नेपाल की पारंपरिक रसोई से सीखें तीखा और चटपटा गोरखा आलू अचार तैयार करने की पूरी विधि सफेद मटर, उबले आलू और भुने काले तिल के खास मसाले से तैयार होने वाला नेपाली गोरखा आलू अचार साधारण खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है। जानिए इसे घर पर बनाने की आसान विधि। दाल, चावल और रोटी की नियमित थाली को अगर किसी अनोखे और चटपटे स्वाद से सजाना हो, तो पड़ोसी देश नेपाल का पारंपरिक गोरखा आलू अचार एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। आम भारतीय अचारों से हटकर तैयार होने वाला यह व्यंजन असल में उबले आलू, साबुत सफेद मटर और खास भुने मसालों का एक अनूठा मेल है। इसे साइड डिश के रूप में परोसा जाता है, जो हर एक निवाले को तीखा, खट्टा और बेहद जायकेदार बना देता है। गोरखा आलू अचार तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री इस पारंपरिक नेपाली व्यंजन को बनाने के लिए घर की रसोई में आसानी से मिलने वाली सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इसके लिए दो कप सफेद मटर, पांच उबले हुए आलू, एक कप बारीक कटा प्याज और तीन चम्मच इमली का गूदा चाहिए। मसालों के अनूठे मिश्रण के लिए एक तिहाई कप काले तिल, पांच साबुत सूखी लाल मिर्च और एक चम्मच साबुत काली मिर्च की आवश्यकता होगी। तड़के और खुशबूदार स्वाद के लिए चार चम्मच शुद्ध सरसों का तेल, आधा चम्मच मेथी के दाने, आधा चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक, तीन बारीक कटी हरी मिर्च, आधा चम्मच हल्दी पाउडर, स्वादानुसार नमक, आधा कप बारीक कटी ताजी धनिया पत्ती और एक चम्मच ताजा नींबू का रस तैयार रखें। मटर और आलू की शुरुआती तैयारी इस व्यंजन को बनाने की शुरुआत मटर की तैयारी से होती है। सबसे पहले दो कप सफेद मटर को अच्छी तरह धोकर रात भर के लिए पानी में भिगोकर रख दें। अगली सुबह भीगे हुए मटर को प्रेशर कुकर में डालें और केवल एक सीटी आने तक मध्यम आंच पर उबाल लें। यहाँ इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि मटर पूरी तरह गल न जाए और दाने साबुत बने रहें। उबलने के बाद मटर को तुरंत पानी से छानकर किसी बड़े बर्तन में निकाल लें। इसके साथ ही पांच आलुओं को भी कुकर में उबालकर छील लें और ठंडा होने के लिए अलग रख दें। काले तिल का खास भुना मसाला तैयार करें गोरखा अचार की असली जान इसका खास तिल वाला मसाला होता है। गैस पर एक पैन गरम करें और उसमें एक तिहाई कप काले तिल डालकर धीमी आंच पर भूनें। जैसे ही तिल चटकने लगें, उसी पैन में पांच सूखी लाल मिर्च और एक चम्मच काली मिर्च डाल दें। इन सभी मसालों को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उनसे सोंधी खुशबू न आने लगे। भूनने के बाद आंच बंद कर दें और मिश्रण को ठंडा होने दें। जब यह मिश्रण सामान्य तापमान पर आ जाए, तो इसे मिक्सर जार में डालकर एकदम बारीक पीस लें। कड़ाही में तड़का और मसालों का संयोजन अब गैस पर एक कड़ाही रखें और उसमें चार चम्मच सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गरम करें। जब तेल से हल्का धुआं उठने लगे, तब आंच धीमी करके उसमें आधा चम्मच मेथी के दाने डालें। इसके बाद कद्दूकस किया हुआ आधा चम्मच अदरक और कटी हुई तीन हरी मिर्च डालकर हल्का सा भूनें। जब तड़का चटक जाए, तो इसमें उबले हुए सफेद मटर डालें और साथ में आधा चम्मच हल्दी पाउडर डालकर अच्छी तरह चलाएं। मटर को पकने दें और इस दौरान पहले से उबले हुए पांच आलुओं को मध्यम चौकोर टुकड़ों में काट लें। कुछ मिनट बाद इन कटे हुए आलुओं को कड़ाही में डालें और कलछी से हल्के हाथों से मिलाते हुए चलाएं ताकि आलू टूटे नहीं और मसालों की परत उन पर समान रूप से चढ़ जाए। खटास, ताजगी और अंतिम स्पर्श जब आलू और मटर आपस में अच्छी तरह मिल जाएं, तो इसमें तैयार किया हुआ भुना काला तिल का पिसा मसाला, एक