# मेट्रो निर्माण से पुणे का कारोबार छिना तो खंडवा लौटे पति-पत्नी, 40 रुपये में डोसा बेचकर फिर शुरू किया नया सफर

> पुणे में रोजाना 22 हजार रुपये कमाने वाले संजय और खुशबू सोनी का कारोबार जब मेट्रो निर्माण के चलते बंद हुआ, तो दोनों ने हार मानने के बजाय खंडवा में नए सिरे से अपना फूड स्टॉल शुरू कर दिया।

**Type:** article · **Category:** खानपान · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/food/pune-metro-nirmana-se-karobara-chhina-to-khandwa-laute-pati-patni-40-rupaye-men-dosa-bechakara-shuru-kiya-south-tadka-maharashtra-35644 · **Language:** Hindi
**Tags:** खंडवा समाचार, पुणे मेट्रो, साउथ तड़का महाराष्ट्र, दक्षिण भारतीय खाना, संजय सोनी, खुशबू सोनी, स्ट्रीट फूड

जीवन में कभी-कभी अचानक आने वाली परेशानियां पूरे बने-बनाए ढर्रे को बदल देती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो किसी भी मोड़ से नई शुरुआत की जा सकती है। महाराष्ट्र के पुणे शहर में सालों तक अपने दक्षिण भारतीय व्यंजनों का डंका बजाने वाले एक दंपती के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वर्षों की कड़ी मेहनत से स्थापित किया गया कारोबार जब एक झटके में बंद करना पड़ा, तो उन्होंने निराश बैठने के बजाय अपने गृह क्षेत्र लौटकर नए सिरे से जिंदगी की शुरुआत करने की ठानी। मध्य प्रदेश के खंडवा में अब यह जोड़ी बेहद किफायती दरों पर लोगों को प्रामाणिक दक्षिण भारतीय भोजन का स्वाद चखा रही है और उनकी यह जुझारू कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है।

## पुणे में चलता था शानदार काम, रोजाना 22 हजार की थी बिक्री
संजय सोनी और उनकी पत्नी खुशबू सोनी खान-पान के व्यवसाय में कोई नौसिखिए नहीं हैं। महाराष्ट्र के पुणे में वे पिछले करीब 8 वर्षों से दक्षिण भारतीय खाने का स्टॉल सफलतापूर्वक चला रहे थे। उनके हाथ के बने पारंपरिक डोसा, इडली, सांभर और अन्य व्यंजनों की मांग इतनी अधिक थी कि ग्राहकों की कतारें लगी रहती थीं। आर्थिक रूप से यह व्यवसाय बेहद मजबूत स्थिति में था, जहां प्रतिदिन की कुल बिक्री लगभग 20 हजार से 22 हजार रुपये तक पहुंच जाती थी। सालों की लगन से उन्होंने पुणे के खान-पान बाजार में अपनी एक मजबूत साख कायम कर ली थी और सब कुछ बेहद सुचारू रूप से चल रहा था।

## मेट्रो निर्माण परियोजना के कारण समेटना पड़ा जमा-जमाया काम
पुणे में इतना शानदार व्यवसाय चलने के बाद भी हालात ने अचानक अप्रत्याशित करवट ली। शहर में बड़े पैमाने पर मेट्रो रेल का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसकी जद में वह इलाका भी आ गया जहां संजय सोनी का फूड आउटलेट मौजूद था। विकास कार्यों और सड़क चौड़ीकरण के चलते प्रशासन द्वारा उस पूरे क्षेत्र से दुकानें और स्टॉल हटा दिए गए। इस अचानक आई रुकावट से उनका रोजमर्रा का चलता हुआ काम पूरी तरह ठप हो गया। कई हफ्तों और महीनों की अनिश्चितता के बाद जब वहां दोबारा काम शुरू होने की कोई गुंजाइश नहीं बची, तो मजबूरी में उन्हें पुणे का पूरा सेटअप समेटना पड़ा और वहां से वापस लौटने का एक बेहद कठिन फैसला लेना पड़ा।

## अपनों के बीच खंडवा आकर नई राह बनाने का फैसला
पुणे का कारोबार बंद होने के बाद परिवार ने खंडवा की राह पकड़ी। खुशबू सोनी मूल रूप से खंडवा की ही रहने वाली हैं और उनका मायका इसी शहर में है। इसके अलावा संजय सोनी के अपने परिवार के सदस्य और रिश्तेदार भी यहीं रहते हैं। संजय के मन में पिछले करीब चार वर्षों से यह विचार चल रहा था कि अपने शहर और अपनों के बीच रहकर कोई उद्यम शुरू किया जाए। जब पुणे का काम प्रभावित हुआ, तो उन्होंने इसे एक अवसर के रूप में देखा और परिवार के निकट रहकर अपनी नई कामकाजी पारी की रूपरेखा तैयार की।

