पारंपरिक गोंद मखाना पंजीरी से बढ़ाएं इम्यूनिटी, बदलते मौसम में शरीर को मिलेगी प्राकृतिक ऊर्जा सर्दियों की शुरुआत में पौष्टिक गोंद, मखाना और मेवों से तैयार होने वाली पंजीरी शरीर को अंदरूनी गर्माहट, खनिज और जरूरी ताकत देती है। बदलते मौसम और ठंड की दस्तक के साथ ही शरीर को अतिरिक्त पोषण एवं गर्माहट की आवश्यकता महसूस होने लगती है। ऐसे समय में सदियों पुरानी पारंपरिक खानपान की आदतें न केवल शारीरिक ऊर्जा को बनाए रखती हैं, बल्कि मौसमी बीमारियों से बचाव में भी बेहद मददगार साबित होती हैं। मेवों, बीजों और जड़ी-बूटियों के संयोजन से बनने वाला यह पारंपरिक आहार आज भी सेहतमंद जीवनशैली के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना दशकों पहले हुआ करता था। पोषण और सेहत के लिए जरूरी तत्व इस पौष्टिक मिश्रण के नियमित सेवन से शरीर को उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, प्राकृतिक और सुरक्षित वसा, फाइबर तथा मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और कैल्शियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाला शुद्ध देसी घी शरीर के भीतर प्राकृतिक ताप बनाए रखने का काम करता है। इसे खाने से न केवल पेट लंबे समय तक भरा रहता है, बल्कि शारीरिक कमजोरी दूर होकर दिनभर स्फूर्ति भी बनी रहती है। तैयारी के लिए आवश्यक सामग्री इस पौष्टिक आहार को बनाने के लिए नीचे दी गई सामग्री जुटाएं • 150 ग्राम बादाम, 150 ग्राम काजू, 150 ग्राम पिस्ता और 150 ग्राम अखरोट • 150 ग्राम मखाने और 100 ग्राम किशमिश • 100 ग्राम खाद्य गोंद और 150 ग्राम खरबूजे के बीज • ¼ कप सफेद तिल, ¼ कप खसखस और ¼ कप अलसी के बीज • 2 कप कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल • ½ बड़ा चम्मच सोंठ (अदरक पाउडर) और 1 छोटा चम्मच कुटी हुई अजवायन • 200 ग्राम गेहूं का आटा • 250 से 350 ग्राम शुद्ध देसी घी • 250 से 300 ग्राम पिसी हुई देसी खांड बनाने की आसान और क्रमबद्ध विधि सबसे पहले एक भारी तले वाली कड़ाही में थोड़ा देसी घी गर्म करें। इसके बाद काजू, बादाम, पिस्ता, अखरोट, किशमिश, खरबूजे के बीज, मखाने और गोंद को एक-एक करके मध्यम आंच पर घी में अच्छी तरह तलकर निकाल लें। आवश्यकतानुसार थोड़ा-थोड़ा घी डालते रहें ताकि प्रत्येक चीज समान रूप से कुरकुरी हो सके। इसके बाद उसी कड़ाही में हल्का घी डालकर तिल, खसखस, अलसी के बीज और कद्दूकस किए नारियल को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक सेकें। इसी समय इसमें पिसी सोंठ और कुटी अजवायन डालकर मिला दें। अब दोबारा कड़ाही में गेहूं का आटा डालें और धीमी से मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि आटे का रंग हल्का भूरा न हो जाए और भीनी खुशबू न आने लगे। तले हुए मेवों, मखानों और गोंद को मिक्सी में डालकर दरदरा पीस लें या फिर खरल में कूट लें। ध्यान रखें कि कुछ मेवों को थोड़ा साबुत या बड़े टुकड़ों में ही रहने दें, जिससे खाते समय अच्छा क्रंच मिलता रहे। इसके बाद एक बड़े बर्तन में पिसे मेवे, भुना हुआ गेहूं का आटा और देसी खांड को एक साथ मिलाएं। अंत में बचा हुआ पिघला देसी घी डालें और सभी सामग्रियों को हाथों या चम्मच से तब तक मिलाएं जब तक कि पूरा मिश्रण पूरी तरह एकसार न हो जाए। भंडारण और सेवन का सही तरीका तैयार मिश्रण को हवा-बंद डिब्बे में भरने से पहले कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। जब यह अच्छी तरह ठंडा हो जाए, तो इसे किसी साफ कंटेनर में बंद करके रख दें। यह व्यंजन पूरे 1 महीने तक बिल्कुल ताजा और खाने योग्य बना रहता है। हर सुबह दूध के साथ केवल 3 से 4 चम्मच इसका सेवन करने से शरीर को भरपूर ऊर्जा और ताकत मिलती रहती है। इसका आप पर असर बदलते मौसम में घर पर यह पारंपरिक व्यंजन बनाकर परिवार को बिना किसी मिलावट के जरूरी पोषण और ऊर्जा दी जा सकती है। • दैनिक खानपान में: सुबह के नाश्ते में 3 से 4 चम्मच पंजीरी को गर्म दूध के साथ शामिल करने से दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। इससे बार-बार लगने वाली भूख शांत होती है और बाहर के प्रोसेस्ड स्नैक्स पर निर्भरता घटती है। • शारीरिक क्षमता पर: इसमें मौजूद कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम हड्डियों तथा मांसपेशियों को मजबूती देते हैं। कमजोरी या थकान महसूस करने वाले लोगों के लिए यह एक प्राकृतिक टॉनिक का काम करता है। • रसोई के बजट पर: एक बार सामग्री तैयार करके पूरे 1 महीने के लिए इसे सुरक्षित स्टोर किया जा सकता है। इससे महंगे डिब्बाबंद सप्लीमेंट्स खरीदने की आवश्यकता नहीं रहती। • सर्दियों में बचाव: देसी घी, सोंठ और अजवायन का मिश्रण शरीर के आंतरिक तापमान को संतुलित रखता है। इससे मौसमी ठंड और आलस से निपटने में मदद मिलती है। ऐसा क्यों हुआ हल्की ठंड की शुरुआत होते ही भारतीय घरों में इस खास पंजीरी को बनाने की सदियों पुरानी परंपरा चली आ रही है। मौसमी बदलाव के दौरान शरीर की ऊर्जा खपत बढ़ने और संक्रमण के जोखिम को देखते हुए इसे तैयार किया जाता है। • मौसमी जरूरत: तापमान गिरते ही शरीर को आंतरिक रूप से गर्म रखने के लिए अधिक कैलोरी और स्वस्थ वसा की आवश्यकता होती है। देसी घी और भुने मेवों का संयोजन इस जरूरत को प्राकृतिक रूप से पूरा करता है। • रोग प्रतिरोधक क्षमता: बदलते मौसम में खांसी, सर्दी और जोड़ों के दर्द की शिकायत अक्सर बढ़ जाती है। सोंठ, अजवायन और अलसी जैसे तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ बनाते हैं। • आहार की संपूर्णता: सिर्फ एक व्यंजन में प्रोटीन, फाइबर, ओमेगा फैटी एसिड और खनिजों का अनूठा संतुलन मिल जाता है। यही कारण है कि पीढ़ियों से इसे सर्दियों का सबसे भरोसेमंद पारंपरिक आहार माना जाता रहा है। सवाल-जवाब 1. इस पंजीरी को कितने दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है? इसे कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा करके एयरटाइट कंटेनर में पूरे 1 महीने तक सुरक्षित स्टोर किया जा सकता है। 2. रोजाना कितनी मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए? प्रतिदिन सुबह दूध के साथ केवल 3 से 4 चम्मच पंजीरी खाना पर्याप्त पोषण और शक्ति प्रदान करता है। 3. इस रेसिपी में किन प्रमुख मेवों और बीजों का प्रयोग किया गया है? इसमें बादाम, काजू, पिस्ता, अखरोट, किशमिश, मखाना, गोंद, खरबूजे के बीज, तिल, खसखस और अलसी के बीज शामिल हैं। 4. क्या मेवों को बहुत बारीक पीसना जरूरी है? नहीं, मेवों को मिक्सी में दरदरा पीसना या कूटना चाहिए और कुछ टुकड़े साबुत रखने चाहिए ताकि खाते वक्त क्रंच मिले। https://trendkia.com/food/parnparika-gond-makhana-pnjiri-se-barhaen-imyuniti-badalate-mausama-men-sharira-ko-milegi-prakritika-urja-41796 TrendKia — Har trend, sabse pehle.