कप बारीक कटा कच्चा प्याज और आधा कप कटी हुई हरी धनिया पत्ती डालें। इसके तुरंत बाद तीन चम्मच इमली का गूदा, एक चम्मच ताजा नींबू का रस और स्वादानुसार नमक शामिल करें। सभी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलाएं ताकि खटास और तीखापन पूरे मिश्रण में एकसार हो जाए। अब गैस बंद कर दें। आपका गरमा-गरम और बेहद स्वादिष्ट नेपाली गोरखा आलू अचार पूरी तरह तैयार है, जिसे आप लंच या डिनर में रोटी और चावल के साथ परोस सकते हैं। इसका आप पर असर यह आसान घरेलू रेसिपी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के आपके नियमित भोजन में विविधता और नया स्वाद जोड़ने का काम करती है। • किफायती बदलाव: घर में पहले से मौजूद सफेद मटर, आलू और सरसों के तेल से एक नई अंतरराष्ट्रीय डिश तैयार हो जाती है। इसके लिए बाजार से महंगे रेडीमेड मसाले या प्रिजर्वेटिव खरीदने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती। • आहार में पोषण: उबले सफेद मटर और तिल का यह मिश्रण भोजन में प्रोटीन और फाइबर की अच्छी मात्रा जोड़ता है। कम तेल और ताजी सामग्री के चलते यह पारंपरिक तले-भुने अचारों से अधिक सुपाच्य विकल्प बनता है। • समय की बचत: अगर मटर रात में भिगोकर रखे जाएं तो यह पूरा व्यंजन मात्र बीस मिनट में बनकर तैयार हो जाता है। व्यस्त कामकाजी दिनों में लंच बॉक्स या डिनर के लिए यह झटपट बनने वाला साइड डिश है। • स्वाद में ताजगी: रोजमर्रा की एक जैसी दाल और सब्जी से ऊब चुके परिवार के सदस्यों के लिए यह तुरंत स्वाद बदलने का काम करता है। तीखा, खट्टा और सोंधा स्वाद साधारण खाने को भी खास बना देता है। ऐसा क्यों हुआ गोरखा आलू अचार की लोकप्रियता और अनूठा स्वाद इसकी क्षेत्रीय सामग्रियों और पारम्परिक पकाने की तकनीकों के संतुलन पर टिका हुआ है। • काले तिल की सोंधी खुशबू: नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भुने हुए काले तिल और साबुत लाल मिर्च को पीसकर आधार मसाला बनाने की पुरानी परंपरा है। जब यह सोंधा मसाला तेल और उबली सब्जियों के साथ मिलता है, तो इसे एक विशिष्ट गाढ़ापन और गहरा स्वाद मिलता है। • खटास का दोहरा संयोजन: इस रेसिपी में केवल एक खट्टा घटक इस्तेमाल करने के बजाय इमली के गूदे और नींबू के रस दोनों को मिलाया जाता है। इमली एक गहरा खट्टा-मीठा स्वाद देती है जबकि नींबू ताजी तीखी खटास जोड़ता है, जिससे स्वाद संतुलित रहता है। • मटर को सिर्फ एक सीटी उबालना: सफेद मटर को रात भर भिगोने के बाद सिर्फ एक सीटी तक पकाने से उसके दाने साबुत और कुरकुरे बने रहते हैं। अधिक पकाने पर मटर का भरता बन जाता, जिससे अचार का पारंपरिक टेक्सचर खराब हो जाता। सवाल-जवाब 1. गोरखा आलू अचार बनाने के लिए कितने आलू और मटर की जरूरत होती है? इस रेसिपी के लिए दो कप सफेद मटर और पांच उबले हुए आलू की आवश्यकता होती है। 2. काले तिल के मसाले में कौन-सी सामग्री भुनी जाती है? एक तिहाई कप काले तिल के साथ पांच साबुत सूखी लाल मिर्च और एक चम्मच काली मिर्च को भूनकर पीसा जाता है। 3. मटर को उबालते समय किस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए? रात भर भीगे हुए मटर को कुकर में सिर्फ एक सीटी आने तक उबालना चाहिए ताकि वे ज्यादा नरम न हों और दाने साबुत रहें। 4. इस अचार में खटास के लिए क्या डाला जाता है? इसमें खट्टेपन के लिए तीन चम्मच इमली का गूदा और एक चम्मच ताजा नींबू का रस मिलाया जाता है। 5. तड़के में किस तेल और किन मसालों का इस्तेमाल होता है? तड़के के लिए चार चम्मच सरसों के तेल में आधा चम्मच मेथी के दाने, आधा चम्मच अदरक और तीन कटी हरी मिर्च का उपयोग किया जाता है। https://trendkia.com/food/nepala-ki-parnparika-rasoi-se-sikhen-tikha-aura-chatapata-gorkha-aloo-achar-taiyara-karane-ki-puri-vidhi-41358 TrendKia — Har trend, sabse pehle.