## नौकरी छोड़ पति के साथ खड़ी हुईं खुशबू, खुला नया आउटलेट
संजय जब खंडवा में जमीन से जुड़कर नए काम की तैयारी कर रहे थे, तो उनकी पत्नी खुशबू ने भी एक बड़ा फैसला लिया। खुशबू पहले एक जगह नौकरी करती थीं, लेकिन पति के नए सफर को गति देने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत करने का संकल्प लिया। करीब एक सप्ताह पहले उन्होंने खंडवा के व्यस्त इंदिरा चौक पर ‘साउथ तड़का महाराष्ट्र’ नाम से अपने नए फूड आउटलेट का शुभारंभ किया।

## रसोई और प्रबंधन का बेहतरीन तालमेल
इस नए आउटलेट पर दोनों पति-पत्नी के बीच जिम्मेदारियों का बहुत ही व्यवस्थित बंटवारा दिखता है। संजय सोनी पूरी तरह से रसोई की कमान संभालते हैं। वे गर्म तवे पर पारंपरिक दक्षिण भारतीय मसालों के साथ डोसा, इडली और सांभर तैयार करते हैं। दूसरी तरफ, खुशबू सोनी ग्राहकों के स्वागत, ऑर्डर लेने, बिलिंग और आउटलेट के संपूर्ण प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालती हैं। दोनों की यह साझा मेहनत और आपसी तालमेल बाजार में आने वाले हर शख्स को आकर्षित कर रहा है और स्थानीय स्तर पर उनके समर्पण की सराहना हो रही है।

## 40 रुपये में सादा डोसा और 50 रुपये में मसाला डोसा
‘साउथ तड़का महाराष्ट्र’ की सबसे बड़ी खासियत इसका उम्दा स्वाद और आम आदमी की जेब के अनुकूल तय की गई कीमतें हैं। महंगाई के इस दौर में भी यहां सादा डोसा केवल 40 रुपये में परोसा जा रहा है, जबकि मसाला डोसा की कीमत मात्र 50 रुपये रखी गई है। संजय सोनी का कहना है कि वे अपने 8 साल के पुणे वाले अनुभव का पूरा लाभ खंडवा के लोगों को दे रहे हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ डोसा बेचना नहीं, बल्कि एक ही छत के नीचे इडली, सांभर और डोसा जैसे पारंपरिक व्यंजनों की शुद्धता और असली स्वाद बेहद किफायती दामों में उपलब्ध कराना है ताकि ग्राहक स्वाद के दम पर बार-बार खिंचे चले आएं।

## इसका आप पर असर
इस घटनाक्रम से खंडवा शहर के खान-पान प्रेमियों को जहां बेहद कम कीमत में प्रामाणिक दक्षिण भारतीय व्यंजन उपलब्ध हो रहे हैं, वहीं यह छोटे व्यापारियों के लिए विपरीत परिस्थितियों में संभलने का एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

- **भारत में:** शहरी विकास और मेट्रो जैसी बड़ी परियोजनाओं के कारण अक्सर छोटे रेहड़ी-पटरी और स्टॉल व्यापारियों का रोजगार प्रभावित होता है। यह घटना दर्शाती है कि अनुभव और हुनर के दम पर छोटे शहरों में लौटकर भी नए व्यावसायिक अवसर बनाए जा सकते हैं।
- **खंडवा में:** शहर के इंदिरा चौक पर आने वाले स्थानीय निवासियों और खरीदारों को अब मात्र 40 रुपये में सादा डोसा और 50 रुपये में मसाला डोसा मिल रहा है। कम बजट वाले छात्रों, दफ्तर जाने वाले कर्मियों और परिवारों के लिए यह एक किफायती और गुणवत्तापूर्ण विकल्प बनकर उभरा है।
- **पारिवारिक उद्यम:** पति-पत्नी द्वारा मिलकर काम संभालने से बाहरी कर्मचारियों पर निर्भरता और शुरुआती लागत कम हो जाती है। छोटे स्तर पर नया उद्यम शुरू करने वाले लोग इस तरह के आपसी कार्य-विभाजन से लाभ उठा सकते हैं।
- **उपभोक्ताओं के लिए विकल्प:** बाजार में उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलने से अन्य स्थानीय विक्रेताओं के बीच भी मूल्य और स्वच्छता को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। नियमित ग्राहकों को कम खर्च में बेहतर स्वाद का विकल्प मिल रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
पुणे में कई वर्षों से सफलतापूर्वक चल रहे एक मुनाफेदार आउटलेट को अचानक बंद कर खंडवा में नया काम शुरू करने के पीछे मुख्य कारण शहरी विकास परियोजना से उत्पन्न विस्थापन और पारिवारिक समर्थन था।

