नवरात्रि व्रत में बनाएं कुरकुरा साबूदाना आलू चीला, जानिए आसान विधि और जरूरी टिप्स पारंपरिक फलाहार से हटकर कुछ नया आजमाना चाहते हैं तो साबूदाना, उबले आलू और व्रत के आटे से बना यह क्रिस्पी चीला एक बेहतरीन विकल्प है। नवरात्रि उपवास के दिनों में अक्सर फलाहार के रूप में साबूदाना खिचड़ी या कुट्टू की पूड़ी ही बनाई जाती है। लगातार एक ही तरह का भोजन करते हुए अगर स्वाद में बदलाव की तलाश हो, तो साबूदाना और आलू से बना चीला एक स्वादिष्ट और हल्का विकल्प बन सकता है। यह व्यंजन कम समय में आसानी से तैयार हो जाता है और खाने में बेहद लाजवाब लगता है। इसे बनाने में भीगे हुए साबूदाने, उबले आलू, व्रत के आटे और बुनियादी मसालों का इस्तेमाल होता है, जिससे यह पेट भरने के साथ उपवास के नियमों के बिल्कुल अनुकूल रहता है। चीला तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री इस स्वादिष्ट फलाहारी चीले को बनाने के लिए रसोई में कुछ खास सामग्रियों की आवश्यकता होती है। माप के अनुसार सही सामग्री रखने से चीला एकदम कुरकुरा बनता है। • साबूदाना: 1 कप साबूदाना • उबले आलू: 2 मध्यम आकार के उबले हुए आलू • व्रत का आटा: 2 बड़े चम्मच सिंघाड़े या कुट्टू का आटा • सेंधा नमक: स्वादानुसार सेंधा नमक • हरी मिर्च: 1 से 2 बारीक कटी हुई हरी मिर्च • अदरक: 1 छोटी चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक • हरा धनिया: 2 बड़े चम्मच बारीक कटा ताजा हरा धनिया • काली मिर्च: आधा छोटी चम्मच काली मिर्च पाउडर • घी या तेल: चीला सेकने के लिए आवश्यकतानुसार घी या तेल घोल तैयार करने का सही तरीका चीला बनाने की शुरुआत साबूदाने की सही तैयारी से होती है। सबसे पहले 1 कप साबूदाने को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसे पर्याप्त पानी में डालकर 6 से 8 घंटे या पूरी रात के लिए भिगोकर रख दें। जब साबूदाना अच्छी तरह फूल जाए और नरम हो जाए, तो बचा हुआ अतिरिक्त पानी पूरी तरह छानकर अलग कर दें। फूले हुए साबूदाने को मिक्सर ग्राइंडर के जार में डालें और थोड़ा सा पानी मिलाकर एक चिकना पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को एक गहरे बर्तन में निकालें। इसमें 2 उबले हुए आलू अच्छी तरह मैश करके मिलाएं। इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च, कद्दूकस किया हुआ अदरक, स्वादानुसार सेंधा नमक, काली मिर्च पाउडर, बारीक कटा हरा धनिया और बाइंडिंग के लिए 2 बड़े चम्मच कुट्टू या सिंघाड़े का आटा डालें। इन सभी सामग्रियों को चम्मच या हाथ की मदद से अच्छी तरह मिला लें ताकि एक गाढ़ा और एकसार घोल तैयार हो जाए। यदि मिश्रण ज्यादा सूखा लगे, तो जरूरत के अनुसार बिल्कुल थोड़ा सा पानी मिलाया जा सकता है। तवे पर चीला सेकने की विधि मिश्रण तैयार होने के बाद गैस पर एक नॉनस्टिक या भारी तले का तवा गर्म करें। तवे की सतह पर थोड़ा सा घी या तेल लगाकर अच्छी तरह फैलाएं। जब तवा सही तापमान पर आ जाए, तो तैयार मिश्रण की एक बड़ी करछी भरकर तवे के बीच में डालें और हल्के हाथों से गोल आकार में फैला दें। चीले को मध्यम आंच पर धीरे-धीरे पकने दें। जब चीले की निचली सतह हल्की भूरी और किनारों से सिकने लगे, तो ऊपर की तरफ थोड़ा सा घी लगाएं और सावधानी से पलट दें। दूसरी तरफ भी घी लगाकर मध्यम आंच पर तब तक सेकें जब तक कि चीला दोनों तरफ से पूरी तरह सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए। दोनों तरफ से अच्छी तरह सिक जाने के बाद इसे तवे से उतारकर प्लेट में रख लें। परोसने के तरीके और जरूरी सावधानियां तैयार गरमागरम साबूदाना आलू चीले को व्रत वाली हरी धनिया-पुदीने की चटनी, ताजे दही या फिर भुनी हुई मूंगफली की चटनी के साथ परोसा जा सकता है। यह नाश्ते में या मुख्य