पारंपरिक अंदाज में घर पर तैयार करें देहाती मटन, लोहे की कड़ाही में धीमी आंच पर पकने से मिलेगा लाजवाब स्वाद देहाती मटन का गहरा रंग और सोंधापन लोहे की कड़ाही में धीमी आंच पर की गई भुनाई से आता है। करीब ढाई घंटे में तैयार होने वाली इस पारंपरिक विधि में सही सामग्री और धैर्य सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। पारंपरिक देहाती मटन की पहचान सिर्फ इसके चटपटे मसालों से नहीं होती, बल्कि इसे पकाने का पुराना देहाती सलीका इसे दूसरी करी से पूरी तरह जुदा बना देता है। जब भारी पेंदे वाली लोहे की कड़ाही में धीमी आंच पर मटन को लगातार भूना जाता है, तो मसालों और तेल का मेल गोश्त को एक गहरा, चमकदार रंग और लाजवाब सोंधापन देता है। इस जायके को अपनी रसोई में उतारने के लिए किसी जटिल तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि यहां सबसे बड़ा हुनर बावर्ची का सब्र होता है। अगर आंच की तेजी पर काबू रखा जाए और हर मसाले को उसका पूरा वक्त दिया जाए, तो तैयार होने वाला सालन ढाबों और देहाती दावतों की याद ताजा कर देता है। देहाती मटन के लिए जरूरी सामग्री और मात्रा इस खास डिश को तैयार करने के लिए सामग्री का सही अनुपात बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए 1 किलो ताजा मटन, आधा किलो बारीक कटा प्याज, 250 ग्राम शुद्ध सरसों का तेल, 150 ग्राम अदरक का पेस्ट और 200 ग्राम लहसुन का पेस्ट चाहिए। इसके साथ ही कुछ हरी मिर्च, साबुत तेजपत्ता, दरदरी पिसी काली मिर्च की गुंडी, तीखी लाल मिर्च की गुंडी, हल्दी पाउडर, स्वाद के हिसाब से सादा नमक, शुद्ध देसी घी और खुशबूदार गरम मसाला निकाल कर रख लें। सरसों का तेल अगर घर का पेरा हुआ मिल जाए तो यह मटन के स्वाद को और भी निखार देता है। कड़ाही की तैयारी और मटन की शुरुआती भुनाई पकाने की शुरुआत के लिए सबसे पहले एक साफ लोहे की कड़ाही को चूल्हे या गैस पर रखकर अच्छी तरह गर्म करें। कड़ाही तप जाने के बाद उसमें 250 ग्राम सरसों का तेल डालें। जब तेल से धुआं उठने लगे और वह पूरी तरह पक जाए, तब उसमें हल्का सा हींग का पानी छिड़क दें। ऐसा करने से सरसों के कच्चे तेल का तीखापन और तीखी गंध शांत हो जाती है। अब यहां आम तरीकों से हटकर एक खास कदम उठाना होता है। तेल में पहले प्याज डालने के बजाय सीधे धुला हुआ मटन डाला जाता है। कड़छी से लगातार चलाते हुए मटन को करीब 10 से 20 मिनट तक तेज से मध्यम आंच पर अच्छी तरह भूनें। इसके बाद इसमें हल्दी पाउडर मिलाएं और अगले 20 मिनट तक गोश्त को भूनते रहें ताकि हल्दी का कच्चापन मिट जाए और मांस पर सुनहरा रंग चढ़ने लगे। प्याज, देसी घी और पिसे मसालों का मिलान भुनाई के दौरान कड़ाही को बीच-बीच में ढक्कन से ढका जा सकता है, मगर ढक्कन हटाकर मटन को लगातार चलाना सबसे जरूरी है ताकि गोश्त कड़ाही के तलवे में चिपके नहीं। जब हल्दी अच्छी तरह रच जाए, तब इसमें आधा किलो कटा हुआ प्याज डालें। प्याज