- **मेट्रो रेल निर्माण:** पुणे में जिस व्यावसायिक स्थान पर यह आउटलेट संचालित था, वहां मेट्रो लाइन का निर्माण कार्य शुरू हो गया। निर्माण के दायरे में आने के कारण प्रशासन ने उस स्थल से सभी दुकानों और स्टॉलों को हटाने के निर्देश दिए, जिससे दुकान का संचालन असंभव हो गया।
- **आजीविका की पूर्ण बंदी:** दुकान हटने के बाद नियमित 20,000 से 22,000 रुपये की दैनिक बिक्री पूरी तरह ठप हो गई। किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर तत्काल दुकान स्थापित करने में असमर्थ होने के कारण दंपति को पुणे का काम पूरी तरह समेटना पड़ा।
- **पारिवारिक पृष्ठभूमि और पूर्व योजना:** खुशबू सोनी का मायका खंडवा में स्थित है और संजय सोनी के रिश्तेदार भी इसी शहर में रहते हैं। संजय पिछले चार सालों से अपने गृह क्षेत्र में काम शुरू करने का विचार कर रहे थे, जिसे विस्थापन की स्थिति ने त्वरित निर्णय में बदल दिया।
- **संयुक्त साझेदारी:** खंडवा में नया उद्यम स्थापित करने के लिए खुशबू सोनी ने अपनी पूर्व नौकरी छोड़कर पति के साथ पूर्णकालिक भागीदारी का रास्ता चुना, जिससे नया आउटलेट तत्काल शुरू हो सका।

## सवाल-जवाब

### 1. संजय और खुशबू सोनी पहले कहां काम करते थे?
वे महाराष्ट्र के पुणे शहर में पिछले करीब 8 वर्षों से दक्षिण भारतीय खाने का आउटलेट चला रहे थे।

### 2. पुणे में उनके आउटलेट की रोजाना कितनी बिक्री होती थी?
पुणे स्थित स्टॉल पर उनकी दैनिक बिक्री लगभग 20 हजार से 22 हजार रुपये तक होती थी।

### 3. पुणे में उनका चलता हुआ कारोबार क्यों बंद करना पड़ा?
पुणे में मेट्रो रेल निर्माण कार्य शुरू होने के कारण वहां की दुकानों को हटाया गया, जिससे उनका स्टॉल भी प्रभावित हुआ।

### 4. खंडवा में उन्होंने किस नाम से और कहां नया आउटलेट शुरू किया है?
उन्होंने खंडवा के इंदिरा चौक पर 'साउथ तड़का महाराष्ट्र' नाम से अपना नया फूड आउटलेट खोला है।

### 5. नए आउटलेट पर सादा डोसा और मसाला डोसा की कीमत क्या रखी गई है?
यहां सादा डोसा 40 रुपये में और मसाला डोसा लगभग 50 रुपये में ग्राहकों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

### 6. आउटलेट के संचालन में पति-पत्नी की क्या भूमिका है?
संजय सोनी रसोई की जिम्मेदारी संभालते हुए व्यंजन तैयार करते हैं, जबकि खुशबू सोनी ग्राहकों के समन्वय और प्रबंधन का काम देखती हैं।

## प्रेरणा और सबक
मुसीबत के समय हिम्मत न हारने और अपनों के साथ मिलकर दोबारा खड़े होने की यह कहानी हर किसी को मुश्किल दौर में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

- **हुनर कभी बेकार नहीं जाता:** आठ साल तक पुणे में प्राप्त किया गया पाक कला का अनुभव खंडवा में उनके काम आया। भौतिक साधन छिन जाने के बावजूद आपकी वास्तविक दक्षता और कौशल हमेशा आपके साथ रहते हैं।
- **आपसी सहयोग सबसे बड़ी ताकत:** एक-दूसरे के फैसलों पर भरोसा करते हुए खुशबू ने नौकरी छोड़ी और संजय ने नए बाजार में कदम रखा। मुश्किल समय में परिवार का ठोस समर्थन किसी भी बड़े नुकसान की भरपाई कर सकता है।
- **विपरीत परिस्थिति को अवसर में बदलना:** पुणे में काम छिन जाने पर निराश बैठने के बजाय दंपती ने उस योजना को लागू किया जो पिछले चार सालों से विचार में थी। जीवन में आने वाली रुकावटों को अक्सर नई शुरुआत के अवसर के तौर पर देखा जा सकता है।
- **गुणवत्ता और ईमानदारी पर भरोसा:** नए शहर में भी उन्होंने ज्यादा मुनाफे के चक्कर में पड़ने के बजाय 40 और 50 रुपये की किफायती दर पर प्रामाणिक स्वाद देने की नीति अपनाई। ग्राहकों का विश्वास जीतना ही किसी भी व्यवसाय की दीर्घकालिक सफलता की चाबी है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._