पानी में भीगी दाल से बनाएं 5 स्वादिष्ट व्यंजन, नाश्ते और शाम की चाय का बदलेगा स्वाद किचन में रातभर भिगोई गई दाल का उपयोग केवल सब्जी या खिचड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे चीला, वड़े, पकौड़े और कबाब जैसे लजीज पकवान भी बनाए जा सकते हैं। अधिकांश भारतीय घरों में दाल का उपयोग आमतौर पर गाढ़ी तरी वाली सब्जी, पारंपरिक दाल या फिर सादी खिचड़ी तैयार करने के लिए ही किया जाता है। हालांकि, रसोई में पहले से भिगोकर रखी गई दाल कई अन्य स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजनों की मुख्य सामग्री भी बन सकती है। चाहे मूंग दाल हो, चना दाल, उड़द या फिर मसूर, इनसे सुबह के हल्के नाश्ते से लेकर शाम के कुरकुरे स्नैक्स तक आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। इन पांच अलग-अलग व्यंजनों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें पकाने के लिए किसी विशेष या जटिल सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि घर में मौजूद रोजमर्रा के मसालों से ही इन्हें बेहद लजीज बनाया जा सकता है। मूंग दाल का चीला: हल्का और पौष्टिक नाश्ता सुबह के समय जब कुछ हल्का, सुपाच्य और तुरंत तैयार होने वाला खाने का मन हो, तब मूंग दाल का चीला एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। इसे बनाने के लिए रातभर पानी में भिगोई गई मूंग दाल को छानकर मिक्सर में बारीक पीस लिया जाता है। इसके चिकने घोल में स्वादानुसार नमक, बारीक कटी हरी मिर्च, घिसा हुआ अदरक और थोड़ा सा जीरा मिलाया जाता है। स्वाद को अधिक समृद्ध बनाने के लिए इसमें बारीक कटा प्याज, टमाटर और ताजा हरा धनिया भी शामिल किया जा सकता है। इसके बाद एक गर्म तवे पर हल्का सा तेल लगाकर इस मिश्रण को गोलाई में फैलाया जाता है और दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेका जाता है। गरमा-गरम चीले को तीखी हरी चटनी या ताजे दही के साथ परोसा जाता है। चना दाल के कुरकुरे वड़े दक्षिण भारतीय शैली के चना दाल वड़े बाहर से बेहद कुरकुरे और अंदर से कोमल बनावट वाले होते हैं। इसे तैयार करने के लिए पानी में अच्छी तरह भीगी चना दाल को छानकर मिक्सर में बिना अतिरिक्त पानी के दरदरा पीसा जाता है। दरदरे मिश्रण में बारीक कटी प्याज, हरी मिर्च, खुशबूदार करी पत्ता, कद्दूकस किया हुआ अदरक और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। पूरे मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर हाथ की हथेलियों से छोटे और चपटे वड़े का आकार दिया जाता है। इसके बाद इन्हें मध्यम आंच पर गर्म तेल में तब तक तला जाता है जब तक कि इनका रंग गहरा सुनहरा न हो जाए। यह कुरकुरा स्नैक नारियल की चटनी या पुदीने की हरी चटनी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है। शाम की चाय के साथ मूंग दाल के पकौड़े बरसात के मौसम में या शाम की गर्मागर्म चाय के साथ मूंग दाल के मंगौड़े या पकौड़े हर किसी को पसंद आते हैं। इन्हें बनाने के लिए भीगी हुई मूंग दाल को थोड़ा दरदरा पीस लिया जाता है ताकि तलने के बाद उनका खस्तापन बरकरार रहे। इस पिसी दाल में नमक, लाल मिर्च पाउडर, हींग का हल्का सा पानी, अदरक का पेस्ट और कटा हरा धनिया मिलाया जाता है। हींग दाल के भारीपन को कम करने के साथ-साथ पकौड़ों में बेहतरीन महक भी जोड़ती है। अब इस गाढ़े मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से लेकर गर्म तेल में कुरकुरा होने तक तला जाता है। जो लोग तले हुए भोजन और अतिरिक्त तेल से परहेज करना चाहते हैं, वे इस दाल के घोल को अप्पे पैन में बेहद कम तेल लगाकर भी कुरकुरा सेक सकते हैं। भीगी दाल से तैयार स्वादिष्ट कबाब शाकाहारी स्नैक्स में कबाब तैयार करने के लिए भीगी हुई दाल एक बेहतरीन आधार प्रदान करती है। इसके लिए भीगी हुई मसूर या मूंग दाल को थोड़ा पका लिया जाता है और उसका पूरा अतिरिक्त पानी पूरी तरह निथार दिया जाता है। इसके बाद पकी दाल को अच्छी तरह मसलकर उसमें बाइंडिंग के लिए उबला हुआ आलू मिलाया जाता है। इस मिश्रण में कद्दूकस किया हुआ अदरक, बारीक कटा ताजा हरा धनिया और अपनी पसंद के सूखे मसाले डाले जाते हैं। सारी सामग्री को एकसार गूंथकर कबाब या टिक्की का चपटा आकार दिया जाता है। फिर इन्हें तवे पर थोड़े से तेल में धीमी आंच पर दोनों तरफ से क्रिस्पी और सुनहरा