पालक पनीर की ग्रेवी बनाते समय फीका पड़ जाता है हरा रंग? शेफ अमित वशिष्ठ की यह आसान तकनीक बनाए रखेगी चमक पालक की प्यूरी पकते ही मटमैली होने की परेशानी को दूर करने के लिए शेफ अमित वशिष्ठ ने ब्लैंचिंग, आइस बाथ और तापमान नियंत्रण के कुछ जरूरी नियम साझा किए हैं। पालक से तैयार होने वाले व्यंजन जैसे पालक पनीर, पालक कोफ्ता और दाल पालक न केवल पौष्टिकता से भरपूर होते हैं बल्कि थाली में बेहद खूबसूरत भी नजर आते हैं। हालांकि कई बार घर की रसोई में पालक की प्यूरी तैयार करते समय सबसे बड़ी चुनौती उसके रंग को लेकर आती है। ताजे पत्तों को पीसकर जैसे ही पकाने के लिए कड़ाही में डाला जाता है, उसका चटख हरापन धीरे-धीरे गायब होकर गहरा डार्क या मटमैला सा दिखने लगता है। इस आम रसोई समस्या को हल करने के लिए शेफ अमित वशिष्ठ ने कुछ बेहद कारगर और आजमाइशी तरीके साझा किए हैं, जिनकी मदद से होटल और रेस्टोरेंट जैसी चमकदार हरी ग्रेवी आसानी से तैयार की जा सकती है। क्लोरोफिल और गर्मी के बीच का वैज्ञानिक कारण पालक का प्राकृतिक हरा रंग उसमें मौजूद क्लोरोफिल नामक पिगमेंट के कारण होता है। जब पालक के पत्तों को पानी में बहुत अधिक देर तक उबाला जाता है या फिर कड़ाही में लंबे समय तक पकाया जाता है, तो आंच की अत्यधिक गर्मी और प्राकृतिक एसिड के संपर्क में आते ही यह क्लोरोफिल टूटने लगता है। रासायनिक संरचना में बदलाव आते ही पत्तों का रंग फीका पड़ने लगता है और प्यूरी बनने के बाद वह बेजान और मटमैली दिखने लगती है। यही वजह है कि पालक की चमक को बरकरार रखने के लिए तापमान और पकाने की अवधि को नियंत्रित करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ब्लैंचिंग और आइस बाथ की सही प्रक्रिया शेफ अमित वशिष्ठ के मुताबिक पालक के हरेपन को सुरक्षित रखने का मूल मंत्र सही ब्लैंचिंग और आइस बाथ में छिपा है। इसके लिए सबसे पहले पालक के पत्तों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर उनकी मिट्टी और अशुद्धियां अलग कर लेनी चाहिए। इसके बाद एक गहरे बर्तन में पानी उबलने के लिए रखें। पानी में उबाल आते ही उसमें थोड़ा सा सादा नमक और एक चुटकी चीनी मिला दें। उबलते पानी में धुले हुए पत्तों को डालें और उन्हें केवल 1 से 2 मिनट के लिए ही गर्म पानी में रहने दें। 2 मिनट पूरे होते ही गैस तुरंत बंद कर देनी चाहिए। इसके बाद पत्तों को गर्म पानी से निकालकर सीधे बर्फ वाले बेहद ठंडे पानी यानी आइस बाथ में डाल देना चाहिए। यह अचानक होने वाला तापमान बदलाव कुकिंग की प्रक्रिया को तुरंत रोक देता है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में थर्मल शॉक कहा जाता है, जिससे पत्तों में मौजूद प्राकृतिक क्लोरोफिल उसी अवस्था में लॉक हो जाता है और पिसने के बाद भी उसका चटख रंग बरकरार रहता है। मिक्सी में पीसते समय और कड़ाही में पकाते वक्त सावधानियां आइस बाथ से निकालने के बाद जब पालक को पीसने की बारी आए, तो मिक्सी के जार में पालक के साथ बर्फ का एक छोटा टुकड़ा डाल देना चाहिए। ग्राइंडर के ब्लेड तेजी से घूमने के कारण जार के भीतर जो गर्मी पैदा होती है, बर्फ का टुकड़ा उस गर्मी को शांत रखता है। इस तरह पीसने के दौरान निकलने वाली मैकेनिकल हीट से भी पालक का रंग सुरक्षित रहता है। प्यूरी तैयार होने के बाद जब उसे तेल या मक्खन में पकाया जाए, तो इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उसे कभी भी ओवरकुक न किया जाए। जब प्याज, टमाटर और खड़े मसाले अच्छी तरह भुन जाएं, तब अंत में पालक की प्यूरी कड़ाही