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  "type": "article",
  "title": "निमाड़ में दीपावली पर खास बनाए जाते हैं गेहूं के शकरपारे, बच्चों से बुजुर्गों तक सभी को आते हैं पसंद",
  "summary": "मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में दीपावली के मौके पर गेहूं के आटे से बनने वाले पारंपरिक शकरपारे खास चाव के साथ तैयार किए जाते हैं। कम सामग्री और बजट में बनने वाले ये शकरपारे अपनी लंबी शेल्फ लाइफ और कुरकुरे स्वाद के कारण हर घर की रसोई की शान बने हुए हैं।",
  "content": "मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में दीपावली का पर्व पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजनों के बिना अधूरा माना जाता है। इस पावन अवसर पर यहां के स्थानीय घरों में विभिन्न प्रकार के पकवानों को बनाने का दौर शुरू हो जाता है। इन्हीं खास व्यंजनों में गेहूं के आटे से तैयार होने वाले शकरपारे अपना एक अलग स्थान रखते हैं। निमाड़ क्षेत्र में इन विशेष शकरपारों को पकाने की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। त्योहार के इन दिनों में महिलाएं खासी दिलचस्पी के साथ इन्हें अपने घरों में तैयार करती हैं। इनका अनूठा स्वाद घर के छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी सदस्यों को बेहद भाता है।\n\nशकरपारे बनाने की आसान और किफायती सामग्री\nइस पारंपरिक व्यंजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने के लिए किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं पड़ती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार इन शकरपारों को बेहद कम खर्च और सीमित संसाधनों के साथ आसानी से घर में ही बनाया जा सकता है। इसके निर्माण के लिए मुख्य रूप से गेहूं का आटा, जीरा, नमक और खाना पकाने के लिए तेल की आवश्यकता होती है। प्रक्रिया की शुरुआत में एक बर्तन के अंदर साफ गेहूं का आटा लिया जाता है। इसके पश्चात इसमें स्वाद के मुताबिक जीरा और नमक मिलाया जाता है। इसके बाद थोड़ा सा तेल डालकर इस पूरी सामग्री को हाथों से अच्छी तरह मिलाया जाता है और अंत में पानी की मदद से एक सख्त आटा गूंथ लिया जाता है।\n\nतैयार करने की चरणबद्ध विधि और तलने की प्रक्रिया\nजब आटा पूरी तरह से गूंथकर तैयार हो जाता है, तब इसकी छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें रोटी की तरह बेल लिया जाता है। इसके बाद एक चाकू या अन्य रसोई के बर्तन की मदद से इस बेली हुई परत को छोटे-छोटे चौकोर या अपनी पसंद के अन्य आकारों में काट लिया जाता है। इसके बाद चूल्हे या गैस पर कड़ाही रखकर तेल गर्म किया जाता है। कटे हुए इन टुकड़ों को धीमी आंच पर तब तक तला जाता है जब तक कि वे सुनहरे और पूरी तरह से कुरकुरे न हो जाएं। जब ये शकरपारे ठंडे हो जाते हैं, तब ये खाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं।\n\nमेहमाननवाजी और लंबे समय तक स्टोर करने की खूबी\nदीपावली के खास मौके पर जब घर पर मेहमानों का आना-जाना होता है, तो उन्हें चाय के साथ अन्य पकवानों के साथ ये शकरपारे भी परोसे जाते हैं। इनकी एक और बड़ी खूबी यह है कि ये लंबे समय तक अपने कुरकुरेपन को बनाए रखते हैं, जिस वजह से इन्हें एयरटाइट डिब्बों में भरकर सुरक्षित रखा जा सकता है। आज के आधुनिक दौर में बाजार के अंदर अनगिनत प्रकार की मिठाइयां और स्नैक्स आसानी से मिल जाते हैं, इसके बावजूद निमाड़ के पारंपरिक गेहूं के आटे के शकरपारों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। आज भी लोगों के दिलों में इनका स्वाद एक खास पहचान बनाए हुए है, और यही वजह है कि दीपावली पर हर घर की रसोई में इनका विशेष स्थान रहता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. निमाड़ में दीपावली पर मुख्य रूप से क्या बनाया जाता है?\nनिमाड़ में दीपावली के अवसर पर गेहूं के आटे से बनने वाले पारंपरिक शकरपारे विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं।\n\n2. शकरपारे तैयार करने के लिए किन सामग्रियों की जरूरत होती है?\nइसके लिए मुख्य रूप से गेहूं का आटा, जीरा, नमक और तलने के लिए तेल की आवश्यकता होती है।\n\n3. इन्हें कैसे काटा जाता है?\nआटे की लोई को बेलने के बाद चाकू या अन्य बर्तन की सहायता से छोटे-छोटे चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है।\n\n4. इनकी क्या विशेषता है?\nये लंबे समय तक कुरकुरे रहते हैं और इन्हें डिब्बे में भरकर आसानी से स्टोर किया जा सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/food/nimar-mein-diwali-par-gehu-ke-shakarpare-58000",
  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-11-08",
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    "दिवाली पकवान",
    "निमाड़ व्यंजन",
    "गेहूं के शकरपारे",
    "पारंपरिक स्नैक्स",
    "मध्य प्रदेश संस्कृति",
    "त्योहार की रेसिपी"
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