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  "type": "article",
  "title": "पूर्णिया में मिल रहा 156 परतों वाला पिपरा खाजा, बिना दांत वाले भी ले सकते हैं स्वाद",
  "summary": "पूर्णिया के भट्ठा बाजार स्थित कालीबाड़ी चौक पर 156 तहों वाला विशेष पिपरा खाजा ₹240 प्रति किलो बिक रहा है, जो अपनी बनावट और कुरकुरेपन के कारण सालभर लोगों की पसंद बना रहता है।",
  "content": "मिठाइयों के शौकीनों के बीच पारंपरिक खाजा हमेशा से खास जगह रखता है, लेकिन बिहार के पूर्णिया शहर में तैयार होने वाला एक खास व्यंजन अपनी विशिष्ट बनावट के चलते खूब चर्चा में है। भट्ठा बाजार इलाके में कालीबाड़ी चौक के समीप संचालित चौधरी मिष्ठान भंडार में 156 परतों वाला पिपरा खाजा बनाया जाता है। आम बाजार में मिलने वाले सामान्य खाजे के मुकाबले यह मिष्ठान अपनी अत्यधिक खस्ता और रेशेदार बनावट के लिए जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मुंह में रखते ही घुल जाता है, जिसकी वजह से छोटे बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और बिना दांत वाले बुजुर्ग भी बिना किसी परेशानी के इसका भरपूर आनंद ले पाते हैं।\n\nकारीगर पूरन मंडल की पारंपरिक कारीगरी\nइस अनूठी मिठाई को तैयार करने की बागडोर अनुभवी हलवाई संभालते हैं। दुकान में कार्यरत कारीगर पूरन मंडल बताते हैं कि वह बीते कई वर्षों से इसी खास विधि का इस्तेमाल कर पिपरा खाजा बना रहे हैं। उनके अनुसार, साधारण खाजे के मुकाबले इसमें परतों की संख्या का बेहद बारीकी से ध्यान रखा जाता है। मैदे की दर्जनों बेहद बारीक और महीन शीट तैयार करके उन्हें एक के ऊपर एक खास सलीके से लपेटा जाता है। इसी जटिल और निरंतर दोहराव वाली तकनीक की बदौलत खाजे के भीतर कुल 156 अलग-अलग तहें विकसित होती हैं, जो तलने के बाद बेहद कुरकुरी और हल्की बनती हैं।\n\nमैदा गूंथने से लेकर चाशनी में डुबोने तक की प्रक्रिया\nपूरन मंडल ने इस बहुस्तरीय मिष्ठान को बनाने का पूरा विवरण साझा किया। निर्माण के पहले चरण में बेहतरीन गुणवत्ता वाले मैदे को सादे पानी के साथ बहुत अच्छी तरह से गूंथा जाता है। उचित लोच पैदा करने के लिए गूंथे हुए मैदे को कुछ देर विश्राम के लिए ढककर रख दिया जाता है। इसके पश्चात निर्धारित सामग्री और जरूरी मसाले मिलाकर मैदे को दोबारा गूंथकर एकदम चिकना और तैयार किया जाता है। अगले चरण में इस मैदे की बेहद पतली-पतली शीट बनाई जाती हैं और उन्हें एक के ऊपर एक करीने से लपेटकर मोटी परत तैयार की जाती है।\n\nजब सभी आवश्यक परतें अच्छी तरह व्यवस्थित हो जाती हैं, तब उन्हें धारदार औजार से काटा जाता है। इसके बाद खाजे को एक विशेष सांचे में दबाकर उसका पारंपारिक आकार दिया जाता है। आकार तय होने पर इसे कड़ाही में मौजूद खौलते गर्म तेल में धीमी आंच पर तला जाता है। जब इसका रंग हल्का सुनहरा हो जाता है, तब इसे तेल से बाहर निकाल लिया जाता है। अंतिम चरण में इन तले हुए गर्म टुकड़ों को गाढ़ी चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है। कुछ समय तक चाशनी में डूबे रहने के बाद जब मिठास अंदरूनी परतों तक समा जाती है, तब इसे बाहर निकालकर बिक्री के लिए काउंटर पर सजा दिया जाता है।