# पुदीना और काजू की रेशमी ग्रेवी से घर पर तैयार करें जायकेदार हैदराबादी हरा मुर्ग

> चिकन के शौकीनों के लिए धनिया, पुदीना और काजू के गाढ़े पेस्ट से बनी यह हैदराबादी डिश लाल ग्रेवी से बिल्कुल अलग और ताजगी भरा स्वाद देती है।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/pudina-aura-kaju-ki-reshami-grevi-se-ghara-para-taiyara-karen-jayakedara-hyderabadi-hara-murga-56288 · **Language:** Hindi
**Tags:** हैदराबादी ग्रीन चिकन, चिकन रेसिपी, नॉनवेज रेसिपी, पुदीना चिकन, काजू ग्रेवी, डिनर रेसिपी

नॉनवेज खाने के शौकीनों की थाली में ग्रेवी का रंग और उसका मिजाज हमेशा खास मायने रखता है। अमूमन घरों में प्याज, लहसुन और टमाटर से तैयार लाल या भूरी ग्रेवी वाला मुर्ग ही ज्यादा पकता है, मगर जब स्वाद में कुछ नयापन और ताजगी चाहिए हो, तो ताजी हरी पत्तियों के मेल से बनने वाला व्यंजन बेहतरीन विकल्प साबित होता है। दक्षिण भारत की मशहूर दस्तरख्वानी रिवायतों में शुमार हरा मुर्ग अपनी भीनी खुशबू, हरी मिर्चों की हल्की तीखी तेजी और भीगे हुए काजू के रेशमीपन के कारण बेहद खास माना जाता है। छुट्टी के दिन परिवार के साथ दोपहर का खाना हो या फिर शाम को घर पधारे खास मेहमानों की खातिरदारी, यह डिश हर महफिल में अलग छाप छोड़ती है। इसे बनाने में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पत्तियों का रंग काला न पड़े, काजू की ग्रेवी बर्तन के तले में न चिपके और गोश्त भीतर तक पूरी तरह नर्म होकर मसालों को अपने में जज्ब कर ले।

## रसोई में जुटाएं जरूरी सामग्री का सही अनुपात
इस व्यंजन को सुचारू रूप से पकाने के लिए जरूरी है कि तमाम चीजें चूल्हा जलाने से पहले ही सलीके से नापकर रख ली जाएं। गोश्त के तौर पर छह से सात मध्यम आकार के चिकन के टुकड़े उपयुक्त रहते हैं। हरियाली और ताजगी के लिए एक पूरा कप भरकर हरा धनिया और उतनी ही मात्रा में पुदीने की ताजी पत्तियां लें। तीखेपन के संतुलन हेतु दो हरी मिर्चें और गाढ़ेपन के लिए पांच से छह साबुत काजू पर्याप्त होते हैं। तड़के और बेस के लिए एक मध्यम प्याज, दो बड़े चम्मच ताजा अदरक-लहसुन का मिश्रण, एक तेजपत्ता, एक छोटी हरी इलायची और दालचीनी का एक छोटा टुकड़ा निकालें। सूखे पिसे मसालों की टोकरी से धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला और सादा नमक शामिल करें। पकाने के लिए कुकिंग तेल और आवश्यकतानुसार साफ पानी की व्यवस्था रखें। कुछ पुरानी सूचियों में मेथी दाने का भी जिक्र मिलता है, लेकिन अधिक मात्रा में इसके इस्तेमाल से ग्रेवी में कड़वापन घुलने का भारी जोखिम रहता है, इसलिए इसे छोड़ देना ही अक्लमंदी है, अथवा यदि डालना ही चाहें तो महज एक छोटी चुटकी ही इस्तेमाल करें।

