पीतल नगरी में 20 रुपये की प्लेट में बिक रहा 200 साल पुराना स्वाद, मुरादाबाद और बरेली तक फैली दही-भल्लों की महक मुरादाबाद में मूंग दाल, गुड़ और खजूर की सोंठ से तैयार पारंपरिक दही-भल्ले लोगों को खूब लुभा रहे हैं, जिनकी शुरुआत 20 रुपये से होती है। उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर अपने चमचमाते पीतल के बर्तनों और हस्तशिल्प के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां का पीतल उद्योग विदेशों तक फैला हुआ है, लेकिन अब इस औद्योगिक पहचान के बीच शहर का खान-पान भी अपनी अलग पहचान बना रहा है। इन दिनों शहर में पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाने वाले खास दही-भल्ले खाने वालों के बीच जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। किफायती दाम और बेहतरीन स्वाद के कारण हर रोज इन ठेलों पर खाने-पीने के शौकीनों का हुजूम देखने को मिलता है। मूंग की दाल और शुद्ध सामग्री से तैयार होता है भल्ला दुकानदार अजय कुमार अपनी इस खास रेसिपी को पूरी तरह शुद्ध और प्राकृतिक बताते हैं। वे भल्ले तैयार करने के लिए मूंग की दाल का उपयोग करते हैं। पहले दाल को बारीक पीसकर उसका घोल तैयार किया जाता है और फिर उससे भल्ले तले जाते हैं। उनका कहना है कि यह व्यंजन लगभग 200 साल पुरानी पारंपरिक खान-पान शैली का हिस्सा है, जिसे आज भी उसी पुराने तरीके से तैयार किया जाता है ताकि इसका मूल स्वाद और पौष्टिकता बरकरार रहे। फास्ट फूड के दौर में सेहतमंद विकल्प आजकल खान-पान में चाऊमीन, बर्गर और पिज्जा जैसे फास्ट फूड का चलन काफी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर बच्चों और युवाओं की सेहत पर देखने को मिलता है। अजय कुमार के अनुसार, उनके तैयार किए गए दही-भल्ले इस तरह के जंक फूड का एक पौष्टिक और सुरक्षित विकल्प पेश करते हैं। वे इसमें शुद्ध गाढ़े दही, घर में तैयार पिसे हुए मसालों और खास किस्म की सोंठ का इस्तेमाल करते हैं। यह सोंठ बाजार के रसायनों के बजाय पूरी तरह गुड़ और खजूर से पकाई जाती है, जिससे इसका खट्टा-मीठा स्वाद सामान्य भल्लों से बिल्कुल अलग बन जाता है। पांच गाड़ियों का नेटवर्क और किफायती दाम इस स्वाद के दीवाने सिर्फ मुरादाबाद तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आसपास के रामपुर शहर से भी लोग इसका लुत्फ उठाने पहुंचते हैं। अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने इस काम की शुरुआत बेहद छोटे पैमाने पर की थी। धीरे-धीरे लोगों की पसंद बढ़ी तो काम का दायरा भी बढ़ता चला गया। आज उनके पास कुल पांच गाड़ियां संचालित हो रही हैं। इनमें से तीन गाड़ियां मुरादाबाद शहर में सेवाएं देती हैं, जबकि दो गाड़ियां बरेली शहर में ग्राहकों के लिए लगाई जाती हैं। ग्राहकों की जेब का ख्याल रखते हुए इनकी कीमत 20 रुपये से शुरू होकर 30 रुपये प्रति प्लेट तक रखी गई है। शहर में मिलने का समय और प्रमुख ठिकाने मुरादाबाद में इन गाड़ियों के लगने का समय और स्थान तय किया गया है ताकि लोगों को ताजे भल्ले मिल सकें। दोपहर 1 बजे से कपूर कंपनी के पास इनकी गाड़ी खड़ी होती है। इसके बाद शाम 5 बजे से बुद्धा पार्क और कांशीराम पार्क के पास गाड़ियां पहुंचती हैं, जहां शाम की सैर पर निकले लोग और परिवार स्वाद लेने पहुंचते हैं। अलग-अलग इलाकों में गाड़ियां मौजूद रहने से ग्राहकों को आसानी से अपनी पसंदीदा प्लेट मिल जाती है। अजय कुमार के मुताबिक, एक बार स्वाद चखने वाला ग्राहक दोबारा जरूर लौटता है, जिसके चलते दिन-ब-दिन इनकी मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। इसका आप पर असर मुरादाबाद और आसपास के जिलों में किफायती और स्वास्थ्यवर्धक पारंपरिक स्ट्रीट फूड का एक सस्ता विकल्प उपलब्ध हो गया है। • मुरादाबाद और बरेली में: स्थानीय निवासियों को कपूर कंपनी, बुद्धा पार्क और कांशीराम पार्क के पास 20 से 30 रुपये में पौष्टिक नाश्ता मिल रहा है। शाम के समय टहलने वाले लोग और परिवार बाजार के जंक फूड से बचकर शुद्ध देसी व्यंजन का स्वाद ले सकते हैं। • आसपास के जिलों में: रामपुर और आसपास के शहरों से मुरादाबाद आने वाले यात्री भी शहर के प्रमुख