\n\n₹240 प्रति किलो दर और सालभर मांग\nचौधरी मिष्ठान भंडार में यह 156 तहों वाला पिपरा खाजा ₹240 प्रति किलो की दर पर ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाता है। दुकान संचालक का कहना है कि यह व्यंजन किसी खास मौसम या त्योहार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुकान पर इसकी बिक्री पूरे बारह महीने लगातार चलती रहती है। भट्ठा बाजार के स्थानीय खरीदारों के अतिरिक्त पूर्णिया शहर के बाहर से आने वाले यात्री और आगंतुक भी इस खास बहुपरतीय स्वाद का लुत्फ उठाने और अपने साथ ले जाने के लिए यहां पहुंचते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nपूर्णिया आने वाले पर्यटकों और पारंपरिक मिठाई के शौकीनों के लिए यह खबर एक किफायती और सुलभ खानपान विकल्प की जानकारी देती है।\n\n• पूर्णिया में: भट्ठा बाजार के कालीबाड़ी चौक स्थित चौधरी मिष्ठान भंडार पर ₹240 प्रति किलो की दर से यह विशेष मिठाई उपलब्ध है। स्थानीय लोग या बाहर से आने वाले खरीदार बिना किसी मौसमी रुकावट के सालभर किसी भी दिन इसका स्वाद ले सकते हैं।\n• बुजुर्गों और बच्चों के लिए: 156 परतों की वजह से यह खाजा बेहद खस्ता और तुरंत घुलने वाला होता है। ऐसे परिवार जिनके घर में बिना दांत वाले बुजुर्ग या छोटे बच्चे हैं, वे इसे आसानी से परोस सकते हैं।\n• त्योहारों और यात्राओं पर: पारंपरिक चाशनी और तली हुई बनावट के चलते यह मिठाई सफर में ले जाने और उपहार देने के लिए उपयुक्त है। खरीदार बाजार दर के अनुसार कम खर्च में स्थानीय हस्तशिल्प मिठाई का आनंद ले सकते हैं।\n• मिष्ठान प्रेमियों के लिए: साधारण खाजे की तुलना में इसमें 156 परतों का अनूठा कारीगरी स्वाद मिलता है। इच्छुक ग्राहक सीधे दुकान पर पहुंचकर ताजा तैयार बैच खरीद सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपूर्णिया में 156 परतों वाला पिपरा खाजा अपनी खास निर्माण प्रक्रिया और पारंपरिक हुनर के समन्वय से तैयार किया जाता है।\n\n• परतदार कारीगरी की विधि: कारीगर पूरन मंडल मैदे की कई अत्यधिक पतली चादरें बनाकर उन्हें एक के ऊपर एक लपेटते हैं। इसी निरंतर लेयरिंग तकनीक के कारण खाजे के भीतर 156 तहें बनकर तैयार होती हैं।\n• विश्राम और दोहरा गूंथना: मैदे को पानी के साथ गूंथकर कुछ समय के लिए विश्राम दिया जाता है और फिर आवश्यक मसाले मिलाकर दोबारा तैयार किया जाता है। इससे मैदे में सही लचीलापन आता है जिससे तलने पर परतें आपस में चिपकने के बजाय अलग-अलग और खस्ता रहती हैं।\n• सांचे और चाशनी का संतुलन: विशेष सांचे में आकार देने के बाद इसे मध्यम आंच पर सुनहरा तला जाता है और फिर चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है। चाशनी के सही सोखने से मिठाई भीतर तक रसीली और मुलायम बन जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पूर्णिया में 156 तह वाला पिपरा खाजा कहां मिलता है?\nयह खास खाजा पूर्णिया के भट्ठा बाजार स्थित कालीबाड़ी चौक के पास चौधरी मिष्ठान भंडार में मिलता है।\n\n2. इस 156 परत वाले खाजे की कीमत कितनी है?\nचौधरी मिष्ठान भंडार में यह पिपरा खाजा ₹240 प्रति किलो की कीमत पर उपलब्ध है।\n\n3. इस खाजे की मुख्य खासियत क्या है?\nइसकी खासियत 156 बारीक परतें हैं, जिससे यह मुंह में रखते ही घुल जाता है और बिना दांत वाले बुजुर्ग व बच्चे भी इसे आसानी से खा सकते हैं।\n\n4. इस खाजे को कौन तैयार करता है?\nदुकान में कारीगर पूरन मंडल कई वर्षों से इस विशेष विधि द्वारा 156 तह वाला खाजा बना रहे हैं।\n\n5. क्या यह खाजा केवल त्योहारों पर ही मिलता है?\nदुकान संचालक के अनुसार 156 तह वाला यह पिपरा खाजा सालभर उपलब्ध रहता है।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-09-29",
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