## पत्तियों की सफाई और महीन पेस्ट तैयार करने का हुनर
ग्रेवी का चटक हरा रंग और बेहतरीन सुगंध पूरी तरह पत्तियों की छंटाई पर निर्भर करती है। धनिया और पुदीना साफ करते वक्त पीली पड़ चुकीं या गली हुई पत्तियों को पूरी तरह छांटकर फेंक दें। धनिए के कोमल डंठल स्वाद बढ़ाते हैं, इसलिए उन्हें साथ में पीसा जा सकता है, जबकि पुदीने के सख्त तनों को पूरी तरह अलग करना जरूरी है क्योंकि वे पिसने में बाधा बनते हैं और स्वाद को कड़वा कर सकते हैं। छांटी गई पत्तियों को ठंडे पानी से दो-तीन मर्तबा अच्छी तरह धो लें और फिर जालीदार छलनी में रख दें ताकि फालतू नमी पूरी तरह टपक जाए। यदि पत्तों में पानी भरा रहेगा तो पेस्ट ढीला हो जाएगा। हरी मिर्च का चुनाव अपने परिवार की पसंद के अनुसार करें, अगर कम तीखा खाते हैं तो एक ही मिर्च काफी होगी।

काजू को मिक्सी में पीसने से कुछ मिनट पहले हल्के गर्म पानी में डाल दें। गर्म पानी में रहने से वे बहुत जल्दी मुलायम हो जाते हैं और पेस्ट में दानेदार नहीं रहते। मिक्सी के जार में धुली पत्तियां, कटी मिर्च और भीगे काजू एक साथ डालें। पानी की मात्रा को बहुत सावधानी से नियंत्रित करें; एक साथ पूरा पानी उंडेलने के बजाय चम्मच के जरिए थोड़ा-थोड़ा करके ही डालें। पीसने के बाद पेस्ट इतना गाढ़ा और मखमली होना चाहिए कि वह मांस की सतह पर आसानी से चिपक सके। पीसते वक्त मिक्सी को रोककर देखें कि कोई बड़ा काजू का टुकड़ा साबुत तो नहीं छूट गया है, और दीवारों पर चिपके पत्तों को चम्मच से बीच में लाकर एक बार फिर चला लें।

## गोश्त का मैरिनेशन और सफाई के जरूरी नियम
धुले और सुखाए हुए चिकन के टुकड़ों को एक गहरे कांच या स्टील के बर्तन में निकालें। अब उस पर तैयार किए गए हरे पेस्ट की पूरी परत चढ़ाएं। इसके साथ ही थोड़ा सा सादा नमक और अदरक-लहसुन के कुटे हुए मिश्रण का कुछ हिस्सा इसमें डालकर साफ चम्मच से अच्छी तरह उलट-पुलट करें, ताकि हर टुकड़े पर मसालों का लेप एकसमान लग जाए। इस बर्तन को ढककर बीस से तीस मिनट के लिए फ्रिज के अंदर आराम करने दें। यदि आपके पास वक्त ज्यादा है तो भी इसे कमरे के तापमान पर बाहर छोड़ने की गलती न करें, बल्कि ठंडक में ही रखें ताकि मांस की ताजगी बरकरार रहे। साथ ही रसोई की स्वच्छता का पूरा ख्याल रखें; जिस चम्मच या बर्तन में कच्चा गोश्त रखा गया था, उसे बिना साबुन से धोए तैयार भोजन के संपर्क में कतई न लाएं, और गोश्त छूने के बाद अपने हाथों को भी साबुन से साफ करें।

## कड़ाही में तड़का और मसालों का संतुलन
पकाने के लिए हमेशा मोटे तले वाली कड़ाही या भारी बर्तन का ही चुनाव करें ताकि तेज आंच पर मसाला झुलसे नहीं। बर्तन में तेल गरम करें। अक्सर पारंपरिक खानों में आधा कप तेल का सुझाव दिया जाता है, मगर समझदारी इसी में है कि शुरुआत कम तेल के साथ की जाए और जरूरत महसूस होने पर ही आगे बढ़ाया जाए। गरम तेल में साबुत तेजपत्ता, हरी इलायची और दालचीनी छोड़ें। जब खड़े मसालों की मीठी खुशबू तेल में उतरने लगे, तब बारीक कटा प्याज कड़ाही में डालें। आंच को मध्यम रखें और करछुल से लगातार चलाते हुए प्याज को केवल पारदर्शी और हल्का बादामी होने तक भूनें। प्याज को बहुत अधिक गहरा भूरा नहीं करना है, वरना पूरी ग्रेवी का हरा रंग मैला पड़ जाएगा। इसके बाद बचा हुआ अदरक-लहसुन का मिश्रण डालें और उसकी कच्ची गंध पूरी तरह खत्म होने तक मध्यम आंच पर भूनते रहें।