में डालें। प्यूरी को केवल उतनी ही देर आंच पर रखें जिससे उसका कच्चापन समाप्त हो जाए। इसके अलावा ग्रेवी में थोड़ी सी खटास जैसे नींबू का रस या अमचूर पाउडर मिलाने से भी उसके प्राकृतिक रंग को लंबे समय तक बनाए रखने में अतिरिक्त सहायता मिलती है। इन आसान कदमों का पालन करके कोई भी अपनी डिश में रेस्तरां जैसी ताजगी और रंग ला सकता है। इसका आप पर असर इस आसान तकनीक को अपनाकर आप अपने भोजन के स्वाद और थाली की खूबसूरती को बेहतर बना सकते हैं। • दैनिक खानपान: रसोई में पालक की प्यूरी बनाते समय इस विधि से पत्तों की चमक बरकरार रहेगी। इससे घर में बनने वाले पालक पनीर और पालक कोफ्ता जैसे व्यंजन होटल जैसे आकर्षक दिखेंगे। • पोषक तत्वों का लाभ: पालक को बहुत ज्यादा उबालने के बजाय केवल 1 से 2 मिनट ब्लैंच करने से उसके प्राकृतिक तत्व सुरक्षित रहते हैं। इससे भोजन में मौजूद क्लोरोफिल और जरूरी विटामिन्स नष्ट होने से बच जाते हैं। • समय और ईंधन की बचत: ग्रेवी को घंटों पकाने के बजाय केवल कच्चापन दूर होने तक पकाने की सलाह दी गई है। इससे रसोई में गैस की खपत घटती है और खाना भी जल्दी बनकर तैयार होता है। • घरेलू उपयोग में सरलता: इस तकनीक को अमल में लाने के लिए किसी महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं है। केवल घर में मौजूद बर्फ, ठंडा पानी और चुटकी भर चीनी की मदद से यह बदलाव लाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ पालक की प्यूरी पकने के दौरान रंग बदलने का मुख्य कारण अत्यधिक तापमान और रासायनिक प्रतिक्रिया है। पत्तों को नियंत्रित तरीके से न पकाने पर प्राकृतिक रंग उड़ जाता है। • क्लोरोफिल का क्षरण: पत्तों में पाया जाने वाला प्राकृतिक क्लोरोफिल गर्मी और एसिड के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। ज्यादा देर तक उबालने या तेज आंच पर पकाने से इसकी संरचना टूट जाती है और रंग मटमैला हो जाता है। • कुकिंग प्रक्रिया का जारी रहना: पत्तों को गर्म पानी से निकालने के बाद भी उनके भीतर की अवशिष्ट गर्मी पकने की प्रक्रिया को जारी रखती है। जब तक उन्हें तुरंत आइस बाथ देकर ठंडा न किया जाए, गर्मी पिगमेंट को नुकसान पहुंचाती रहती है। • मिक्सर ग्राइंडर का घर्षण: मिक्सी के जार में ब्लेड तेजी से घूमने पर मैकेनिकल हीट उत्पन्न होती है। यदि पीसते समय बर्फ का उपयोग न किया जाए तो यही गर्मी प्यूरी को गहरा और बदरंग बना देती है। सवाल-जवाब 1. पालक को उबलते पानी में कितनी देर तक रखना चाहिए? पालक के पत्तों को उबलते पानी में केवल 1 से 2 मिनट के लिए ही ब्लैंच करना चाहिए और तुरंत गैस बंद कर देनी चाहिए। 2. उबलते पानी से निकालने के तुरंत बाद क्या करना चाहिए? पत्तों को गर्म पानी से निकालकर सीधे बर्फ वाले बेहद ठंडे पानी में डालना चाहिए ताकि कुकिंग की प्रक्रिया तुरंत रुक सके। 3. पालक पीसते समय बर्फ का टुकड़ा क्यों डाला जाता है? बर्फ का टुकड़ा मिक्सी के ब्लेड से पैदा होने वाली गर्मी को शांत रखता है, जिससे पीसने के दौरान प्यूरी का रंग खराब नहीं होता। 4. कड़ाही में प्यूरी डालते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए? मसाले पहले से भूनकर तैयार रखें और प्यूरी को केवल उसका कच्चापन दूर होने तक ही पकाएं, उसे जरूरत से ज्यादा ओवरकुक न करें। https://trendkia.com/food/palaka-panira-ki-grevi-banate-samaya-phika-para-jata-hai-hara-rnga-shepha-amit-vashist-ki-yaha-asana-takanika-banae-rakhegi-chamak-38670 TrendKia — Har trend, sabse pehle.