डालकर मटन को लगभग 10 मिनट तक भूनें। जैसे ही प्याज हल्का गलने लगे और गोश्त अपना प्राकृतिक पानी छोड़ने लगे, उसी वक्त इसमें शुद्ध देसी घी डाल दें। घी पड़ते ही कड़ाही से उठने वाली महक बदल जाती है और मटन के रेशों में चिकनाई समा जाती है। घी डालने के बाद मिश्रण को 20 मिनट तक और भूनें ताकि घी और मांस का अर्क आपस में घुल-मिल जाएं। इसके बाद 200 ग्राम लहसुन और 150 ग्राम अदरक का पेस्ट डालकर 15 से 20 मिनट तक चलाते हुए पकाएं। जब अदरक-लहसुन का पानी सूख जाए, तब स्वाद के अनुसार लाल मिर्च पाउडर मिलाएं और फिर से 15 से 20 मिनट तक धीमी आंच पर भुनाई जारी रखें। पानी का संतुलन और धीमी आंच पर अंतिम पकवान इस पूरे दौर में कड़ाही के भीतर आंच के मिजाज और मांस की रंगत पर पैनी नजर रखना जरूरी है ताकि सूखे मसाले जलने न पाएं। जब गोश्त गलने की दिशा में बढ़ने लगे और मसाले गहरा तेल छोड़ने लगें, तब काली मिर्च की गुंडी को थोड़े से पानी में घोलकर कड़ाही में डालें। इस घोल को मटन के साथ 15 से 20 मिनट तक चलाते हुए पकाएं। इसके बाद स्वाद के मुताबिक नमक डालें और पूरे मसाले को अच्छी तरह मिला लें। अब तरी और मांस को पूरी तरह नरम करने के लिए जरूरत के अनुसार गुनगुना पानी डालें और ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर पकने दें। बीच-बीच में कड़ाही खोलकर चलाते रहें ताकि मटन नीचे न लगे। जब गोश्त पूरी तरह गलकर हड्डियों से अलग होने लगे, तब ऊपर से पिसा हुआ गरम मसाला छिड़कें, अच्छी तरह मिलाएं और कड़ाही को आंच से नीचे उतार लें। परोसने का तरीका और देवघर का देहाती जायका लोहे की कड़ाही में तैयार हुए इस देहाती मटन की खासियत इसका गहरा गाढ़ा रंग, मसालों की सोंधी खुशबू और धीमी भुनाई से पैदा हुआ गाढ़ापन है। इसे गर्मागर्म उबले चावल या तवा रोटी के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि इसे शुरू से अंत तक बनाने में करीब ढाई घंटे का वक्त जरूर लगता है, लेकिन थाली में परोसने के बाद हर निवाले में वह मेहनत पूरी तरह सार्थक महसूस होती है। जब भी घर में कोई पर्व-त्योहार हो या छुट्टी के दिन परिवार के साथ कुछ खास खाने की ख्वाहिश हो, तो देवघर की इस पारंपरिक देहाती शैली में मटन बनाकर जरूर चखें। इसका आप पर असर इस पारंपरिक रेसिपी को अपनाकर घर पर ही बिना किसी कृत्रिम रंग के असली ढाबा स्टाइल गाढ़ा और स्वादिष्ट मटन बनाया जा सकता है। • रसोई के बर्तनों का चयन: नॉन-स्टिक या एल्युमीनियम के बजाय लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल भोजन को स्वाभाविक गहरा रंग और सोंधापन देता है। इसके लिए आपको भारी पेंदे वाले लोहे के बर्तन में धीमी आंच पर खाना पकाने की आदत डालनी होगी। • समय का प्रबंधन: इस विधि से मटन बनाने में करीब ढाई घंटे का समय लगता है, इसलिए इसे जल्दबाजी में पकाने से बचना चाहिए। छुट्टी के दिनों या दावत के मौकों पर पहले से योजना बनाकर ही इसे पकाना शुरू