अब मैरीनेट किए गए गोश्त को हरे मसाले समेत कड़ाही के भीतर पलट दें और बर्तन के कोनों में चिपका बाकी मसाला भी साफ करके डाल दें। आंच को मध्यम रखकर धीरे-धीरे चलाएं ताकि प्याज और खड़े मसालों का बेस गोश्त के साथ अच्छी तरह एकाकार हो जाए। इस दौरान खास सतर्कता बरतनी होगी क्योंकि काजू का स्वभाव कड़ाही के तले में चिपकने का होता है। यदि कड़ाही को बिना देखे कुछ मिनटों के लिए भी छोड़ दिया गया, तो मसाला नीचे लग सकता है। अगर मिश्रण तली पकड़ने लगे, तो हल्का सा पानी छिड़कें और करछुल से हल्के हाथ से खुरचकर छुड़ा लें। इस चरण में बहुत ज्यादा पानी डालने की जल्दबाजी न करें, नहीं तो मसालों का भुनाव अधूरा रह जाएगा और ग्रेवी पतली पड़ जाएगी।

## धीमी आंच पर गोश्त को पकाना और परोसना
अब धनिया पाउडर और स्वाद के मुताबिक लाल मिर्च पाउडर छिड़कें। चूंकि मिश्रण में पहले से हरी मिर्च पिसी हुई है, इसलिए लाल मिर्च की मात्रा कम ही रखनी चाहिए ताकि ग्रेवी की कुदरती हरियाली बनी रहे। नमक भी मैरिनेशन में शामिल था, इसलिए दोबारा डालते समय अपनी जीभ और अंदाज का पूरा ध्यान रखें। सब कुछ आपस में मिलाने के बाद थोड़ा सा पानी डालें, कड़ाही पर ढक्कन लगाएं और धीमी से मध्यम आंच पर पकने दें। पकाने के समय को लेकर घड़ी की सुइयों के भरोसे न रहें; गोश्त के टुकड़ों के आकार, उसमें मौजूद हड्डियों और चूल्हे की आंच के अनुसार पकने की अवधि घट-बढ़ सकती है। महज बीस मिनट बीत जाने का यह कतई मतलब नहीं है कि गोश्त भीतर तक गल चुका है।

बीच-बीच में ढक्कन हटाकर जायजा लेते रहें और यदि ग्रेवी बहुत सूखने लगे तो हल्का गुनगुना पानी ही मिलाएं। जब गोश्त पूरी तरह गलकर नर्म हो जाए, तब ग्रेवी के गाढ़ेपन की जांच करें। यदि ग्रेवी जरूरत से ज्यादा पतली लगे तो ढक्कन हटाकर तेज आंच पर कुछ देर खुला पकाएं ताकि पानी उड़ जाए; और अगर बहुत ज्यादा गाढ़ी हो गई हो तो थोड़ा पानी डालकर धीमी आंच पर एक उबाल ले आएं। सबसे आखिर में बचा हुआ गरम मसाला और बारीक कटा ताजा धनिया ऊपर से बुरक दें, ताकि खुशबू सीधे खाने वाले की नाक तक पहुंचे। आंच बुझाने के बाद कड़ाही को दो-तीन मिनट ढका रहने दें ताकि भाप भीतर ही बैठ जाए। इसके बाद इसे खूबसूरत डोंगे में निकालें और गरमा-गरम नान, तंदूरी रोटी या बासमती चावल के साथ दस्तरख्वान पर सजाएं। पुदीने और गरम मसालों के चटपटेपन को संतुलित करने के लिए साथ में सादे प्याज के लच्छे बेहद मुफीद साबित होते हैं।

## इसका आप पर असर
घर पर सामान्य लाल ग्रेवी वाले चिकन की जगह हरी पत्तियों और काजू से यह व्यंजन तैयार करने से खाने के शौकीनों को न सिर्फ एक नया जायका मिलता है, बल्कि पोषण और रसोई प्रबंधन में भी सीधा सुधार होता है।

