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  "title": "राजस्थान के भरतपुर में खजला की महक, उत्तर प्रदेश के कारीगर तैयार कर रहे पारंपरिक मिठाई",
  "summary": "भरतपुर में केवल साल में एक महीने मिलने वाली प्रसिद्ध खजला मिठाई का दौर शुरू हो चुका है, जिसकी शुरुआती कीमत 300 रुपये प्रति किलो रखी गई है।",
  "content": "राजस्थान के भरतपुर जिले में मिठाइयों की दुकानों पर इन दिनों एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है, जहां शहर का मशहूर खजला तैयार करने का सिलसिला पूरी तेजी से शुरू हो चुका है। बारह महीनों मिलने वाली सामान्य मिठाइयों के उलट, यह पारंपरिक व्यंजन पूरे साल में केवल एक सीमित अवधि के लिए ही बाजारों में नजर आता है। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस खास दौर में स्थानीय बाजारों और मिष्ठान भंडारों में इसकी मांग अचानक काफी बढ़ जाती है। अपनी खास बनावट, लाजवाब स्वाद और अनोखी निर्माण कला के चलते यह व्यंजन हर वर्ग के लोगों को आकर्षित करता है।\n\nउत्तर प्रदेश के हुनरमंद कारीगर संभालते हैं कमान\nइस अनूठी मिठाई को पारंपरिक रूप से तैयार करने के लिए विशेष रूप से उत्तर प्रदेश से कारीगरों का दल भरतपुर पहुंचता है। ये कारीगर पारंपरिक पद्धतियों और अपनी पुरानी कला का इस्तेमाल करके खजला बनाते हैं। कारीगर लगभग एक महीने तक यहीं रहकर सुबह से देर रात तक इस काम में जुटे रहते हैं। इस प्रक्रिया में आटे की महीन परतों को बेहद सावधानी और तरकीब के साथ गूंथकर तैयार किया जाता है। इसके बाद इन परतों को तेल अथवा घी में गहराई से तला जाता है और अंत में चाशनी में डुबोया जाता है। इसी जटिल कारीगरी के कारण खजले में एक अनोखा कुरकुरापन और संतुलित मिठास घुल जाती है।\n\nचार से पांच किस्मों में उपलब्ध है यह स्वाद\nबाजार में ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए इस समय करीब चार से पांच अलग-अलग तरह के खजले बनाए जा रहे हैं। इन सभी किस्मों में उनके आकार, बनावट और मिठास के स्तर पर अंतर रखा जाता है ताकि हर कोई अपनी पसंद के अनुसार इसका आनंद ले सके। दिखने में आकर्षक और बनावट में जालीदार यह मिठाई खाने में उतनी ही कुरकुरी और स्वादिष्ट लगती है। यही वजह है कि दुकानों पर पहुंचने वाले खरीदार अपनी पसंद की वैरायटी चुनकर बड़ी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।\n\nसुबह से जुटने लगते हैं कारीगर, बाहरी लोग भी ले रहे स्वाद\nदुकानों और कारीगरी के ठिकानों पर सुबह होते ही भट्ठियां सुलग जाती हैं और खजला बनाने का काम तेज हो जाता है। भारी तादाद में ताजा खजले तैयार करके बिक्री केंद्रों और काउंटर तक पहुंचाए जा रहे हैं। सिर्फ भरतपुर के स्थानीय नागरिक ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों से यहां आने वाले मुसाफिर भी इस पारंपरिक जायके का लुत्फ उठाना बिल्कुल नहीं भूलते। चूंकि यह पूरे वर्ष में सिर्फ एक बार ही मिलता है, इसलिए त्योहारों और खास पारिवारिक आयोजनों के मौके पर इसकी खरीदारी और भी तेज हो जाती है।\n\n300 रुपये प्रति किलो से शुरू होते हैं दाम\nदाम के लिहाज से देखें तो बाजार में खजला 300 रुपये प्रति किलो की शुरुआती कीमत पर बिक रहा है, जबकि अलग-अलग किस्मों और बनावट के हिसाब से इनके दाम अलग-अलग तय किए गए हैं। सीजन सीमित समय का होने की वजह से लोग समय रहते इसका स्वाद चख लेना चाहते हैं। सीमित उपलब्धता, सदियों पुराना पारंपरिक स्वाद और उत्तर प्रदेश के कारीगरों की अनोखी कला ही खजला को भरतपुर की मिठाइयों में एक अलग और खास पहचान दिलाती है।