होने तक सेका जाता है। इन कबाबों को तीखी पुदीने की चटनी के साथ गर्मागर्म परोसा जाता है। मुलायम और स्पंजी दही वड़ा दही वड़ा एक ऐसा पारंपरिक व्यंजन है जो उत्सवों और खास मौकों पर खूब चाव से खाया जाता है। इसे बनाने के लिए उड़द की दाल को कुछ घंटों के लिए पर्याप्त पानी में भिगोकर रखा जाता है। भीगने के बाद दाल को न्यूनतम पानी का इस्तेमाल करते हुए गाढ़ा और चिकना पीस लिया जाता है। इसके बाद बैटर को हाथों से एक ही दिशा में अच्छी तरह फेंटा जाता है, जिससे उसमें हवा भर जाती है और वड़े अंदर से पूरी तरह स्पंजी बनते हैं। अब इस घोल से गोल वड़े बनाकर मध्यम गर्म तेल में सुनहरे होने तक तले जाते हैं। तेल से निकालने के बाद इन वड़ों को कुछ मिनटों के लिए हल्के गुनगुने पानी में डुबोया जाता है और फिर हथेलियों से दबाकर अतिरिक्त पानी निकाल लिया जाता है। अंत में इन्हें गाढ़ी फेंटी हुई मीठी या सादी दही में डालकर ऊपर से भुना हुआ जीरा पाउडर, लाल मिर्च, इमली की खट्टी-मीठी चटनी और थोड़ा नमक छिड़ककर परोसा जाता है। इसका आप पर असर घर में भीगी हुई दाल के इन वैकल्पिक उपयोगों से रोजमर्रा के खानपान में विविधता लाना और पोषण बढ़ाना आसान हो जाता है। • खानपान में विविधता: सामान्य दाल-रोटी के बजाय उसी भीगी दाल से सुबह का पौष्टिक नाश्ता या शाम का कुरकुरा नाश्ता तैयार किया जा सकता है। इससे रोज एक जैसा भोजन करने की बोरियत खत्म होती है और बिना अतिरिक्त खर्च नए पकवान बनते हैं। • किचन का समय: रात में दाल भिगोकर रखने से सुबह नाश्ता पकाने में समय की काफी बचत होती है। दाल पीसकर चीला या वड़ा बनाने में केवल 15 से 20 मिनट का समय लगता है। • कम तेल के विकल्प: मूंग दाल का चीला या अप्पे पैन में बने मंगौड़े उन लोगों के लिए बहुत मुफीद हैं जो तला हुआ खाना कम पसंद करते हैं। इससे स्वाद से समझौता किए बिना तेल की खपत में कटौती की जा सकती है। • सामग्री की बचत: इन सभी व्यंजनों के लिए किसी विशेष फैंसी सामग्री की जरूरत नहीं होती है। घर में पहले से मौजूद बुनियादी मसालों, प्याज, मिर्च और आलू की मदद से ही इन्हें बनाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ भारतीय खानपान में दाल को भिगोकर विभिन्न व्यंजन बनाने की परंपरा पोषण, स्वाद और सुपाच्यता को ध्यान में रखकर विकसित हुई है। दाल को सीधे पकाने के बजाय भिगोकर पीसने से कई तरह के पकवान तैयार करना संभव हो जाता है। • दाल का मुलायम होना: दालों को कुछ घंटों या रातभर भिगोने से उनके दाने पानी सोखकर फूल जाते हैं। इससे उन्हें बिना ज्यादा पानी मिलाए आसानी से चिकना या दरदरा पीसना संभव हो पाता है। • पोषण और सुपाच्यता: दाल को भिगोकर पकाने से पेट में गैस या भारीपन की समस्या कम होती है। हींग, अदरक और जीरे जैसे पाचक मसालों को मिलाने से ये व्यंजन सुपाच्य बन जाते हैं। • विविध बनावट की संभावना: महीन पीसने पर चीले का पतला घोल बनता है, जबकि दरदरा पीसने पर वड़े और पकौड़े कुरकुरे बनते हैं। इस तकनीक के कारण एक ही सामग्री से अलग-अलग स्वाद और बनावट मिल जाती है। सवाल-जवाब 1. मूंग दाल चीला बनाने के लिए दाल को कितनी देर भिगोना चाहिए? मूंग दाल को रातभर या कम से कम 4 से 6 घंटे तक पानी में भिगोकर रखना चाहिए ताकि वह अच्छी तरह पीस सके। 2. दही वड़े को अंदर से बेहद मुलायम और स्पंजी कैसे बनाया जाता है? उड़द दाल के गाढ़े बैटर को अच्छी तरह फेंटना चाहिए ताकि उसमें हवा भर सके, और तलने के बाद वड़ों को कुछ देर गुनगुने पानी में भिगोना जरूरी है। 3. क्या मूंग दाल के पकौड़े बिना तेल में तले भी बनाए जा सकते हैं? हां, यदि आप अधिक तेल से बचना चाहते हैं तो दाल के मिश्रण को अप्पे पैन में बहुत कम तेल लगाकर कुरकुरा सेक सकते हैं। 4. चना दाल के वड़ों को कुरकुरा बनाने की सही विधि क्या है? चना दाल को पानी से निकालकर बिना अतिरिक्त पानी डाले दरदरा पीसना चाहिए और फिर मध्यम गर्म तेल में सुनहरा होने तक तलना चाहिए। 5. दाल के कबाब में आलू का उपयोग किसलिए किया जाता है? मसली हुई पकी दाल में उबला हुआ आलू मिलाने से मिश्रण को अच्छी बाइंडिंग मिलती है जिससे तवे पर सेकते समय कबाब टूटते नहीं हैं। https://trendkia.com/food/pani-mein-bhigi-dal-se-banayein-5-swadisht-vyanjan-nashte-aur-sham-ki-chai-ka-badlega-swad-47553 TrendKia — Har trend, sabse pehle.