- **सामग्री के चयन पर:** बाजार के पैकेटबंद मसालों या भारी क्रीम पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ताजे पुदीने, धनिए और रसोई में पहले से रखे थोड़े से काजू के इस्तेमाल से बिना किसी महंगे खर्च के रेस्टोरेंट जैसी गाढ़ी ग्रेवी तैयार की जा सकती है।
- **रसोई में समय और गैस की बचत:** भारी तले के बर्तन में कम तेल और नियंत्रित आंच पर पकाने से ईंधन कम खर्च होता है। साथ ही अगर पत्तियों की छंटाई और चिकन का मैरिनेशन पहले से करके रख लें तो मुख्य पकाने में महज आधा घंटा लगता है।
- **खानपान और सेहत पर:** ज्यादा तेल-मसालों और तली हुई लाल तरी की तुलना में ताजी हरी पत्तियों से बनी ग्रेवी पचने में आसान होती है। भारी चिकनाई से बचने वाले लोग इसे कम तेल में बनाकर भी पूरे स्वाद का लुत्फ उठा सकते हैं।
- **सफाई और खाद्य सुरक्षा पर:** कच्चे चिकन के बर्तनों को पके हुए भोजन से अलग रखने का नियम परिवार को फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण से सुरक्षित रखता है। इससे रसोई में काम करते वक्त स्वच्छता की बेहतर आदत बनती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह हैदराबादी शैली का हरा मुर्ग पारंपरिक लाल चिकन करी की तुलना में अलग स्वाद इसलिए देता है क्योंकि इसकी बुनियाद तली हुई प्याज और टमाटर के बजाय ताजी पत्तियों और भीगे काजू के कच्चे पेस्ट पर रखी जाती है।

- **ताजी पत्तियों की भूमिका:** धनिए के कोमल तनों और पुदीने की पत्तियों का मिश्रण ग्रेवी को प्राकृतिक सुगंध और चटक हरा रंग देता है। पुदीने के सख्त डंठल हटाने से कड़वाहट पैदा नहीं होती और ताजगी बनी रहती है।
- **काजू का गाढ़ापन:** गुनगुने पानी में भीगे काजू पिसकर एक प्राकृतिक इमल्शन बनाते हैं जो पानी और तेल को अलग नहीं होने देता। इसी की वजह से बिना क्रीम या मेवे की अधिक मात्रा के ग्रेवी में रेशमी गाढ़ापन आ जाता है।
- **मसालों का क्रमबद्ध तालमेल:** लाल मिर्च और गरम मसाले को कम मात्रा में रखने से पत्तियों की प्राकृतिक खुशबू दबती नहीं है। साथ ही चिकन को पहले मैरीनेट करने से गोश्त के रेशों के भीतर तक नमक और हरी मिर्च का स्वाद रच-बस जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हैदराबादी ग्रीन चिकन बनाने के लिए गोश्त की कितनी मात्रा चाहिए?
इस रेसिपी के अनुसार छह से सात मध्यम आकार के चिकन के टुकड़े लिए जाते हैं।

### 2. हरे पेस्ट को तैयार करते वक्त किन चीजों का उपयोग किया जाता है?
एक कप हरा धनिया, एक कप पुदीने की पत्तियां, दो हरी मिर्चें और पांच से छह भीगे हुए काजू को थोड़े पानी के साथ पीसा जाता है।

### 3. पेस्ट बनाते समय पुदीने के डंठल क्यों हटा दिए जाते हैं?
पुदीने के मोटे और सख्त डंठल पिसने में बाधा डालते हैं और ग्रेवी में अवांछित कड़वाहट घोल सकते हैं।

### 4. चिकन को कितनी देर तक मैरीनेट करने की सलाह दी जाती है?
मसाला लगे चिकन को ढककर लगभग 20 से 30 मिनट के लिए फ्रिज में रखने की सलाह दी गई है।

### 5. पकाते समय प्याज को गहरा भूरा क्यों नहीं करना चाहिए?
प्याज को अधिक गहरा भूनने से ग्रेवी का प्राकृतिक हरा रंग मैला और गहरा पड़ सकता है।

### 6. काजू वाला पेस्ट कड़ाही में डालते वक्त किस बात का ध्यान रखना होता है?
काजू का पेस्ट तले में तेजी से चिपकता है, इसलिए इसे लगातार चलाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर थोड़ा पानी डालकर छुड़ाना चाहिए।

### 7. इस डिश को किन चीजों के साथ परोसना सबसे अच्छा रहता है?
तैयार ग्रीन चिकन को नान, तंदूरी रोटी या सादे चावल और प्याज के सलाद के साथ परोसा जाता है।

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