पारंपरिक जायके और सादा भोजन, बीजिंग के बन्स से लेकर घरेलू स्वाद तक ऐसी है शी जिनपिंग की थाली चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सार्वजनिक भोजनों से उनके सादे और पारंपरिक चीनी खानपान के प्रति लगाव की झलक मिलती है। शान्शी प्रांत के घरेलू व्यंजनों से लेकर बीजिंग के साधारण बन्स तक, उनके भोजन में स्थानीय स्वाद प्रमुखता से नजर आता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों और विशाल कूटनीतिक सम्मेलनों में नजर आने वाले राष्ट्राध्यक्षों की निजी दिनचर्या को लेकर लोगों में हमेशा उत्सुकता रहती है। जब बात खानपान की आती है, तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सार्वजनिक जीवन शैली में साधारण और प्रांतीय व्यंजनों की गहरी छाप दिखाई देती है। विभिन्न दौरों और सार्वजनिक मौकों पर सामने आए ब्यौरों से यह स्पष्ट होता है कि वे भव्य दावतों के बजाय अपने देश के रोजमर्रा के पारंपरिक स्वादों को तरजीह देते रहे हैं। जब आम कतार में लगकर खाया साधारण लंच चीनी राष्ट्रपति के खानपान से जुड़ा सबसे चर्चित वाकया दिसंबर 2013 का है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। उस दौरान वे बीजिंग स्थित किंगफेंग स्टीम्ड बन रेस्टोरेंट में पहुंचे थे। वहां उन्होंने किसी वीआईपी तामझाम के बिना स्वयं कतार में खड़े होकर भोजन का ऑर्डर दिया और अन्य ग्राहकों के बीच बैठकर लंच किया। उनकी थाली में उस दिन छह पोर्क और हरी प्याज वाले स्टीम्ड बन्स, स्ट्यू किया हुआ पोर्क लिवर और सरसों के हरे पत्तों की एक प्लेट शामिल थी। इस पूरे साधारण भोजन का कुल बिल 21 युआन बैठा था, जो उस वक्त भारतीय मुद्रा में लगभग 300 रुपये के बराबर आंका गया था। इस प्रसंग ने न सिर्फ उनके सादगी पसंद रवैये को रेखांकित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि वे चीनी जनमानस के सामान्य भोजन से कितने जुड़े हुए हैं। सैनिकों के साथ साधारण अंडा-टमाटर और शान्शी का देहाती स्वाद साल 2014 में जब शी जिनपिंग ने सैन्य जवानों के साथ बैठकर भोजन साझा किया, तो उनकी थाली में टमाटर के साथ तले हुए अंडों की बेहद लोकप्रिय घरेलू डिश मौजूद थी। यह व्यंजन चीन के लगभग हर घर में रोजमर्रा के नाश्ते या खाने का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा उनके भोजन की आदतों का एक मजबूत सिरा उत्तर-पश्चिमी चीन के शान्शी प्रांत से गहराई से जुड़ा हुआ है। अपनी युवावस्था के दौरान उन्होंने लियांगजियाहे गांव में कई वर्ष बिताए थे। जब वे 2015 में इस गांव के दौरे पर दोबारा गए, तब उन्होंने एक स्थानीय परिवार के घर पर पारंपरिक देहाती भोजन ग्रहण किया। इस भोज में फर्मेंटेड यानी अचार वाली देशी सब्जियां, स्थानीय ढंग से तले हुए पकवान, मटन, चिकन और कद्दू की सादी सब्जी परोसी गई थी। उत्तरी चीन के पारंपरिक खानपान जैसे हाथ से बने नूडल्स, स्टीम्ड बन्स और सादे मटन के प्रति उनका विशेष जुड़ाव इसी दौर की पृष्ठभूमि से उपजा माना जाता है। बचपन की पसंदीदा मीठी डिश और संयमित आदतें पारंपरिक स्नैक्स के प्रति भी शी जिनपिंग का एक खास लगाव सामने आ चुका है। उन्होंने खुद यह साझा किया था कि बचपन से ही उन्हें जियांगमी टियाओ नामक पारंपरिक मीठा व्यंजन बेहद पसंद रहा है। वर्ष 2017 में पीपुल्स डेली में छपे एक बयान के अनुसार, वे पारंपरिक उत्सवों और त्योहारों के दौरान जियांगमी टियाओ और तली हुई पाईचा जैसी खस्ता नमकीन चीजें जरूर खरीदते हैं। हालांकि इन पकवानों को लेकर वे अपनी सेहत के प्रति सतर्कता भी बरतते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि चूंकि इन तली हुई पारंपरिक चीजों में तेल की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए वे इन्हें सामान्य दिनों में खाने से बचते हैं और सिर्फ बड़े पर्व-त्योहारों पर ही सीमित मात्रा में इनका आनंद लेते हैं। पसंदीदा पकवान को पूरी तरह छोड़ने के बजाय अवसरों पर सीमित रखना उनकी संयमित जीवनशैली को दर्शाता है। दौरे पर मांसाहारी डिशेज और