सार्वजनिक पार्कों के बाहर इस लोकप्रिय नाश्ते का आनंद ले सकते हैं। इससे क्षेत्र में पारंपरिक और सेहतमंद खान-पान की मांग को बढ़ावा मिल रहा है। • बजट और सेहत पर: केवल 20 रुपये की न्यूनतम कीमत होने की वजह से यह छात्रों और आम कामकाजी लोगों की जेब पर बिल्कुल भारी नहीं पड़ता। साथ ही मूंग दाल, गुड़ और खजूर का इस्तेमाल होने के कारण यह फास्ट फूड के मुकाबले पाचन और स्वास्थ्य के लिए कहीं बेहतर है। • स्ट्रीट वेंडर्स के लिए: छोटे स्तर से पांच गाड़ियों तक का यह सफर स्थानीय युवाओं और छोटे व्यापारियों को गुणवत्ता आधारित खान-पान के कारोबार में संभावनाएं दिखाता है। शुद्धता और सही मूल्य तय करके स्थानीय स्तर पर भी सफल रोजगार खड़ा किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ फास्ट फूड के बढ़ते प्रचलन के बीच पारंपरिक और प्राकृतिक रूप से तैयार व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ी है, जिसने इस उद्यम के विस्तार को संभव बनाया। • शुद्ध सामग्री का उपयोग: इस लोकप्रियता का मुख्य कारण मूंग दाल, गाढ़े दही और खजूर-गुड़ की सोंठ जैसे प्राकृतिक घटकों का प्रयोग है। लोग जंक फूड से होने वाले नुकसान से बचने के लिए ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। • किफायती मूल्य निर्धारण: प्लेट की कीमत 20 से 30 रुपये रखी गई है, जो हर वर्ग के ग्राहक के बजट में फिट बैठती है। सही कीमत और बेहतर स्वाद ने इसे बाजार में तेजी से लोकप्रिय बनाया। • समय और स्थान का सटीक प्रबंधन: दोपहर में व्यावसायिक क्षेत्र कपूर कंपनी और शाम को बुद्धा पार्क व कांशीराम पार्क जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में गाड़ियां लगाने से ग्राहकों की नियमित आमद सुनिश्चित हुई। इस योजनाबद्ध उपस्थिति ने कारोबार को मुरादाबाद से बरेली तक फैलने में मदद की। सवाल-जवाब 1. मुरादाबाद में बिकने वाले इन खास दही-भल्लों की शुरुआती कीमत क्या है? इन दही-भल्लों की कीमत 20 रुपये से शुरू होकर 30 रुपये प्रति प्लेट तक है। 2. यह भल्ले किस दाल से तैयार किए जाते हैं? यह दही-भल्ले मूंग की दाल को पीसकर उसके घोल से शुद्ध और पारंपरिक तरीके से बनाए जाते हैं। 3. भल्लों पर डाली जाने वाली सोंठ में किन चीजों का इस्तेमाल होता है? सोंठ को बाजार के रसायनों के बजाय पूरी तरह गुड़ और खजूर के मिश्रण से तैयार किया जाता है। 4. अजय कुमार का यह कारोबार कितने शहरों में और कितनी गाड़ियों से चल रहा है? यह कारोबार कुल पांच गाड़ियों से चल रहा है, जिनमें से तीन गाड़ियां मुरादाबाद में और दो बरेली में लगाई जाती हैं। 5. मुरादाबाद में यह दही-भल्ले किस समय और किन जगहों पर उपलब्ध होते हैं? दोपहर 1 बजे से कपूर कंपनी के पास और शाम 5 बजे के बाद बुद्धा पार्क व कांशीराम पार्क में यह दही-भल्ले मिलते हैं। प्रेरणा और सबक छोटे पैमाने पर शुरू किए गए पारंपरिक खान-पान के काम को गुणवत्ता और लगन के बल पर एक बड़े नेटवर्क में बदला जा सकता है। • गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं: अजय कुमार ने बाजार की देखा-देखी कृत्रिम तत्वों के बजाय मूंग दाल, गुड़ और खजूर जैसी पारंपरिक सामग्रियों पर भरोसा बनाए रखा। शुद्ध उत्पाद हमेशा ग्राहकों का दीर्घकालिक भरोसा जीतता है। • छोटे स्तर से शुरुआत: व्यवसाय चाहे कितने भी सीमित संसाधनों से शुरू हो, निरंतरता और ईमानदारी से उसे बड़े स्तर पर पहुंचाया जा सकता है। एक छोटे प्रयास से आज पांच गाड़ियों का बेड़ा तैयार हो चुका है। • ग्राहक केंद्रित मूल्य: उत्पाद को आम जनता की पहुंच में रखने के लिए 20 रुपये का शुरुआती दाम तय करना एक सफल कारोबारी कदम साबित हुआ। उचित मूल्य अधिक बिक्री और निरंतर मांग की नींव रखता है। • सुविचारित विस्तार: मांग बढ़ने पर एक ही शहर तक सीमित रहने के बजाय पड़ोसी शहर बरेली में भी गाड़ियां शुरू की गईं। सही समय पर नए बाजारों में उतरना किसी भी छोटे उद्यम को बड़ा बना सकता है। https://trendkia.com/food/pitala-nagari-men-20-rupaye-ki-pleta-men-bika-raha-200-sala-purana-svada-moradabad-aura-bareilly-taka-phaili-dahi-bhallon-ki-mahak-34363 TrendKia — Har trend, sabse pehle.