पूर्णिया में डेढ़ सदी पुरानी दुकान पर पांच पीढ़ियों से मिल रहे बिना प्याज-लहसुन के समोसे और लिट्टी पूर्णिया के मधुबनी चौक पर स्थित डेढ़ सौ साल पुराना मधुबनी मिष्ठान भंडार पांच पीढ़ियों से बिना प्याज-लहसुन के शुद्ध समोसे और लिट्टी परोस रहा है। पास के मंदिर और संतों की आमद के कारण यहां 12 रुपये में मिलने वाले इस नाश्ते की परंपरा आज भी बदस्तूर जारी है। बिहार के पूर्णिया शहर में खानपान के शौकीनों और धार्मिक नियमों का पालन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक ऐसा पारंपरिक ठिकाना मौजूद है, जहां डेढ़ सदी से शुद्ध शाकाहारी नाश्ता तैयार किया जा रहा है। आमतौर पर नवरात्रि के पावन पर्व पर श्रद्धालु और आम लोग अपने भोजन में प्याज और लहसुन का त्याग कर देते हैं, जबकि संन्यासी और साधु-संत साल के बारह महीने सात्विक आहार ही ग्रहण करते हैं। ऐसे वक्त में बाजार में बिना प्याज और लहसुन से तैयार चटपटे स्नैक्स मिलना काफी मुश्किल हो जाता है, लेकिन पूर्णिया के मधुबनी चौक पर स्थित एक ऐतिहासिक दुकान इस कमी को दशकों से पूरा कर रही है। मधुबनी चौक का डेढ़ सौ साल पुराना मिष्ठान भंडार पूर्णिया के व्यस्त मधुबनी चौक पर संचालित मधुबनी मिष्ठान भंडार अपनी सात्विक पहचान के लिए पूरे इलाके में मशहूर है। इस प्रतिष्ठान के संचालक बद्री प्रसाद गुप्ता के अनुसार, यह दुकान लगभग डेढ़ सौ साल पुरानी है और उनका परिवार अब तक पांच पीढ़ियों से लगातार इसी जगह पर इसका संचालन कर रहा है। दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां किसी भी प्रकार के व्यंजन, नाश्ते अथवा मिष्ठान में प्याज या लहसुन का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। नवरात्रि के विशेष दिनों के अलावा सामान्य दिनों में भी यहां शुद्धता के इसी कड़े नियम का पालन होता है। समीपवर्ती मंदिर और साधु-संतों से जुड़ी है यह अनूठी परंपरा दुकान में प्याज और लहसुन का पूरी तरह परहेज करने के पीछे एक गहरा धार्मिक और व्यावहारिक कारण जुड़ा हुआ है। बद्री प्रसाद गुप्ता स्पष्ट करते हैं कि उनकी दुकान की दीवार से सटा हुआ एक पवित्र मंदिर मौजूद है। इस मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी, स्थानीय श्रद्धालु और दूर-दराज से आने वाले साधु-संत दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन करने के बाद ये सभी श्रद्धालु और संत उनकी दुकान पर आकर विभिन्न मिठाइयों, समोसे और लिट्टी का आनंद लेते हैं। इसी वजह से प्रतिष्ठान की शुरुआत से ही यह संकल्प लिया गया कि यहां बनने वाली किसी भी खाद्य सामग्री में तामसिक समझी जाने वाली सामग्री नहीं डाली जाएगी। किफायती दाम और देर शाम तक सेवा मधुबनी मिष्ठान भंडार पर मिलने वाले बिना प्याज-लहसुन के समोसे का स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है। पांच पीढ़ियों से चले आ रहे इस हुनर के चलते यहां के नाश्ते का जायका बरकरार है। वर्तमान में इस दुकान पर बिना प्याज-लहसुन वाला समोसा 12 रुपये प्रति पीस के हिसाब से ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाता है। समोसे के साथ-साथ यहां की शुद्ध सात्विक लिट्टी भी स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। यह दुकान सुबह सवेरे खुल जाती है और देर शाम तक ग्राहकों की सेवा में निरंतर तत्पर रहती है, जहां हर समय निर्माण प्रक्रिया में साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसका आप पर असर त्योहारी सीजन या