शराब से दूरी सरकारी दौरों के दौरान दर्ज किए गए भोजन के विवरणों से यह भी पता चलता है कि उनकी थाली में मांसाहारी व्यंजनों का संतुलित स्थान रहा है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2012 में जब उन्होंने हेबेई प्रांत की फुपिंग काउंटी का दौरा किया था, तो उनके आधिकारिक भोजन में ब्राउन सॉस के साथ पकाया गया चिकन, साबुत लहसुन की कलियों के साथ पोर्क बेली और लहसुन के तड़के वाली ताजी हरी पत्तागोभी या हरी सब्जियां शामिल की गई थीं। उसी आधिकारिक यात्रा के रिकॉर्ड में यह खास विवरण भी दर्ज है कि उनके भोजन के साथ किसी भी प्रकार का अल्कोहल यानी शराब बिल्कुल नहीं परोसी गई थी। हालांकि इन सभी सार्वजनिक उदाहरणों के आधार पर किसी वैज्ञानिक डाइट प्लान का दावा नहीं किया जा सकता, फिर भी यह साफ झलकता है कि चीन के सर्वोच्च नेता की व्यक्तिगत पसंद जमीन से जुड़े पारंपरिक स्वादों के इर्द-गिर्द घूमती है। इसका आप पर असर सार्वजनिक हस्तियों की खानपान शैली से आम पाठकों को पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण और संतुलित खानपान की अहम प्रेरणा मिलती है। • खानपान संतुलन: पसंदीदा तली-भुनी मिठाइयों को रोजाना खाने के बजाय सिर्फ त्योहारों तक सीमित रखकर स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे वजन और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में मदद मिलती है। • पारंपरिक स्वाद: आधुनिक प्रोसेस्ड फूड के बजाय घर के बने ताजे और मौसमी स्थानीय व्यंजनों को प्राथमिकता देना सेहत के लिए फायदेमंद है। क्षेत्रीय खानपान शरीर की स्वाभाविक जरूरतों के अनुकूल होता है। • सादगी और अनुशासन: बड़े पदों पर रहते हुए भी सादा भोजन चुनना यह संदेश देता है कि पोषण और सादगी दिखावे से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। इससे भोजन की बर्बादी रोकने की प्रेरणा भी मिलती है। • मितव्ययी विकल्प: साधारण और पौष्टिक भोजन महंगे रेस्तरां के खाने की तुलना में बजट के लिहाज से भी काफी किफायती होता है। दैनिक जीवन में यह घरेलू बजट को संतुलित रखता है। ऐसा क्यों हुआ शी जिनपिंग के भोजन से जुड़े प्रसंग विभिन्न आधिकारिक दौरों, ग्रामीण यात्राओं और सार्वजनिक लंच के दौरान दर्ज किए गए ब्यौरों से सामने आए हैं। • सार्वजनिक आउटरीच: वर्ष 2013 में बीजिंग के साधारण रेस्तरां में आम लोगों के साथ भोजन करने का कदम प्रशासनिक सादगी और जनता से जुड़ाव दर्शाने की मुहिम का हिस्सा था। इसने उनके जनसामान्य के बीच स्वीकार्य अक्स को उभारा। • युवावस्था की पृष्ठभूमि: चीन के शान्शी प्रांत के लियांगजियाहे गांव में बिताए गए बरसों ने उनके खानपान में सादे देहाती व्यंजनों, मटन और स्थानीय सब्जियों के प्रति स्थायी लगाव पैदा किया। यही स्वाद उनके बाद के दौरों में भी परिलक्षित हुआ। • सरकारी दौरों के नियम: वर्ष 2012 के हेबेई दौरे जैसे उदाहरणों में दर्ज सादे भोजन और शराब न परोसने के विवरण फिजूलखर्ची रोकने और सरकारी कामकाज में अनुशासन स्थापित करने के निर्देशों के अनुरूप थे। सवाल-जवाब 1. शी जिनपिंग ने 2013 में बीजिंग के किस रेस्तरां में लंच किया था? उन्होंने बीजिंग स्थित किंगफेंग स्टीम्ड बन रेस्टोरेंट में कतार में लगकर भोजन खरीदा था। 2. किंगफेंग रेस्तरां में उनके भोजन का कुल खर्च कितना आया था? उस भोजन का कुल बिल 21 युआन था, जिसकी कीमत उस समय लगभग 300 भारतीय रुपये के बराबर थी। 3. शी जिनपिंग की बचपन की पसंदीदा पारंपरिक मिठाई कौन सी है? उन्हें बचपन से जियांगमी टियाओ नामक पारंपरिक मीठी डिश बेहद पसंद रही है। 4. क्या 2012 के हेबेई दौरे में उनके भोजन के साथ शराब परोसी गई थी? नहीं, आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार उनके भोजन के साथ किसी भी प्रकार की शराब नहीं परोसी गई थी। https://trendkia.com/food/parnparika-jayake-aura-sada-bhojana-beijing-ke-bansa-se-lekara-gharelu-svada-taka-aisi-hai-xi-jinping-ki-thali-34389 TrendKia — Har trend, sabse pehle.