# पाली की 50 साल पुरानी दुकान पर उमड़ी भीड़, हाथ से फेंटकर तैयार होती है अनोखी देशी डलगोना कॉफी

> राजस्थान के पाली शहर में 'बादशाहों का झंडा' इलाके की 50 साल पुरानी दुकान अपनी खास देशी डलगोना कॉफी के लिए चर्चा में है। बिना किसी मशीन के 8 से 10 मिनट हाथ से फेंटकर बनाई जाने वाली यह क्रीमी कॉफी दूर-दूर से आने वाले सैलानियों और स्थानीय लोगों को दीवाना बना रही है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-08-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/pali-ki-50-sala-purani-dukana-para-umari-bhira-hatha-se-phentakara-taiyara-hoti-hai-anokhi-deshi-dalagona-kophi-15669 · **Language:** Hindi
**Tags:** पाली, राजस्थान, देशी डलगोना कॉफी, बादशाहों का झंडा, नरेश भाई, स्ट्रीट फूड

राजस्थान का ऐतिहासिक शहर पाली अपने शानदार इतिहास, सांस्कृतिक परंपराओं और स्वादिष्ट पकवानों के लिए काफी मशहूर है। इन दिनों पाली के स्थानीय बाजार की एक 50 साल पुरानी दुकान अपनी खास देशी डलगोना कॉफी की वजह से काफी सुर्खियां बटोर रही है। वैसे तो डलगोना कॉफी का चलन आधुनिक कैफे संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन नरेश भाई के हाथों से तैयार होने वाला यह देशी अंदाज पिछले 50 वर्षों से अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। इस खास कॉफी का स्वाद इतना अद्भुत है कि स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पाली आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक भी इस दुकान पर खिंचे चले आते हैं।

## 'बादशाहों का झंडा' इलाके की अनूठी पहचान
इस प्रसिद्ध दुकान का सबसे बड़ा आकर्षण इसका अनोखा ठिकाना और नाम है, जिसे 'बादशाहों का झंडा' कहा जाता है। यह नाम सुनते ही यहां आने वाले हर व्यक्ति के मन में उत्सुकता पैदा हो जाती है। दशकों से यह स्थान लोगों के मिलने-जुलने और पसंदीदा स्वाद का आनंद लेने का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। शहर में घूमने आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक इस जगह पर पहुंचे बिना अपनी यात्रा पूरी नहीं मानते। यहां आने वाले ग्राहक कॉफी की चुस्की लेते हुए अक्सर यही कहते हैं कि इसका शाही जायका वाकई इस जगह के नाम के मुताबिक है।

## हाथ से फेंटने की पारंपरिक तकनीक और रेसिपी
आधुनिक कैफे की तरह इलेक्ट्रॉनिक मशीनों या ब्लेंडर का इस्तेमाल करने के बजाय नरेश भाई इसे पूरी तरह से पारंपरिक और देशी तरीके से बनाते हैं। इसे तैयार करने के लिए एक बड़े कटोरे में तीन चीजें बराबर मात्रा में मिलाई जाती हैं। इसमें 2 बड़े चम्मच बढ़िया इंस्टेंट कॉफी पाउडर लेते हैं, फिर उसमें 2 बड़े चम्मच शक्कर और 2 बड़े चम्मच उबलता हुआ गर्म पानी मिलाया जाता है।

सामग्री मिलाने के बाद असली हुनर का काम शुरू होता है। इसके बाद मिश्रण को बिना रुके एक ही तरफ घुमाते हुए 8 से 10 मिनट तक हाथ से मथा जाता है। जैसे-जैसे इसे मथा जाता है, इसका गहरा रंग हल्का भूरा होने लगता है। कुछ ही देर में यह गाढ़े मलाईदार क्रीम का रूप ले लेता है, जिससे एक घना और मनमोहक झाग तैयार होता है।

## परोसने का अंदाज और ग्राहकों का उत्साह
कॉफी का क्रीमी झाग तैयार होने के बाद इसे ग्राहकों के सामने बड़े गिलास में परोसा जाता है। ग्राहक की चाहत के अनुसार एक लंबे गिलास में गरम या फिर चिल्ड दूध भरा जाता है, और यदि ग्राहक ठंडा पसंद करे तो बर्फ के टुकड़े भी डाल दिए जाते हैं। अंत में तैयार गाढ़े मलाईदार कॉफी के झाग को दूध के ऊपर सजाकर परोसते हैं। कड़क कॉफी और क्रीमी दूध का यह तालमेल ग्राहकों को बेहद पसंद आता है, जिसकी वजह से 50 साल पुरानी इस दुकान पर हर दिन लोगों का तांता लगा रहता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** देश भर में पारंपरिक और बिना मशीन के हाथों से तैयार खान-पान के प्रति लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

**पाली (राजस्थान) में:** शहर के निवासियों और यहां आने वाले पर्यटकों को 50 साल पुरानी दुकान पर किफायती दाम में पारंपरिक देशी डलगोना कॉफी का अनोखा स्वाद मिलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. पाली में देशी डलगोना कॉफी कहां मिलती है?
यह कॉफी पाली के 'बादशाहों का झंडा' इलाके में स्थित एक 50 साल पुरानी दुकान पर मिलती है, जिसे नरेश भाई चलाते हैं।

### 2. देशी डलगोना कॉफी बनाने में कितना समय लगता है?
इस कॉफी के झाग को हाथ से एक ही दिशा में लगभग 8 से 10 मिनट तक लगातार फेंटा जाता है।

### 3. इस कॉफी को बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
इसमें 2 बड़े चम्मच इंस्टेंट कॉफी, 2 बड़े चम्मच शक्कर और 2 बड़े चम्मच गर्म पानी का इस्तेमाल होता है।

### 4. इस दुकान की क्या खासियत है?
यह दुकान 50 साल पुरानी है और बिना किसी मशीन के हाथ से फेंटी हुई पारंपरिक देशी डलगोना कॉफी परोसने के लिए जानी जाती है।

## प्रेरणा और सबक
**देशी डलगोना कॉफी की सफलता से मिलने वाले मुख्य सबक:**

- **पारंपरिक हुनर का सम्मान:** बिना किसी आधुनिक मशीन के हाथ से मेहनत करके बनाई गई चीज़ भी आज के दौर में लोगों को आकर्षित कर सकती है।
- **विरासत और निरंतरता:** नरेश भाई ने 50 वर्षों की पुरानी परंपरा और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया।
- **पहचान और मौलिकता:** 'बादशाहों का झंडा' जैसे अनूठे नाम और देशी अंदाज ने इस साधारण पेय को एक खास पहचान दी।

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