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  "title": "पटना जंक्शन के पास मिलती है A1 चंद्रकला, सात समंदर पार तक है इस खास मिठाई का जलवा",
  "summary": "पटना जंक्शन के पास न्यू मार्केट में स्थित A1 चंद्रकला अपनी खास मिठास के लिए मशहूर है। इस मिठाई को खरीदने के लिए दुकान पर हमेशा भीड़ लगी रहती है और इसका स्वाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंचता है।",
  "content": "बिहार की राजधानी पटना में जायके के शौकीनों के लिए खान-पान की कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ खास स्वाद ऐसे हैं जो लोगों के जेहन में हमेशा के लिए बस जाते हैं। ऐसा ही एक अनोखा और लोकप्रिय स्वाद पटना जंक्शन के पास स्थित न्यू मार्केट इलाके में मिलने वाली A1 चंद्रकला का है। जैसे ही दुकान के शटर उठते हैं, वहां खरीदारों का तांता लग जाता है। कोई अपने परिवार के सदस्यों के लिए मिठाई पैक करवाता है, तो कोई अपने दोस्तों और नाते-रिश्तों को पटना की इस प्रसिद्ध सौगात का स्वाद चखाने के लिए साथ ले जाता है। इस दुकान की चंद्रकला की ख्याति केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से लेकर विदेशों में बैठे लोगों तक फैली हुई है।\n\nदुकान खुलते ही उमड़ पड़ती है खरीदारों की भीड़\n\nपटना जंक्शन से बाहर निकलकर न्यू मार्केट की दिशा में बढ़ने पर मस्जिद के ठीक सामने पिलर नंबर 6 के नजदीक यह दुकान मौजूद है। यहां आने वाले ग्राहकों को केवल एक स्वादिष्ट मिठाई नहीं मिलती, बल्कि उनके साथ पुराना अपनापन और यादें भी जुड़ी होती हैं। पटना से बाहर रहने वाले बहुत से लोग अपने घर-परिवार और बच्चों के लिए इस मिठाई को ले जाना नहीं भूलते। दुकान के संचालक धीरज कुमार चौरसिया बताते हैं कि पुणे में शिक्षा ग्रहण कर रहे बिहार के तमाम छात्र इस मिठाई को बहुत याद करते हैं। जब भी उनके अभिभावक पटना आते हैं, तो वे अपने बच्चों के लिए इसे जरूर साथ ले जाते हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी इसकी मांग इतनी अधिक है कि वहां लगभग हर दिन मिठाई भेजी जाती है। सुबह 11 बजे दुकान का संचालन शुरू होता है और रात 8 बजे तक ग्राहकों के आने-जाने का सिलसिला लगातार बना रहता है।\n\nमैदे की दो पूड़ियों के बीच भरा जाता है खोवा\n\nचंद्रकला को तैयार करने की विधि भले ही सामान्य लगे, लेकिन इसके स्वाद को एक समान बनाए रखने के लिए सामग्री की शुद्धता और निर्माण तकनीक पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। धीरज कुमार चौरसिया ने जानकारी दी कि मैदे की दो पूड़ियों के बीच में खोवा भरा जाता है और फिर उसमें मनपसंद मेवे मिलाए जाते हैं। यही मिश्रण इस मिठाई को उसका खास और अनूठा स्वाद प्रदान करता है। हालांकि, इसे सही तरीके से पकाना और तलना बहुत आवश्यक होता है, क्योंकि हल्की सी भी लापरवाही से भीतर मौजूद खोवा जल सकता है और पूरी मेहनत खराब हो सकती है। दुकानदारों का दावा है कि इस चंद्रकला को करीब एक हफ्ते तक सुरक्षित रखकर खाया जा सकता है, जिसके कारण लोग इसे दूसरे शहरों और विदेशों में अपने रिश्तेदारों के पास भी आसानी से भेज पाते हैं।\n\nट्रेन से सफर करने वाले यात्री भी करते हैं खास फरमाइश\n\nइस मिठाई की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रेलगाड़ी से गुजरने वाले मुसाफिर भी रास्ते में इसकी मांग करते हैं। दुकानदारों के अनुसार, एक बार साप्ताहिक अवकाश के दिन दुकान बंद रहने के दौरान एक यात्री का फोन आया जो ट्रेन से यात्रा कर रहे थे और उन्हें सफर के दौरान ही चंद्रकला चाहिए थी। हालांकि उस दिन प्रतिष्ठान बंद होने की वजह से मिठाई मुहैया कराना संभव नहीं हो सका। वे कहते हैं कि यह कोई नियमित होम डिलीवरी सेवा नहीं है, लेकिन पुराने ग्राहक या इसके दीवाने जब विशेष आग्रह करते हैं, तो वे उनकी खुशी का ध्यान रखते हुए रेलवे स्टेशन तक मिठाई पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उनके लिए यह केवल व्यापार नहीं है, बल्कि ग्राहकों के स्नेह और भरोसे का पूर्ण सम्मान है।