करें। • सामग्री की गुणवत्ता: घर का पेरा हुआ सरसों का तेल और शुद्ध देसी घी इस रेसिपी का स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं। सही अनुपात में अदरक, लहसुन और प्याज रखने से ग्रेवी का गाढ़ापन बिल्कुल सही बनता है। • पकाने की तकनीक: प्याज से पहले मटन को सीधे तेल और हल्दी में भूनने से गोश्त की बनावट सख्त नहीं होती और वह अंदर तक रसीला बना रहता है। यह तरीका सामान्य मटन करी से अलग है लेकिन मांस के रेशों को बेहतर स्वाद देता है। ऐसा क्यों हुआ देहाती मटन का यह खास स्वाद और गहरा रंग किसी आधुनिक मसाले की वजह से नहीं, बल्कि लोहे के बर्तन और धीमी भुनाई की वैज्ञानिक प्रक्रिया से तैयार होता है। • लोहे की कड़ाही का असर: लोहे के बर्तन में लंबे समय तक मसालों और तेल को भूनने से स्वाभाविक ऑक्सीकरण होता है, जो ग्रेवी को गहरा काला-भूरा रंग देता है। इससे बिना किसी कृत्रिम रंग के सालन में पारंपरिक देहाती रंगत आ जाती है। • धीमी आंच पर भुनाई: मटन और मसालों को 15 से 20 मिनट के अलग-अलग चरणों में भूनने से प्याज और मसालों की शर्करा धीरे-धीरे कैरेमलाइज होती है। यही प्रक्रिया मीट के प्राकृतिक रस को अंदर ही सील कर देती है। • हींग के पानी का इस्तेमाल: सरसों के खौलते तेल में हींग का पानी डालने से तेल का तीखा कड़वापन खत्म हो जाता है। इससे तेल की तेज गंध दब जाती है और मसालों की मूल खुशबू खुलकर सामने आती है। • प्याज से पहले गोश्त की भुनाई: पारंपरिक देवघर शैली में पहले मटन को तेल में भूनने से मांस की ऊपरी परत पक जाती है। बाद में प्याज डालने पर वह मांस के छोड़े गए पानी में धीरे-धीरे गलकर गाढ़ी ग्रेवी बन जाता है। सवाल-जवाब 1. देहाती मटन को पकाने में कुल कितना समय लगता है? इस पारंपरिक विधि से मटन बनाने में शुरू से अंत तक करीब ढाई घंटे का समय लगता है। 2. 1 किलो मटन के लिए कितने प्याज और तेल की जरूरत होती है? 1 किलो मटन के लिए आधा किलो प्याज और 250 ग्राम सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। 3. मटन का गहरा रंग किस वजह से आता है? लोहे की कड़ाही में धीमी आंच पर मटन और मसालों को लगातार भूनने की वजह से यह गहरा रंग आता है। 4. सरसों के तेल की तेज गंध कम करने के लिए क्या डाला जाता है? गरम सरसों के तेल में हींग का पानी डालने से उसकी तेज गंध और तीखापन कम हो जाता है। 5. क्या इस रेसिपी में प्याज मटन से पहले डाला जाता है? नहीं, इसमें प्याज डालने से पहले मटन को तेल और हल्दी में करीब 20-20 मिनट तक अच्छी तरह भूना जाता है। 6. देहाती मटन को किस चीज के साथ परोसना सबसे अच्छा माना जाता है? इसे गर्मागर्म उबले चावल या सादी तवा रोटी के साथ परोसा जाता है। https://trendkia.com/food/parnparika-andaja-men-ghara-para-taiyara-karen-dehati-mutton-lohe-ki-karahi-men-dhimi-ancha-para-pakane-se-milega-lajavaba-svada-56352 TrendKia — Har trend, sabse pehle.