भोजन के समय दोनों ही मौकों पर उपयुक्त रहता है। बेहतरीन परिणाम पाने के लिए कुछ सावधानियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। साबूदाने को कम से कम 6 से 8 घंटे भिगोना अनिवार्य है, क्योंकि ठीक से न भीगने पर वह पिसते समय दानेदार रह सकता है और चीला अंदर से सख्त बनेगा। व्रत के नियमों का पालन करते हुए सामान्य नमक के स्थान पर केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करें। घोल को कभी भी बहुत ज्यादा पतला न करें, क्योंकि अधिक पतला बैटर तवे पर चिपक सकता है और पलटते समय टूट सकता है। चीले को हमेशा मध्यम आंच पर ही पकाएं; तेज आंच पर यह बाहर से जल सकता है और अंदर से कच्चा रह सकता है, जबकि धीमी से मध्यम आंच पर यह अंदर तक पककर बाहर से क्रिस्पी बनता है। इसका आप पर असर यह फलाहारी रेसिपी उपवास के दौरान भोजन की सीमित पसंद से जूझ रहे लोगों के लिए एक आसान और त्वरित विकल्प प्रदान करती है। • भोजन में विविधता: यह पारंपरिक साबूदाना खिचड़ी और तली हुई पूड़ी का एक हल्का और कम चिकनाई वाला विकल्प है। इसके सेवन से उपवास के दौरान पाचन तंत्र पर भारीपन महसूस नहीं होता। • समय की बचत: साबूदाना पहले से भीगा होने पर यह नाश्ता महज 10 से 15 मिनट में तैयार हो जाता है। कामकाजी और व्यस्त लोगों के लिए व्रत में यह झटपट बनने वाला व्यंजन है। • पोषण और ऊर्जा: आलू और साबूदाने से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट दिनभर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखते हैं। सेंधा नमक और काली मिर्च उपवास में कमजोरी से राहत दिलाते हैं। • सामग्री की उपलब्धता: इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्रियां सामान्य भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्ध होती हैं। इसके लिए बाजार से किसी महंगी विशेष वस्तु को खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसा क्यों हुआ उपवास के दौरान भोजन के सीमित विकल्पों के कारण लोग साबूदाने और आलू से नए और स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने के तरीके खोजते हैं। • पारंपरिक व्यंजनों से ऊब: व्रत में अधिकांश लोग लगातार साबूदाना खिचड़ी या कुट्टू की तली हुई पूड़ी खाते-खाते स्वाद में बदलाव चाहते हैं। इसी कारण हल्के और चीले जैसे कम तेल वाले विकल्प लोकप्रिय हो रहे हैं। • बाइंडिंग और कुरकुरापन: साबूदाने को पीसकर उसमें उबले आलू और कुट्टू या सिंघाड़े का आटा मिलाने से घोल को सही गाढ़ापन मिलता है। यह मिश्रण तवे पर बिना टूटे सिकता है और बाहर से कुरकुरा बनता है। • उपवास के सख्त नियम: नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्वों पर अनाज, सामान्य नमक और प्याज-लहसुन का उपयोग वर्जित होता है। इन सभी नियमों का पालन करते हुए यह रेसिपी पूरी तरह शुद्ध फलाहार के रूप में तैयार की जाती है। सवाल-जवाब 1. साबूदाने को कितनी देर भिगोना चाहिए? साबूदाने को अच्छी तरह फूलने और पीसने के लिए कम से कम 6 से 8 घंटे या पूरी रात पानी में भिगोना चाहिए। 2. चीले की बाइंडिंग के लिए कौन सा आटा इस्तेमाल करें? बाइंडिंग के लिए 2 बड़े चम्मच सिंघाड़े का आटा या कुट्टू का आटा इस्तेमाल किया जा सकता है। 3. चीला तवे पर चिपकने या टूटने से कैसे बचाएं? घोल को बहुत अधिक पतला न करें और चीले को हमेशा मध्यम आंच पर एक तरफ से सुनहरा होने के बाद ही पलटें। 4. इस चीले को किन चीजों के साथ परोसा जा सकता है? इसे व्रत वाली हरी चटनी, ताजे दही या भुनी हुई मूंगफली की चटनी के साथ परोसा जा सकता है। https://trendkia.com/food/navaratri-vrata-men-banaen-kurakura-sabudana-potato-chilla-janie-asana-vidhi-aura-jaruri-tipsa-46257 TrendKia — Har trend, sabse pehle.