व्रत के दौरान बिना प्याज-लहसुन का भोजन तलाशने वाले लोगों के लिए यह दुकान एक प्रामाणिक और सस्ता विकल्प प्रदान करती है। • भारत में: व्रत और धार्मिक अवसरों पर बाहर का नाश्ता करते समय शुद्धता की चिंता बनी रहती है। ऐसे में प्रमाणित सात्विक भोजनालय श्रद्धालुओं को बिना किसी संशय के पारंपरिक भोजन का आनंद लेने की सुविधा देते हैं। • पूर्णिया में: शहर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग मधुबनी चौक स्थित इस दुकान से 12 रुपये में बिना प्याज-लहसुन का ताजा समोसा ले सकते हैं। दुकान सुबह से देर शाम तक खुली रहती है, जिससे नवरात्रि या सामान्य दिनों में नाश्ता हासिल करना बेहद आसान रहता है। • खानपान का खर्च: 12 रुपये प्रति पीस की दर से मिलने वाला यह नाश्ता आम लोगों और यात्रियों की जेब पर बिल्कुल भी भारी नहीं पड़ता है। किफायती दाम के चलते स्थानीय लोग रोजमर्रा के नाश्ते के लिए भी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। • धार्मिक नियम: मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और संतों को पूजा-पाठ के तुरंत बाद सात्विक नाश्ता आसानी से सुलभ हो जाता है। इससे उन्हें घर से दूर होने पर भी अपनी पारंपरिक भोजन मर्यादा से समझौता नहीं करना पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ इस दुकान में बिना प्याज और लहसुन के समोसा और नाश्ता बनाने का निर्णय पास स्थित मंदिर और वहां आने वाले संतों की धार्मिक मान्यताओं से सीधे जुड़ा हुआ है। • मंदिर से सटा स्थान: दुकान की दीवार ठीक पास के मंदिर से सटी हुई है, जहां पूरे दिन धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं। इस भौगोलिक स्थिति के कारण दुकान हमेशा से मंदिर परिसर के परिवेश का एक स्वाभाविक हिस्सा बनी रही है। • साधु-संतों की आमद: मंदिर में नियमित दर्शन और पूजा के लिए आने वाले पुजारी और साधु-संत तामसिक भोजन और प्याज-लहसुन का सख्त परहेज करते हैं। उनके नाश्ते और जलपान की जरूरत को पूरा करने के लिए ही दुकान ने इस सख्त नियम को अपनाया। • पांच पीढ़ियों की परंपरा: दुकान के संस्थापक परिवार ने डेढ़ सौ साल पहले जो सात्विक नियम तय किया था, उसे आने वाली पांचों पीढ़ियों ने व्यावसायिक लाभ के लिए भी कभी नहीं बदला। यही निरंतरता आज इस दुकान की सबसे बड़ी साख बन चुकी है। सवाल-जवाब 1. यह ऐतिहासिक दुकान पूर्णिया में कहां स्थित है? यह दुकान पूर्णिया के मधुबनी चौक पर स्थित है, जिसका नाम मधुबनी मिष्ठान भंडार है। 2. मधुबनी मिष्ठान भंडार कितने सालों से चल रहा है? यह दुकान लगभग डेढ़ सौ (150) साल पुरानी है और पांच पीढ़ियों से इसी स्थान पर चलाई जा रही है। 3. इस दुकान के वर्तमान संचालक कौन हैं? इस दुकान के मालिक बद्री प्रसाद गुप्ता हैं। 4. यहां बिना प्याज-लहसुन के समोसे क्यों बनाए जाते हैं? दुकान से सटी हुई एक मंदिर है, जहां आने वाले साधु-संत और पुजारी बिना प्याज-लहसुन का नाश्ता करते हैं। 5. मधुबनी मिष्ठान भंडार में समोसे की कीमत क्या है? यहां बिना प्याज-लहसुन वाला समोसा 12 रुपये प्रति पीस के हिसाब से मिलता है। 6. समोसे के अलावा यहां और क्या खास मिलता है? यहां समोसे के साथ-साथ बिना प्याज और लहसुन से तैयार पारंपरिक लिट्टी और मिठाइयां भी मिलती हैं। https://trendkia.com/food/purnia-men-derha-sadi-purani-dukana-para-pancha-pirhiyon-se-mila-rahe-bina-pyaja-lahasuna-ke-samose-aura-litti-47761 TrendKia — Har trend, sabse pehle.