\n\nइसका आप पर असर\nभरतपुर की मौसमी मिठाई खजला के शौकीनों के लिए खरीदारी और स्वाद चखने का सीमित समय शुरू हो चुका है।\n\n• भरतपुर में: स्थानीय निवासियों और यहां आने वाले पर्यटकों को ताजी खजला मिठाई चखने का अवसर मिल रहा है। यह सीजन केवल लगभग एक महीने ही चलता है, इसलिए खरीदारों को इसी सीमित समय में अपनी पसंद की वैरायटी चुननी होगी।\n• भारत में: पारंपरिक खानपान में रुचि रखने वाले लोग भरतपुर के प्रसिद्ध क्षेत्रीय व्यंजनों का अनुभव ले सकते हैं। राजस्थान की यात्रा करने वाले बाहरी मुसाफिर भी इस अनूठे स्वाद को खरीद सकते हैं।\n• कीमत और बजट: दुकानों पर खजला की शुरुआती दर 300 रुपये प्रति किलो तय की गई है। विभिन्न किस्मों और बनावट के हिसाब से अलग-अलग कीमतें रखी गई हैं, जिसे ग्राहक अपने बजट अनुसार चुन सकते हैं।\n• त्योहार और आयोजन: आगामी त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में परोसने के लिए लोग विशेष ऑर्डर दे सकते हैं। सीमित उत्पादन होने के कारण समय रहते खरीदारी करना मुफीद रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभरतपुर में खजला मिठाई का निर्माण केवल साल में एक बार सीमित अवधि के लिए ही किया जाता है, जिसके पीछे पारंपरिक कारीगरी और मौसमी परंपराएं जुड़ी हैं।\n\n• पारंपरिक कारीगरी का आगमन: खजला तैयार करने का हुनर विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के कारीगरों के पास है जो साल में सिर्फ एक बार भरतपुर आते हैं। इन कारीगरों के यहां एक महीने रहने के दौरान ही यह मिठाई बनाई जाती है।\n• जटिल निर्माण प्रक्रिया: आटे की कई बारीक परतों को तैयार करके उन्हें घी या तेल में तलना और चाशनी में डुबोना एक विशेष हुनर की मांग करता है। इस जटिल कला के कारण स्थानीय स्तर पर इसे पूरे साल सामान्य रूप से नहीं बनाया जाता।\n• मौसमी और सीमित मांग: यह मिठाई एक खास पारंपरिक सीजन और त्योहारों के समय ही तैयार की जाती है। सीमित अवधि में उपलब्ध होने के कारण ही इसकी ताजगी और विशेष स्वाद बना रहता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भरतपुर में खजला मिठाई कितने समय के लिए उपलब्ध रहती है?\nखजला मिठाई पूरे साल नहीं मिलती, बल्कि यह केवल लगभग एक महीने के सीमित सीजन के लिए ही तैयार की जाती है।\n\n2. इस मिठाई को बनाने के लिए कारीगर कहां से आते हैं?\nखजला तैयार करने के लिए विशेष पारंपरिक कारीगर उत्तर प्रदेश से भरतपुर आते हैं।\n\n3. बाजार में खजला की कीमत क्या है?\nबाजार में खजला की शुरुआती कीमत 300 रुपये प्रति किलो है, जो विभिन्न किस्मों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।\n\n4. भरतपुर में खजला की कितनी किस्में तैयार की जा रही हैं?\nइस समय आकार, बनावट और मिठास के आधार पर करीब चार से पांच प्रकार के अलग-अलग खजले तैयार किए जा रहे हैं।\n\n5. खजला मिठाई को किस तरह बनाया जाता है?\nआटे की खास परतों को तैयार कर उन्हें तेल या घी में तला जाता है और फिर चाशनी में डुबोकर कुरकुरा और मीठा बनाया जाता है।",
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  "category": "खानपान",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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    "भरतपुर",
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