुक्त है?
हां, क्योंकि इसमें बहुत कम तेल और मसालों का उपयोग होता है, जिससे यह वजन संतुलित रखने के लिए एक बेहतरीन हल्का विकल्प बनती है। हालांकि विशेष डाइट के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

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