\n\nदशकों पुरानी दुकान और 25 रुपये प्रति पीस कीमत\n\nवर्तमान समय में A1 चंद्रकला के एक पीस की कीमत 25 रुपये निर्धारित है। यह दुकान कई दशकों पुरानी है, हालांकि इसके स्थापना वर्ष की सटीक तारीख किसी के पास उपलब्ध नहीं है। दुकान पर कड़ाही संभाल रहे एक अनुभवी कारीगर ने बताया कि वे पिछले 50 वर्षों से इसी स्थान पर काम कर रहे हैं, जिससे साफ होता है कि यह प्रतिष्ठान उससे भी अधिक पुराना है। इस समय चौरसिया परिवार की दूसरी पीढ़ी इस कारोबार को आगे बढ़ा रही है। संचालक का मानना है कि उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रखने के लिए गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता, यही वजह है कि तमाम अन्य दुकानों के बीच इस ब्रांड ने अपनी अलग पहचान बनाई है।\n\nक्यों रखा गया है इस मिठाई का नाम चंद्रकला\n\nइस लजीज व्यंजन के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प और तार्किक कहानी जुड़ी हुई है। दुकानदारों का कहना है कि चंद्रकला शब्द चंद्रमा की सोलह कलाओं से ताल्लुक रखता है। इस मिठाई को बनाने से लेकर खाने तक एक खास कला की जरूरत होती है। इसे बनाते समय पूरी सतर्कता बरतनी पड़ती है और खाते वक्त भी सावधानी रखनी होती है, ताकि अंदर की चाशनी कपड़ों पर न गिर जाए। निर्माण में थोड़ी सी चूक होने पर यह जल सकती है और इसका जायका बिगड़ सकता है। इसका मतलब साफ है कि चंद्रकला केवल मैदे, खोवा और मेवे का मेल नहीं है, बल्कि यह कुशल कारीगरी और लंबे अनुभव का बेहतरीन परिणाम है।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर पाठकों को पटना की पारंपरिक और प्रसिद्ध मिठाइयों की जानकारी देती है, जिससे स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक धरोहर का पता चलता है।\n\n• भारत में: लोग देश के अन्य हिस्सों से यात्रा करते समय इस प्रकार की पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद ले सकते हैं और उन्हें अपने परिजनों तक पहुंचा सकते हैं।\n\n• पटना में: स्थानीय निवासी और बाहर से आने वाले यात्री न्यू मार्केट पहुंचकर किफायती दाम में इस पारंपरिक मिठाई का आनंद उठा सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पारंपरिक मिठाई अपनी खास गुणवत्ता और पुरानी कारीगरी के कारण दशकों से लोकप्रिय बनी हुई है।\n\n• पारंपरिक रेसिपी: मैदे और खोवे का सही मिश्रण और उचित तापमान पर तलने की तकनीक इसके अनूठे स्वाद को बनाए रखती है।\n\n• ग्राहकों का विश्वास: गुणवत्ता से कोई समझौता न करने की नीति के कारण यह दुकान पीढ़ियों से ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. A1 चंद्रकला की दुकान कहाँ स्थित है?\nयह दुकान पटना जंक्शन के पास न्यू मार्केट में मस्जिद के सामने पिलर नंबर 6 के पास स्थित है।\n\n2. A1 चंद्रकला के एक पीस की कीमत कितनी है?\nA1 चंद्रकला के एक पीस की कीमत वर्तमान में 25 रुपये है।\n\n3. इस मिठाई को कितने दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है?\nइस चंद्रकला को लगभग एक सप्ताह तक रखकर खाया जा सकता है।\n\n4. यह दुकान कितने समय से खुली रहती है?\nयह दुकान सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक खुली रहती है।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-10-23",
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